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Saturday, September 26, 2020

एक महीने की भी फीस न देने वाले छात्रों को स्कूल में नहीं मिलेगा प्रवेश - निजी स्कूलों ने शासन को कराया अवगत

एक महीने की भी फीस न देने वाले छात्रों को स्कूल में नहीं मिलेगा प्रवेश

12 अक्टूबर से विद्यालय खोलने की मांग, फीस जमा न करने वालों को नहीं मिलेंगी कक्षाएं।

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला को सौंपा ज्ञापन।


अक्तूबर में अगर निजी स्कूल खुलें तो उन छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा, जिन्होंने अभी तक एक भी महीने की फीस जमा नहीं कराई है।


निजी स्कूलों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने अपने इस निर्णय से शासन को लिखित में अवगत करा दिया है। पहले चरण में केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए ही स्कूल खोलने का प्रस्ताव है।


एसो. अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी स्कूलों को 30 से 40 प्रतिशत तक छात्रों की ही फीस मिली है। बार-बार कहने के बावजूद ऐसे कई अभिभावक हैं जिन्होंने अप्रैल से अभी तक एक भी महीने की फीस जमा नहीं कराई है। 12 अक्तूबर से स्कूल खोलने का प्रस्ताव शासन को सौंप दिया है।


इसमें साफ तौर पर स्कूलों के निर्णय से शासन को अवगत करा दिया है कि जिन अभिभावकों ने एक भी महीने की फीस नहीं दी है, उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी निजी स्कूलों के प्रबंधन ने एकमत से यह निर्णय लिया है। अभिभावकों को पहले भी निर्देश दिया था कि जिन्हें फीस देने में कठिनाई है, वे साक्ष्य के साथ 20 प्रतिशत तक फीस कटौती को आवेदन कर सकते हैं।


बताया कि अभी केवल बड़े क्लास खोलने का ही प्रस्ताव दिया है। वहीं, जो छात्र नहीं आना चाहते हैं तो उनकी इच्छा है। इतना ही नहीं जो स्कूल अभी नहीं खोलना चाहते, उन पर भी कोई दबाव नहीं होगा। छात्र केवल अभिभावकों की अनुमति से ही स्कूल आएंगे।


शासन को एसओपी भी सौंपी
अध्यक्ष ने बताया कि सभी स्कूलों ने बात कर शासन के निर्देश अनुसार स्कूल खोलने को एसओपी भी तैयार कर शासन को सौंप दी है। इसके अनुसार 12 अक्तूबर से 10वीं और 12वीं की ही पढ़ाई शुरू होगी। इन्हें प्रोजेक्ट वर्क, प्रैक्टिकल और मिड टर्म परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। स्थिति को देखते हुए बाद में 9वीं और 11वीं के छात्रों को पढ़ाई के लिए बुलाया जाएगा। 


लखनऊ । अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने 12 अक्टूबर से दो शिफ्टों में विद्यालय खोले जाने की मांग की है। इस संबंध में प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला को ज्ञापन दिया है। एसोसिएशन ने यह साफ कर दिया है कि जिन बच्चों की एक भी माह की फीस लॉकडाउन से अबतक नहीं जमा की गई है वह उन्हें कक्षाएं नहीं देंगे। फीस जमा न करने वाले बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट भी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालय खोले जाने को लेकर कोविड-19 से विद्यार्थियों की सुरक्षा के मानक भी निर्धारित किए हैं।


एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिन बच्चों की फीस नहीं जमा है उनके अभिभावक धीरे-धीरे फीस जमा कर दें। क्योंकि विद्यालय प्रबंधन को स्टॉफ का वेतन देना है और इसक अलावा अन्य खर्च भी हैं। जिन अभिभावकों के पास आर्थिक समस्या है वह विद्यालय प्रबंधन से मिलकर अपनी समस्या बताएं और एक से दो माह की फीस जमा कर दें। बाकी की फीस के लिए कुछ समय प्रबंधन से मांग लें।


