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Wednesday, September 16, 2026

माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन सरकारी गजट में हुआ प्रकाशित

माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन सरकारी गजट में हुआ प्रकाशित 

15 सितंबर 2026




माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रधानाचार्य (इंटर स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसमें जहां पीजी स्तर पर राहत देते हुए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं। वहीं बीएड को शामिल किया गया है। जबकि अनुभव का नियम पूर्व की भांति रहेगा।


विशेष सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार उप्र माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय 2 के विनियम-1 के परिशिष्ट क में संस्था प्रधान की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड होना चाहिए। साथ ही पूर्व की भांति राज्य सरकार की उच्चतर कक्षाओं (नौ से 12 में) प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षण अनुभव, हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 साल से कम आयु आयु नहीं होना चाहिए।

इसी क्रम में प्रधानाध्यापक के लिए पीजी 50 फीसदी अंकों के साथ, एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड व बीपीएड होना होगा। साथ ही केंद्र-राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षक अनुभव, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए। बता दें, अब तक दोनों पद के लिए लगभग एक जैसी अर्हता थी। 


Friday, May 23, 2025

शिक्षकों की योग्यता तय होने तक मदरसों में नई भर्ती नहीं, सुप्रीम कोर्ट से कामिल व फाजिल की डिग्री असांविधानिक होने पर शासन ने लगाई रोक

शिक्षकों की योग्यता तय होने तक मदरसों में नई भर्ती नहीं, सुप्रीम कोर्ट से कामिल व फाजिल की डिग्री असांविधानिक होने पर शासन ने लगाई रोक


लखनऊ। मदरसों में शिक्षकों की अब नए सिरे से योग्यता तय की जाएगी। योग्यता तय होने तक मदरसों में शिक्षकों की नई नियुक्ति नहीं हो सकेगी। शासन ने शिक्षकों की नई भर्ती पर रोक लगा दी है।


उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त प्रदेश में तहतानिया (कक्षा 1 से 5), फौकानिया (कक्षा 5 से 8) और आलिया (हाई स्कूल या इससे ऊपर) के करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त 560 मदरसे हैं। इन मदरसों में मुंशी-मौलवी (हाईस्कूल), आलिम (इंटर) की शिक्षा दी जा रही है। 


मदरसा बोर्ड की कामिल और फाजिल की डिग्री की यूजीसी से मान्यता न होने से सुप्रीम कोर्ट ने इन डिग्रियों को असांविधानिक घोषित कर दिया था। ऐसे में मदरसा शिक्षकों की योग्यता का नए सिरे से निर्धारण होना है। शिक्षकों की योग्यता का निर्धारण विषय व कक्षावार वर्गीकरण के आधार पर होगा। इसलिए शासन ने नई नियुक्ति पर रोक लगाई है। 


कार्यरत शिक्षकों को करेंगे प्रशिक्षित

अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि मदरसों में कार्यरत शिक्षक नए आदेश से प्रभावित नही होंगे। इन शिक्षकों का तहतानिया और फौकानिया में उपयोग किया जाएगा। कार्यरत शिक्षकों की विषयवार योग्यता को चिह्नित कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें आधुनिक विषयों से जोड़ने के लिए ब्रिज कोर्स कराया जाएगा।


नई शिक्षा नीति के मुताबिक तय होगा पाठ्यक्रम

शिक्षकों की योग्यता के निर्धारण और पाठ्यक्रम तय करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में शासन स्तर पर कमेटी बनेगी। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक ने बताया कि कमेटी योग्यता निर्धारित करने के साथ ही नई शिक्षा नीति के आधार पर पाठ्यक्रम के लिए अनिवार्य आधुनिक विषय तय करेगी।

Tuesday, August 23, 2022

राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ताओं की भर्ती में भी अनिवार्य होगा बीएड

राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ताओं की भर्ती में भी अनिवार्य होगा बीएड

प्रवक्ता में बीएड अनिवार्य, 100 साल पुराने नियमों में होगा बदलाव



प्रयागराज :  राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती में भी बीएड को अनिवार्य किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अर्हता लागू करने के लिए शासन स्तर पर मंथन तेज हो गया है। इस संबंध में बुधवार को शासन में उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है।


एनसीटीई ने 16 दिसंबर 2014 को जारी अधिसचूना में प्रवक्ता भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड को अनिवार्य कर दिया था।


केंद्रीय विद्यालयों में भी पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती में बीएड अर्हता अनिवार्य है। लेकिन एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के तकरीबन आठ साल बाद भी यूपी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से की जाने वाली राजकीय विद्यालयों की प्रवक्ता भर्ती और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए दोनों भर्तियों की नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक या एलटी ग्रेड भर्ती) में बीएड अनिवार्य योग्यता है।


