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Tuesday, October 8, 2024

8 साल से लटकी प्राइमरी शिक्षकों की पदोन्नति जल्द, पदोन्नति के लिए नई नीति करीब करीब तय

8 साल से लटकी प्राइमरी शिक्षकों की पदोन्नति जल्द, पदोन्नति के लिए नई नीति करीब करीब तय



लखनऊ। प्रदेश के प्राइमरी शिक्षकों की पदोन्नति के लिए नई नीति करीब करीब तय हो चुकी है। बेसिक शिक्षा विभाग इसे शीघ्र ही अन्तिम रूप देकर शासन को भेजने की तैयारी में है। शासन की मुहर लगते ही इसे जारी किया जाएगा। इससे करीब दो लाख शिक्षकों को लाभ होगा। यह पदोन्नति हर तीन साल पर होगी।


नई नीति में प्राइमरी में पदोन्नति पाने वाले शिक्षक उसी स्कूल में प्रधानाध्यापक भी बन सकेंगे, जहां वे तैनात थे। अभी सहायक अध्यापक पद से पदोन्नति के बाद उच्च प्राइमरी में सहायक अध्यापक या दूसरे प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति का प्रावधान है। 


नई नीति प्रभावी होने के बाद स्कूल शिक्षा महानिदेशालय द्वारा बनाए गए मानकों को पूरा करने वाले उसी स्कूल में प्रधानाध्यापक बन सकेंगे। शिक्षकों की पदोन्नति भी हर तीन साल पर होगी। अभी शिक्षकों को पांच साल के बाद प्रोन्नति मिलती है। हालांकि वर्ष 2016 के बाद से विभाग में शिक्षकों की कोई पदोन्नति नहीं हुई है। तीन साल पर पदोन्नति की नीति-2015 से पूर्व भी रही है, जिसे बाद में सरकार ने पांच साल में तब्दील कर दिया था।


सरकार ने शिक्षकों की ज्येष्ठता को जल्द से जल्द अन्तिम रूप भी निर्देश दिए हैं ताकि नई नीति होते ही पदोन्नति की प्रक्रिया अनुसार शुरू की जा सके। शिक्षकों की ज्येष्ठता सूची का लंबे समय से लटका पड़ा है। कर बेसिक शिक्षा अधिकारियों लापरवाही के कारण ज्येष्ठता सूची को तैयार करने के लिए जिलों से सूची प्रेषित किये जाने की तिथियां 10 से अधिक बार बढ़ाई गईं। कारण अलग-अलग अलग-अलग जिलों ने अलग-अलग तरीके से ज्येष्ठता सूची तैयार की, जिससे तमाम तरह की विसंगतियां उत्पन्न हुईं। मसलन कुछ जिलों में यह चयन गुणांक के आधार पर तैयार कर दिया गया तो कुछ जिलों में जन्मतिथि के आधार पर सूची तैयार की गई।


आठ साल से लगाए हैं प्रोन्नति की आस

नेशनल काउन्सिल फॉर टीचर एजुकेशन के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी शिक्षक को पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। प्रदेश में प्राइमरी के 75 फीसदी से अधिक सहायक अध्यापक टीईटी पास करने के बाद भी बीते आठ सालों से पदोन्नति की आस लगाए बैठे हैं। कुछ शिक्षकों का जब धैर्य जवाब दे गया तो वे हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने जब जवाब तलब किया तो आनन-फानन में जिलों से जानकारियां मंगाई जाने लगीं। हाईकोर्ट को बता दिया गया कि जिलों से सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। जल्द ही इस बारे में कोर्ट को अवगत करा दिया जाएगा।

Wednesday, October 19, 2022

स्कूलों में जमेगा गिल्ली-डंडा का रंग - उड़ेंगे कागज के विमान, खिलौने और खेलों को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला

स्कूलों में जमेगा गिल्ली-डंडा का रंग - उड़ेंगे कागज के विमान, खिलौने और खेलों को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला



