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Tuesday, April 20, 2021

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव


प्रयागराज : पिछले सत्र में एक भी दिन विद्यार्थी स्कूल नहीं गए। बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की। नए सत्र पर भी कोरोना की काली छाया पड़ रही है। तमाम स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, कुछ में चल रही है। कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई दोबारा शुरू करा दी है। इन सब के बीच राहत वाली बात यह कि स्कूलों में किसी भी तरह का पाठ्यक्रम नहीं बदला है। विद्यार्थी पुरानी किताबें लेकर आगे की पढ़ाई कर सकते हैं।


स्कूल की तरफ से नई किताबों को खरीदने का भी दबाव नहीं बनाया जाएगा। कुछ स्कूलों ने तो पुस्तक बैंक भी बनाई है जिसमें वह पुरानी किताबें एकत्र कर जरूरतमंद बच्चों को दे रहे हैं। इसके लिए वह किसी भी तरह का शुल्क नहीं ले रहे। यह कदम कोरोना काल में अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।


हालांकि तमाम अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूलों की तरफ से नई किताबों को खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ स्कूल विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान यूनिफार्म पहनकर बैठने के लिए भी निर्देशित कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चे घर में हैं तो यूनिफार्म की क्या जरूरत है। कोरोना काल में अनावश्यक रूप से ड्रेस खरीदने का दबाव ठीक नहीं हैं।


सभी स्कूलों में दोबारा शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, अभिभावकों की शिकायत, स्कूल नई किताबें खरीदने के लिए बना रहे दबाव


निजी स्कूल अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। आर्थिक बोझ भी डाल रहे हैं जबकि पढ़ाई सुचारू ढंग से नहीं हो रही है। कापियों के मूल्य बढ़ने के साथ ही कुछ स्कूल नई किताब खरीदने का भी दबाव बना रहे हैं। इसके लिए खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। - विजय गुप्त, अभिभावक एकता समिति।

मेरा पुत्र सिविल लाइंस के निजी विद्यालय में पढ़ता है। पिछले सत्र में आधा पाठ्यक्रम भी नहीं पूरा कराया जा सका। नए सत्र में फीस 15 फीसद बढ़ा दी गई है। स्कूल प्रबंधन से मांग है कि कोरोना काल में फीस माफ की जाए। ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़े। - संजय द्विवेदी, अभिभावक।

इस बार भी कक्षाएं ऑनलाइन शुरू हो गई हैं। पुरानी किताबें मिलें तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। नई किताबों का कोई दबाव नहीं है। - फादर थामस कुमार, प्रधानाचार्य सेंट जोसफ इंटर कॉलेज।

पुरानी किताबें मिल जाएं तो उसे लेकर पढ़ाई करें। हां कॉपियों को जरूर लेना होगा। इस बार कॉपियां अनिवार्य रूप से जांची जाएंगी। सुझाव भी बच्चों को दिए जाएं। -डा. विनीता इसूवियस, प्रधानाचार्य जीएचएस।

पुरानी किताबें यदि बच्चों को मिल जाएं तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षक भी अध्ययन सामग्री बच्चों के वाट्सएप पर भेज रहे हैं, वेबसाइट पर भी मैटर है। -डेविड ल्यूक, प्रधानाचार्य, बीएचएस।

स्कूल में करीब 150 बच्चों ने पुरानी किताबें जमा कराई हैं। उसे जरूरतमंदों को दिया जा रहा है। अन्य विद्यार्थी भी स्कूल या अपने आसपास के बच्चों को किताबें दे सकते हैं। - अर्चना तिवारी, प्रधानाचार्य, टैगोर पब्लिक।

Monday, April 5, 2021

कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


नई दिल्ली । शिक्षा व्यवस्था किसी भी देश का भविष्य निर्धारित करती है। लेकिन जब शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम में चलाई जाने वाले किताबों पर निजी स्कूल एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने की मनमानी करते हैं तो अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। देशभर में सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबंधित हर स्कूल के अलग कोर्स और किताबें हैं।


इन स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवाई जाती है। एनसीईआरटी की किताबों का अधिकतम मूल्य अगर 50 से 150 रूपए हैं तो वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 600 रूपये तक की होती हैं।


