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Tuesday, December 2, 2025

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक, बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक,  बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

01 दिसम्बर 2025
 लखनऊः विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान में तैनात कई बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) की मौत के बाद पूरे प्रदेश में शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। संगठनों का कहना है कि शिक्षकों का मूल कार्य बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन प्रशासन उन्हें जबरन निर्वाचन संबंधी कठिन और दबाव भरे कामों में लगा रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कई शिक्षकों को पहली बार यह जिम्मेदारी मिली है। तकनीकी दिक्कतों, जनसहयोग की कमी और लक्ष्य पूरा न होने पर दिए जा रहे दंडात्मक निर्देशों के कारण वे भारी तनाव में हैं।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि मौजूदा हालात शिक्षक समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर रहे हैं। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। संगठन ने मांग की है कि मृत शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिजन को सरकारी नौकरी, माता पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा और बच्चों की निश्शुल्क शिक्षा दी जाए। 10 दिसंबर से परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं और उसके बाद निपुण आकलन होना है। ऐसे में विद्यालयों में स्टाफ की कमी से परीक्षाएं प्रभावित होंगी। इसलिए सभी शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से तुरंत मुक्त किया जाए।



शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग, शिक्षक संगठनों ने बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

कहा- स्कूलों में प्रभावित हो रही पढ़ाई, बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

दिवंगत बीएलओ के परिजनों को नौकरी और 50 लाख मुआवजा देने की मांग

27 नवंबर 2025
लखनऊ। शिक्षक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि काम के दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे शिक्षकों में भी भय व्याप्त है। संगठनों ने सीएम से शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग की है। साथ ही काम का तनावमुक्त माहौल बनाने की मांग उठाई है।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व महामंत्री उमाशंकर सिंह ने सीएम को पत्र भेजकर यह मांग उठाई है। इसमें उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी लगने से परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम में भी शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाने पर स्पष्ट रोक है। परिषदीय स्कूलों में 10 दिसंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं ऐसे में इस समय बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने बीएलओ पर अधिकारियों द्वारा दबाव बनाने का आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने मांग की दिवंगत बीएलओ के परिजनों को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया जाए।

साथ ही एसआईआर के काम का समय बढ़े और बीएलओ के सहयोग के लिए दो अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। अनिल ने कहा, जिन अधिकारियों दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हुए हैं उसकी जांच कराके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

Friday, December 13, 2024

नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब क्रिकेट अंपायरिंग का मिला नया जिम्मा

नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब क्रिकेट अंपायरिंग का मिला नया जिम्मा


सरकारी नौकरी में सुपरमैन के नाम से मशहूर हो चुके सूबे के बेसिक शिक्षकों को अब नया टास्क मिलने वाला है। हर फन में माहिर माने जाने वाले शिक्षकों से अब क्रिकेट मैच में अंपायरिंग भी कराने की तैयारी है। 


रुहेलखंड इलाके के एक बड़े जिले में इसका बाकायदा फरमान भी जारी हो चुका है। एसएसपी साहब के इस फरमान का पालन कराने का जिम्मा बीएसए को दिया गया है। फरमान में नौ सहायक शिक्षकों को इस काम के लिए पुलिस लाइन में आमद करानी है। 


पहले से ही पोलियो अभियान से लेकर चुनाव तक ड्यूटी के बोझ से दबे शिक्षकों में इस फरमान से खलबली मची है। अब भला पुलिस का आदेश नकार किसे क्लीन बोल्ड होना है।


Wednesday, December 11, 2024

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश
 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका से चुनाव संबंधित कार्य लिए जाने के रामपुर के एसडीएम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने शिक्षिका का वेतन रोकने के आदेश पर भी रोक लगा दी है और उसे नियमित वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है। सहारनपुर की संयमी शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया।


याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची को एसडीम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी रामपुर मनिहारान ने चुनाव संबंधी विविध कार्यों में लगाया था जिसकी वजह से याची द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। वह छात्रों को पढ़ाने का काम नहीं कर पा रही थी। बाद में एसडीएम ने 29 अक्टूबर 2024 के आदेश से याची का वेतन रोक दिया गया।


अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा सुनीता शर्मा एडवोकेट की जनहित याचिका पर पारित फैसले का हवाला दिया। इस निर्णय में खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। खंडपीठ ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा है कि बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है, यह उनके मौलिक अधिकार में शामिल है तथा अनिवार्य शिक्षा अधिनियम की धारा 27 में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं लिया जा सकता है। शिक्षकों से सिर्फ 10 वर्ष में होने वाली जनगणना, आपदा राहत और सामान्य निर्वाचन के समय ही सेवा ली जा सकती है। इसके अलावा उनसे कोई अन्य ड्यूटी लेना अवैधानिक है। खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों का कार्य सिर्फ छात्रों को पढ़ाना है।

