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Monday, November 17, 2025

एडेड माध्यमिक स्कूलों के प्रशिक्षित स्नातक (TGT) शिक्षकों को जल्द मिलेगी प्रोन्नति, सरकार ने मांगा प्रस्ताव और सूची

एडेड माध्यमिक स्कूलों के प्रशिक्षित स्नातक (TGT) शिक्षकों  को जल्द मिलेगी प्रोन्नति, सरकार ने मांगा प्रस्ताव और सूची


लखनऊ। एडेड माध्यमिक स्कूलों के प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी के शिक्षकों को जल्द प्रोन्नति का लाभ मिलने वाला है। सरकार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से ऐसे शिक्षकों की सूची समेत उन्हें प्रोन्नत करने का प्रस्ताव मांगा है।

दरअसल, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत स्नातक श्रेणी के कला, व्यायाम, भाषा, शिल्प तथा संगीत आदि विषयों के अध्यापकों की एक दशक से भी अधिक समय से पदोन्नति लंबित है। संबंधित संवर्ग के शिक्षक लगातार शासन से प्रोन्नति की मांग कर रहे हैं। शिक्षक नेताओं की ओर से यह मुद्दा विधान परिषद में भी कई बार उठाया जा चुका है। अब शासन स्तर पर ऐसे शिक्षकों की प्रोन्नति की सहमति बनी है। बताया जाता है कि शासन अगले माह के अन्त तक इस प्रकरण को निस्तारित करने का मन बना चुका है।

10 साल की सेवा पर प्रोन्नति के हैं नियमः अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति के 10 साल पूरे होने पर टीजीटी स्नातक श्रेणी के कला, व्यायाम, भाषा, शिल्प तथा संगीत आदि विषयों के अध्यापकों की लगातार मांग के बाद शासन ने प्रदेश भर के ऐसे करीब 7400 शिक्षकों को पदोन्नत करने का निर्णय किया है। इसी संदर्भ में शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को विभागीय पत्र भेजकर स्नातक श्रेणी के ऐसे शिक्षक जिनकी पदोन्नति होनी है की संख्या समेत पूरी सूची अतिशीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षकों को प्रवक्ता पद पर प्रोन्नति के नियम है। इसके बाद के 10 वर्षों के पश्चात अर्थात 20 वर्ष की नौकरी पूरी होने पर चयनमान वेतन दिए जाने का प्रावधान है। इसके दो साल बाद यानि पहली पदोन्नति के 12 साल बाद प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने की व्यवस्था है। सामान्य विषयों के शिक्षकों को इस नियम का लाभ मिलता रहा है लेकिन स्नातक श्रेणी के कला, व्यायाम, भाषा, शिल्प तथा संगीत आदि विषयों के अध्यापकों का प्रोन्नत 2015 में यह कहकर रोक दिया या था कि इस संबंध में जारी शासनादेश में इसका कोई प्रावधान नहीं है।



Monday, December 16, 2024

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त, जानिए! क्या है विवाद?

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त,  जानिए! क्या है विवाद?


लखनऊ : प्रदेश के बेसिक स्कूलों में नौ साल से शिक्षकों के प्रमोशन नहीं हुए। इससे पहले जो प्रमोशन हुए थे, वे भी अब वरिष्ठता विवाद में उलझते जा रहे हैं। वरिष्ठता विवाद के बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर तीन जिलों के प्रमोशन निरस्त भी कर दिए गए हैं। इससे प्रदेश के अन्य जिलों के प्रमोट हुए शिक्षक भी सहमे हुए हैं कि इस आदेश असर प्रदेश के सभी जिलों पर न पड़े।


60 फीसदी स्कूल प्रभारी हेड के सहारे 
बेसिक स्कूलों में आखिरी बार 2015 में प्रमोशन हुए थे। पहले जिला स्तर से प्रमोशन होते थे। ऐसे में कई जिले तो ऐसे हैं जहां 15 साल से प्रमोशन ही नहीं हुए हैं। इस वजह से प्रदेश के करीब 60% स्कूलों में स्थायी हेड मास्टर नहीं हैं। वे प्रभारी शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। अब तीन जिलों के प्रमोशन फिर से रद कर दिए गए हैं। ये जिले बुलंदशहर, सहारनपुर और सोनभद्र हैं। इससे अब प्रदेश में शिक्षकों को डर सता रहा है कि कहीं उनके जिले में भी प्रमोशन पर कोर्ट के आदेश का असर न पड़े।


जानिए! क्या है विवाद?

