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Tuesday, June 30, 2026

शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस संस्था को प्रोत्साहित करते हुए होगी माफ या राज्य सरकार द्वारा होगी प्रतिपूर्ति, देखें आदेश

गरीब दो बहनों में से एक की फीस होगी माफ, आदेश जल्द

लखनऊ । विद्यालयों, महाविद्यालयों अथवा संस्थाओं में पढ़ रहीं एक ही गरीब परिवार की दो बहनों में से एक की ट्यूशन फीस सरकार की तरफ से माफ किए जाने या उसकी भरपाई किए जाने के आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस संबंध में की गई घोषणा को शासन स्तर से अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।

महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर प्रदेश में यूपी बोर्ड से लेकर सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों की कक्षा 9 से 12 तक की बच्चियों का सारा विवरण तलब किया है। दूसरी तरफ पहली जुलाई को इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है।



शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस संस्था को प्रोत्साहित करते हुए होगी माफ या राज्य सरकार द्वारा होगी प्रतिपूर्ति, देखें आदेश 


शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे किसी परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ कराई जाएगी या राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी।

 22.06.2026



Sunday, November 9, 2025

Fee Refund Policy by the UGC : फीस वापसी नियम का पालन न करने पर कॉलेजों की मान्यता रद्द होगी : यूजीसी

Fee Refund Policy by the UGC : फीस वापसी नियम का पालन न करने पर कॉलेजों की मान्यता रद्द होगी : यूजीसी

राज्यों के मुख्य सचिवों और विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र


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नई दिल्ली। छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर है। अगर कोई छात्र छात्र किसी भी कारण से दाखिला लेने के बाद कालेज छोड़ता है तो कॉलेज प्रबंधन को उसकी फीस वापस करनी अनिवार्य है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है।

इसमें कहा गया कि कोई उच्च शिक्षण संस्थान किसी छात्र की फीस और उसके अकादमिक सर्टिफिकेट को नहीं रख सकता है। नियम न मानने पर मान्यता रदद, सभी प्रकार की ग्रांट रोकने, किसी प्रोग्राम में एक साल या उससे अधिक समय तक दाखिले पर रोक, जुर्माना से लेकर राज्य सरकारों के संस्थानों के खिलाफ स्टेट एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यूजीसी के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने इस संबंध में सभी राज्य सरकारों और विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि यूजीसी के बार-बार निर्देशों के बाद कई शिक्षण संस्थान छात्र के कॉलेज छोड़ने पर फीस वापस नहीं कर रहे हैं।

इसके अलावा दाखिले के बाद मूल सर्टिफिकेट तक वापस नहीं किए जा रहे हैं। राज्य सरकारों से आग्रह है कि वे अपने उच्च शिक्षण संस्थानों में फीस वापसी के नियमों को लागू करवाएं। 

Sunday, October 12, 2025

स्कूलों में फीस के लिए UPI अपनाने पर शिक्षा मंत्रालय का जोर

स्कूलों में फीस के लिए UPI अपनाने पर शिक्षा मंत्रालय का जोर

राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा, डिजिटल लेनदेन से छात्रों को सुविधा होगी


नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों से प्रवेश और परीक्षा शुल्क वसूलने के लिए एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) अपनाने को कहा है। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण और लेन-देन प्रक्रिया को सरल बनाना है। इससे छात्रों और अभिभावकों को भी सुविधा होगी।


राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और एनसीईआरटी, सीबीएसई, केवीएस और एनवीएस जैसी स्वायत्त संस्थाओं को लिखे एक पत्र में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने यूपीआई, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों का लाभ उठाने पर जोर दिया। 

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह कदम विधायी, नीतिगत और संस्थागत सुधारों के माध्यम से 'जीवन और स्कूली शिक्षा में आसानी' को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने से कई लाभ होंगे, जिनमें अधिक सुविधा, पारदर्शिता और अभिभावकों के लिए स्कूल जाए बिना ही दूर से भुगतान करने की क्षमता शामिल है। इसका उद्देश्य हितधारकों को डिजिटल लेनदेन से परिचित कराकर उनके बीच वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना भी है, जो एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी शिक्षा प्रणाली के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि नकद भुगतान से डिजिटल भुगतान में बदलाव से स्कूल प्रशासन का आधुनिकीकरण होगा और 2047 तक 'विकसित भारत' एक नागरिक-केंद्रित, डिजिटल रूप से उन्नत राष्ट्र के सरकार के लक्ष्य को बल मिलेगा।

