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Monday, June 15, 2026

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala


दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।


नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।


महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।

एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।

पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।

याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।

Saturday, March 8, 2025

नए सत्र से 10 फीसदी तक अधिक चुकानी होगी फीस, प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने की तैयारी

नए सत्र से 10 फीसदी तक अधिक चुकानी होगी फीस, प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने की तैयारी


लखनऊ। आपके बच्चे भी निजी स्कूलों में पढ़ते हैं तो नए सत्र 2025-26 से अधिक फीस चुकाने के लिए तैयार रहें। स्कूल प्रबंधकों ने 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की तैयारी की है। कुछ कॉशन मनी व अन्य सुविधाओं के नाम पर भी फीस में इजाफा करेंगे। ऐसे में फीस में 10 फीसदी और अन्य सुविधाओं के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क में पांच प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके पीछे स्कूल प्रबंधकों का तर्क है कि हर साल शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन में इजाफा किया जाता है। ऐसे में फीस बढ़ाना उनकी मजबूरी है।


 नहीं वापस की फीस : कोरोनाकाल में फीस में 15 प्रतिशत की छूट थी। स्कूलों ने यह फीस अभिभावकों को नहीं वापस की। कुछ विद्यालयों ने तो इसे अगली फीस में जोड़ लिया, लेकिन जिन्होंने अपने बच्चे को अगले साल उस विद्यालय में नहीं पढ़ाया उन्हें पैसे वापस नहीं मिले।


स्कूलों में अभी ली जा रही फीस

■ लामार्टिनियर बॉयज स्कूल : प्रवेश शुल्क 95,000 रुपये, वार्षिक फीस 99,550 रुपये

■ जीडी गोयनका स्कूल शहीद पथ : प्रवेश शुल्क 55 हजार रुपये, वार्षिक फीस 1,55,600 रुपये

■ सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल गोमतीनगर : प्रवेश शल्क 35 हजार रुपये, वार्षिक फीस 1,11,180 रुपये

■ सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल शहीद पथ : प्रवेश शुल्क 60 हजार रुपये, वार्षिक फीस 1,40,000 रुपये

■ स्टडी हाल : प्रवेश शुल्क 32,500 रुपये, वार्षिक फीस 93,600 रुपये

■ केआर मंगलम स्कूल : प्रवेश शुल्क 50 हजार रुपये, वार्षिक फीस 1,23,000 रुपये

■ मिलेनियम स्कूल : प्रवेश शुल्क 48 हजार रुपये, वार्षिक फीस 1,02,240

■ दिल्ली पब्लिक स्कूल गोमतीनगर विस्तार : प्रवेश शुल्क 30 हजार रुपये, वार्षिक फीस 89,880 रुपये

■ सिटी मॉटेसरी स्कूल : प्रवेश शुल्क 17 हजार रुपये, वार्षिक फीस 53,640


यूनिफॉर्म भी बदलने की तैयारी

शहर के आधा दर्जन स्कूल इस सत्र से यूनिफॉर्म भी बदलने की तैयारी में हैं। इससे पहले मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मंडल के सभी डीएम को पत्र जारी कर नियम का हवाला दिया है। नियम के मुताबिक कोई भी स्कूल प्रबंधक पांच सत्र बीतने के पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकता है। हालांकि, अभिभावक संघ का कहना है कि निजी स्कूल मानेंगे नहीं। दुकानदारों से सांठगांठ चलती रहेगी।


फीस रेगुलेशन एक्ट के तहत फीस में इजाफा होना है। इस पर दो से तीन दिनों में निर्णय होगा। मानक से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ~ अनिल अग्रवाल अध्यक्ष, अनएडेड स्कूल एसोसिएशन

Saturday, June 22, 2024

राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण कसेगा स्कूलों पर शिकंजा, नियमावली बनाए जाने का काम हुआ शुरू

राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण कसेगा स्कूलों पर शिकंजा,  नियमावली बनाए जाने का काम हुआ शुरू

