DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label एआईसीटीई. Show all posts
Showing posts with label एआईसीटीई. Show all posts

Monday, July 6, 2026

यूपी के 12 समेत देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद, 950 से अधिक पाठ्यक्रम भी बंद किए गए

यूपी के 12 समेत देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद, 950 से अधिक पाठ्यक्रम भी बंद किए गए

एआईसीटीई ने कहा, मौजूदा विद्यार्थियों को डिग्री पूरी करने में नहीं आएगी बाधा


नई दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देशभर के 58 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा संस्थान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने बताया कि इन कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपनी डिग्री पूरी करने की अनुमति दी जाएगी।


एआईसीटीई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2025-26 में कुल 58 इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे अधिक 12-12 संस्थान बंद किए गए। मध्य प्रदेश में आठ, तेलंगाना और पंजाब में 4-4 संस्थान बंद हुए। आंध्र प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन कॉलेज बंद किए गए, जबकि गुजरात, कर्नाटक, पुणे और तमिलनाडु में दो-दो कॉलेज बंद हुए। हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में एक-एक कॉलेज बंद किए गए। 

इन 58 संस्थानों में से तीन सरकारी सहायता प्राप्त थे, जबकि शेष निजी थे। एआईसीटीई देश में तकनीकी शिक्षा के लिए वैधानिक राष्ट्रीय शीर्ष सलाहकार एवं नियामक संस्था है। यह इंजीनियरिंग, वास्तुकला, प्रबंधन और फार्मेसी जैसे पाठ्यक्रमों की निगरानी करती है। 


950 से अधिक पाठ्यक्रम भी बंद किए गए 
पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान देशभर के प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग कॉलेजों में संचालित किए जा रहे 950 से अधिक पाठ्यक्रमों को भी बंद कर दिया गया। इन पाठ्यक्रमों के पुराने पड़ जाने के कारण इनकी मांग काफी घट गई थी। इससे इनकी पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर नौकरियां मिलने की संभावना भी घटती जा रही थी।


चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा बंद
कॉलेजों को बंद करने के लिए प्रोग्रेसिव क्लोजर यानी चरणबद्ध तरीके से बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अब इन कॉलेजों में नए विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिलेगा, पर जो पहले से वहां पढ़ रहे हैं, उन्हें डिग्री पूरी करने का मौका दिया जाएगा, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष या भविष्य खराब न हो।

छात्रों-शिक्षकों की कमी बनी वजह इनमें से कुछ कॉलेजों में बहुत ही कम विद्यार्थी दाखिला ले रहे थे। कई संस्थानों में योग्य व अनुभवी प्रोफेसर या फैकल्टी नहीं थे। तो कई कॉलेज क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, जैसे संसाधनों के तय मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे थे।

Tuesday, December 16, 2025

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पेश, ये बदलाव होगा

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पेश, ये बदलाव होगा
 

लोकसभा में सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के प्रावधान वाले विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान, 2025 विधेयक पेश किया। विपक्ष ने विधेयक को लेकर कई आपत्तियां जताई, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदस्यों को इस विधेयक को लेकर दिक्कत नहीं होनी चाहिए थी। चूंकि आपत्ति की जा रही है इसलिए सरकार सदन से इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने का अनुरोध कर रही है।

कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है। आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, तृणमूल के सौगत राय, कांग्रेस की एस जोतिमणि व द्रमुक के टीवी सेल्वागणपति ने भी बिल का विरोध किया। जोतिमणि व सेल्वागणपति ने कहा, यह तमिलनाडु जैसे राज्यों पर हिंदी थोपने की कोशिश है। रिजिजू बोले, आशंकाएं उचित नहीं हैं।


ये बदलाव होगा

1. उच्च शिक्षा के लिए कानूनी आयोग बनेगा, जो नीति निर्धारण वसमन्वय को लेकर सरकार को सलाह देगा।

2. शैक्षणिक मानक तय करने का जिम्मा होगा, परीक्षा परिणाम, छात्रों की आवाजाही और शिक्षकों के न्यूनतम मानदंड तय होंगे।




उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक वाला बिल मंजूर, प्रस्तावित विधेयक अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा

12 दिसम्बर 2025
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूजीसी और एआईसीटीई जैसे निकायों की जगह उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।