Thursday, December 5, 2024

शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का लगातार बढ़ता बोझ, डाटा फीडिंग के बोझ तले दबते जा रहे शिक्षक, अब अपार आईडी की फीडिंग में बर्बाद हो रहा पढ़ाई का समय

शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का लगातार बढ़ता बोझ, डाटा फीडिंग के बोझ तले दबते जा रहे शिक्षक, अब अपार आईडी की फीडिंग में बर्बाद हो रहा पढ़ाई का समय
 

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक इन दिनों पढ़ाई छोड़कर अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट अकादमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनाने में व्यस्त हैं। शिक्षकों को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसमें छात्रों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फीड करना शामिल है। इससे उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी, यानी बच्चों को पढ़ाना, बुरी तरह प्रभावित हो रही है।  


"हमें पढ़ाई के समय इस तरह के प्रशासनिक काम में उलझाया जा रहा है। शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हम डेटा एंट्री ऑपरेटर बन गए हैं," एक शिक्षक ने नाराजगी जताई।  


गैर-शैक्षणिक कार्यों और योजनाओं से पढ़ाई हो रही बाधित  

यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है, बल्कि शिक्षकों में मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की कई योजनाएं, जैसे मिड-डे मील की रिपोर्टिंग और अब अपार आईडी फीडिंग, सीधे कक्षाओं के समय को कम कर रही हैं।  

"अगर हमारा समय डेटा फीडिंग में ही लग जाएगा, तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन? पढ़ाई के समय में इस तरह की गतिविधियां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं," एक अन्य शिक्षक ने बताया।  


प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग स्टाफ क्यों नहीं? 

शिक्षकों का सवाल है कि सरकार इस तरह के कार्यों के लिए अलग से स्टाफ क्यों नहीं नियुक्त करती। क्या शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाना है, या हर योजना का कार्यान्वयन भी उनकी जिम्मेदारी है? शिक्षकों को जबरन इस तरह के कार्यों में शामिल करने से न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी गिर रही है।  

"ऐसे कार्यों के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य तकनीकी स्टाफ नियुक्त होना चाहिए। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए होते हैं, न कि प्रशासनिक कार्यों के लिए," शिक्षकों के संगठन ने अपनी नाराजगी जाहिर की।  


बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर

बच्चों की शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। पढ़ाई का समय लगातार घट रहा है, जिससे बच्चों का शैक्षणिक स्तर प्रभावित हो रहा है। कई शिक्षक शिकायत करते हैं कि वे न तो पूरे समय पढ़ा पा रहे हैं, और न ही बच्चों की पढ़ाई में सुधार के लिए कोई नई योजना लागू कर पा रहे हैं।  

"हम बच्चों के साथ समय बिताने के बजाय कागजों और कंप्यूटर पर डेटा भरने में व्यस्त हैं। यह बच्चों के साथ अन्याय है," एक शिक्षक ने बताया।  


क्या हो सकता है समाधान? 

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम करना जरूरी है।  

1. डेटा फीडिंग और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से स्टाफ नियुक्त किया जाए।  
2. शिक्षकों को केवल शिक्षण और शैक्षणिक विकास के कार्यों तक सीमित रखा जाए।  
3. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शैक्षणिक गुणवत्ता में कोई कमी न हो।  


"बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों को उनके मूल कार्य से अलग करना न केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए हानिकारक है, बल्कि यह पूरी शिक्षा नीति पर सवाल खड़ा करता है।"  

सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाने की जरूरत है, ताकि शिक्षकों की ऊर्जा बच्चों की पढ़ाई में लगे और शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।

Wednesday, January 17, 2024

यूपी : अब सामूहिक विवाह समारोह में दुल्हनों को सजाने हेतु लगा दी महिला शिक्षिकाओं की ड्यूटी, इस जिले का वायरल आदेश बना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय

यूपी : अब सामूहिक विवाह समारोह में दुल्हनों को सजाने हेतु लगा दी महिला शिक्षिकाओं की ड्यूटी, इस जिले का वायरल आदेश बना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय


उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में तैनात महिला शिक्षकों की ड्यूटी अब दुल्हन सजाने के लिए लगाई गई। इसके लिए आदेश भी जारी किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक 20 पूर्व माध्यमिक विद्यालय की 20 महिला शिक्षकों की ड्यूटी दुल्हन सजाने के लिए लगाई गई है। बांदा जिले का आदेश यह खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्य विकास अधिकारी की ओर से जारी इस आदेश के मुताबिक 20 महिला शिक्षकों को 801 दुल्हन को सजाने का कार्य करना होगा। आदेश में सभी महिला शिक्षकों के नाम और उन विद्यालयों का भी जिक्र किया गया है जहां पर यह महिला शिक्षक तैनात है।


 पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना यह आदेश

 पूरे उत्तर प्रदेश में यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों के यकीन नहीं हो रहा कि ऐसा भी हो सकता है। बताया जा रहा है कि कुछ जिलों में इससे पहले भी शिक्षकों की ड्यूटी इस कार्य के लिए लगाई गई है।

समाज कल्याण विभाग की पहल पर लगाई गई ड्यूटी
 दरअसल समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत यह ड्यूटी लगाई गई है। क्योंकि 801 दुल्हन को सजाने का कार्य करना है यह काम महिलाओं द्वारा ही किया जाना है। इसलिए सरकारी शिक्षिकाओं का चयन किया गया है।

 बांदा जिले में होनी थी 801 बेटियों की शादी
 मुख्य विकास अधिकारी के आदेश के मुताबिक मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 108 बेटियों की शादी होनी है। मुख्य विकास अधिकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार भी शामिल होंगे।




Thursday, March 30, 2023

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना अब नहीं होगा आसान, पीएम-श्री स्कूलों से होगी शुरुआत, सभी राज्यों से यह गारंटी लेने में जुटा है शिक्षा मंत्रालय

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना अब नहीं होगा आसान, पीएम-श्री स्कूलों से होगी शुरुआत, सभी राज्यों से यह गारंटी लेने में जुटा है शिक्षा मंत्रालय 

शिक्षा मंत्रालय की यह पहल यदि रंग लाई तो शिक्षकों से अब पढ़ाने के अतिरिक्त दूसरा कोई काम नहीं लिया जा सकेगा। फिलहाल इसे लेकर चिंतित मंत्रालय इन दिनों नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी राज्यों से यह गारंटी लेने में जुटा है।


नई दिल्ली। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने में जुटे शिक्षा मंत्रालय की यह पहल यदि रंग लाई तो शिक्षकों से अब पढ़ाने के अतिरिक्त दूसरा कोई काम नहीं लिया जा सकेगा। फिलहाल स्कूलों में शिक्षकों के पास पढ़ाई के अतिरिक्त इन दिनों प्राथमिकता का जो काम है, वह बच्चों को समय पर मिड-डे मील मुहैया कराने का है।


एक शिक्षक के भरोसे चल रहे देश में ढाई लाख स्कूल

ऐसे में उनका हर दिन फोकस उसे ही तैयार कराने और बच्चों को खिलाने पर रहता है। फिलहाल इसे लेकर चिंतित मंत्रालय इन दिनों नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी राज्यों से यह गारंटी लेने में जुटा है, जिनमें शिक्षकों को किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य में न लगाया जाए। स्कूली शिक्षा की यह स्थिति देश के करीब डेढ़ लाख स्कूलों में और भी चिंताजनक है, जो सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे है। ऐसे में वह पढ़ाई कराए या फिर मिड-डे मील तैयार करवाएं।


सभी राज्यों से स्कूलों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरणों में

 मंत्रालय ने यह पहल उस समय तेज की है, जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत वह प्रत्येक ब्लॉक के दो स्कूलों को पीएम- श्री स्कीम के तहत अपग्रेड करने जा रही है। इसके लिए सभी राज्यों से स्कूलों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। हालांकि इस स्कीम का लाभ सिर्फ उन्हीं राज्यों को मिलेगा,जो अपने यहां पूरी तरह से नीति के अमल की गारंटी देंगे।


राज्यों को इसे लेकर शिक्षा मंत्रालय के साथ एक अनुबंध भी करना है। फिलहाल अब तक दिल्ली, बिहार व झारखंड सहित सात राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों के साथ इसे लेकर अनुबंध कर लिया है। खास बात यह है कि राज्यों में पीएम श्री स्कूलों को खोलने के पीछे भी मंत्रालय का जो मकसद है, उसमें एक ऐसा मॉडल स्कूल तैयार करना है, जो कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर पूरी तरह से खरा उतर सके।


शिक्षकों को गैर- शैक्षणिक कार्यों से दूर रखे जाने की होगी कोशिश

इसके शिक्षकों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में मंत्रालय यह सुनिश्चित करने में जुटा है, कि शिक्षकों को पढ़ाई के अतिरिक्त किसी काम में न लगाया जाए। नीति में भी शिक्षकों को मिड-डे मील सहित दूसरे सभी गैर-शैक्षणिक कार्यों से अलग रखने की सिफारिश की गई है।


बावजूद इसके शिक्षकों को अभी मिड-डे मील के साथ वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण, जनगणना सहित राज्यों की ओर से चलाए जाने वाले किसी भी प्रमुख कार्यक्रम में लगा दिया जाता है। शिक्षकों की सेवा शर्तें राज्यों के अधीन होने से वह इसे मानने के लिए बाध्य भी रहते है।