तीन जिलों में रद किए गए प्रमोशन में मुख्य विवाद वरिष्ठता तय करने को लेकर है। जूनियर स्कूलों के हेड के पद पर जो प्रमोशन किए गए थे, उसमें कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के आधार पर वरिष्ठता तय की गई थी। इसको लेकर कुछ शिक्षक तभी कोर्ट चले गए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण नियुक्ति की तारीख से होना चाहिए, न कि कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से। जूनियर हाईस्कूलों में कुछ शिक्षक ऐसे भी थे जिनकी भर्ती सीधे जूनियर में ही हुई थी।

उन्होंने भी एक मुकदमा दायर कर दिया। इस तरह इस मामले में तीन पक्ष हो गए। इस पर कोर्ट ने इसी साल सरकार को निर्देश दिए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण तय नियमावली के आधार पर करते हुए मामले को निस्तारित किया जाए। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब इसका निस्तारण करते हुए संबंधित बीएसए को आदेश जारी कर दिए। जिन तीन जिलों के शिक्षक कोर्ट गए थे, वहां के बीएसए ने प्रमोशन निरस्त कर दिए हैं।

Thursday, September 5, 2024

पदोन्नति में देरी से प्रभारी बनाने की परंपरा बढ़ी, शिक्षाधिकारियों की भी पदोन्नति लटकी, 198 में 88 पद खाली

पदोन्नति में देरी से प्रभारी बनाने की परंपरा बढ़ी, शिक्षाधिकारियों की भी पदोन्नति लटकी, 198 में 88 पद खाली

• शिक्षा निदेशक के सृजित चार पदों में से तीन पर प्रभारी तैनात

• अपर शिक्षा निदेशक स्तर के 12 पदों में से आठ पर कार्यवाहक


प्रयागराज : बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई पर सरकार का विशेष जोर है। स्कूलों में पढ़ाई  की आनलाइन मानीटरिंग कराई जा रही है। शिक्षाधिकारी निरीक्षण कर सेल्फी भेज रहे हैं, लेकिन पढ़ाई  व्यवस्था ठीक कराने, विभागीय कार्य व समस्याएं समय पर निपटाने 5 का जिन पर दायित्व है, उनकी  बहुत कमी है। 


स्थिति यह है कि , शिक्षा विभाग में समूह 'क' के न सृजित 198 पदों में से 88 रिक्त हैं। उन पर प्रभारी नियुक्त हैं। इनमें प्रदेश स्तर के भी पद हैं। इतना ही न नहीं, प्रदेश स्तर के दो-दो पद तक व एक ही अधिकारी के पास है। कार्य की अधिकता से जहां विभागीय कामकाज में देरी होती है, वहीं 5 अधिकारियों में समय से पदोन्नति न मिलने पर निराशा है। 


विभागीय व्यवस्था में शिक्षा निदेशक के चार पद सृजित हैं, जिनमें शिक्षा निदेशक माध्यमिक, बेसिक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और साक्षरता हैं। इनमें से सिर्फ माध्यमिक निदेशक पूर्णकालिक हैं। शेष तीन पदों पर प्रभारी कार्यरत हैं। 


इसी तरह अपर शिक्षा निदेशक (एडी) स्तर के 12 पद प्रदेश में सृजित हैं। इनमें एक पद कैंप कार्यालय लखनऊ तथा एक पद शिक्षा निदेशालय मुख्यालय प्रयागराज में है। इसके अलावा एडी राजकीय, पत्राचार, सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज, महिला शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, सीमैट निदेशक, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी), साक्षरता और संयुक्त सचिव शासन का पद है। इनमें सिर्फ चार पदों पर अपर शिक्षा निदेशक नियुक्त हैं। शेष आठ पद प्रभारियों के भरोसे हैं। 


