रसोइयां न कर सके। इसके लिए शासन स्तर से बर्तनों पर मोहर लगकर आई है।1क्या है व्यवस्था : जिले में करीब 15 सौ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील सहित अन्य कई योजनाओं का लाभ दिया जाता है, लेकिन सरकारी तंत्र के कारण योजनाओं का बेहतर लाभ बच्चों को नहीं मिल पाता है। जिस कारण विद्यालयों में लगातार छात्रों का नामांकन कम होता जा रहा है। कम नामांकन होने पर उच्चाधिकारी चितिंत हैं।1घरों से लाते थे बच्चे बर्तन : मिड डे मील योजना का लाभ लेने के लिए बच्चों को घरों से स्वयं बर्तन लेकर आने पड़ते थे। ऐसे में यदि कोई बच्चा बर्तन लाना भूल जाए तो उसे मिड डे मील से महरूम रहना पड़ता था। वहीं, शासन स्तर से बच्चों के लिए बर्तन आदि की व्यवस्था नहीं की गई थी। ग्रांट न होने का हवाला अधिकारी देते रहते थे। 1अब जगी आस : सब कुछ ठीक रहा तो बच्चों को अपने घरों से मिड डे मील खाने के लिए बर्तन नहीं लाने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रेरणा से अब विद्यालयों में बच्चों के लिए बर्तनों की व्यवस्था कराई जा रही है। अब बच्चों को थाली और गिलास विद्यालयों में ही मिला करेंगे। इसके लिए गत दिनों शासन स्तर पर मिड डे मील जिला समन्वयकों की बैठक लेकर बर्तनों का सैंपल दिए गए। 1समिति का होगा गठन : विद्यालयों में बर्तन पहुंच सके और किसी स्तर पर गड़बड़ी न हो सके। इसके लिए एक समिति का गठन जिला स्तर पर किया जाएगा। उसके बाद जल्द ही विद्यालयों तक बर्तन पहुंचाए जाएंगे, ताकि बच्चों को मिड डे मील का बेहतर लाभ मिल सके। वहीं, बर्तनों को कोई बाजार आदि में नहीं बेच सके।6>>परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए आएंगे बर्तन 16प्रदेश सरकार की मोहर लगकर आएगी बर्तनों

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