तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें, निजी फोन से जनगणना को राजी नहीं शिक्षक, विरोध करते हुए जनगणना रजिस्ट्रार को लिख रहे पत्र
लखनऊ। जनगणना में निजी मोबाइल प्रयोग करने के निर्देशों का शिक्षकों एवं शिक्षक संगठनों की ओर से भारी विरोध शुरू हो गया है। जनगणना की ट्रेनिंग में शिक्षकों व अन्य कर्मियों को जनगणना के दायित्वों को पूरा करने के लिए आधुनिक फीचर वाले मोबाइल के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं।
बड़ी संख्या में शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों ने राज्य जनगणना अधिकारी से लेकर भारत के जनगणना रजिस्ट्रार को इसके लिए कड़ा विरोध पत्र भेजा है। पत्रों में किसी ने लिखा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो आज भी की-पैड वाला साधारण मोबाइल प्रयोग करते हैं। किसी ने लिखा कि कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पास स्मार्टफोन तो है लेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से 4जीबी से कम रैम वाला मोबाइल का उपयोग करते हैं। सफाई में यह भी लिखा गया है कि ऐसा करना कोई पिछड़ापन नहीं यह उनकी निजी जीवन शैली है। फिर कैसे किसी को विशेष मोबाइल खरीदने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें
शिक्षक आशीष सिंह की मानें तो स्थिति और मुश्किल तब हो जाती है, जब एचएलओ ऐप की तकनीकी शर्तें सामने आती हैं। जैसे एंडरॉयड 12 या उससे ऊपर और कम से कम 4 जीबी रैम आईफोन यूजर्स के लिए भी कम से कम आईओएस 15.0 होना चाहिए। ऐसे में जिनके पास ऐसा फोन नहीं है, उन्हें मजबूरी में नया फोन खरीदना पड़ेगा, वरना वे कार्य नहीं कर पाएंगे। प्रशिक्षण के समय बहुत अध्यापक इसी परेशानी में दिखे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक और तकनीकी बोझ डालती है।
एचएलओ का हो रहा कड़ा विरोध
एचएलओ ऐप के जरिए " बीवाईओडी यानि 'ब्रिंग योर ओन डिवाइस' मॉडल लागू किया गया है अर्थात अपना फोन लाओ और उसी से सरकारी काम करो लेकिन इसके लिए न तो कोई स्मार्टफोन दिया जा रहा है और न ही कोई तकनीकी सहायता।
वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि डिजिटल जनगणना का जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह कर्मचारियों के निजी संसाधनों पर टिका हुआ है।
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