उरई(जालौन)। आज दिनांक 20 जुलाई 2016 को अटेवा के तत्वाधान में सैकड़ो
शिक्षकों व कर्मचारियों ने दोपहर 2 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय
पर एकत्रित होकर सभा की व 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों व
कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की। सभा का संचालन
हरपाल यादव ने किया।
जिसमें अटेवा के जिला संयोजक राकेश सरोज ने कहा कि पेंशन एक सरकारी कर्मचारी का मूलभूत अधिकार है जिसे 1 अप्रैल 2004 को कर्मचारियों से छीन लिया गया। परन्तु अब कर्मचारी भी शांत नहीं रहने वाले वे आंदोलन करेंगे और सरकार से इस अधिकार को वापिस लेकर ही रहेंगे।
मण्डल प्रभारी सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन छीनकर सरकार ने कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया है। न तो किसी सांसद की पेंशन बन्द की गई न ही विधायक परन्तु कर्मचारियों की बंद कर दी गई। ये सरासर नाइंसाफी है और हम इस नाइंसाफी के विरोध में डटकर खड़े रहेंगे।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र राजपूत ने कहा कि सरकार ने सुरक्षित भविष्य वाली पुरानी पेंशन बन्द करके बाजार आधारित नई पेंशन की व्यवस्था कर दी है । ये हम सरकारी कर्मचारियों के लिए सर्वदा अस्वीकार है । यदि वास्तव में सरकार को नई पेंशन में लाभ दिखता है तो सर्वप्रथम उसे विधायकों व सांसदों की पुरानी पेंशन बन्द करके नई पेंशन चालू कर देनी चाहिए।
एससी/एसटी शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुन्दर सिंह शास्त्री ने कहा कि पेंशन ही सरकारी नौकरी का चार्म हुआ करता था जिसे बन्द करके सरकार ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। आज का युवा नौकरशाही की और मुड़ने के बजाय उच्च वेतनभोगी बनने के लिए मल्टीनेशनल कम्पनियों का रुख करने लगा है। यदि पुरानी पेंशन लागू न हुई तो आने वाले समय में सरकार को अच्छे कर्मचारी भी न मिलेंगे ।
जिसमें अटेवा के जिला संयोजक राकेश सरोज ने कहा कि पेंशन एक सरकारी कर्मचारी का मूलभूत अधिकार है जिसे 1 अप्रैल 2004 को कर्मचारियों से छीन लिया गया। परन्तु अब कर्मचारी भी शांत नहीं रहने वाले वे आंदोलन करेंगे और सरकार से इस अधिकार को वापिस लेकर ही रहेंगे।
मण्डल प्रभारी सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन छीनकर सरकार ने कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया है। न तो किसी सांसद की पेंशन बन्द की गई न ही विधायक परन्तु कर्मचारियों की बंद कर दी गई। ये सरासर नाइंसाफी है और हम इस नाइंसाफी के विरोध में डटकर खड़े रहेंगे।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र राजपूत ने कहा कि सरकार ने सुरक्षित भविष्य वाली पुरानी पेंशन बन्द करके बाजार आधारित नई पेंशन की व्यवस्था कर दी है । ये हम सरकारी कर्मचारियों के लिए सर्वदा अस्वीकार है । यदि वास्तव में सरकार को नई पेंशन में लाभ दिखता है तो सर्वप्रथम उसे विधायकों व सांसदों की पुरानी पेंशन बन्द करके नई पेंशन चालू कर देनी चाहिए।
एससी/एसटी शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुन्दर सिंह शास्त्री ने कहा कि पेंशन ही सरकारी नौकरी का चार्म हुआ करता था जिसे बन्द करके सरकार ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। आज का युवा नौकरशाही की और मुड़ने के बजाय उच्च वेतनभोगी बनने के लिए मल्टीनेशनल कम्पनियों का रुख करने लगा है। यदि पुरानी पेंशन लागू न हुई तो आने वाले समय में सरकार को अच्छे कर्मचारी भी न मिलेंगे ।
शिक्षिका श्वेता मौर्या ने कहा कि 12 वर्ष तक हमने बहुत सब्र कर लिया है अब शिक्षक-कर्मचारी चुप नहीं बैठेगा। पश्चिम बंगाल, केरल व त्रिपुरा में पुरानी पेंशन लागू है तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं? अब तो आर-पार की लड़ाई तय है। आज हम जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री/प्रधानमन्त्री तक अपना ज्ञापन पहुँचा रहे हैं। अगर इस ज्ञापन से उनकी नींद टूटती है तो ठीक अन्यथा अटेवा के तत्वाधान में आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
बाद में जिला संरक्षक सम्पूर्णानन्द गौतम द्वारा इस घोषणा के साथ सभा का समापन हुआ कि आज 20 जुलाई को जैसी एकता हम शिक्षकों-कर्मचारियों ने दिखाई है उससे भी श्रेष्ठ एकता के प्रदर्शन के लिए 21 अगस्त से 18 दिवसीय मंडलवार धरना-प्रदर्शन के लिए सब तैयार रहें। अक्टूबर में लखनऊ में विशाल धरना व प्रदर्शन किया जायेगा और आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
सभा को सुरेन्द्र प्रताप ठाकुर, विनोद अहिरवार, राघवेन्द्र यादव, गिरधर अनुरागी, बृजेश निरंजन, सिद्धार्थ उदयवीर, संजीव त्यागी, शैलेश कुमार, अजीत प्रताप सिंह, आफ़ताब आलम ने भी संबोधित किया।
सभा के बाद शिक्षक-कर्मचारी मोटरसाइकल रैली निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे। वहाँ मुख्यमंत्री तथा प्रधानमन्त्री को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट शीतल प्रसाद को सौंपा गया।
ज्ञापन देने वालों में बृजेश श्रीवास्तव, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, हरपाल यादव, राजेंद्र राजपूत, सुन्दर सिंह शास्त्री, विकास श्रीवास्तव, विक्रम सिंह, सुरेश वर्मा, विकास गुप्ता, सुरेन्द्र प्रताप ठाकुर, विनोद अहिरवार, राघवेन्द्र यादव, गिरधर अनुरागी, बृजेश निरंजन, श्वेता मौर्या, सिद्धार्थ उदयवीर, संजीव त्यागी, राकेश सरोज, सम्पूर्णानन्द गौतम, शैलेश कुमार, अजीत प्रताप सिंह, आफ़ताब आलम, संतोष विश्वकर्मा, अजय निरंजन, रमाकांत व्यास, ज्ञान चन्द्र कैथवास, महेंद्र वर्मा, राज कुमार सैनी, विनोद कुमार भारतीया, राम किशोर, हृदेश कुमार, प्रदीप कुमार, मनीष विश्वकर्मा, योगेन्द्र सिंह यादव, राजकुमार सिंह, नरेन्द्र कुमार, पंकज कुमार गुप्ता, कोमल सिंह, किशोर सिंह दोहरे, मनोज कुमार गौतम, चन्द्रकेश राम, मनीष पालीवाल, रामहंत सिंह, रामकृष्ण निरंजन, मिस्टर सिंह, प्रदीप यादव, मनीष कुमार निरंजन, अमृतलाल नागर, राजेंद्र प्रसाद, शैलेश कुमार, सुधीर कुमार गुर्जर, पुनीत कुमार भारती, जितेन्द्र कुमार वर्मा, कमल सिंह, प्रदीप कुमार, नृपेन्द्र देव सिंह, संतोष कुमार, धीरेन्द्र सिंह यादव, संजीव कुमार त्यागी, दयालाल, राहुल निरंजन आदि उपस्थित रहे।






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