कलेक्ट्रेट सभागार में सीडीओ लालजी यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को जैपनिज इंसेफेलाइटिस(जेई)और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से बचाव पर गोष्ठी आयोजित हुई। सीडीओ ने कहाकि गंदगी और प्रदूषित जल के सेवन से फैलने वाली इस बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज विभाग सहित अन्य को एक साथ काम करना होगा। सीएमओ डा. एपी श्रीवास्तव ने कहाकि इंसेफेलाइटिस बीमारी से मासूमों की मौत के मामले में पूर्वांचल के जिले संवेदनशील हैं। जनपद में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए उचित व्यवस्था की गई है।एडीशनल सीएमओ डा. केएम मिश्र ने कहाकि 22 जुलाई को जनपद के प्रत्येक ब्लाकों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधान, विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, अध्यापक, एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद ये अपने-अपने गांव के लोगों को शौचालय बनवाने, भोजन करने के पहले और शौच के बाद हाथ धोने, आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के प्रति जागरुक करेंगे। इसके बाद 27 जुलाई को जनपद के प्रत्येक स्कूल से जन जागरुकता रैली निकाली जाएगी। इसी दिन हर गांवों में चौपाल भी लगेंगे। गोरखपुर से आए विशेषज्ञ डा. वीके श्रीवास्तव ने कहाकि घर के आसपास अथवा अन्य जगहों में जल जमाव की स्थिति न रहे, वह इसलिए कि जहां पानी स्थिर रहता है, वहां मच्छर अंडे देते हैं। इन मच्छरों के कारण मलेरिया व अन्य बीमारियां जन्म लेती है। मच्छररोधी दवाओं का उपयोग आवश्यक है । डिप्टी सीएमओ डा. मो. अकरम ने कहाकि सावधानी ही इस बीमारी के बचाव का अच्छा माध्यम है। गोष्ठी में डा. एके सिन्हा, डिप्टी सीएमओ डा. रतन लाल, डीपीआरओ राम आग्रे सिंह, डीपीओ एके दूबे, डीएसडब्ल्यूओ उमाकांत शुक्ल, स्वास्थ्य विभाग के मनीष व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग की बैठक में जानकारी देते अधिकारी।
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