प्रदेश स्तर के इन पदों में एडी राजकीय के पास एडी पत्राचार का तथा एडी माध्यमिक के पास सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश का प्रभार है। मंडल स्तर के पदों पर भी अधिकारियों की कमी है। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के 22 पद सृजित हैं। इनमें जेडी अर्थ, जेडी महिला शिक्षा तथा दो  पद कैंप कार्यालय में हैं, जिनमें एक बेसिक व एक माध्यमिक में है। शेष 18 पद मंडल मुख्यालय में हैं। इनमें भी पांच पदों पर प्रभारी कार्य कर रहे हैं। 


मंडलीय उप शिक्षा निदेशक (डीडीआर) स्तर के प्रदेश में सृजित 108 पदों में 31 खाली हैं, जिस पर प्रभारियों को तैनाती मिली है। पदोन्नति में देरी से जहां प्रभारी बनाने की परंपरा बढ़ी है, वहीं कार्य संचालन और समस्या निस्तारण पर भी असर पड़ रहा है।

Sunday, August 4, 2024

वर्षों से प्रमोशन का इंतजार, डेढ़ साल से मिल रही सिर्फ तारीख, अब तक वरिष्ठता सूची तैयार नहीं तैयार नहीं कर पाया बेसिक शिक्षा विभाग

वर्षों से प्रमोशन का इंतजार, डेढ़ साल से मिल रही सिर्फ तारीख, अब तक वरिष्ठता सूची तैयार नहीं तैयार नहीं कर पाया बेसिक शिक्षा विभाग

अब फिर बीएसए को आदेश कर मांगी अंतिम वरिष्ठता सूची


लखनऊ : प्रदेश के बेसिक शिक्षक वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। डेढ़ साल पहले प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन फिर तारीख पर तारीख मिल रही हैं। डेढ़ साल में विभाग अभी तक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी नहीं कर सका है। बेसिक शिक्षा परिषद ने हाल ही में एक बार फिर 27 जुलाई तक सभी बीएसए से वरिष्ठता सूची मांगी मांगी थी लेकिन अभी किसी जिले ने जारी नहीं की।


 बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन पहले जिला स्तर पर होते थे। कई जिले तो ऐसे हैं जहां 15-16 साल से प्रमोशन ही नहीं हुए हैं। लखनऊ में ही 2008 के बाद से प्रमोशन नहीं हुए। जिला स्तर पर 2016 तक प्रमोशन हुए। उसके बाद किसी जिले में प्रमोशन ही नहीं हुए। उसके बाद 2018 में प्रदेश भर में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन जूनियर टीईटी को लेकर पेंच फंस गया। 


प्राइमरी के सहायक अध्यापक का प्रमोशन प्राइमरी के हेड या फिर जूनियर के सहायक अध्यापक के पद पर होता है। इसी तरह प्राइमरी के हेड का प्रमोशन जूनियर के हेड पर होगा। प्राइमरी से जूनियर में जाने के लिए आरटीई के तहत अलग से जूनियर टीईटी जरूरी है। आरटीई लागू होने के बाद कुछ शिक्षकों ने तो टीईटी पूरी कर ली है। वहीं कुछ ने नहीं की है। इसी को लेकर मामला कोर्ट में पहुंच गया था। इससे प्रमोशन नहीं हो सके थे। 


कई बार भेजे रिमाइंडर

जिलों को कहा गया कि वे वरिष्ठता सूची तैयार करें। उसके बाद उन पर आपत्तियां मांगी जाएं और फिर अंतिम सूची जारी की जाए। इसके लिए तारीखें भी जारी की गईं। वे तारीखें निकल गईं। डेढ़ साल में कई बार बेसिक शिक्षा परिषद ने जिलों को यह प्रक्रिया पूरी करने का रिमाइंडर दिया। फिर भी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर सभी बीएसए को पत्र जारी किया गया है।

इस मामले पर कुछ शिक्षक कोर्ट गए हैं। कोर्ट के निर्देश पर ही वरिष्ठता सूची मांगी गई थी। कोर्ट जो भी आदेश देगा। उसे ध्यान में रखते हुए जल्द प्रमोशन की कार्यवाही की जाएगी। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव-बेसिक शिक्षा परिषद