प्रस्तावित विधेयक जिसे पहले भारत का उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) विधेयक नाम दिया गया था, अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित एकल उच्च शिक्षा नियामक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को प्रतिस्थापित करना है।

अधिकारी ने बताया, विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण की स्थापना से संबंधित विधेयक को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा क्षेत्र की, जबकि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा की देखरेख करती है और एनसीटीई शिक्षकों की शिक्षा के लिए नियामक निकाय है।

मेडिकल-लॉ कॉलेज दायरे में नहीं : प्रस्तावित आयोग को उच्च शिक्षा के एकल नियामक के रूप में स्थापित किया जाएगा, लेकिन मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं-विनियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानक निर्धारण। वित्त पोषण, जिसे चौथा क्षेत्र माना जाता है, अभी तक नियामक के अधीन प्रस्तावित नहीं है।




HECI : बनेगा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग, UGC, NCTE और AICTE जैसी संस्थाओं की जगह लेगा नया आयोग

23 नवंबर 2025
नई दिल्ली : सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश करने के लिए कुल 10 विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक भी सरकार के एजेंडे में है। प्रस्तावित कानून के जरिये उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना की जाएगी। प्रस्तावित उच्च शिक्षा आयोग विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) जैसी संस्थाओं की जगह लेगा और उच्च शिक्षा के एकीकृत नियामक के तौर पर काम करेगा। संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा है। 


लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) यूजीसी, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का स्थान लेगा। इस समय यूजीसी गैर तकनीकी उच्च शिक्षा का नियामक है, जबकि एआइसीटीई तकनीकी शिक्षा का नियमन करता है और एनसीटीई अध्यापक शिक्षा का नियामक निकाय है। 


एचईसीआइ को एकल उच्च शिक्षा विनियामक के तौर पर स्थापित करने का प्रस्ताव है, लेकिन चिकित्सा और विधि महाविद्यालयों को इसके दायरे में नहीं लाया जाएगा। इस आयोग की तीन भूमिकाएं-नियमन, मान्यता और मानक तय करने की है।

Tuesday, April 8, 2025

इंजीनियरिंग की किताबें 12 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की तैयारी, अनुवाद का काम जारी, एआईसीटीई ने 2026 तक योजना पूरा करने का रखा लक्ष्य

इंजीनियरिंग की किताबें 12 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की तैयारी, अनुवाद का काम जारी, एआईसीटीई ने 2026 तक योजना पूरा करने का रखा लक्ष्य


दिसंबर 2026 तक 12 भारतीय भाषाओं में सभी इंजीनियरिंग डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। अलग- अलग विषयों और शैक्षणिक वर्षों के लिए पाठ्य पुस्तकों के अनुवाद का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। बताते चलें कि एआईसीटीई विश्वविद्यालय से संबद्ध और स्वायत्त तकनीकी संस्थानों की निगरानी करता है।

भारतीय भाषाओं में ये पाठ्य पुस्तकें एआईसीटीई के मॉडल पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई हैं और ये सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस जैसी मुख्य इंजीनियरिंग शाखाओं को कवर करती हैं।

एआईसीटीई के चेयरमैन प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि पहले और दूसरे वर्ष के इंजीनियरिंग डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए लगभग 600 पाठ्यपुस्तकें पहले ही तैयार की जा चुकी हैं और 12 क्षेत्रीय भाषाओं में अपलोड भी की जा चुकी हैं। इन क्षेत्रीय भाषाओं में हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा, हमने इंजीनियरिंग के डिप्लोमा और डिग्री दोनों की पहले और दूसरे वर्ष की दो वर्षों की पुस्तकें तैयार कर ली हैं। तीसरे और चौथे वर्ष की पाठ्यपुस्तकों के लिए काम तेजी से चल रहा है। इनमें से भी हमने तीसरे वर्ष के लिए लगभग 40 से 50 पुस्तकें तैयार कर ली हैं।


