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Thursday, July 9, 2020

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म, 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म,  2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड की ओर से हाईस्कूल के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 501 और इंटरमीडिएट के लिए 601 रुपये रखा गया है। इस शुल्क में स्कूल के प्रधानाचार्यों को फार्म भरने के लिए मात्र 25 पैसे (चवन्नी) दिया जा रहा है। स्कूलों को इसी 25 पैसे में बच्चों का ऑनलाइन फार्म भरवाना होगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि ऑनलाइन फार्म भरने के लिए साइबर कैफे अथवा ऑनलाइन काम करने वाली किसी एजेंसी की सेवा लेनी होगी, इसके लिए कम से कम प्रति फार्म दो रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में प्रधानाचार्यों ने सवाल उठाया है कि 25 पैसे में कैसे फार्म भरा जाएगा।


प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश कुमार शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्यों की ओर से हर साल आवेदन शुल्क में स्कूल का खर्च बढ़ाने की मांग की जाती है, सरकार और बोर्ड की ओर से आश्वासन भी मिलता है परंतु होता कुछ नहीं है। एक बार फिर से यूपी बोर्ड के परीक्षा शुल्क में स्कूलों को फिर से चवन्नी ही मिली है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रवक्ता एसपी तिवारी का कहना है कि यह कितना अव्यवहारिक है कि बोर्ड जब ऑफलाइन आवेदन होता था, उसी समय का आवेदन खर्च हमें दे रहा है जबकि फीस 200 से 500 रुपये तक पहुंच गई।


बोर्ड की ओर से माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश लेने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त रखी गई है। कोरोना संकट के काल में प्रधानाचार्यों ने पांच अगस्त तक शुल्क जमा करने और प्रवेश पूरा होने को अव्यवहारिक बताया है।
बच्चे स्कूल आ नही रहे हैं, उनके लिए स्कूल 31 जुलाई तक बंद हैं। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करना और प्रवेश लेना मुश्किल होगा। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क नहीं जमा करने पर छात्रों, अभिभावकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा।

Sunday, July 5, 2020

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल, शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे

छह जुलाई से सभी माध्यमिक शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे, 

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल


प्रदेश सरकार ने दिया निर्देश स्कूलों की फीस जमा कराएं अभिभावक, एकमुश्त देने में असमर्थ तो किश्तों में दे सकेंगे फीस


फीस न जमा होने पर न काटें बच्चे का नाम, ऑनलाइन क्लास से भी न रोका जाए।


इस दौरान एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, एक समय में ज्यादा अभिभावकों को नहीं बुलाया जाएगा





कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन से बंद चल रहे माध्यमिक विद्यालयों को शासन द्वारा छह जुलाई से खोलने का निर्णय लिया है। यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व संस्कृत बोर्ड सहित सभी बोर्डो से संबंधित विद्यालय सोमवार से खुल जाएंगे और शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इन विद्यालयों में पहुंचेगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्र छात्राओं के एडमीशन भी किए जाएंगे। हालांकि छात्र छात्राएं अभी विद्यालय नहीं आएंगे उनकी छुट्टी रहेगी। सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया होगी। अभी तक माध्यमिक विद्यालय बन्द चल रहे थे। सोमवार से माध्यमिक विद्यालय खुल जाएंगे और सभी विद्यालयों में शिक्षक भी पहुचेंगे। 


ऑनलाइन कक्षाएं नियमित

दिशा निर्देशों में बताया गया है कि छह जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। 10 जुलाई से नियमित ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाए। सभी कक्षा अध्यापक एवं विषय अध्यापक विद्यालय में ही रह कर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करेंगे। जिसकी मानिटरिंग जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से की जाएगी।


लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जो अभिभावक कोरोना संकट के कारण एकमुश्त फीस जमा कराने में असमर्थ हैं, वे स्कूल प्रबंधन के समक्ष किस्तों में फीस जमा कराने का प्रार्थना पत्र दें। विद्यालय प्रबंधन उस पर गंभीरता से विचार करेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करानी होगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा और न ही स्कूल से उसका नाम काटा जाएगा। फीस को लेकर अगर अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 


गौरतलब है कि वित्तविहीन विद्यालयों के संगठनों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि अभिभावक सरकार के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए फीस जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि राज्य व केंद्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक या बड़े संस्थान के कर्मचारी व अधिकारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के आदेश पर वित्तविहीन विद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों नियमित वेतन देना पड़ रहा है।

Friday, July 3, 2020

फीस जमा करने के दबाव पर अभिभावक नाराज, ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की मिल रही चेतावनी