आखिर कहां फंस रहा पेच?
खुद परिषद ने यह साफ नहीं किया है कि प्रमोशन के लिए जूनियर टीईटी जरूरी है या नहीं? इसको लेकर बीएसए भी भ्रमित हैं। पिछले साल जब प्रक्रिया शुरू की गई थी तो बीएसए ने अलग- अलग मानकों पर सूची तैयार करनी शुरू कर दी थीं। यह स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं की गई। जब प्रमोशन प्रक्रिया शुरू की गई तो उसी के साथ अंतरजनपदीय म्यूचुअल तबादले की प्रक्रिया भी साथ में शुरू की गई थी। ये तबादले हो चुके हैं। इस तरह शिक्षकों की वरिष्ठता फिर बदल गई। ऐसे में अंतिम सूची जारी करने से पहले एक अनंतिम सूची जारी करनी होगी और उस पर आपत्तियां मांगनी होंगी।



बेसिक शिक्षा विभाग ने 19 माह में 15 पत्र किए जारी, फिर भी नहीं हो पाया 35 हजार बेसिक शिक्षकों का प्रमोशन

🔵 करीब डेढ़ साल में सचिव स्तर से जिलों को जारी हो चुके 15 पत्र 
🔵 बिना प्रधानाध्यापक के चल रहे प्रदेश के 34054 बेसिक स्कूल


बेसिक शिक्षा विभाग साग में तैनात शिक्षकों के प्रमोशन के लिए बीते 19 महीने में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव जिला स्तर के लिए 15 पत्र जारी कर चुके हैं। इसके बाद भी प्रमोशन नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षक संघों का दावा है कि पूरे प्रदेश में करीब 35 हजार शिक्षकों का प्रमोशन लंबित है। प्रमोशन नहीं होने के कारण 34,054 स्कूलों में हेडमास्टर ही तैनात नहीं हैं।



नियम कानूनों में बार बार बदलाव के चलते बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के कई मामले हाईकोर्ट तक पहुंच गए। बीते वर्ष हाईकोर्ट ने नियम-कानूनों में बार-बार लगभग सभी रिटों का निस्तारण कर दिया। इसके बाद तेजी से प्रमोशन हो जाने चाहिए थे।

सचिव स्तर से जिला स्तर के लिए चिट्ठी-पत्री भी शुरू हो गई। इसे लेकर पत्र आते रहे और उन पर कार्रवाई होती रही। सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 24 जुलाई अब एक और पत्र जारी किया है। इस पत्र के जरिए प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापक पदों की वरिष्ठता सूची मांगी गई है। 



दर्जन बार आदेश, फिर भी बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति शेष
प्रमोशन प्रक्रिया के लिए फिर शुरू हुई प्रक्रिया पर उठे प्रश्न

वर्ष 2008 शिक्षकों के बाद से नहीं मिली को पदोन्नति


प्रयागराजः बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक-शिक्षिकाएं 15 वर्ष से पदोन्नति मिलने के इंतजार में हैं, लेकिन उनकी यह प्रतीक्षा खत्म नहीं हो रही है। अब 24 जुलाई को एक बार फिर बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी बीएसए को पत्र लिखकर शिक्षक/शिक्षिकाओं की अंतिम वरिष्ठता सूची मांगी है, लेकिन शिक्षक कह रहे हैं कि पदोन्नति मिल जाए, तब तो प्रयास के अर्थ हैं, वर्ना पत्रों के ढेर से लाभ नहीं मिलने वाला है।

अगर पदोन्नति देने के लिए वर्ष 2023 से किए जा रहे प्रयास को ही देखें तो अब तक दर्जन भर से ज्यादा बार आदेश दिए गए, लेकिन पदोन्नति मिलने का शिक्षकों का इंतजार खत्म नहीं हुआ। वर्ष 2008 के बाद से बेसिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि कई बार मांग की गई। इधर, पदोन्नति की मांग को लेकर शिक्षकों के मुखर होने पर प्रक्रिया शुरू तो की गई, लेकिन पूरी नहीं हुई। वर्ष 2023 में 31 जनवरी को पदोन्नति दिए जाने के लिए वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए, लेकिन बात पदोन्नति पूरी होने तक नहीं पहुंची। इस संबंध में 19 फरवरी 2023 को फिर पत्र जारी किया गया। इस तरह अलग-अलग तिथियों में पत्र जारी करने का सिलसिला अब तक तक चल रहा है। 