वहीं, सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


एनसीईआरटी की किताबें उबाऊ और सामग्री की कमी

मयूर विहार फेज-1 स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबें पुराने ढर्रे पर चली आ रही है, किताबें काफी उबाऊ भी हैं और उनमें सामग्री की भी कमी है। किताब में केवल संक्षिप्त सवाल होते है, जो छात्र को प्रैक्टिस करने के लिए कम पड़ते हैं। आप यह आलेख प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।वहीं, द्वारका स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक उनके स्कूल में वो फिलहाल कुछ किताबें विदेशी प्रकाशकों की इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक निजी प्रकाशकों की किताबें 21वीं सदी के छात्रों के हिसाब से हैं।


राजेंद्र नगर स्थित सलवान पब्लिक स्कूल के एक शिक्षक के मुताबिक एनसीईआरटी की कुछ किताबें कई बार बाजार में ही उपलब्ध नहीं होती या देरी से मिलती है। वहीं, निजी प्रकाशकों की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती है इसलिए स्कूल निजी प्रकाशकों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों की निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल करने को लेकर लगभग यही तर्क है।

प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षा के लिए एनसीईआरटी बेहतर

इन सभी निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती है। इस पर निजी स्कूलों की तर्क है कि बोर्ड की परीक्षाओं में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी की किताबों से ही आते हैं।

करोल बाग स्थित दिल्ली सरकार के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य हंस राज मोदी बताते हैं कि उनके स्कूल में सभी छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती हैं। अगर किसी विषय में एनसीईआरटी की किताब नहीं है तो स्कूल छात्रों को सपोर्ट मटेरियल उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक स्कूल के सभी छात्र बोर्ड के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एनसीईआरटी का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि जितना अच्छा कान्सेप्ट (संकल्पना) एनसीईआरटी की किताबें से समझ आता है उतना शायद ही किसी निजी प्रकाशक की किताबों से आए।

स्कूलों का बंधा होता है कमीशन

दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम के मुताबिक शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को अपनी सूची में शामिल करने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल से ही दुकान का पता बताया जाता है कि कहां से निजी प्रकाशक की किताब खरीदनी है और किताब में लिखे दाम पर ही किताब खरीदनी पड़ती है। क्योंकि स्कूलों की कमीशन बंधा होता है। उनके मुताबिक किताब वितरण के जो ठेके दुकानों को दे रखे थे उसमें भी मनमर्जी चलाई जाती है, स्कूलों को जहां से कमीशन कम हुआ वहां से हटाकर दूसरी जगह आवंटित कर दिया जाता है। 

वहीं, फेसबुक, ट्वीटर पर एनसीईआरटी बनाम निजी प्रकाशकों की किताबों को लेकर मुद्दा उठा रहे शिक्षाविद और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निरंजन कुमार के मुताबिक आज सबसे ज्यादा परेशान निम्न मध्यम वर्गीय परिवार है। वो जैसे तैसे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाता हैं उस पर भी स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को खरीदने का जो दबाव बनाया है वो अभिभावकों के लिए सही नहीं है। उनके मुताबिक स्कूलों का काम सिर्फ शिक्षा देना होना चाहिए न कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करना।

एनसीईआरटी सचिव मेजर हर्ष कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रोफेसर काफी शोध के बाद छात्रों के लिए किताबें तैयार करते हैं। इन्हें तैयार करने में भी लंबा समय लगता है। एनसीईआरटी की किताबें देशभर के 22 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में चलती हैं और ये देशभर के छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। आज सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र इन्हीं किताबों से पढ़कर उत्तीर्ण होते हैं। इसका दाम बी निजी प्रकाशकों के मुकाबले बहुत कम होता है। निजी स्कूलों को इन किताबों को आठवीं तक की कक्षा में जरूर शामिल करना चाहिए।

Wednesday, March 31, 2021

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी



शहर के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मंगलवार को निजी स्कूलों के संगठन-‘अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन’ (अप्सा) की हुई वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।


एक साल बाद पहली बार ऐसा होगा जब स्कूलों में एक साथ मॉन्टेसरी से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों की पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि जूनियर कक्षाओं के लिए अभी ऑनलाइन पढ़ाई का क्रम भी समानांतर जारी रहेगा। स्कूल खोलने का निर्णय लेने के बाद स्कूलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अप्सा के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि शासन ने चार अप्रैल तक कक्षा आठ तक के विद्यालयों को बंद रखने का आदेश दिया है। इसका पालन करते हुए नए शैक्षणिक सत्र में पांच अप्रैल से सभी स्कूल खुल जाएंगे। हालांकि स्कूल अपनी सहूलियत के अनुसार एक अप्रैल से खुलेंगे तो उनमें प्रशासनिक कार्य होगा। विधिवत पढ़ाई पांच से ही प्रारंभ होगी। इस दौरान जिन स्कूलों में रिजल्ट जारी नहीं हुए हैं, वहां स्टाफ रिजल्ट तैयार करने से लेकर दाखिले की प्रकिया पूरी करेगा।