निजी व सरकारी स्कूलों की बनाई जाएगी जोड़ी

लखनऊ : स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण गठित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। अब इसकी नियमावली तैयार की जा रही है और जल्द इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। प्राधिकरण के गठित होने के बाद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी। वह मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे और विभिन्न मानकों को सख्त किया जाएगा। यह स्वायत्त संस्था होगी और इसके अध्यक्ष व सदस्यों के चयन के लिए योग्यता तय की जाएगी।


माध्यमिक शिक्षा विभाग को  इसकी नियमावली तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्राइमरी और  माध्यमिक स्कूल अभी बेसिक शिक्षा परिषद व माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से तैयार किए गए नियमों के अनुसार चलाए जा रहे हैं। ऐसे में नियमों को मौजूदा समय की जरूरत के अनुसार अपडेट किया जाएगा और उन्हें सख्ती से लागू कराया जाएगा। 


प्राधिकरण सभी स्कूलों का मूल्यांकन भी करेगा, जिसके आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से स्कूल स्तर पर गुणवत्ता मूल्यांकन एवं प्रत्यायन के लिए मदद ली जाएगी। राज्य सरकार निजी स्कूलों पर ज्यादा से ज्यादा शिकंजा कसने पर जोर दे रही है। प्राधिकरण के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा। गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ-साथ अभिभावकों की शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा। 


अभी डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसकी सुनवाई करती है, लेकिन यह इतना प्रभावी नहीं है। सरकारी व निजी स्कूलों का पेयर (जोड़ी) बनाई जाएगी और यह विद्यालय एक-दूसरे के संसाधनों का प्रयोग कर सकेंगे। निजी स्कूलों में बड़े खेल के मैदान नहीं हैं तो वह पास के सरकारी स्कूल के खेल मैदान का प्रयोग कर सकेंगे।

Monday, April 8, 2024

निजी स्कूल बसों और वैन के जरिए भी लूट का शिकार हो रहे बच्चे और अभिभावक, डीजल / पेट्रोल के दाम घटने के बाद भी एक साल में 20 से 30 फीसदी की हुई बढ़ोत्तरी

निजी स्कूल बसों और वैन के जरिए भी लूट का शिकार हो रहे बच्चे और अभिभावक, डीजल / पेट्रोल के दाम घटने के बाद भी एक साल में 20 से 30 फीसदी की हुई बढ़ोत्तरी 


प्रयागराज : नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होते ही निजी स्कूल संचालकों ने फीस के साथ ही स्कूल बसों का भी किराया बढ़ा दिया है। 20-30 फीसदी किराया बढ़ाने से अभिभावकों को अब एक किमी परिधि के लिए प्रतिदिन 56 रुपये की दर से किराया देना होगा।

निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाने के साथ ही ट्रांसपोर्ट फीस के नाम पर 20 से 30 फीसदी का इजाफा कर दिया है। तीन किमी तक परिधि में स्कूल बसों का किराया 1800 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

बीते सत्र में बस के किराये के रूप में जिन अभिभावकों को करीब 2600 से 3000 रुपये देने पड़ते थे, नए सत्र में उन्हें अब करीब 2800 से 3500 रुपये देने रड़ेंगे। अभिभावकों का कहना है के बस के किराये में हर बार बस किराया प्रतिवर्ष बढ़ाया जाता है। अभिभावक मजबूर होकर किराया चुकाते हैं। निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की कोई पहल नहीं की जाती है। जिला प्रशासन को ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना चाहिए।


डग्गामार बसें फिर भी बढ़ा दिया किराया

जिले में कई स्कूलों में डग्गामार बसे संचालित हो रही हैं। बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर बसें दौड़ती रहती हैं। हादसा होने के बाद एआरटीओ से लेकर शिक्षा विभाग जागता है। पिछले वर्ष एआरटीओ ने बिना फिटनेस के चलने वाली 319 स्कूल बसों का चालान किया था।



