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Friday, March 18, 2016

फैजाबाद : अंग्रेजी माध्यम को मात देता प्राथमिक  विद्यालय गद्दौपुर अनुशासन, ड्रेस व गुणवत्तापरक शिक्षा बनी पहचान

अवधेश मिश्र, मया बाजार (फैजाबाद)1सर्व शिक्षा अभियान की उम्मीदों को साकार कर रहा है प्राथमिक विद्यालय गद्दौपुर। अनुशासन व गुणवत्तापरक शिक्षा अब यहां की पहचान बन चुकी है। यही वजह रही है कि बेशिक शिक्षा विभाग इस विद्यालय को जिले के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय का दर्जा दे चुका है। कान्वेन्ट स्कूलों को मात दे रहा अन्य विद्यालयों के लिये प्रेरणा का स्नोत बना यह विद्यालय वर्ष 1964 से स्थापित हुआ था। तमाम उतार चढ़ाव के बाद यह बेसिक शिक्षा की दरकती नींव के मजबूत स्तम्भ के रूप में जाना जाता है। 1ज्यादा दिन नहीं हुए करीब चार वर्ष पहले की ही बात है जब यह विद्यालय गांव के अन्य परिषदीय विद्यालयों की तरह बदहाल था। पेड़ के नीचे जमीन पर नौनिहाल ककहरा सीखते थे। 14 अक्तूबर 2011 में प्रधानाध्यापक पद पर बृजेश कुमार यादव की तैनाती हुई। प्रधानाध्यापक ने अपनी लगन व निष्ठा से चार वर्षों में इस विद्यालय को जिले का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय होने का गौरव दिलाया। प्रधानाध्यापक के परिश्रम का नतीजा है कि पांच शिक्षण कक्षों, एक बरामदा व एक सुसज्जित प्रधानाचार्य कक्ष वाले स्कूल की चमचमाती दीवारों पर अंकित नौनिहालों को शिक्षित करने वाली इबारतें, शिक्षण कार्य के प्रति समझ और संजीदगी के साथ अध्यापकों की प्रतिबद्धता बयां करती है। छोटी उम्र के बच्चों को सिखाने पढा़ने का सलीका और हौसला शिक्षण कक्षों में दिखाई पड़ता है।़ 1एक इंजीनियर की गलती ईट और चूने में दब जाती है, एक चिकित्सक की गलती कब्र में दब जाती है किन्तु ़ एक शिक्षक की गलती राष्ट्र के‘ जीवन‘ में‘ झलकती’है। मैं कीट हूं, मैं पक्षी हूं, मैं फल हूं आदि अस्तित्वों के अनेकानेक दीवारों पर लिखे स्लोगन बेहतर हाल को दर्शाते हैं इसी तरह विभिन्न मुख मुद्रा वाले राष्ट्र नायकों की चित्रवली बरबस ज्ञान का बोध कराती है। आगे विद्यालय के अध्यापक व अध्यापिकाओं द्वारा संकलित उन कविताओं की कतारवद्ध कविताएं दीवारों पर लिखी दिखती हैं जो नौनिहालों के हिसाब से बेहद ज्ञानवर्धक लगती हैं चाहे वह डाø एपीजे अब्दुल कलाम की़ विद्या देती नई कल्पना, कल्पना लाती नये विचार। नये विचारों से मिले ज्ञान, ज्ञान बनाये आपको महान, या। फिर। स्वामी विवेकानंद़ महान व्यक्तित्व का प्रथम लक्ष्य उसकी नम्रता, और उठो जागो और जबतक लक्ष्य तक न पहुंच जाओ रुको मत़ हो अगले पल विद्यालय की कक्षा पांच की छात्र वविता, दीपा, सरिता, रोशनी के द्वारा राष्ट्रीय गीत इंसाफ की डगर में बच्चों दिखाओ चलके आदि गीत भावी पीढ़ी को जिम्मेदारियों का बोध कराती हैं। इसे देख अहम योगदान देने वाले ग्राम प्रधान नागेंद्र नाथ गोस्वामी सहित विद्यालय का स्टाफ भी गौरवान्वित हुए बिना नहीं रह पाता। अनुशासन संस्कार और संयम का। 1समावेश मध्याह्न भोजन के पंगत में दिखता है इसमें कोई शक नहीं कि मध्याह्न भोजन तक नौनिहालों के पेट में चूहे कूदने लगे थे किंतु खाने में तत्परता से पूर्व हाथ धुल कर पंगत में बैठना फिर भोजन मंत्र पढ़ने के बाद भोजन को हाथ लगाना यह सब कैसे संभव हो रहा है। प्रधानाध्यापक निष्ठा, लगन, अनुशासन, नियमानुराग, समयवद्धता तथा विद्यालय अध्यापक और अध्यापिकाओं कमर सिद्धकी, नीतू सिंह, एकता वर्मा, संगीता वर्मा रामावती वर्मा की तत्परता को श्रेय देते हैं सहायक अध्यापक कमर सिद्दीकी दार्शनिक अंदाज में कहते हैं यहां सब कुछ सकारात्मक हैं। ग्राम प्रधान नागेंद्र नाथ गोस्वामी रसोइया शान्ती देवी, कुसुम लता, राजकुमारी, श्याम सुंदर सफाई कर्मी राजितराम व नन्हे मुन्नों का आपसी सामन्जस्य इस उम्मीद पर मुहर लगाती है।1प्राथमिक विद्यालय गद्दौपुर में 246 बच्चे बच्चियां शिक्षारत हैं। प्रधानाध्यापक बृजेश कुमार यादव ने अपने निजी मद से सभी बच्चों को आकर्षक बेंच पर बैठने की व्यवस्था की। है। इस वर्ष रंग रोगन में लगभग 70 से 80 हजार रुपए खर्च हुए हैं जबकि सरकारी सहायता सिर्फ 21 हजार रुपए मिले हैं। िद्यालय का शौचालय होटल की तरह चमकता है। अपने निजी मद से ही विद्यालय में सरकारी ड्रेस के अलावा स्वेटर, जूता, मोजा, टाई, बेल्ट व बच्चों को बर्तन भी प्रधानाध्यापक के द्वारा वितरित किया जाता है। वास बेसिन के ऊपर शीशा व हाथ पोछने के लिए करीने से सजी तौलिया प्रधानाध्यापक का विद्यालय के प्रति निष्ठा व समर्पण की ताईद करती है। भारत का नक्सा, स्टेज, बाउन्ड्रीवाल के किनारे लगे विभिन्न प्रकार के खूबसूरत फूल पौधे तथा सफाई स्वच्छ भारत के मिशन को साकार करता दिखाई पड़ता है। खंड शिक्षा अधिकारी अरुण वर्मा कहते है कि उनकी कोशिश अधिकाधिक विद्यालयों को संस्कारवान व शिक्षा का सुद्धढ केंद्र बनाने की है बशर्ते अभिभावक भी सजग व संवेदनशील रहे वीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि निश्चित ही यह विद्यालय पूरे जनपद का गौरव है प्रधानाध्यापक व शिक्षकों के इस प्रयास से औरों को प्रेरणा लेनी चाहिए।

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