सीनियर कक्षाओं में होगी फुल स्ट्रेंथ
अनिल अग्रवाल ने बताया कि सीनियर कक्षा नौ से 12 तक में फुल स्ट्रेंथ में पढ़ाई शुरू होगी। जबकि मॉन्टेसरी से कक्षा आठ तक के आधे-आधे छात्रों को बुलाया जाएगा। वहीं जिन स्कूलों में इंफ्राट्रक्चर बढ़िया है वे फुल स्ट्रेंथ में बच्चों को बुला सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ऑनलाइन गतिविधियां भी जारी रहेंगी। एक-डेढ़ हफ्ते बाद इनमें भी सभी बच्चे एक साथ आना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि कोरोना की रोकथाम के सारे इंतजाम पूर्व की भांति ही किए जाएंगे। मास्क, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य रहेगा। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है।


मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह से
वहीं मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह और सात अप्रैल से शुरू होंगी। यहां पर गुड फ्राइडे को लेकर आयोजन व तैयारियां चल रही हैं। इसके बाद ही कुछ छह तो कुछ सात अप्रैल से खुलेंगे। कैथेड्रल, ला मार्ट, सेंट फ्रांसिस समेत अन्य मिशनरी स्कूल छह और सात अप्रैल से खुलेंगे।


टीकाकरण के लिए शासन को भेजी जाएगी सूची
अध्यक्ष ने बताया कि शिक्षकों और कर्मचारियों को कोविड टीका लगाने के लिए शासन को लिस्ट भेजी जाएगी। स्कूलों से इसका ब्यौरा मांगा गया है। शिक्षकों की सूची शासन को भेज दी जाएगी, जिनकी टीका लगाने की व्यवस्था अस्पताल में की जाएगी। टीकाकरण होने से अभिभावकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

Saturday, March 27, 2021

कोरोना की रफ्तार पकड़ने पर प्राइवेट स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन क्लास चलाने पर शुरू किया विचार, परिषदीय विद्यालयों में भी ई पाठशाला को जारी रखने का निर्देश

कोरोना की रफ्तार पकड़ने पर प्राइवेट स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन क्लास चलाने पर शुरू किया विचार, परिषदीय विद्यालयों में भी ई पाठशाला को जारी रखने का निर्देश


कोरोना बढ़ने के साथ-साथ अब स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन कक्षाएं चलाने पर विचार शुरू कर दिया है। अन एडेड स्कूल एसोसिएशन ने जहां 30 मार्च को इस मामले पर अहम बैठक बुलाई है वहीं मिशनरी स्कूलों ने जूनियर तक की कक्षाओं को ऑनलाइन ही चलाने की तैयारी की है। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भी अब फिर से ऑनलाइन घर से पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है।


कोरोना बढ़ने से स्कूल संचालक तथा बच्चों के अभिभावक दोनों चिंतित हैं। गुरुवार को सिटी मांटेसरी स्कूल के शिक्षकों के पॉजिटिव मिलने के बाद अब राजधानी के स्कूल संचालकों के साथ अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। कई अभिभावक भी ऑनलाइन क्लास की ही मांग कर रहे थे।

स्कूल संचालक जहां फिर से ऑनलाइन कक्षाएं चलाने पर विचार कर रहे हैं, वहीं सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भी इसको लेकर मंथन शुरू हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में मीटिंग भी की है। जिसमें उन्होंने घरकी पढ़ाई अभियान पर जोर दिया है। घर की पढ़ाई के लिए ई पाठशाला के साथ ही व्हाट्सएप क्लास जारी रखने का निर्देश दिया गया है। इसी के साथ महानिदेशक ने बच्चों के अभिभावकों को व्हाट्सएप क्लास से जोड़े रखने को कहा है ताकि समय पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके।


सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 20% बच्चों तक भी नहीं पहुंच पाई ऑनलाइन पढ़ाई

प्राइवेट तथा मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने कुछ हद तक ऑनलाइन पढ़ाई जरूर की है। लेकिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को कुछ नहीं मिला है। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे गरीब तबके के होते हैं। इनके पास मोबाइल, लैपटॉप और कनेक्शन उपलब्ध नहीं हो पाया। इनके परिवारीजनों ने भी इनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी 20% तक की पहुंच का दावा करते हैं। लेकिन यह आंकड़े भी सही नहीं है । ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हुई । अब अगर फिर से सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो बच्चों का अगला सत्र भी खराब होना तय है।