कॉपी-किताबों के नाम पर स्कूलों में लूट का खेल, अभिभावकों का आरोप, निजी स्कूलों और दुकानदारों की है मिलीभगत 

नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत होने के साथ ही फीस से लेकर कॉपी-किताबों के नाम पर लूट का खेल शुरू हो गया है। कई स्कूलों की ओर से किताबों की सूची तक दुकानदार ही दे रहे हैं। कॉपी-किताबों के इस सेट में कई ऐसी भी किताबें हैं, जो न कभी खोली जानी हैं और ना ही उनका पाठ्यक्रम से कोई सीधा नाता है। मनमानी की इस चक्की में अभिभावकों के पिसने के बावजूद अफसर चुप हैं। शिकायत के बाद न तो इस पर अंकुश लग सका है ना ही कोई कार्रवाई हो सकी है।

बाजारों से सरकारी किताबें गायब
कान्वेंट स्कूल प्रबंधनों के स्तर से किताबों का चयन किए जाने के कारण सरकारी किताबें बाजार से नया सत्र शुरू होने से पहले ही गायब हो गई हैं। इसकी वजह यह भी है कि यह किताबें दुकानदारों को प्रिंट रेट पर मिल रही हैं। इन किताबों को बेचने में दुकानदारों को कोई फायदा भी नहीं हैं। इसलिए सरकारी किताबें बाजारों में नहीं दिखाई पड़ रही हैं। अगर सरकारी किताबें चला दी जाए तो अभिभावकों का बोझ कुछ हद तक कम हो जाएगा।

स्कूल में वसूली जाती है अलग-अलग फीस
इलाके में स्थित सभी कॉन्वेंट स्कूलों में अलग-अलग फीस वसूल की जाती है। यहां कोई भी ऐसा कान्वेंट स्कूल नहीं है जो माह में एक हजार से कम फीस वसूल करता हो। कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां प्रति बच्चे 2100 से 3200 रुपये तक फीस प्रतिमाह वसूल की जाती है। यहां तक कि देहात में कान्वेंट स्कूल का बोर्ड लगाकर 1200 से 1500 रुपये प्रति बच्चे फीस वसूल की जा रही है।



फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी के आगे लाचार शिक्षा विभाग के अफसर

नये सिरे से प्रवेश के नाम पर हजारों रुपये वसूले

स्कूल में कक्षा बदली और ले लिया प्रवेश शुल्क

प्रयागराज । शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों की मनमानी के एक से बढ़कर एक मामले सामने आने लगे हैं। मनमानी फीसवृद्धि करने के साथ ही स्कूलों ने वसूली का नया तरीका अपनाया है। प्रतिष्ठित सेंट एंथोनी गर्ल्स कॉलेज में कक्षा पांच पास करने के बाद छठवीं में दाखिला लेने पर बच्चों से फिर से प्रवेश शुल्क (एडमिशन फीस) लिया जा रहा है।



किताबों के दाम में 30 प्रतिशत की वृद्धि से अभिभावकों की कमर टेढ़ी, नए सत्र में शिक्षण सामग्री महंगी होने से आफत

यूकेजी की किताबों का सेट सात हजार के पार


प्रयागराज। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ ही किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का खेल शुरू हो गया है। इस बार 30 प्रतिशत तक किताबों के दाम में वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं कॉपी-किताबों के बने बनाए सेट ही दिए जा रहे हैं। बजट न होने पर एक किताब बाद में खरीदने का आग्रह करने पर अभिभावकों को वापस कर दिया जा रहा है। इससे जहां बच्चों की पढ़ाई महंगी हो गई है, वहीं बढ़ते आर्थिक बोझ से अभिभावक परेशान हो उठे हैं।

