ऐसे तो संवर चुकी शिक्षा की नर्सरी जासं, इलाहाबाद: जब बुनियाद ही कमजोर होगी तो भारत का भविष्य कैसे संवरेगा। यह हाल तब है जब केंद्र व राज्य सरकार शैक्षिक गुणवत्ता पर जोर दे रही है। परिषदीय स्कूल की परीक्षा के पेपर में गलतियों ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यूपी बोर्ड की तर्ज पर कराई जा रही परिषदीय स्कूल की परीक्षा मजाक बन गई है। गुरुवार को हुई कक्षा आठ की परीक्षा सामाजिक विषय पेपर में काफी गलतियां थीं। इससे परीक्षार्थी परेशान हुए। यह हाल तब है जब पेपर जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान ने बनाया है। पेपर में कहीं प्रश्न अधूरे तो कहीं शब्दों में गलतियां हैं।1बृहस्पतिवार को कक्षा आठ के परीक्षार्थियों की सामाजिक विषय की परीक्षा थी। प्रश्न पत्र में अति लघु उत्तरीय में ब्रिटिश के बजाय विटिश संसद छापा था। वस्तुनिष्ठ प्रश्न एक में प्रश्न पूछा गया था कि अमेंरिका की खोज किसने की थी? अमेरिका के ऊपर बिंदी लगी थी। इतना ही नहीं लघु उत्तरीय प्रश्न में पूछा गया था कि शीतोष्ण घास प्रदेश में खेती करने के लिए अधिकाधिक प्रयोग क्यों करते हैं। यह प्रश्न अधूरा था। पेपर सेटर मशीनरी लिखना ही भूल गए थे। इस वजह से प्रश्न अधूरा ही छप गया। इन गलतियों की वजह से परीक्षार्थी परेशान रहे। दरअसल, इस बार परिषदीय स्कूल की कक्षा छह से आठ तक की परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र छपवाए गए हैं। परीक्षार्थियों को पेपर के साथ ही उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई गई है। परीक्षार्थी नकल न कर सके इसके लिए सचल दस्ता गठित है। जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान प्राचार्य राजेंद्र प्रसाद के मुताबिक पेपर सेंटर ने जो गलियां की है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
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