पांच अप्रैल से कक्षाएं शुरू करने की योजना में हो सकता है बदलाव

मिशनरी स्कूल एक से पांच अप्रैल के बीच में खुल रहे हैं। सेंट फ्रांसिस स्कूल में एक शिक्षक के पॉजिटिव आने के बाद अब स्कूलों ने फिर से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की तैयारी कर ली है। हालांकि पहले सेंट फ्रांसिस ने पांच अप्रैल से ऑफलाइन कक्षाएं चलाने की बच्चों को जानकारी दी थी। लेकिन अब इसमें बदलाव की तैयारी है। इस संबंध में अभी अभिभावकों को कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि राजधानी के लगभग सभी मिशनरी स्कूलों ने कक्षा 8 तक के बच्चों की ऑनलाइन ही कक्षाएं चलाने की तैयारी की है। ऐसे में फिर से बच्चों को ऑनलाइन क्लास लेनी पड़ सकती है।

Thursday, March 25, 2021

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील


लखनऊ : उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कोविड-19 के मद्देनजर स्कूल प्रबंधकों से इस साल भी फीस न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार का सहयोग देते हुए जैसे पिछले साल फीस नहीं बढ़ाई, उसी तरह इस साल भी करें, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उप मुख्यमंत्री बुधवार को लामार्टीनियर गल्र्स कालेज में आयोजित कोरोना योद्धाओं के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कोरोना काल के दौरान पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 23 प्रमुख लोगों को सम्मानित किया।



Wednesday, March 17, 2021

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल


लखनऊ। निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई पांच अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए स्कूलों ने तैयारी शुरू कर दी है। छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पहले की तरह चलेंगी। एक से पांच तक के बच्चों की कक्षाओं के लिए स्कूल अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। जिन स्कूलों ने एक मार्च से इनकी क्लास नहीं शुरू कीं, वे भी पांच अप्रैल से इन कक्षाओं की पढ़ाई शुरू कराने जा रहे हैं।


वर्तमान सत्र खत्म हो रहा है। अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं। इस बीच अधिकतर निजी स्कूल पांच अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। वहीं, जिन स्कूलों में अभी तक प्री-प्राइमरी की कक्षाएं नहीं शुरू हुईं, वे भी नए सत्र से बच्चे बुला रहे हैं। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्री प्राइमरी से 12वीं तक की कक्षाएं पांच अप्रैल से शुरू हो जाएंगी। एक साल बाद पूरी तरह से स्कूल खोलने की स्टाफ ने तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच सरकार का कोई नया आदेश आता है तो उसका भी पालन किया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि नए सत्र से सभी कक्षाओं का संचालन शुरू होगा। शासन के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।


सहमति पर बुलाए जाएंगे बच्चे
कई स्कूल कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति मांग रहे हैं। पॉयनियर मोंटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने बताया कि प्राइमरी बच्चों को आना है कि नहीं यह अभिभावकों पर छोड़ दिया है। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या ऋचा खन्ना ने बताया कि पांचवीं तक के बच्चों के लिए अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। कानपुर रोड स्थित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की प्रिंसिपल पूनम गौतम ने बताया कि एक अप्रैल से जूनियर व सीनियर सेक्शन की पढ़ाई शुरू होगी। प्राइमरी की पढ़ाई सहमति के आधार पर पांच अप्रैल से शुरू होगी। वहीं, दी मिलेनियम स्कूल रायबेरली रोड की प्रिंसिपल मंजुला गोस्वामी ने बताया कि ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प बंद नहीं होगा। सहमति पर ही बच्चों को बुलाया जाएगा।

अभिभावकों का विरोध
राजधानी में कोरोना के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में अभिभावकों की ओर से नए सत्र से स्कूल खोलने का विरोध शुरू हो गया है, खासकर छोटे बच्चों को बुलाने को लेकर। लखनऊ अभिभावक विचार परिषद अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एक बार फिर कोरोना पैर पसार रहा है। ऐसे में नए सत्र से स्कूल खोलने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। खासकर पांच तक के बच्च्चों के लिए। वे सरकार को प्रस्ताव भेजकर छोटे बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू न कराने की मांग करेंगे।