डेली न्यूज़ नेटवर्करायबरेली। शासनादेशों को ताख पर रखकर काम करने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस निरंजन की जेब में सचिव बेसिक शिक्षा से लेकर तमाम बड़े अधिकारी हैं। तभी तो तमाम शिकायतों के बावजूद कार्रवाई तो दूर स्पष्टीकरण तक मांगना शासन जरूरी नहीं समझता। यही कारण हैं कि बिना किसी डर के जीएस निरंजन अपने लाभ के लिए रायबरेली में बेसिक शिक्षा की कमर तोड़ने पर अमादा हैं। शैक्षिक स्तर को सुधारने के बजाए वसूली में जुटे जीएस निरंजन को सचिव बेसिक शिक्षा का वरदहस्त हैं। बीएसए सचिव बेसिक शिक्षा बीएसए के कितने लाडले हैं इसका खुलासा राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान जीएस प्रियदर्शी के करीब डेढ़ माह पूर्व भेजे गए पत्र से हुआ हैं। इस पत्र में एसपीडी ने रायबरेली और महराजगंज के दो बेसिक शिक्षा अधिकारियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की थी जिसकी प्रगति अब तक शून्य हैं। बेसिक शिक्षा से जुड़े सूत्रों की मानें तो सचिव बेसिक शिक्षा ने गुपचुप तरीके से बीएसए को बुलाकर साठ-गांठ कर ली। कोई ऐसा पत्र सचिव द्वारा जारी नहीं किया गया जिसमें कार्रवाई परिलक्षित होती हो। मामले में रायबरेली एवं महराजगंज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी धीरेन्द्र श्रीवास्तव रायबरेली एवं वाचस्पति द्विवेदी महराजगंज को अनियमित ढंग से मूल विभाग में वापस भेजकर कार्यमुक्त कर दिया गया था। जिले के बीएसए जीएस निरंजन ने एएओ धीरेन्द्र श्रीवास्तव से व्यक्तिगत द्वेष के कारण उन्हें आनन-फानन रिलीव कर दिया था। तब से अब तक सर्वाधिक बजट और महत्वपूर्ण सर्व शिक्षा अभियान का लेखा-जोखा पूरी तरह से गड़बड़ हो चुका हैं। इस प्रकरण का संज्ञान लेकर राज्य परियोजना निदेशक जीएस प्रियदर्शी ने बीएसए द्वय को 26 सितम्बर 2016 को पत्र जारी कर दो दिन के अंदर अनियमित तरीके से रिलीव किए गए एएओ के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। सचिव के खास हठधर्मी प्रवृत्ति के बीएसए जीएस निरंजन ने एसपीडी के पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। उच्चाधिकारियों की अवहेलना के लिए माहिर जीएस निरंजन ने न तो कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही प्रस्तुत हुए। एसपीडी श्री प्रियदर्शी ने 18 अक्टूबर 2016 को सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र लिखकर प्रकरण से अवगत कराया साथ ही बीएसए रायबरेली व महराजगंज को जान-बूझकर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना का आरोपी करार दिया। एसपीडी ने सचिव बेसिक शिक्षा से बेसिक शिक्षा अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति भी की। डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई ऐसा बेसिक शिक्षा से जुड़े सूत्र बताते हैं। रायबरेली में सचिव बेसिक शिक्षा और बीएसए के संबंधों की चर्चा जोर-शोर से हैं और ऐसा माना जा रहा हैं कि इन संबंधों की मजबूत डोर के आगे एसपीडी का पत्र कोई मायने नहीं रखता। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा के व्यक्ति मोबाइल नम्बर पर कई बार कॉल की गई लेेकिन बेल जाने के बाद भी उन्होंने फोन नहीं उठाया।
बीएसए को बचाते हुए सचिव ने ठंडे बस्ते में डाला मामला
रायबरेली। साथी शिक्षकों के संख्याबल की धौंस दिखाकर चहेतों के संशोधन कराकर लाभ कमाने वाले शिक्षक नेता अपने ही एक शिक्षक को पांच महीने से वेतन नहीं दिला सके। अपने कारनामों के लिए मौजूदा समय में चर्चित बेसिक शिक्षा विभाग जुलाई में नियुक्त हुए शिक्षक को लगातार दौड़ा रहा हैं। विद्यालय में अध्यापन कार्य समाप्त करने के बाद शिक्षक वेतन के लिए बीएसए की चौखट पर ऐड़ियां रगड़ता हैं। कभी साहब गायब हो जाते हैं तो कभी बाबू साहब का हवाला देकर टरका देता हैं। शिक्षक के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन हुआ भी की नहीं इसके लिए विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की। जानकारी के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग में 15000 बीटीसी भर्ती प्रक्रिया में प्रतापगढ़ निवासी शैलेश कुमार सिंह को रायबरेली के राही ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भखरवारा में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली थी। शैलेश का कहना हैं कि उनके साथ ज्वाइन करने वाले साथियों (शिक्षकों) का वेतन उनके खातों में पहुंच चुका हैं। लेकिन पांच माह बीतने के बाद भी उन्हें अभी तक वेतन नहीं मिला हैं। इस मामले की शिकायत विभाग से की गई तो वहां से भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला। बस यहीं कहा जाता हैं कि उनके शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन नहीं हुआ हैं। ऐसे में शिक्षक ब्लॉक और बीएसए दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पांच माह से शिक्षक को वेतन न मिलने के कारण उसे घर खर्च चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। हर समस्या का निराकरण कराने का दावा करने वाले नेता भी मौन धारण किए हुए हैं। मजबूर शिक्षक बीते पांच महीने से दौड़ रहा हैं। इस संबंध में जब जीएस निरंजन के सबसे खास माने जा रहे प्रभारी बीएसए सुनील प्रजापति से बात की गई तो उन्होंने कहाकि मामला जानकारी में हैं। शिक्षक के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन जल्द कराया जाएगा। सत्यापन होने के बाद उसे समय से वेतन मिल सकेगा।
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