निजी स्कूल प्रबंधनों की मनमानी से इस बार कॉपी-किताब खरीदने में ही पसीने छूट जा रहे हैं। अभिभावक हर साल किताबें बदले जाने से भी परेशान हैं। जो कॉपी 20 रुपये में मिल रही थी, अब उसके दाम बढ़कर 30 रुपये हो गए हैं। स्कूलों में दाखिले के साथ बच्चों के लिए स्टेशनरी, बैग, बोतल खरीदने में जेब ढीली हो रही है। किताब खरीदने आईं कटरा की शिल्पी चौरसिया बताती हैं कि सीबीएसई सहित अन्य बोडों से संबंधित किताबों के प्रकाशकों ने 30 फीसदी तक दाम बढ़ा दिए हैं।

वहीं, किताबों के साथ स्टेशनरी के दामों में भी काफी इजाफा हुआ है। पिछले साल नर्सरी से तीसरी कक्षा तक की किताब कॉपियों का सेट ढाई से तीन हजार रुपये में मिलता था, इस साल 4000-5000 रुपये में मिल रहा है। स्कूलों ने कॉपी, किताब और स्टेशनरी खरीदने के लिए दुकानें पहले से तय कर रखी हैं। इसलिए यहां जो कीमतें बताई जाती हैं, मजबूरन अदा करना पड़ता है। 


अल्लापुर की श्वेता साहू के तीन बच्चे अलग-अलग जगह निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। जिसमें एक बेटा पांचवीं, दूसरा 10वीं और बेटी भी 10वीं में है। वह अपने बच्चों के लिए कॉपी- किताब खरीदने गईं तो दाम सुनकर ही हैरान रह गईं। उन्हें तीनों बच्चों की किताबों के लिए 15,500 रुपये चुकाने पड़े। जबकि, पिछले साल उन्होंने 12,500 रुपये में ही किताबें खरीदी थीं।

इसी तरह कटरा की रहने वाली आरती प्रकाश ने इस बार एक निजी स्कूल में अपनी बेटी का दाखिला यूकेजी में कराया है। जब कॉपी-किताब के सेट का दाम पूछने आई तो सन्न रह गई। यूकेजी का सेट सात हजार रुपये में है। कहा कि निजी प्रकाशकों की ओर से नई डिजाइन, बेहतर प्रिंट, और क्वालिटी के नाम पर अभिभावकों पर बोझ डाल दिया जाता है।

वहीं, अभिभावक पंकज बताते हैं कि स्कूल प्रबंधन से दाम कम करने की बात कहने पर सीधे वापस कर दिया जा रहा है। किताबों के सेट में से एक किताब भी कम कराई गई, तब भी अभिभावकों से रुखा व्यवहार किया जा रहा है। किताबें नहीं दी जा रही हैं



निजी विद्यालयों ने बढ़ाई फीस, अभिभावक परेशान, नए सत्र से महंगी हुई शिक्षा,  प्रवेश शुल्क में भी बढ़ोतरी, कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के दाम भी बढ़े


लखनऊ। अप्रैल में नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों पर बढ़ी फीस का बोझ पड़ गया है। उत्तर प्रदेश अनएडेड स्कूल एसोसिएशन ने पांच से सात फीसदी फीस बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि एडमिशन फीस और कई अन्य मदों की वजह से काफी विद्यालयों में यह फीस बढ़ोतरी 10 से 12 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे अभिभावक परेशान हैं।


इंदिरानगर निवासी अर्चना ने बताया कि - मेरी दो बेटियां हैं, नए सत्र से एक बेटी पांचवीं जबकि दूसरी सातवीं कक्षा में प्रवेश करेगी। फीस बढ़ने से नए सिरे से बजट तैयार करना होगा। बच्चों को पढ़ाना जरूरी है इसलिए अन्य मदों में कटौती करनी होगी। उनके अनुसार, स्कूल की ओर से बताया गया कि इस बार 200 रुपये प्रतिमाह फीस बढ़ाई गई है। पिछले साल मासिक फीस 2850 रुपये थी जो नए सत्र से 3050 हो गई है। साउथ सिटी निवासी अतुल ने बताया कि मेरे बेटे आदित्य का एडमिशन नर्सरी कक्षा में होना है। बताया, स्कूल की ओर से जानकारी दी गई कि प्रवेश शुल्क 20 हजार रुपये है। 