लखनऊ। शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं फोन करके अभिभावकों को धमकाया जा रहा है कि फीस न दी गई तो बच्चे का नाम कट जाएगा। इसे लेकर अभिभावकों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे लगातार थोड़ी थोड़ी फीस जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद दबाव बनाया जा रहा है। राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईएससी से मान्यता प्राप्त करीब एक हजार निजी स्कूल चल रहे हैं। जुलाई से ही ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है। गुरुवार को हजरतगंज के एक निजी स्कूल से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए फोन किया गया और बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं। फीस न जमा कर पाने की स्थिति में स्कूल की ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की चेतावनी दी गई। वहीं इस पूरे मामले में अभिभावक संगठन के अभिषेक खरे की मानें तो सक्षम अभिभावक लगातार फीस जमा कर रहे हैं। उसके बावजूद स्कूल लगातार दबाव बना रहे हैं। जिससे अभिभावक काफी परेशान हैं।

लोहिया विविः पूरी फीस लेने का किया विरोध

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने पूरी फीस न लिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कोरोना महामारी के चलते काफी अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वे पूरी फीस देने में असमर्थ हैं। इसलिए फीस किश्तों में ली जाए। विवि प्रशासन ने 25 जून को सूचना जारी करके छात्रों से 1 से 4 जुलाई के बीच फीस जमा करने को कहा। छात्रों ने 28 जून को इसका विरोध करते हुए कुलपति को ईमेल से मांग पत्र भेजकर फीस किश्तों में लेने. यूटिलिटी चार्ज को नए सत्र की फीस में समायोजित करने की मांग की थी। मगर उनके मांग पत्र पर कुलपति ने विचार नहीं किया और 6 से 20 जुलाई के ही जमा करने व उसके बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं।

कोरोना संक्रमण की इस स्थिति में निजी स्कूलों को शासन के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। अन्यथा विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

Monday, June 29, 2020

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

Saturday, June 27, 2020

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Friday, June 26, 2020

नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


School Fees In Lockdown : अभिभावक संघ के अनुसार महज 2-3 घंटे की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पूरी फीस लेना गलत है। स्कूल एसोसिएशन की दलील है कि वे सिलेबस को अपने हिसाब से पूरा कराने की कर रहे हैं कोशिश



नई दिल्ली। कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के चलते स्कूल-कॉलेज मार्च से बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई में नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन क्लासेज (Online Classes) चलाई जा रही हैं। मगर इन्हीं के बीच फीस को लेकर स्कूल प्रशासन और पैरेंट्स के बीच ठन गई है। स्कूल प्रबंधन जहां समय से फीस भरने को कह रहा है। वहीं अभिभावकों की दलील है कि महज 2 से 3 घंटे के लिए वे पूरी फीस नहीं दे सकते हैं। इस बात को लेकर अभिभावक संघ (Parents Association) हल्लाबोल की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मसले का हल नहीं निकला तो वे 26 तारीख से आंदोलन करेंगे।


इस सिलसिले में उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) के फ़ीस वसूलने (School Fees In Lockdown) के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था। इसके बाद सरकार ने कहा था कि ऑनलाइन क्लास देने वाले प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। मगर सरकार के इस फैसले से अभिभावक संघ सहमत नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभिभावक संघ के अध्यक्ष राम कुमार का कहना है कि सिर्फ़ 2 घंटे की ऑनलाइन क्लास हो रही है। इसमें भी कई बार नेटवर्क की दिक्कत होती है, तो कभी लाइट चली जाती है या अन्य समस्याएं आ जाती हैं। इससे पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती है। ऐसे में ट्यूशन फीस के नाम पर पूरी फीस वसूली बिल्कुल गलत है। इसका विरोध किया जाएगा। मालूम हो कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों की ओर से लिए जा रहे फीस को लेकर गुरुग्राम में भी अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी। यहां के पैरेंट्स एसोसिएशन ने भी आंदोलन की धमकी दी थी।


अभिभावक संघ इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी में है। संघ के अध्यक्ष का कहना है कि वे फ़ीस के मुद्दे पर किसान यूनियन के साथ मिलकर प्रदेशभर में आंदोलन करेंगे। वे 26 तारीख से सड़कों पर उतरकर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। वहीं इस मसले पर स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि वे पूरे सिलेबस को 2-3 घंटे में पूरा कराने की कोशिश कर रहे हैं। वे स्कूल के सिलेबस के हिसाब से ही प्लानिंग कर रहे हैं। ऐसे में ट्यूशन फीस लेना गलत नहीं है। क्योंकि इसी के जरिए शिक्षकों को उनकी सैलरी दी जा सकेगी।