जनसंख्या का घनत्व एवं उपलब्ध संसाधन निश्चित ही पर्याप्त नहीं हैं, लेकिन कोई भी विकासशील देश सिर्फ संसाधनों के अभाव का विलाप कर विकसित नहीं हो सकता। विकास के लिए सिर्फ धन ही नहीं, बल्कि समर्पण के साथ सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए मोटे निवेश की धारणा को झुठलाती ‘शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार’ एक जीवंत पहल बनकर तैयार हो चुकी है। श्री अरविंद सोसायटी और प्रदेश के शिक्षा विभाग की ओर से ‘रूपांतर’ कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूलों में बिना निवेश शिक्षा को उम्दा बनाने की पहली कोशिश एक किताब का रूप ले चुकी है। 11 नवाचारों को किया शामिल शिक्षकों के लिए, शिक्षकों के द्वारा तैयार किए गए इस नवाचार मंच ‘शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार’ के प्रथम अंक में कुछ स्कूलों द्वारा अपनाए गए बेहतरीन रिजल्ट वाले 11 नवाचारों को शामिल किया गया है। इनमें कला-शिल्प से सर्वागीण विकास, खेल-खेल में शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता, अभिनव शिक्षण तकनीक, बाल संसद, दैनिक बाल अखबार, छात्र प्रोफाइल, भविष्य सृजन, सरल अंग्रेजी अधिगम, कांसेप्ट मैपिंग और चित्रकथा के माध्यम से शिक्षा शामिल हैं।
ऐसे निकले ये 11 नवाचार
‘रूपांतर : ट्रांसफॉर्मिग एजुकेशन इंस्पायरिंग एक्शन’ कार्यक्रम के अंतर्गत श्री अरविंद सोसायटी की ओर से प्रदेश के 18 मंडलों के 75 जिलों, 821 विकास खंडों के दो लाख विद्यालयों से साढ़े पांच लाख शिक्षक-प्रशिक्षितों को इस मुहिम में शामिल किया गया। इन शिक्षकों द्वारा विभिन्न स्कूलों में अपनाए गए तीन लाख नवाचारों में से चयनित 30 नवाचार में 11 पर केस स्ट्डी तैयार की गई है।
श्री अरविंद सोसायटी के निदेशक-शिक्षा संभ्रांत के अनुसार यह उन शिक्षकों की वैचारिक प्रतिबद्धता ही है कि बिना समुचित संसाधनों के अपनी निष्ठा, कर्मठता एवं योग्यता के जरिए नवाचारों का सृजन किया। अलग-अलग विद्यालयों में शिक्षकों के इन प्रयासों के परिणाम काफी उत्साहपूर्ण रहे हैं। पर समस्या यह है कि इसका लाभ उसी विद्यालय को मिल रहा है,
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