इसके बाद हर महीने अच्छी-खासी अलग से फीस देनी है। कुल फीस के साथ ही निजी विद्यालयों में करीब 12 फीसदी एडमिशन फीस बढ़ाई गई है। इसमें कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स भी शामिल है।

फीस ही नहीं बच्चों की किताबें, ड्रेस व वाहन शुल्क भी बढ़ाया गया है। सत्र 2024-25 के लिए शहर के नामचीन विद्यालयों में नर्सरी और यूकेजी कक्षा में बच्चों का प्रवेश शुल्क 20 हजार रुपये तक है।

निजी विद्यालयों में शिक्षा व अन्य व्यवस्थाओं की फीस दर अलग-अलग हैं। इसके बावजूद कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म की कीमत लगभग हर जगह काफी अधिक है।

नियमानुसार पांच से सात फीसदी की होती है बढ़ोतरी

महंगाई के आधार पर ही फीस की बढ़ती है। फीस की गाइडलाइन सभी निजी विद्यालयों की वेबसाइट पर अपडेट की गई हैं। प्रत्येक साल नियमतः करीब पांच से सात फीसदी की फीस शुल्क बढ़ाया जाता है। स्कूल मे बेहतर शिक्षा का माहौल हो, इसके लिए विद्यार्थियों को बेहतर व्यवस्थाएं दी जाती हैं।
अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश अनएडेड स्कूल एसोसिएशन



शर्ट, पैंट, फ्रॉक, टी शर्ट, लोअर व जूते में 50 से 200 रुपये बढ़ाए, टाई, बेल्ट, मोजे और हेयर बैंड में 10 से 50 रुपये का इजाफा

निजी स्कूलों की यूनिफार्म खरीदना हुआ अब और महंगा,  दाम 5 से 20 फीसदी तक बढ़ गए 


लखनऊ । नये सत्र के शुरू होते ही निजी स्कूलों के बच्चों की किताबों व कापियों के साथ ही यूनिफार्म के दामों में पांच से 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

स्कूलों के नामित दुकानदारों ने प्रति शर्ट, पैंट, फ्राक, टी शर्ट, लोअर व जूते में 50 से 200 रुपये तक बढ़ा दिये हैं। वहीं टाई, बेल्ट, मोजे और हेयर बैंड में 10 से 50 रुपये रुपये का इजाफा किया। अभिभावकों की जेब पर इस साल प्रति बच्चे 500 से 1000 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कई स्कूलों ने यूनिफार्म व जूते में बदलाव कर दिया है। शहर में सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी बोर्ड और यूपी बोर्ड के करीब एक हजार निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों की गर्मी और सर्दी की अलग-अलग यूनिफार्म चलती है। इन स्कूलों में हाउस ड्रेस और स्पोर्ट ड्रेस अलग से चलती है।


