करोड़ों खर्च होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ाने में शिक्षक व अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि जिस दिन स्कूलों में दूध व फल वितरण होते हैं, उस दिन जरूर बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जाती है। मिड-डे-मील विभाग के रिकार्ड पर नजर डालें तो जिले के परिषदीय विद्यालयों में वैसे 40 से 45 प्रतिशत बच्चे उपस्थित रहते हैं, लेकिन जिस दिन दूध और फल वितरण होता है, उस दिन बच्चों की संख्या 55 से 60 प्रतिशत पहुंच जाती है। सीबीएसई पैटर्न की तरह परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का माहौल बनाने के लिए सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग नई नई पहल आरंभ कर रहा है। विभाग ने स्कूलों का शैक्षिक सत्र जुलाई की जगह अप्रैल माह से शुरू किया। यही नहीं प्रत्येक माह विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई परखने के लिए मासिक परीक्षा होती है। इन तमाम कोशिश के बावजूद परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं छात्र-छात्रओं की उपस्थिति बढ़ नहीं रही है। उधर,बेसिक शिक्षा के जिला समन्वयक रासु कुमार का कहना है कि रोजाना जिले के स्कूलों से 40 से 45 प्रतिशत बच्चों उपस्थिति आती है। सोमवार व बुधवार को फल और दूध वितरण वाले दिन छात्रों की संख्या 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि सभी शिक्षकों व बीईओ को उपस्थिति बढ़ाने तथा शिक्षा स्तर बढ़ाने के आदेश दे रखे हैं।
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