प्रयागराज। राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती में भी बीएड को अनिवार्य किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अर्हता लागू करने के लिए शासन स्तर पर मंथन तेज हो गया है। इस संबंध में बुधवार को शासन में उच्च स्तरीय बैठक होगी। एनसीटीई ने 16 दिसंबर 2014 को जारी अधिसचूना में प्रवक्ता भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड को अनिवार्य कर दिया था।


केंद्रीय विद्यालयों में भी पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती में बीएड अर्हता अनिवार्य है। लेकिन एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के तकरीबन आठ साल बाद भी यूपी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से की जाने वाली राजकीय विद्यालयों की प्रवक्ता भर्ती और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए दोनों भर्तियों की नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक या एलटी ग्रेड भर्ती) में बीएड अनिवार्य योग्यता है।


100 साल पुराने नियम में होगा बदलाव

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में इंटरमीडिएट एक्ट 1921 के नियमों के आधार पर भर्ती होती है। यही कारण है कि कला शिक्षकों की भर्ती में अब तक लाहौर की डिग्री मान्य है और बीएफए, एमएफए जैसी डिग्री लेने वाले अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाते। इसी प्रकार अन्य विषयों की शिक्षक भर्ती में भी विसंगतियां हैं। सूत्रों के अनुसार नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार है। विधानसभा से पास होने के बाद लागू होगा।

Sunday, October 31, 2021

शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, कहा- आवेदन की अंतिम तिथि को नियुक्ति की अर्हता जरूरी

शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, कहा- आवेदन की अंतिम तिथि को नियुक्ति की अर्हता जरूरी

आवेदन पत्र की अंतिम तिथि के दिन अभ्यर्थी का अर्ह होना जरूरी- हाईकोर्ट


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि शिक्षकों की भर्ती के आवेदन पत्र की अंतिम तिथि के दिन अभ्यर्थी का अर्ह होना चाहिए। अंतिम तिथि के बाद यदि कोई अभ्यर्थी बैकपेपर से बीटीसी पास होता है तो वह शिक्षक की नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बैकपेपर से बीटीसी पास होने का मतलब यह कदापि नहीं हो सकता कि अभ्यर्थी को भूतलक्षी प्रभाव से शिक्षक पद के लिए अर्ह माना जाए।

यह निर्णय न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने शिक्षक भर्ती की अभ्यर्थी अंजली सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका में याची ने सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग की थी। याची की नियुक्ति की मांग पर इस आधार पर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसके पास आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 दिसम्बर 2018 तक बीटीसी पास होने की निर्धारित योग्यता नहीं थी। याची ने बैकपेपर से बीटीसी परीक्षा 2019 में पास की। 

याची का कहना था कि पांच मार्च 2021 के शासनादेश में यह व्यवस्था दी गई है कि बीटीसी के नम्बर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन जो बैकपेपर से होगा, अधिकारी उसका भी संज्ञान लेंगे जबकि याची की इस मांग को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शाहजहांपुर ने पहले ही मानने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि याची को पांच मार्च 2021 के शासनादेश का लाभ नहीं मिल सकता।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून का प्रतिपादित सिद्धांत है कि किसी भी अभ्यर्थी के योग्यता का परीक्षण प्रार्थना पत्र देने की अंतिम तिथि तक होना चाहिए। याची शिक्षक के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 दिसम्बर 2018 तक बीटीसी की योग्यता नहीं रखती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि याची बैकपेपर से बीटीसी परीक्षा पास हो गई है, इसका मतलब यह नहीं कि उसे भूतलक्षी प्रभाव से शिक्षक पद के लिए अर्ह माना जाए।


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि को अभ्यर्थी पद के लिए अर्ह होना चाहिए। 


अंतिम तिथि के बाद यदि कोई अभ्यर्थी बैकपेपर से बीटीसी पास होता है तो वह नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं है। बैकपेपर से बीटीसी पास होने का मतलब यह कदापि नहीं हो सकता कि अभ्यर्थी को भूतलक्षी प्रभाव से टीचर पद के लिए अर्ह माना जाय। 


यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने अंजली सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची ने सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की मांग की थी। याची की नियुक्ति की मांग पर इस आधार पर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया, क्योंकि उसके पास प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 दिसंबर, 2018 तक बीटीसी पास होने की निर्धारित योग्यता नहीं थी।


 याची ने बैकपेपर से बीटीसी परीक्षा 2019 में उत्तीर्ण की। याची का कहना था कि शासनादेश पांच मार्च 2021 में यह व्यवस्था दी गई है कि बीटीसी के नंबर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन जो बैक पेपर से होगा, उसका भी अधिकारी संज्ञान लेंगे। 


जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शाहजहांपुर ने कहा कि याची को शासनादेश पांच मार्च 2021 का लाभ नहीं मिल सकता। पीठ ने कहा कि प्रतिपादित सिद्धांत है कि किसी भी अभ्यर्थी के योग्यता का परीक्षण प्रार्थना पत्र देने की अंतिम तिथि तक होना चाहिए। याची प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 22 दिसम्बर, 2018 तक बीटीसी की योग्यता नहीं रखती थी।