मातृभाषा में आसानी से समझाई गई है मुश्किल इंजीनियरिंग की पढ़ाई

प्रोफेसर सीताराम ने आगे कहा कि ये पाठ्य पुस्तकें आधुनिक तरीके से तैयार की गई हैं ताकि छात्र अपनी मातृभाषा में आसानी से इन्हें समझ सकें। हर अध्याय में उद्देश्य, परिणाम आधारित शिक्षण तत्व और समस्या समाधान अभ्यास शामिल हैं। इससे पाठ्य सामग्री अधिक व्यवस्थित और लक्ष्य आधारित बनती है। अनुवाद प्रक्रिया को तेज करने के लिए एआईसीटीई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल कर रहा है। सीताराम ने बताया कि उनका डीप लर्निंग मॉडल यानी गहन शिक्षण मॉडल एक पुस्तक को लगभग 10 मिनट में 80 फीसदी की सटीकता के साथ अनुवाद कर सकता है। इसके बाद विशेषज्ञ उसे पढ़कर सुधार करते हैं। भारत के संविधान में 22 मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं, लेकिन अभी यह योजना सिर्फ 12 प्रमुख भाषाओं तक सीमित है क्योंकि बजट की कमी है।


ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्रों को होगी आसानी

सीताराम ने यह भी साफ कर दिया किया कि छात्रों के लिए क्षेत्रीय भाषा में पढ़ना अनिवार्य नहीं है। यह केवल एक विकल्प है, खासकर उन छात्रों के लिए जो अपनी मातृभाषा में पढ़ना ज्यादा सहज महसूस करते हैं। मसलन ग्रामीण क्षेत्रों के कई छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करने में अधिक सहजता से महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई छात्रों को अंग्रेजी समझने में परेशानी होती है। इससे उनके लिए विषय समझना और मुश्किल हो जाता है। मातृभाषा में पढ़ने से वे विषय को बेहतर तरीके समझ पाएंगे।


सरकार ने योजना को कारगर बनाने के लिए कस ली है कमर

प्रोफेसर सीताराम ने क्षेत्रीय भाषा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों को नौकरी मिलने में मुश्किल होने की बात मानते हुए कहा कि यह एक चुनौती है, जिससे पार पाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मॉडल को कारगर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए सरकार को जागरूकता अभियान चलाने होंगे और उद्योगों को ऐसे छात्रों को मौका देने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। उन्होंने बताया कि कनाडा और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में छात्र फ्रेंच या जर्मन जैसी भाषाओं में उच्च शिक्षा ले सकते हैं, तो भारत में भी यह संभव होना ही चाहिए। सीताराम का मानना है कि यह कोशिश ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छात्रों को सशक्त बनाएगी और इंजीनियरिंग शिक्षा को और अधिक समावेशी और सुलभ बनाएगी।

Sunday, March 16, 2025

छात्रों की तर्ज पर देश भर के प्रोफेसर भी एक साल तक इंडस्ट्री में करेंगे फेलोशिप, इंजीनियरिंग कॉलेजों के 45 वर्ष की आयु तक वाले असिस्टेंट, एसोसिएट और प्रोफेसर को मिलेगा मौका, वेतन के अलावा एक लाख रुपये प्रति माह मिलेगी फेलोशिप

छात्रों की तर्ज पर देश भर के प्रोफेसर भी एक साल तक इंडस्ट्री में करेंगे फेलोशिप,  इंजीनियरिंग कॉलेजों के 45 वर्ष की आयु तक वाले असिस्टेंट, एसोसिएट और प्रोफेसर को मिलेगा मौका

वेतन के अलावा एक लाख रुपये प्रति माह मिलेगी फेलोशिप

नए जमाने के रोजगार के लिहाज से युवाओं को तैयार करने से पहले शिक्षकों को है तैयार करना


नई दिल्ली। पहली बार छात्रों की तर्ज पर प्रोफेसर भी इंडस्ट्री में जाकर एक साल की फेलोशिप करेंगे। केंद्र सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रोफेसर को इंडस्ट्री में जाकर फेलोशिप करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विजिटर यानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पिछले दिनों इंडस्ट्री की जरूरतों और उभरते क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करने से पहले, प्रोफेसर को तैयार करना का निर्देश दिया है। इसमें 45 आयु वर्ग के अस्सिटेंट, एसोसिएट और प्रोफेसर को फेलोशिप को मौका मिलेगा।


अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के उपाध्यक्ष प्रोफेसर अभय जेरे ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से देशभर के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों के 45 आयु वर्ग तक के प्रोफेसर इस फेलोशिप योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे। उससे पहले उन्हें इस योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।