अभी 24 जुलाई को जारी पत्र में परिषद सचिव ने पिछले पत्रों की जानकारी देते हुए सभी बीएसए से कहा है कि परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में पदोन्नति के संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के पत्र का संज्ञान लें। यह भी बताया है कि 24 अप्रैल 2023 के पत्र के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों की वरिष्ठता सूची का प्रकाशन कर आपत्ति मांगकर अंतिम रूप से प्रकाशित कराते हुए पदोन्नति की कार्यवाही नियमानुसार पूर्ण करने के आदेश दिए गए थे। 


जिलों ने निर्देश के क्रम में कार्यवाही निश्चित रूप से पूर्ण कर ली होगी। ऐसे में जिलों में तैयार अंतिम वरिष्ठता सूची विशेष वाहक के माध्यम से 27 जुलाई तक परिषद कार्यालय में उपलब्ध कराने का समय दिया गया। मामले पर उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि प्रदेश भर के शिक्षक 2008 के बाद से पदोन्नति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बार प्रक्रिया पूर्ण कराते हुए पदोन्नति दी जानी चाहिए, जिससे शिक्षकों को लाभ मिल सके।

Wednesday, July 31, 2024

मा0 उच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका पर पारित अन्तिम आदेश के उपरान्त ही होगी पदोन्नति की कार्यवाही, बेसिक शिक्षा मन्त्री ने विधानसभा में बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी प्रश्न पर दिया जवाब

मा0 उच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका पर पारित अन्तिम आदेश के उपरान्त ही होगी पदोन्नति की कार्यवाही, बेसिक शिक्षा मन्त्री ने विधानसभा में बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी प्रश्न पर दिया जवाब


परिषदीय अध्यापकों की पदोन्नति के सम्बन्ध में मा० उच्च न्यायालय में योजित याचिका संख्या 523/2024 हिमांशू राणा व अन्य बनाम स्टेट ऑफ यू०पी० व अन्य मा. न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उक्त याचिका में मा. न्यायालय द्वारा पारित अन्तिम आदेश के उपरान्त पदोन्नति की कार्यवाही की जायेगी।



Thursday, June 9, 2022

जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति

जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति



प्रयागराज :  राजकीय इंटर कालेज के सहायक अध्यापकों (एलटी) की स्थाई वरिष्ठता लंबे समय से अटकी हुई है। वरिष्ठता निर्धारित नहीं होने से करीब पांच हजार शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है। राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा ने बातचीत में भरोसा दिया है कि वरिष्ठता निर्धारण का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा।


राजकीय शिक्षकों की वर्ष 1991 से दिसंबर 2000 की स्थाई वरिष्ठता वर्ष 2004 प्रकाशित हुई। इसके बाद से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हुई। अस्थाई वरिष्ठता निर्धारित करके आपत्ति मांगे जाने की औपचारिकता पूरी की जाती है, लेकिन स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो पा रही है। इस संबंध में पिछले दिनों राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री रामेश्वर । प्रसाद पाण्डेय ने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय के यहां जानकारी की तो । thsti बताया गया कि पत्रावली शासन में अनुमति के लिए लंबित है।


ऐसे संघ की प्रांतीय अध्यक्ष छाया शुक्ला, कार्यकारी प्रांतीय महामंत्री सत्य शंकर मिश्र ने महामंत्री के साथ मामले को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा शंभू कुमार के समक्ष रखा। बताया कि स्थाई वरिष्ठता निर्धारण की फाइल डेढ़ माह से शासन में अटकी है। इस पर विशेष सचिव ने समीक्षा अधिकारी से पूछताछ की है। उन्होंने भरोसा दिया है कि जल्द ही स्थाई वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी।


प्रांतीय महामंत्री ने बताया कि इसकी प्रक्रिया निदेशालय से अपर शिक्षा निदेशक मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक के क्रम में चलने के कारण लंबी हो जाती है। इसी कारण 22 वर्ष से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो सकी है।

Monday, May 31, 2021

यूपी बोर्ड : सभी स्कूलों के कक्षा 6, 7, 8, 9 और 11 के छात्रों को प्रोन्नत करने का फैसला