खिलौने और खेलों से बच्चों में बौद्धिक विकास की वैज्ञानिक प्रामाणिकता सिद्ध होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने अब इसे स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का फैसला लिया है। इसके तहत न सिर्फ पारंपरिक खेल और खिलौनों से उन्हें जोड़ने की पहल की गई है, बल्कि ऐसे खिलौने और खेलों की मैपिंग भी की गई है जो बच्चों को स्कूली स्तर पर विज्ञान और गणित जैसे विषयों में मदद भी करेंगे। पारंपरिक खेलों में गिल्ली-डंडा, कंचा, लट्टू व कागज के विमान, गुड्डा-गुड़िया और गाड़ी आदि शामिल हैं। लेकिन राज्यों के हिसाब यह अलग-अलग हैं। इन पारंपरिक खेलों से बच्चों में एकाग्रता, संख्या ज्ञान, कौशल आदि का विकास हो सकता है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार देश में अब बच्चों को स्कूली स्तर पर खिलौना और खेल आधारित शिक्षा दी जाएगी। इसमें आइआइटी गांधीनगर की मदद ली गई है। यह सझाव भी दिया है कि स्कलों के  किस स्तर पर या किसी आयु वर्ग के बच्चे को कौन से खिलौनों और खेलों से जोड़ा जाए। पूरे पाठ्यक्रम में तीन साल से दसवीं तक के बच्चों के लिए खेल और खिलौने का सुझाव है। पीएम श्री स्कूलों से इसकी शुरुआत होगी।


एनसीईआरटी की ओर से तैयार किए गए खिलौना आधारित इस पाठयक्रम को सभी राज्यों को भेज दिया गया है। सभी से अपनी जरूरत और उपलब्धता के हिसाब से खिलौनों को चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। इस पूरी पहल का मकसद स्कूली शिक्षा को रुचिकर बनाने सहित बच्चों का बौद्धिक विकास करना है।


इस बीच मंत्रालय ने राज्यों और स्कूलों को सिर्फ ऐसे खिलौनों को शामिल करने का सुझाव दिया है जो पूरी तरह से देश में बने हैं। साथ ही भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) से प्रमाणित हों। गौरतलब है कि इस पहल को भारतीय खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि देश में भारतीय खिलौनों का एक बड़ा बाजार भी तैयार होगा। मौजूदा समय  खिलौनों के बाजार में चीन का काफी दखल है।



विज्ञान व गणित में बच्चा कमजोर है तो इन खिलौनों से जोड़ें 

स्कूली स्तर यदि किसी का बच्चा गणित और विज्ञान जैसे विषयों में कमजोर है, या फिर उसका रुझान नहीं है, तो इसके लिए आइआइटी गांधीनगर ने कुछ ऐसे खिलौनों की मैपिंग भी की है जिसके जरिये उनमें उन विषयों से जुड़ी रुचि को बढ़ाया जा सकता है। या फिर वह उनकी मदद से उन विषयों में दक्ष हो सकते हैं। इनमें गणित के क्यूब, नंबर स्ट्रिप, फ्लेक्स 2डी, 3 डी, टावर पजल और विज्ञान के लिए अर्जुन का लक्ष्य आदि जैसे इनोवेटिव खिलौने सुझाए हैं। इसी तरह इतिहास के लिए हड़प्पा कालीन खिलौनों से जोड़ने आदि जैसे सुझाव शामिल हैं। इसके साथ ही बच्चों में अंकों की समझ को विकसित करने के लिए भी खिलौने सुझाए गए हैं।

Saturday, August 22, 2020

नई शिक्षा नीति : एक विवि में नहीं होंगे 300 से अधिक सम्बद्ध कॉलेज

नई शिक्षा नीति :  एक विवि में नहीं होंगे 300 से अधिक सम्बद्ध कॉलेज

देश के 17 विश्वविद्यालयों से 500 या इससे अधिक कॉलेज संबद्ध


 
नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने की मुहिम अब और तेज होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर काम भी शुरू कर दिया है। संबद्ध कॉलेजों को इस मुहिम में फिलहाल सबसे ऊपर रखा गया है। जिन्हें एक चरणबद्ध तरीके से स्वायत्तता दी जाएगी। पहले चरण में विश्वविद्यालयों से कॉलेजों की संबद्धता को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा। इसके तहत अब विश्वविद्यालय से सिर्फ तीन सौ कॉलेज ही संबद्ध हो सकेंगे। मौजूदा समय में बड़ी संख्या में ऐसे भी विश्वविद्यालय हैं जिनसे करीब सात सौ कॉलेज संबद्ध हैं। देश में फिलहाल 40 हजार से ज्यादा कॉलेज हैं।