नर्सरी के बच्चे की यूनिफार्म 1500 से 2000 रुपये में: अलीगंज स्थित एक निजी स्कूल में प्ले वे से नर्सरी कक्षा के बच्चे की यूनिफार्म (गर्मी) 1000 से 1500 रुपये की है। इस स्कूल की नर्सरी के बच्चे यूनिफार्म में शर्ट की कीमत 250, पैंट 280, बेल्ट 160, टाई 60, जूता 500 का है। साथ ही हाउस ड्रेस में टी शर्ट और लोवर 500 रुपये का जूता 300 रुपये का है। कक्षा जबकि कक्षा तीन के बच्चे की शर्ट की कीमत 280, पैंट 300, बेल्ट 170, टाई 80, जूता 650 का है। हाउस ड्रेस 600 से 700की और जूता 300 से 500 रुपये का है। वहीं कक्षा छह के बच्चे की शर्ट 300, पैंट 350, बेल्ट 200, टाई 100, जूता 500 से 800 रुपये, हाउस ड्रेस 800 व जूता 500 से 600 रुपये का। वहीं कक्षा नौ से 12 वीं के बच्चे का शर्ट 350 से 500 रुपये, पैंट 400 से 700 रुपये, बेल्ट 200 से 300 रुपये, टाई 150 रुपये तक, हाउस ड्रेस 1000 से 1500 व जूते की कीमत 1000 तक है। वहीं गोमतीनगर और अंसल गोल्स सिटी के कई नामी स्कूलों में नर्सरी के बच्चों की गर्मी की यूनिफार्म दो से तीन हजार रुपये के बीच है। वहीं सर्दी की यूनीफार्म तीन से पांच हजार रुपये की बीच है।



महंगाई: नए सत्र में निजी प्रकाशकों ने किताब-कॉपियों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ाये

प्रिंटिंग सामग्री हुई महंगी, मुनाफे के लिए हर बार बदल देते हैं किताब


लखनऊ। नए सत्र में निजी प्रकाशकों ने किताब-कॉपियों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ा दिये हैं। विषयवार प्रति किताब के दाम में 20 से 100 रुपये तक इजाफा हुआ है। कापियों व रजिस्ट्रर में पांच से 12 रुपये तक दाम बढ़ाये हैं। बाजार में निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा महंगी हैं। 


एनसीईआरटी में 10वीं और 12वीं की किताबों का सेट 1500 के भीतर मिल रहा है। जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें छह से आठ हजार के बीच में मिल रही हैं। निजी स्कूलों में कक्षा प्ले वे से 12वीं के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रति बच्चा अभिभावकों की जेब पर 600 से 2000 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।


सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी बोर्ड और यूपी बोर्ड के निजी स्कूलों ने नया सत्र शुरू कर दिया है। यूपी बोर्ड के वित्तविहीन स्कूल और सीबीएसई व सीआईएससीई स्कूलों के प्रबंधक एनसीईआरटी के किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों से बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। यह किताबें स्कूलों द्वारा नामित पुस्तक विक्रेताओं के यहां मिलती हैं। स्कूलों से किताब-कॉपियों की सूची के साथ नामित बुक डिपो के पर्चे भी दे रहे हैं। बाजार में किसी अन्य दुकान पर यह किताबें नहीं मिलतीं।



प्रिंटिंग सामग्री हुई महंगी, मुनाफे के लिए हर बार बदल देते हैं किताब

यह स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें खुद तय करते हैं। मुनाफे के लिए हर बार किताबें बदल दी जाती हैं। सीआईएससीई बोर्ड में नर्सरी में किताब और कापियों का सेट 3500 रुपये में दे रहे हैं। जबकि बीते साल इसकी कीमत तीन हजार के भीतर थी। कक्षा तीन में किताब कॉपियों का सेट 6000 में मिल रहा है। बीते सत्र में यह सेट 5000 हजार था। वहीं सीबीएसई में कक्षा चार का सेट 6500 में दे रहे हैं। वहीं 10 वीं कक्षा मेंसेट 10 हजार और 12 वीं का सेट 12 हजार तक है पिछले साल यह सेट 10 हजार के भीतर था।


सरकार किताबों के दाम तय करे

सरकार को चाहिए कि किताबों के दाम तय करे। एनसीईआरटी की किताबें सभी बोर्डों के लिए लागू कराये। स्कूलों के प्रबंधक मुनाफे के लिए हर बार किताबें बदल देते हैं। यह खुद प्रकाशकों के नाम तय करने के एवज में मोटा कमीशन लेते हैं। इसका असर अभिभावकों पर पड़ता है। इस पर रोक लगनी चाहिए। प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष, अभिभावक कल्याण संघ

Saturday, January 27, 2024

CAG ने दिल्ली के 1700 निजी स्कूलों के खाते तलबकर मांगा 5 साल का हिसाब, जानिए क्यों?

