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Wednesday, May 28, 2025

निजी विश्वविद्यालयों में नहीं चलेगी मानकों की अनदेखी, निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने गठित की पांच विशेष कमेटियां

निजी विश्वविद्यालयों में नहीं चलेगी मानकों की अनदेखी, निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने गठित की पांच विशेष कमेटियां

खामियां मिलने पर विश्वविद्यालय के खिलाफ होगी कार्रवाई

47 निजी विश्वविद्यालयों में हैं 2.66 लाख विद्यार्थी


 लखनऊः प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की लगातार बढ़ रही संख्या और उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों के हितों के दृष्टिगत उच्च शिक्षा विभाग ने इन विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए पांच विशेष कमेटियां गठित की हैं। हर कमेटी में पांच सदस्य हैं। इन कमेटियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। कमेटियां निजी विश्वविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगी। रिपोर्ट में खामियां मिलने पर संबंधित विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में मान्यता रद करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।


प्रदेश में इस समय कुल 47 निजी विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 2.66 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से कई विश्वविद्यालय बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ पर शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाएं और नियामक मानकों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। इसी को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल के निर्देश पर गठित की गईं यह निगरानी कमेटियां सभी निजी विश्वविद्यालयों में जाकर देखेंगी कि वहां शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है, फैकल्टी योग्य है या नहीं, छात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।


कमेटियां यह भी देखेंगी कि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा उप्र निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 का पालन किया जा रहा है या नहीं। इस अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए न्यूनतम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन अनिवार्य है। साथ ही विश्वविद्यालय संचालकों को पांच करोड़ रुपये की एफडी भी जमा करनी होती है, जिसका ब्याज ही वे उपयोग में ला सकते हैं। कमेटियां जिन बिंदुओं पर निगरानी करेगी, उनमें शैक्षणिक गतिविधियां, नियमित कक्षाएं, कोर्स की पूर्णता, फैकल्टी की नियुक्ति, छात्र शिकायत निवारण प्रणाली, फीस संरचना और बुनियादी ढांचे की स्थिति प्रमुख हैं।


इस साल के अंत तक हो जाएंगे 50 निजी विश्वविद्यालय

प्रदेश में इस वर्ष के अंत तक तीन और निजी विश्वविद्यालय खुलने की संभावना है, जिससे इनकी संख्या 47 से बढ़कर 50 तक पहुंच जाएगी। प्रदेश में सबसे ज्यादा 18 निजी विश्वविद्यालय मेरठ मंडल में हैं। आगरा मंडल में आठ निजी विश्वविद्यालय हैं।


यदि किसी निजी विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया या नियमों का उल्लंघन हुआ, तो विभाग कठोर कार्रवाई करेगा। छात्रों या उनके अभिभावक की शिकायतों की कमेटियां जांच करेंगी। –डा. दिनेश कुमार राजपूत, अपर सचिव, उच्च शिक्षा परिषद


Wednesday, October 2, 2024

पिछड़े जिलों में निजी विवि खोलने पर मिलेगी छूट, कैबिनेट ने यूपी उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को दी हरी झंडी

पिछड़े जिलों में निजी विवि खोलने पर मिलेगी छूट, कैबिनेट ने यूपी उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को दी हरी झंडी


लखनऊ। प्रदेश में असेवित व आकांक्षी (पिछड़े) जिलों में निजी विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने स्टांप ड्यूटी में 50 फीसदी तक और विदेशी विश्वविद्यालयों को कैंपस खोलने पर स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी तक की छूट देगी। कैबिनेट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति 2024 को हरी झंडी दे दी है।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश में 40 असेवित जिलों व पांच आकांक्षी जिलों में कोई विवि नहीं है। अगर यहां निजी विवि खुलते हैं तो उन्हें विभिन्न प्रकार की छूट दी जाएगी।


विदेशी विवि को स्टांप ड्यूटी में मिलेगी 100% छूट

इसके तहत 50 करोड़ रुपये तक के निवेश पर स्टांप ड्यूटी में 50 फीसदी, 51 से 150 करोड़ के निवेश पर 30% और 151 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर 20 फीसदी छूट दी जाएगी। वहीं इनको कैपिटल सब्सिडी में भी क्रमशः 15, 16 व 17% की छूट दी जाएगी। इस तरह प्रदेश में कहीं भी विदेशी विवि या उसका कैंपस खोलने पर कुल निवेश का 20 फीसदी और 100 फीसदी स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाएगी। 

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में शीर्ष 50 रैंक पाने वाले विश्वविद्यालयों को भी प्रदेश में कहीं भी कैंपस खोलने के लिए कुल निवेश का 20 फीसदी और 100 फीसदी स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि इस नीति से उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि होगी। वहीं, युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर भी बढ़ेंगे।


केडी विवि मथुरा को आशय पत्र जारी करने की सहमति

लखनऊ। निजी विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने के क्रम में मथुरा में केडी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए आशय पत्र जारी करने को प्रदेश कैबिनेट ने सहमति दे दी है। यह विवि मथुरा के अकबरपुर, छाता में 50.54 एकड़ भूमि पर बनेगा। अब इसके निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया को गति मिलेगी। 