एसोसिएशन ने विद्यालय खोलने को यह बनाए मानक

एक कक्षा में 20 से अधिक विद्यार्थी नहीं होंगे। सीट से सीट की दूरी तीन फिट होगी। सुबह पहली शिफ्ट में आठ से 11 बजे तक 10वीं और 12वीं की कक्षाएं संचालित होंगी। दूसरी पाली में दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक कक्षा नौ और 11 की कक्षाएं संचालित होंगी। प्रवेश और निकास द्वार की अलग-अलग व्यवस्था होगी। 

कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर रहे विद्यालयों में अगर कोई बच्चा संक्रमित होता है तो विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं होगी। प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले विद्यालय के खिलाफ शासन सख्त कार्यवाही करे। 

प्रवेश द्वार से लेकर कक्षाओं तक गोले बने होंगे। शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखा जाएगा। अगर किसी बच्चे को बीच में बाहर जाने की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए पास जारी किया जाएगा। एक बार में एक ही बच्चा बाहर जा सकेगा। बिना मास्क के बच्चों का विद्यालय में प्रवेश नहीं होगा। निकास और प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होगी। 

Saturday, September 19, 2020

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।

Sunday, September 13, 2020

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग                 


बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने व्यापक जनहित में केन्द्र व राज्य सरकारों से अपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन से संक्रमित देश में आर्थिक मंदी से भीषण बेरोजगारी एवं जीवन में अभूतपूर्व संकट झेल रहे करोड़ों लोगों के सामने बच्चों के फीस जमा करने की समस्या बेहद गंभीर है। जिसके कारण लोगों को कई जगह अब धरना-प्रदर्शन आदि के रूप में सामने आना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को पुलिस के डण्डे खाने पड़ रहे हैं, जो अति-दु:खद है। 


मायावती ने शनिवार सुबह ट्विट किया-



उन्होंने कहा कि ऐसे 'एक्ट आफ गॉड' के समय में संवैधानिक मंशा के अनुरूप सरकार को कल्याणकारी राज्य होने की भूमिका खास तौर से काफी बढ़ जाती है। केन्द्र व राज्य सरकारेंअपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी व प्राइवेट स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति करें अथार्त व्यापक जनहित में बच्चों की स्कूल फीस माफ करें।

Sunday, August 30, 2020

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

Wednesday, August 26, 2020

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को दो हफ्त में हलफनामा पेश करने के निर्देश

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी ने शासनादेश को दी है चुनौती


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना के दौर में फीस जमा न होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का नाम न काटने के मामले में याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार से सुझाव मांगे हैं। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से दाखिल अतुल कुमार व एक अन्य की याचिका पर दिया।


याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक यूपी सरकार के 4 जुलाई के उस शासनादेश को चुनौती देकर रद्द करने की गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना आपदा के चलते फीस जमा नहीं होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के नाम न काटे जाएं। अधिवक्ता की दलील थी कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य सरकार को ऐसा शासनादेश जारी करने की शक्ति नहीं है। ऐसे में यह खारिज करने लायक है। 



कोर्ट ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद याचियों से पूछा कि क्या वे अपने शिक्षकों व स्टाफ को बगैर किसी कटौती के नियमित वेतन दे रहे हैं। साथ ही यह सुझाव भी पेश करने को कहा है कि अगर जरूरतमंद विद्यार्थियों को किस्तों में फीस जमा किए जाने की अनुमति दी जाती है तो इसकी वसूली सुनिश्चित करने के लिए क्या एहतियात या शर्तें लगाई जानी चाहिए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद नियत करते हुए इन्हीं पहलुओं पर याचियों और महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह को हलफनामे पर लिखित सुझाव पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Saturday, August 15, 2020

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज।


नई दिल्ली : यूपी के निजी स्कूलों द्वारा मासिक फीस वसूली नहीं करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इजाजत दी है कि वह इस मामले में फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं।




शुक्रवार को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

यूपी के निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदेश सरकार को शासनादेश जारी करने के लिए याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि कोरोना काल में निजी स्कूल मासिक फीस वसूली नहीं करें। लेकिन, याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पैरेंट्स एसोसिएशन ने दायर की थी।


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