यूपी बोर्ड : सभी स्कूलों के कक्षा 6, 7, 8, 9 और 11 के छात्रों को प्रोन्नत करने का फैसला

9 व 11 के छात्रों को करें प्रोन्नत, माध्यमिक शिक्षा विभाग से आदेश जारी


माध्यमिक शिक्षा की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यूपी बोर्ड के साथ ही सभी शिक्षा बोर्डो के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 9 व 11 के छात्र-छात्रओं को उनके वार्षिक परीक्षाफल के आधार पर अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाए। यदि किसी स्कूल में वार्षिक परीक्षा नहीं हो पाई है तो स्कूल वर्ष भर के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रोन्नत करें। यदि आंतरिक मूल्यांकन भी उपलब्ध नहीं है तो सामान्य रूप से छात्रों को प्रोन्नत किया जाए।


यूपी सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल (10वीं) की बोर्ड परीक्षा निरस्त करने का फैसला किया है। यूपी बोर्ड के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा। इस परीक्षा के लिए 29,94,312 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इन अभ्यर्थियों को लंबे समय से सरकार के फैसले का इंतजार था। सरकार ने परिस्थितियां अनकूल होने पर इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा जुलाई के दूसरे हफ्ते में कराने का फैसला किया है। यह परीक्षा मात्र डेढ़ घंटे की होगी, जिसमें परीक्षार्थी को केवल तीन प्रश्नों के उत्तर देने होंगे।


उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के 56 लाख छात्रों के व्यापक हित में यह फैसला लिया गया। बोर्ड को कक्षा 10 के छात्रों की कक्षा 11 में प्रोन्नति के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश बनाने के आदेश दिए गए हैं।


जल्द जारी किया जाएगा 12वीं का परीक्षा कार्यक्रम

डॉ. शर्मा ने कहा कि कक्षा 12 की परीक्षा के महत्व को देखते हुए यह परीक्षा निरस्त न करने का फैसला लिया गया। हालात सुधरने पर कोविड-19 से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट की परीक्षा को जुलाई के दूसरे हफ्ते में कराए जाने का प्रस्ताव है। इसकी विस्तृत समय सारणी शीघ्र हीसाझा की जाएगा। इस वर्ष भी 15 कार्य दिवसों में यह परीक्षा कराई जाएगी। प्रश्नपत्र की अवधि को मात्र डेढ़ घंटे रखा जाएगा तथा छात्रों को 10 प्रश्नों में किन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर देने की स्वतंत्रता होगी। कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए इस वर्ष 26,10,316 छात्रों का पंजीकरण हुआ है।

अगली कक्षाओं में प्रोन्नति देने के निर्देश

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में कक्षा 6, 7 व 8 के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नति देने के फैसला का शासनादेश पूर्व में ही जारी कर दिया गया है। अब यह निर्णय लिया गया है कि यदि किसी बोर्ड विशेष का अन्यथा आदेश न हो तो सभी बोर्ड के सभी विद्यालयों की कक्षा 6, 7 व 8 के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए। कक्षा 9 एवं 11 के छात्रों को उनकी वार्षिक परीक्षा के परीक्षाफल के आधार पर अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए। यदि किसी विद्यालय में वार्षिक परीक्ष नहीं हो पाई है तो वे आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में प्रोन्नति देंगे। यदि आंतरिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है तो सामान्य रूप से छात्र को प्रोन्नति दी जाए। यदि बोर्ड विशेष का इस संबंध में कोई आदेश होगा तो वह लागू होगा।


पाठ्यक्रम में की थी 30 फीसदी की कटौती
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी देश का प्रथम राज्य है जिसने गत वर्ष 2020 के जुलाई माह में ही कोरोना महामारी के दृष्टिगत पठन-पाठन में हो रहे व्यवधान के कारण पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कमी कर दी थी।

Saturday, January 23, 2021

कई साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षक व कर्मचारी, परिषदीय शिक्षक 30-35 वर्ष की लंबी सेवा पूरी कर एक ही पद से हो रहे रिटायर

कई साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षक व कर्मचारी, परिषदीय शिक्षक 30-35 वर्ष की लंबी सेवा पूरी कर एक ही पद से हो रहे रिटायर 