CAG ने दिल्ली के 1700 निजी स्कूलों के खाते तलबकर मांगा 5 साल का हिसाब, जानिए क्यों? 



नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने 1772 गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को ऑडिट नोटिस जारी किया है। स्कूलों से 14 दिन के भीतर पिछले पांच साल का हिसाब मांगा गया है।


कार्यबाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की पीठ ने इस मामले में पूर्व में दिल्ली सरकार द्वारा इन स्कूलों के खातों की जांच न करने पर नाराजगी जाहिर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर अब कैग द्वारा स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। 


नोटिस में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि 31 मार्च 2023 तक का हिसाब पेश करें। कैग को स्कूलों के ऑडिट की विस्तृत रिपोर्ट 11 मार्च को उच्च न्यायालय के समक्ष पेश करनी है। कैग ने अपने नोटिस में कहा कि स्कूल इस नोटिस को गंभीरता से लें।


जनहित याचिका पर नोटिस: गैर सरकारी संगठन जनसेवा वेलफेयर सोसायटी जनहित याचिका दायर कर कहा था कि निजी स्कूलों को तब तक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जब तक उनके खातों का ऑडिट कैग और शिक्षा निदेशालय द्वारा नहीं हो जाता। निजी स्कूलों का ऑडिट 2010 में हुआ था। उस समय भी 25 निजी स्कूलों का ऑडिट किया गया था।


कैग ने सात तरह की जानकारी मांगी

1. आगामी वर्ष की प्रातियों और भुगतान का बजट अनुमान ।
2. आय-व्यय का ब्योरा, पिछले वर्ष की बेलेंस शीट, आंतरिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट
3. 30 अप्रैल 2023 तक छात्रों के नामांकन की रिपोर्ट 
4. रियायते छात्रवृत्ति आदि का पैटर्न
5. स्कूल कर्मधारियों की तनख्वाह और अन्य खर्च का थोरा
6. फीस, जुर्माना, फड की सूची
7. वेतन के सवितरण की तारीखों को दर्शाने वाला विवरण।



Friday, November 3, 2023

चार सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद ही निजी स्कूलों पर हो कार्रवाई, प्राइवेट स्कूलों के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर हुई बैठक

चार सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद ही निजी स्कूलों पर हो कार्रवाई, प्राइवेट स्कूलों के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर हुई बैठक



लखनऊ : स्कूलों में सुरक्षित परिवेश के लिए तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक महानिदेशक, स्कूल शिक्षा कार्यालय के सभागार में हुई। एसओपी बनाने के लिए पिछले दिनों गठित की गई दस सदस्यीय कमेटी में शामिल निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने माडल ड्राफ्ट तैयार करने पर बैठक में चर्चा की।


निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा विभाग को मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि स्कूल में किसी भी तरह की घटना होने पर चार सदस्यीय कमेटी की प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआइआर दर्ज कराई जाए। सीधे प्रधानाचार्य, शिक्षक, कर्मचारी व प्रबंधतंत्र के खिलाफ मुकदमा न दर्ज किया जाए। 


अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी स्कूलों की ओर से सौंपे गए ड्राफ्ट में इस चार सदस्यीय कमेटी में जिलाधिकारी का प्रतिनिधि, एक अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक या बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ एक निजी स्कूल का प्रतिनिधि भी शामिल हो। 


यदि इस कमेटी की जांच में स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाए तो तत्काल कार्रवाई हो । यदि स्कूल पर आरोप सही न पाए जाएं तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई हो । स्कूलों में मोबाइल के प्रयोग प्रतिबंध रहे। विद्यार्थी स्कूल में मोबाइल लेकर न आएं व पढ़ाई के दौरान शिक्षकों का मोबाइल भी जमा रहे ।