फेलोशिप योजना का मकसद, नए जमाने के रोजगार के लिहाज से युवाओं को तैयार करने से पहले शिक्षकों को तैयार करना है। शिक्षक इंडस्ट्री में जाकर उनके काम को समझेंगे, ताकि उन्हें पता लगे कि उनकी जरूरत क्या है।


वेतन के अलावा एक लाख रुपये प्रति माह मिलेगी फेलोशिप

इंडस्ट्री में जाकर एक साल तक फेलोशिप करने वाले प्रोफेसर को उनका वेतन तो मिलेगा ही। इसके अलावा हर महीने उनको एक लाख रुपये फेलोशिप के भी अतिरिक्त मिलेंगे। इसका मकसद, अधिक से अधिक प्रोफेसर को इंडस्ट्री से जोड़ना है। इस दौरान इंडस्ट्री उन्हें अपनी जरूरतों के आधार पर तैयार करने की ट्रेनिंग देगी। वे आगे जाकर छात्रों को तैयार करेंगे।

Wednesday, January 1, 2025

यूजी-पीजी में अलग-अलग विषय तो भी बन सकेंगे तकनीकी कॉलेज में शिक्षक

यूजी-पीजी में अलग-अलग विषय तो भी बन सकेंगे तकनीकी कॉलेज में शिक्षक

एआईसीटीई रेग्यूलेशन-डिग्री 2019 में संशोधन की तैयारी, 

असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए एमटेक तो एसोसिएट और प्रोफेसर बनने को पीएचडी अनिवार्य


नई दिल्ली। अब यूजी और पीजी में अलग-अलग ब्रांच (विषय) में पढ़ाई करने वाले छात्र भी तकनीकी कॉलेजों में शिक्षक बन सकेंगे। वह दोनों में से किसी भी ब्रांच का चयन कर सकते हैं। मसलन, यदि आपने बीटेक कंप्यूटर साइंस और एमटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग में की होगी, तो कंप्यूटर साइंस या मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के लिए शिक्षक पद के योग्य होंगे। 


अभी तक शिक्षक बनने के लिए बीटेक और एमटेक दोनों में एक ही ब्रांच या विषय की पढ़ाई अनिवार्य थी। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए प्रमोशन का आधार सिर्फ रिसर्च पेपर नहीं होगा। इसमें लचीलापन लाते हुए अब अकेडमिक, रिसर्च पेपर व इनोवेशन और छात्रों का 360 फीडबैक को भी शामिल किया जाएगा। 


सूत्रों के मुताबिक, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) तकनीकी कॉलेजों में एआईसीटीई रेग्यूलेशन (डिग्री) 2019 में संशोधन कर रहा है। पुराना नियम एक जनवरी 2016 से लागू हुआ था। उसकी जगह तकनीकी कॉलेजों के लिए अब एआईसीटीई रेग्यूलेशन (डिग्री) अगस्त 2024 आ रहा है। इसमें मुख्य तौर पर शिक्षकों की भर्ती, और प्रमोशन के नियमों में बदलाव होना है। इसका लाभ एआईसीटीई के मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर समेत अन्य तकनीकी कॉलेजों को होगा।


प्रमोशन में तीन श्रेणियों का आधार बनेंगे 100 अंक

अभी तक असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए रिसर्च पेपर मुख्य आधार होता था। लेकिन नए नियमों में अकेडमिक, रिसर्च पेपर व इनोवेशन और छात्रों का 360 फीडबैक मुख्य होगा। इसमें छात्रों के फीडबैक के 30 अंक, एसीआर के 10 अंक, डिपार्टमेंट एक्टिविटी के 30 अंक और इंस्टीट्यूशन एक्टिविटी के 30 अंक रहेंगे। प्रमोशन में रिसर्च इनोवेशन, रिसर्च फंडिंग, क्वालिटी पब्लिकेशन, पढ़ाना, स्टार्टअप व इनोवेशन प्रोजेक्ट, पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी मूल्यांकन होगा।


सेवानिवृत्ति की आयु 70 साल का फैसला राज्य करेंगे

तकनीकी कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल से बढ़ाकर 70 साल करने की भी सिफारिश है। लेकिन एआईसीटीई इस फैसले का अधिकार राज्य सरकारों को देगा। वे चाहें तो रिटायरमेंट की आयु 70 कर सकते हैं।


