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Tuesday, October 4, 2016

बिजनौर : चले इंग्लिश मीडियम की राह पर अंग्रेजी की किताब भी नहीं, परिषदीय स्कूलों में अभी तक नहीं पहुंच सकीं अंग्रेजी की किताबें

परिषदीय विद्यालयों को सीबीएसई पैटर्न पर लाने में जुटे विभागीय अफसर शिक्षा के मूलमंत्र को फलीभूत तक नहीं कर पा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों का शैक्षिक सत्र भी जुलाई की जगह अप्रैल में आरंभ कर दिया। यहीं नहीं विद्यालयों में प्रत्येक माह टेस्ट भी लिया जाने लगा है, लेकिन अभी तक परिषदीय स्कूलों में एक भी अंग्रेजी की किताब नहीं पहुंची है। अन्य विषयों की किताबें भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाईं है।  सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर उठाने का प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने वाले छात्र-छात्रओं को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ साथ यूनिफार्म मुफ्त दी जा रही है। छात्रों को मिड-डे-मील भी दिया जा रहा है। छात्रों को किताबें रखने के लिए नि:शुल्क बैग देने की तैयारी है, लेकिन इन स्कूली बैगों में रखने को किताबें नहीं है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद परिषदीय स्कूलों में सब कुछ है, लेकिन शिक्षा ही नहीं है। शासन व अफसरों की लेटलतीफी के चलते अभी तक जिले में शतप्रतिशत किताबें नहीं पहुंच पाईं हैं। करीब तीस प्रतिशत किताबें ही जिले में पहुंचीं हैं और उन्हें स्कूलों में भिजवाया जा रहा है। इनमें भी अंग्रेजी विषय की एक भी किताब नहीं है। ऐसे में जब स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए अंग्रेजी की किताबें नहीं है तो वह सीबीएसई के बच्चों की तरह कैसे ज्ञान पा सकते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेश चंद्र ने बताया कि किताबें आने लगी हैं, जो नहीं आईं हैं उनकी डिमांड भेज दी गई है। जल्द ही परिषदीय स्कूलों में किताबें पहुंच जाएंगी

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