हरदोई, जागरण संवाददाता: विद्यालयों में वार्षिक परीक्षा न देने वाले बच्चों का अब गुरु जी टेस्ट लेंगे। निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का पालन करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। विद्यालय में आयोजित होने वाली किसी भी परीक्षा में न भाग लेने वाले बच्चों की कक्षोन्नति के असमंजस करते हुए बेसिक शिक्षा निदेशक ने फरमान जारी किया है। कहा कि अभिभावकों को बुलाकर नौ व 11 अप्रैल को विद्यालयों में बच्चों का टेस्ट लिया जाए।परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाओं का शासन स्तर से पैटर्न बदल दिया गया है। इस बार कक्षा दो से कक्षा आठ तक की बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर परीक्षाएं ली गईं। वैसे देखा जाए तो विद्यालयों में शतत, अर्धवार्षिक और फिर वार्षिक परीक्षा ली जाती है। निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम में किसी भी बच्चे को एक कक्षा में न रोकने का नियम है। नियमानुसार कक्षा एक से आठ तक के हर बच्चे की अगली कक्षा में कक्षोन्नति कर दी जाए। परीक्षाओं का आयोजन तो पूर्व से ही होता था लेकिन पर पूर्ति तक सीमित था और बच्चों को पास कर दिया जाता था। नवीन व्यवस्था में सब कुछ बदल दिया गया और न केवल बच्चों की परीक्षा हुई बल्कि उन्हें अंक पत्र भी दिए गए। बच्चों की कक्षोन्नति के संबंध में शतत या अर्धवार्षिक परीक्षा के आधार पर ही उन्हें पास कर देने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन विद्यालयों ऐसे भी हजारों बच्चे हैं जोकि केवल पंजीकरण ही करा लेते और परीक्षा देना तो दूर विद्यालय ही नहीं आते। इन्हीं बच्चों की कक्षोन्नति को लेकर असमंजस की स्थिति थी। जिले में देखा जाए तो कक्षा एक के करीब 48 हजार 478 बच्चों की कक्षोन्नति दी गई। तो कक्षा दो से पांच तक के दो लाख 76 हजार 750 और कक्षा छह से आठ तक के 95 हजार 267 बच्चों को अंक पत्र दिए गए। जबकि जिन बच्चों ने वार्षिक परीक्षा नहीं दी उन्हें अन्य परीक्षा के आधार पर आगे बढ़ा दिया गया पर परीक्षा छो़ड़ने वाले बच्चों की स्थिति असमंजस में थी। बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा ने इसे दूर करते हुए कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में किसी भी बच्चे की कक्षोन्नति न रोकने का नियम है। उसी का पालन किया जाए। जिन बच्चों ने कोई परीक्षा नहीं दी उनके अभिभावकों को बुलाकर उनकी मौजूगी में नौ व 11 अप्रैल को विद्यालयों में टेस्ट लिया जाए। शिक्षक शिक्षिकाएं श्यामपट पर प्रश्न लिखें और बच्चों से उत्तर पुस्तिकाओं पर जवाब लिखवाए जाएं और कक्षोन्नति का वही आधार माना जाए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. ब्रजेश मिश्र ने बताया कि आदेशों का पालन कराया जाएगा और खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से परीक्षा न देने वाले बच्चों का विवरण एकत्रित कर उनका टेस्ट कराया जाएगा। घर से बुलाकर लाए जाएंगे बच्चे : विद्यालय आएं या न आएं। परीक्षा दें या न दें लेकिन बच्चों को पास करना ही है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में किसी भी बच्चे की कक्षोन्नति न रोकने का प्राविधान है और उसी का पालन कराने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। बेसिक शिक्षा निदेशक ने जारी आदेश में साफ कहा कि नौ व 11 अप्रैल को आयोजित होने वाले टेस्ट का प्रचार प्रसार कराया जाए। जो बच्चे स्कूल नहीं आते हैं शिक्षक शिक्षिकाएं उनके घर जाकर अभिभावकों से मिलकर बच्चों को विद्यालय लाकर उनका टेस्ट लें।
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