Wednesday, September 17, 2025

मनमाने ढंग से फीस वसूली पर लगेगा ब्रेक, डिग्री कॉलेजों में मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर बीएससी बीए की भी फीस तय होगी

मनमाने ढंग से फीस वसूली पर लगेगा ब्रेक, डिग्री कॉलेजों में मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर बीएससी बीए की भी फीस तय होगी

प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तर्ज पर शुल्क निर्धारण

7925 डिग्री कॉलेजों में 54.76 लाख छात्र पढ़ रहे


लखनऊ। अब मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर परंपरागत पाठ्यक्रमों की भी मानक फीस निर्धारित की जाएगी। बीए, बीएससी व बीकॉम के समान्य और ऑनर्स पाठ्यक्रमों का शुल्क निर्धारण प्रोफेशनल कोर्सों की तर्ज पर किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं के अनुसार एक निश्चित शुल्क से अधिक कॉलेज नहीं वसूल सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है।


अभी बीए, बीएससी व बीकॉम की प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तरह कोई मानक फीस निर्धारित न होने से कॉलेज मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं। खासकर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में स्थिति और खराब है। राजकीय, एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में फीस को लेकर काफी असमानता है। किसी कॉलेज में बीए व बीएससी की फीस तीन हजार से लेकर आठ हजार रुपये है तो कहीं यह 15-20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर तक है।

Saturday, September 13, 2025

बेटियों की फीस माफी चार साल से प्रस्तावों में फंसी, मुख्यमंत्री ने दो अक्तूबर 2021 को लखनऊ में की थी घोषणा

बेटियों की फीस माफी चार साल से प्रस्तावों में फंसी, मुख्यमंत्री ने दो अक्तूबर 2021 को लखनऊ में की थी घोषणा

प्रयागराज। निजी स्कूल या कॉलेज में पढ़ रही एक परिवार की एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी बच्ची की ट्यूशन फीस माफ करने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा चार साल से प्रस्तावों में ही फंसी है। मुख्यमंत्री ने दो अक्टूबर 2021 (गांधी जयंती) को लखनऊ में घोषणा की थी कि ऐसी बच्चियों की ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ कराई जाएगी या उसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी।

इस संबंध में तीन दिसंबर 2024 को शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव भेजा गया लेकिन अफसर किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सके। इसी क्रम में अभिभावकों की आय सीमा समेत अन्य बिन्दुओं पर विचार-विमर्श के लिए विशेष सचिव माध्यमिक कृष्ण कुमार गुप्त की अध्यक्षता में 20 अगस्त 2025 को हुई बैठक में तय हुआ कि आय सीमा का निर्धारण (छात्रवृत्ति/फीस प्रतिपूर्ति) समाजकल्याण विभाग की गाइडलाइन के आधार पर किया जाएगा।

फीस माफी या प्रतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत करने वाली बच्चियों/अभिभावकों को अन्य योजना से लाभ मिल रहा है या नहीं इसे फिल्टर करने के लिए समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति पोर्टल से माध्यमिक शिक्षा विभाग के इस घोषणा के क्रियान्वयन के लिए लागू की गयी योजना को एनआईसी के माध्यम से इंटीग्रेट भी करना होगा। 

वर्तमान में राजकीय/अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में ट्यूशन फीस नहीं है। वित्तविहीन विद्यालयों के संबंध में भी माध्यमिक शिक्षा विभाग की 2018 में निर्गत फीस नियमन की अधिसूचना के अनुसार ट्यूशन फीस नाम से कोई फीस नहीं ली जाती है बल्कि कम्पोजिट फीस की व्यवस्था निर्धारित है जिसमें समेकित रूप से सभी प्रकार की फीस सम्मिलित हैं। 

इन स्थितियों में घोषणा के क्रियान्वयन के लिए सुविचारित प्रस्ताव तैयार करने पर सहमति बनी है। शासन के उपसचिव संजय कुमार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव को नौ सितंबर को भेजे पत्र में फीस माफी/फीस प्रतिपूर्ति के संबंध में एक सपताह के अंदर संशोधित प्रस्ताव मांगा है।