लखनऊ। प्रदेश के तमाम सेवा संवर्गों में पदोन्नति के पद लंबे समय से रिक्त हैं। कर्मचारी पदोन्नति के लिए विभागीय अफसरों का चक्कर काट रहे हैं। पर, कई-कई साल बीत जा रहे हैं, पदोन्नति नहीं हो रही है। शासन स्तर से पदोन्नति के समस्त पदों को भरने के निर्देश के बाद कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र बताते हैं कि प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की पदोन्नतियां प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक व जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक के पद पर होती है। 2016 में कुछ जिलों में पदोन्नति हुई थी, फिर रोक लगा दी गई। चार वर्ष बीत गए, शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिल पा रही है । शिक्षक 30-35 वर्ष की लंबी सेवा पूरी कर एक ही पद से रिटायर हो रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक से प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति करीब 10 वर्ष से नहीं हुई है। इससे शिक्षकों में कुंठा बढ़ती है। सरकार को पदोन्नतियों की कार्यवाही प्राथमिकता पर शुरू करनी चाहिए।

 इसी तरह राजस्व निरीक्षक से नायब तहसीलदार व लेखपाल से राजस्व निरीक्षक की पदोन्नति पिछले दो वर्ष से नहीं हो पा रही है। हालात ये हैं कि राजस्व निरीक्षकों को अपनी पदोन्नति के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ा। कोर्ट को पदोन्नति का निर्देश दिए लंबा समय बीतने को है, लेकिन पदोन्नति अब तक अटकी है। बताया जा रहा है कि पूर्व में तमाम कर्मियों को नियम विरुद्ध पदोन्नति दी गई थीं। इस प्रकरण में कार्रवाई व उचित निर्णय लेकर अन्य कर्मियों की पदोन्नति का रास्ता निकालने की जगह अफसर फाइल पर कुंडली मारे बैठे हैं।

Thursday, July 30, 2020

पॉलीटेक्निक छात्र पिछली परीक्षाओं के अंकों के आधार पर होंगे प्रमोट

पॉलीटेक्निक छात्र पिछली परीक्षाओं के अंकों के आधार पर होंगे प्रमोट।

कानपुर। प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में दूसरे-चौथे वर्ष और सेमेस्टर के छात्र पिछली परीक्षाओं और असाइनमेंट के आधार पर प्रमोट किए जाएंगे। प्राविधिक शिक्षा निदेशालय द्वारा बनाई गई समिति ने छात्रों को प्रमोट करने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। प्राविधिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि दूसरे और चौथे सेमेस्टर के छात्रों को सेशनल एग्जाम, असाइनमेंट के अंक और पिछले सेमेस्टर के 50% अंकों को कैरीओवर करते हुए प्रमोट किया जाएगा। अंतिम वर्ष, अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रहे और विशेष बैंक पेपर देने वाले छात्र छात्राओं की परीक्षाएं सात सितंबर से 12 सितंबर के बीच होंगी।




17 अगस्त से पांच सितंबर तक पॉलिटेक्निक संस्थानों में कक्षाएं चलेंगी। बचा पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ दूसरे व चौथे सेमेस्टर के छात्रों सेशनल एग्जाम और असाइनमेंट का काम पूरा कराया जाएगा।

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Monday, July 27, 2020

प्रमोशन, वेतन विसंगति को लेकर शिक्षक परेशान, 2008 से राजकीय कॉलेज में एलटी ग्रेड को नहीं मिली प्रोन्नति

प्रमोशन, वेतन विसंगति को लेकर शिक्षक परेशान, 2008 से राजकीय कॉलेज में एलटी ग्रेड को नहीं मिली प्रोन्नति


लखनऊ :: प्रदेश के 800 से ज्यादा राजकीय इंटर कॉलेजों में से किसी में भी नियमित प्रधानाचार्य नहीं है। वर्ष 2008 से राजकीय इंटर कॉलेजों में एलटी ग्रेड को प्रोन्नति नहीं दी गई। 2001 से एसीपी यानी एश्योर्ड कॅरिअर प्रमोशन का भी लाभ नहीं मिला।




