बेसिक विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर और विद्यालय भवनों के सुधार पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी तमाम विद्यालय ऐसे हैं जिनमें पढ़ने वाले छात्रों को जोखिम उठाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे ही विद्यालयों में शहर सीमा से सटे उच्च प्राथमिक विद्यालय लोहार खेड़ा द्वितीय भी शामिल है। विद्यालय के सामने पानी भरा है और बच्चों को जोखिम उठा ईट डालकर आना जाना पड़ता है।उक्त उच्च प्राथमिक विद्यालय में 73 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय में मुख्यगेट से लेकर स्कूल की सीढ़ियों के करीब तक घुटनों तक पानी भरा है। बच्चे एक -एक ईट का रास्ता बना किसी तरह कक्षाओं तक पहुंचते हैं। कई छात्रों ने बताया कि अक्सर वह ईट से पैर फिसलने पर गिर जाते हैं। जिससे ड्रेस खराब हो जाती है। बच्चों ने बताया कि अब तो कुछ पानी कम हो गया हे बरसात के दिनों में तो पैंट उतार कर आना जाना पड़ता है। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका सुनीता कुमारी ने बताया कि बीएसए को पत्र लिखकर जल भराव की समस्या से अवगत करा चुकी हूं। उन्होंने बताया कि बरसात के बीच शिक्षिकाएं भी पानी में गिर चुकी हैं।
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