राज्य अपने 10 फीसदी शिक्षकों की उच्च शिक्षा की क्वालिफिकेशन अपग्रेड कराएं

नए नियमों में विभिन्न राज्यों के 10 फीसदी शिक्षकों की क्वालिफिकेशन अपग्रेड करने का प्रावधान है। इसमें एआईसीटीई विभिन्न राज्य सरकारों को प्रस्ताव बनाकर देगा। इसमें उसके शिक्षकों की एमटेक व पीएचडी की पढ़ाई पूरी करवाई जाएगी। इसका सारा खर्चा एआईसीटीई देगा। इसके तहत एमटेक उम्मीदवार को 9000 रुपये और पीएचडी के लिए 15 हजार रुपये प्रति महीने का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इन शिक्षकों की एमटेक और पीएचडी की पढ़ाई आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी, एनआईटी परिसर में होगी।


डीन, प्रिंसिपल, डायरेक्टर को पढ़ाने के दो घंटे कम

नए नियमों में डीन, प्रिंसिपल और डायरेक्टर या किसी भी प्रशासनिक पद पर तैनात अधिकारी के पढ़ाने के हर हफ्ते के घंटों में दो घंटे कम किए गए हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर को हफ्ते में 16 घंटे, एसोसिएट प्रोफेसर को 14, प्रोफेसर, सीनियर, एचएजी प्रोफेसर को 12 तो डायरेक्टर व प्रिंसिपल को चार घंटे की पढ़ाई या लैब वर्क शामिल है।


घटती मांग वाली ब्रांच के शिक्षक होंगे एडवांस कोर्स में अपग्रेड

दुनियाभर में नौकरियों में लगातार बदलाव से सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रिोनिक्स इजीनियरिंग में भी छात्रों की संख्या लगातार घट रही है।

एआईसीटीई के पास ऐसे करीब डेढ़ से दो लाख शिक्षक हैं। ब्रांच बंद होने से उनकी नौकरी पर संकट आ रहा है। इसलिए ऐसे शिक्षकों को रोजगार के उभरते क्षेत्रों में एआईसीटीई अपने खर्चे पर छह महीने का पीजी एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड टेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग, 3 डी प्रिंटिंग में करवा रहा है। ताकि वे इन उभरते क्षेत्रों में निपुण होकर कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में अपना भविष्य बना सकें।

एआईसीटीई ने आईआईटी और एनआईटी में 21 सेंटर बनाए हैं। यहां 30 से 50 शिक्षकों पर प्रति सेंटर 20 लाख का खर्च होगा।

Thursday, September 5, 2024

पीएम श्री स्कूलों में रोपे जाएंगे नवाचार के बीज, देशभर के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों, प्रधानाचार्यों को विशेष प्रशिक्षण

पीएम श्री स्कूलों में रोपे जाएंगे नवाचार के बीज, देशभर के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों, प्रधानाचार्यों को विशेष प्रशिक्षण 

• AICTE देगा इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण


नई दिल्ली : देश की नई पीढ़ी में इनोवेशन के बीज अब स्कूली स्तर पर ही रोपे जाएंगे। इसकी शुरुआत देशभर के पीएम- श्री (पीएम स्कूल फार राइजिंग इंडिया) से होगी। फिलहाल, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने इस दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत पीएम श्री स्कीम में चयनित देशभर के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों, प्रधानाचार्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही छात्रों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगी।


एआइसीटीई ने पीएम-श्री स्कूलों को नवाचार और स्किल से जोड़ने के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। इसके तहत वह देशभर में इसे लेकर चार से 19 सितंबर के बीच दस केंद्रों पर प्रशिक्षण अभियान चलाएगी। यह अभियान तीन चरणों में चलेगा। 

पहला चरण 4 से 5 सितंबर तक बेंगलुरु, चंडीगढ़, देहरादून और गांधीनगर में आयोजित होगा। दूसरा चरण 11-12 सितंबर को गुवाहाटी, हैदराबाद, जमशेदपुर, पटना और बद्दी (हिमाचल प्रदेश) में होगा। वहीं, अंतिम चरण 18-19 सितंबर को विजयवाड़ा में होगा। पीएम श्री स्कीम के तहत अभी देशभर के 2320 माध्यमिक और 2487 उच्चतर माध्यमिक स्कूलों का चयन होना है।