मेरठ में विद्या विवि को संचालन अधिकार पत्र जारी

 लखनऊ। कैबिनेट ने मेरठ में निजी क्षेत्र के अंतर्गत विद्या विवि को संचालन अधिकार पत्र जारी करने पर सहमति दे दी है। यह विश्वविद्यालय बनकर तैयार है। अब यहां पर प्रवेश व पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू होगी। 

Wednesday, June 7, 2023

प्रदेश में छह नये निजी विश्वविद्यालयों को मिली मंजूरी

प्रदेश में छह नये निजी विश्वविद्यालयों को मिली मंजूरी


कैबिनेट ने मंगलवार को छह नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को अपनी मंजूरी दे दी। आज हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के तहत प्रदेश में निजी क्षेत्र के मथुरा में केएम (कृष्ण मोहन) विश्वविद्यालय, फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ में मेजर एसडी सिंह यूनिवर्सिटी, आगरा में अग्रवन हेरीटेज यूनिवर्सिटी, गाजियाबाद में एसडीजीआई ग्लोबल विश्वविद्यालय तथा मेरठ में विद्या विश्वविद्यालय एवं महावीर यूनिवर्सिटी की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई।


प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के प्रभावी होने के बाद से कैबिनेट का यह तीसरा ऐसा निर्णय है जिसमें प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की स्थपना को मंजूरी प्रदान की गई है। इससे पूर्व के कैबिनेट में तीन निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी प्रदान करते हुए इसका आशय पत्र निर्गत किए जाने की संस्तुति को भी हरी झंडी प्रदान की गई थी।

Sunday, January 2, 2022

निजी विश्वविद्यालय अब दूसरे जिलों में भी खोल सकेंगे कैंपस, यूपी सरकार ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

निजी विश्वविद्यालय खोल सकेंगे कैंपस, यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी

निजी विश्वविद्यालय अब दूसरे जिलों में भी खोल सकेंगे कैंपस, यूपी सरकार ने प्रस्ताव को दी मंजूरी



उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी विवि (स्थापना) नियमावली-2021 को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब निजी विश्वविद्यालय प्रदेश के दूसरे जिलों में भी कैंपस खोल सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में संचालित निजी विश्वविद्यालय अब दूसरे जिले में भी अपने कैंपस खोल सकेंगे। प्रदेश सरकार ने उप्र. निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली 2021 को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूर दी है।

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि निजी विश्वविद्यालयों की ओर से दूसरे जिलों ऑफ कैंपस संचालित करने की मंजूरी देने का प्रस्ताव दिया था। इसी को देखते हुए विश्वविद्यालय संचालन के पांच वर्ष की अवधि के बाद ही ऑफ कैंपस स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।

ऑफ कैंपस के लिए शहरी क्षेत्र में 20 व ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ भूमि आवश्यक होगी। कैंपस का संचालन पुरानी शर्तों के अनुसार किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इससे निजी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी साथ ही जिन जिलों में विश्वविद्यालय नहीं है, वहां के विद्यार्थियों को जिलों में अब विश्वविद्यालय के कैंपस में पढ़ने का अवसर मिलेगा।


कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली 2021 और उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 10 सन् 1973) में संशोधन को यूपी कैबिनेट ने भी मंजूरी दी।


 इस संशोधन के जरिए निजी विश्वविद्यालयों को आफ कैम्पस खोलने की अनुमति मिल सकेगी। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (अनुदेशक और फोरमैन अनुदेशक) सेवा नियमावली 2021 को भी मंजूरी दी।


इस कदम से नई शिक्षा नीति-2020 की अपेक्षा के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थाओं की संख्या बढ़ेगी। शासन ने कुछ दिन पहले ही राज्य विश्वविद्यालयों को संघटक कालेज खोलने की अनुमति दी थी, अब उसी तर्ज पर यह केंद्र भी संचालित होंगे।


उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-12 वर्ष 2019) में तीन अहम संशोधन किए गए हैं। प्रथम संशोधन में निजी विश्वविद्यालयों को आफ-कैंपस केंद्र स्थापित करने की अनुमति मिली है, दूसरे में महाविद्यालयों के नाम मानक के अनुसार भूमि उपलब्ध होने पर निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की अनुमति प्रदान किया जाना है, जबकि तीसरे संशोधन में निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के अधीन स्थापित या निगमित विश्वविद्यालयों की प्रथम परिनियमावलियां कार्यपरिषद की ओर से बनाया जाना शामिल है।


नई शिक्षा नीति-2020 में हर जिले में या उसके निकट न्यूनतम एक उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, नामांकन दर में वृद्धि करना व उच्च शिक्षण संस्थाओं को संस्थागत स्वायत्तता देने के बिंदु शामिल हैं। संशोधित अधिनियम में व्यवस्था है कि महाविद्यालयों के नाम मानक के अनुसार भूमि उपलब्ध होने पर निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की अनुमति मिलेगी।


महाविद्यालय के नाम भूमि को विश्वविद्यालय की प्रायोजक संस्था की माना जाएगा। निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के अधीन स्थापित अथवा निगमित विश्वविद्यालयों की प्रथम परिनियमावलियां कार्यपरिषद की ओर से बनाई जाएंगी। विश्वविद्यालय की ओर से बनायी गयी प्रथम परिनियमावलियों को राज्य सरकार की ओर से अनुमोदन की जरूरत नहीं होगी, विश्वविद्यालयों को परिनियम बनाने में स्वायत्तता मिलेगी।