मा० मुख्यमंत्री जी द्वारा दिनांक 02-10-2021 को जनपद लखनऊ में की गयी घोषणा संख्या YAN8/2021 (यदि शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा से नीचे जीवन यापन करने वाले किसी परिवार की एक से अधिक बच्चियां किसी विद्यालय, महाविद्यालय अथवा संस्था में अध्ययन कर रही है तो दूसरी बच्ची की ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ करायी जायेगी या उसकी प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जायेगी) के क्रियान्वयन के सम्बंध में।



Monday, July 28, 2025

यूपी में और महंगी हुई डाक्टरी की पढ़ाई, सरकार ने बढ़ाई निजी मेडिकल कालेजों की फीस, 1.5 से 5.50 लाख रुपये तक की वृद्धि

यूपी में और महंगी हुई डाक्टरी की पढ़ाई, सरकार ने बढ़ाई निजी मेडिकल कालेजों की फीस, 1.5 से 5.50 लाख रुपये तक की वृद्धि

एसी और नान एसी छात्रावास शुल्क में दस हजार रुपये तक की वृद्धि

31 निजी मेडिकल कालेज में से 17 को फीस बढ़ाने की दी गई अनुमति

विविध शुल्क 94,160 रुपये, जिसमें पंजीकरण से लेकर परीक्षा शुल्क तक


लखनऊ । प्रदेश के निजी मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई महंगी हो गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की फीस नियमन समिति ने सत्र 2025-26 में 31 निजी मेडिकल कालेजों में से 17 को सालाना फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इस सत्र में निजी कालेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को 1.55 लाख से 5.50 लाख रुपये अधिक देना पड़ेगा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी मेडिकल कालेजों के शिक्षण शुल्क में वृद्धि के अलावा छात्रावास व विविध शुल्क भी तय कर दिया है। एसी छात्रवास के लिए इस बार 2,02,125 रुपये सालाना शुल्क तय किया गया है, जबकि बीते सत्र में यह 1,92,500 रुपये था। इसी तरह नान एसी छात्रावास के लिए प्रत्येक छात्र को 1,73,250 रुपये प्रतिवर्ष देना होगा। बीते सत्र में यह शुल्क 1,65,000 रुपये था। इस शुल्क में मेस का खर्च भी जोड़ा गया है। यह भी हिदायत दी गई है कि छात्रावास के एक कमरे में सिर्फ दो ही छात्रों को रखा जाए।


फीस नियमन समिति ने विविध शुल्क 94,160 रुपये तय किया है। इसमें यूनिवर्सिटी पंजीकरण, विकास शुल्क, लाइब्रेरी, स्टूडेंट एसोसिएशन, जिम, स्पोर्ट्स, प्रवेश, परीक्षा शुल्क आदि को शामिल किया गया है। हास्पिटल, प्रयोगशाला आदि को शामिल करते हुए तीन लाख रुपये सिक्योरिटी राशि तय की गई है। इसे पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद वापस किया जाएगा। निजी मेडिकल कालेजों को यह भी हिदायत दी गई है कि वो शिक्षण शुल्क साल में एक बार ही लेंगे। किसी दशा में पांच वर्षों का शिक्षण शुल्क एकमुश्त नहीं जमा कराया जाएगा।


एमडी-एमएस करना भी हुआ महंगा

अब एमडी-एमएस करना भी महंगा हो गया है। फीस नियमन समिति ने एमडी-एमएस की फीस में 10 लाख रुपये सालाना तक की वृद्धि की है। जीएस मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल हापुड़ में पीजी की क्लीनिकल सीट के लिए 2025-26 के लिए अब 31,16,082 रुपये फीस देनी होगी। जबकि 2024-25 में इसी मेडिकल कालेज में एमडी-एमएस की एक साल की फीस 21,63,946 रुपये थी। टीएस मिश्रा मेडिकल कालेज लखनऊ में क्लीनिकल, पैथोलाजी और नान क्लीनिकल, तीनों ही वर्गों में फीस बढ़ा दी गई है। टीएस मिश्रा मेडिकल कालेज में वर्ष 2024-25 से 2025-26 में क्लीनिकल सीट में लगभग 10 लाख रुपये, पैथोलाजी में लगभग पांच लाख और नान क्लीनिकल सीट में लगभग तीन लाख रुपये बढ़ाए गए हैं।