वहीं खण्ड शिक्षा अधिकारियों को भी 2011 से प्रोन्नति नहीं दी गई। बेसिक और माध्यमिक के बीच संवर्गों को अलग करने को लेकर घोषणाएं भले हुई हों लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। राजकीय शिक्षकों के प्रमोशन के लिए कई बार गोपनीय आख्या मांगी गई लेकिन प्रवक्ता पद पर प्रोन्नति नहीं दी।


वहीं प्रधानाचार्य पदों पर डीपीसी को लगभग 2 वर्ष हो चुके हैं लेकिन उसका रिजल्ट अभी तक नहीं दिया गया। मामला कोर्ट में है और शिक्षकों का आरोप है कि लचर पैरवी के अभाव में उनके मामला लटक गया है। प्रधानाचार्य के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से और 50 फीसदी प्रोन्नति से भरे जाते हैं।


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Sunday, July 26, 2020

राजकीय महाविद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू


राजकीय महाविद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू


राजकीय महाविद्यालयों में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू 
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में किया जाना है प्रोन्नत
परीक्षा से होगा प्रमोशन, लॉकडाउन में ठप हो गई थी प्रक्रिया 


प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई है। यह प्रोन्नति परीक्षा के माध्यम से की जानी है। पिछले साल तो कर्मचारियों को प्रमोशन मिल गया था, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण प्रमोशन की प्रक्रिया ठप हो गई, जिसे शुरू करने के लिए उच्व्च शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी राजकीय महाविद्यालयों,ख्क्षेत्रीय उच्च शिाक्षा अधिकारियों और राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी के पुस्तकालयाध्यक्षों को पत्र जारी किया गया है। 


राजकीय स्नातक एवं स्नाताकोत्तर महाविद्यालयों में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को हर साल तृतीय श्रेण्ी में प्रोन्नत किया जाता है। इसके लिए अर्ह कर्मचारियों को परीक्षा में शामिल होना पड़ता है और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों को प्रोन्नति दी जाती है। इस साल यह परीक्षा जून/जुलाई में प्रस्तावित थी लेकिन लॉकडाउन के कारण परीक्षा को स्थगित कर दिया गया और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति की प्रक्रिया ठप हो गई। हालांकि प्रमोशन के लिए महाविद्यालयों ने उच्च शिक्षा निदेशालय को अर्ह कर्मचारियों की सूची प्रेषित कर दी थी। इनमें से कुछ कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं और कुछ निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। 


निदेशालय की ओर से ऐसे कर्मचारियों का नाम हटाते हुए पुन: नई सूची प्रेषित की गई है। इस सूची में जिन कर्मचारियों के नाम शामिल हैं, उनके बारे में निदेशालय ने जानकारी मांगी है। निदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष २०१९-२० की गोपनीय आख्या प्राचार्य द्वारा ग्रेडिंग अंकित करते हुए भेजी जाए। संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई चलने अथवा न चलने के बारे में आख्या दी जाए। संबंधित कर्मचारी की प्रोन्नति के संबंध में सहमति पत्र प्राचार्य से प्रमाणित हो और संबंधित कर्मचारियों की प्रोन्नति के बारे में प्राचार्य द्वारा स्पष्ट संस्तुति या असंस्तुति हो। इसके अलावा जिन कर्मचारियों के नाम सूची में नहीं हैं, वे भी प्रोन्नति की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। 


ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवा कम से कम पांच वर्ष की होनी चाहिए और वे हाईस्कूल या उसके समक्षक परीक्षा उत्तीर्ण हों। वर्ष २०१५-१६ से वर्ष २०१९-२० तक पांच वर्षों की आख्या ग्रेडिंग सहित, प्रथम नियुक्ति एवं कार्यभार ग्रहण करने से संबंधित प्रमाणपत्र की प्रमाणित छायाप्रति और प्रोन्नति के लिए कर्मचारी की सहमति/असहमति प्राप्त करनी होगी। इसके बाद कॉलेजों को ऐसे कर्मचारियों की सूची निदेशालय को २८ जनवरी तक भेजनी होगी। साथ ही बताना होगा कि कर्मचारी के खिलाफ कोई शिकायती प्रकरण/विभागीय कार्यवाही तो नहीं चल रही है, जिससे प्रोन्नति की प्रक्रिया में बाधा आए।