यूजीसी ने यह पहल नई शिक्षा नीति में विश्वविद्यालयों से कॉलेजों की संबद्धता पर उठाए गए सवालों के बाद की है। नीति में अगले 15 साल में संबद्धता की पूरी प्रणाली को खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि इसे एक चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत विश्वविद्यालयों को जबावदेही देने का भी प्रस्ताव किया गया है ताकि वे संबद्ध कॉलेजों को अकादमिक, प्रशासनिक, पाठयक्रम संबंधी मामलों में न्यूनतम मापदंड, वित्तीय मजबूती, शिक्षण और मूल्यांकन आदि मापदंड पर तैयार कर सकें। कॉलेजों के लिए इन मापदंडों को पूरा करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि स्वायत्तता के लिए ये आवश्यक हैं।


देश के 17 विश्वविद्यालयों से 500 या इससे अधिक कॉलेज संबद्ध

● छत्रपति साहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय से 1,276 कॉलेज संबद्ध थे और करीब 15 लाख छात्र अध्ययनरत
● राजस्थान विश्वविद्यालय से 792 कॉलेज संबद्ध थे
● गुलबर्गा विश्वविद्यालय में कुल 345 कॉलेज थे, जिसे दो भागों में बांटा गया। एक हिस्से में 200 और दूसरे में 145 कॉलेज संबद्ध रहे।
● अगले 15 साल में चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह खत्म होगी संबद्धता प्रणाली
● संबद्ध कॉलेजों को स्वायत्तता मानदंडों के अनुरूप तैयार करेंगे विवि


नैक रैंकिंग पर मिलती है स्वायत्तता

मौजूदा समय में किसी भी संस्थान को स्वायत्तता उसकी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की रैकिंग के आधार पर प्रदान की जाती है। यह रैंकिंग संस्थान की अकादमिक, प्रशासनिक, वित्तीय मजबूती और शिक्षण आदि क्षमता के आकलन के आधार पर प्रदान की जाती है।


स्वायत्तता का अर्थ कुछ भी करने की आजादी नहीं

स्वायत्तता को लेकर तेज हुई मुहिम में मंत्रलय ने यह भी साफ किया है कि इस स्वायत्तता का मतलब कुछ भी करने की स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि नियमों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। मंत्रलय के मुताबिक, पिछले कुछ साल में करीब आठ हजार कॉलेजों को स्वायत्तता दी गई है। बाकी कॉलेजों को भी स्वायत्तता देने के लिए वह चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे।


संबद्धता से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता संस्थान

विश्वविद्यालय से तीन सौ कॉलेजों को ही संबद्ध करने के पीछे उद्देश्य यह है कि विश्वविद्यालय इतने कॉलेजों को सक्षम बनाने में आसानी से मार्गदर्शन कर सकेंगे। मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि संबद्धता से कोई भी संस्थान अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता और न ही गुणवत्ता पर उसका कोई ध्यान रहता है।


यूजीसी के मुताबिक देश में विश्वविद्यालयों की संख्या

● राज्य विश्वविद्यालय - 412
● डीम्ड विश्वविद्यालय - 124
● केंद्रीय विश्वविद्यालय - 53
● निजी विश्वविद्यालय - 361
● कुल विश्वविद्यालय - 950
● देश में कुल कॉलेज -39,931

Saturday, October 12, 2019

स्टार्ट अप चुनिए, मिलेगा 10 नम्बर का ग्रेस, नई स्टार्ट अप नीति 2019 तैयार, उपस्थिति में मिलेगी छूट, हर जिले के पांच स्कूलों और मंडलों के दो डिग्री कॉलेजों को मिलेगा लाभ

स्टार्ट अप चुनिए, मिलेगा 10 नम्बर का ग्रेस, नई स्टार्ट अप नीति 2019 तैयार, उपस्थिति में मिलेगी छूट, हर जिले के पांच स्कूलों और मंडलों के दो डिग्री कॉलेजों को मिलेगा लाभ।





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Saturday, August 17, 2019

नई दिल्ली : नो डिटेंशन पॉलिसी को राज्य सरकार की मंजूरी, कक्षा पांचवीं-आठवीं के बच्चे भी होंगे फेल



नई दिल्ली : नो डिटेंशन पॉलिसी को राज्य सरकार की मंजूरी, कक्षा पांचवीं-आठवीं के बच्चे भी होंगे फेल। 




Tuesday, August 13, 2019

नए लॉ कॉलेज खोलने पर तीन साल तक लगी रोक, धड़ल्ले से खुल रहे लॉ कॉलेजों पर संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया का निर्णय


नए लॉ कॉलेज खोलने पर तीन साल तक लगी रोक,  धड़ल्ले से खुल रहे लॉ कॉलेजों पर संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया का निर्णय।