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Tuesday, April 14, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक कर रहे हैं इसका विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

उन शिक्षकों को मिली है छूट जिनकी बची है पांच साल की नौकरी


प्रयागराज। कक्षा एक से आठ तक  के सभी सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दस अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन की रिट याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में इस कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को ही चुनौती दी गई है, इसलिए इसमें कोई दम नहीं है।


इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) उत्तर प्रदेश की रिट याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने साफ कहा था कि याचिका की सारी प्रार्थनाएं एक सितंबर 2025 के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले से पहले ही तय हो चुकी हैं। एक सितंबर को शीर्ष अदालत ने आरटीई एक्ट के तहत गैर-माइनॉरिटी स्कूलों में टीईटी अनिवार्य माना था।

सेवारत पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।


दोनों फैसलों का मतलब

सुप्रीम कोर्ट ने अब दो बार (17 नवंबर 2025 और दस अप्रैल 2026) यूपी के शिक्षक संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों मामलों में कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ है कि आरटीई कानून और टीईटी की अनिवार्यता पर कोई ढील नहीं मिलेगी। प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों पर अब टीईटी पास करने का दबाव बढ़ गया है। जिन शिक्षकों की पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास न करने पर नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

Monday, September 29, 2025

पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा लाखों शिक्षकों का भविष्य, TET अनिवार्यता पर टिकी निगाहें

पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा लाखों शिक्षकों का भविष्य,  TET अनिवार्यता पर टिकी निगाहें


सुप्रीम कोर्ट में लंबित पुनर्विचार याचिकाओं ने देशभर के लाखों शिक्षकों की उम्मीदें जगा दी हैं। अदालत के हालिया आदेश के बाद अब सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य हो गया है, जिससे लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इस फैसले से नाराज कई शिक्षक संगठनों और राज्य सरकारों ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की हैं।  

सुप्रीम कोर्ट में बड़ा मामला  
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों ने 2017 में आरटीई अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती दी है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है तो वे जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। उनका तर्क है कि अचानक नियम बदलने से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।  

याचिका खारिज हुई तो लाखों शिक्षकों पर खतरा  
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है तो पूरे देश में लाखों शिक्षकों पर टीईटी पास करने का नियम लागू हो जाएगा। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही करीब 1,86,000 शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे। प्रभावित होने वालों में बीएड, बीपीएड और पुराने बीटीसी धारक शिक्षक शामिल हैं। वहीं मृतक आश्रित कोटे से चयनित इंटरमीडिएट योग्यता वाले शिक्षक भी इसके दायरे में आ जाएंगे।  

एनसीटीई की भूमिका सबसे अहम  
विशेषज्ञों के अनुसार, राहत तभी मिल सकती है जब एनसीटीई आरटीई अधिनियम की धारा 23(2) की स्पष्ट व्याख्या करे। यदि एनसीटीई पुराने शिक्षकों के लिए 2010 से पहले टीईटी पास करने की अनिवार्यता को हटा देता है तो याचिका में संशोधन की संभावना बनी रहेगी।  

पुनर्विचार याचिका की प्रक्रिया  
पुनर्विचार याचिकाएं पहले जजों के चेंबर में जाती हैं। यदि न्यायालय को इसमें नए तथ्य या साक्ष्य मिलते हैं तो इसे ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए लाया जाता है, अन्यथा चेंबर में ही खारिज कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिवक्ताओं को मौखिक बहस का अवसर नहीं मिलता और निर्णय पूरी तरह लिखित याचिका पर आधारित होता है।  

अक्टूबर तक आ सकता है फैसला  
कानूनी जानकारों का अनुमान है कि अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट इस पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला सुना सकता है। यदि याचिका खारिज होती है तो लाखों शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य हो जाएगा। वहीं, शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राहत नहीं मिलती तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने और अपनी नौकरी की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।




टीईटी प्रकरण में शिक्षक संगठन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, दाखिल की याचिका, अन्य राज्यों के शिक्षक संगठनों से संपर्क में हैं उत्तर प्रदेश के शिक्षक नेता

प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हो रहे प्रभावित

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (तिवारी गुट) के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि संगठन ने टीईटी मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की है। इस अवसर पर उनके साथ संरक्षक व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वासवराज गुरिकर व महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी भी उपस्थित थे।


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के निर्णय से प्रभावित शिक्षक भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने लगे हैं। प्रदेश सरकार के पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के बाद यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। जबकि कुछ और संगठन इसके लिए तैयारी कर रहे हैं।

यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने बताया कि बृहस्पतिवार को यह याचिका दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार के 2017 के उस संशोधन अधिनियम को वजह माना है जिसके माध्यम से वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए आज की न्यूनतम अर्हता आवश्यक की गई है। उन्होंने इस अधिनियम संशोधन को मौलिक अधिकारों के विरुद्ध तथा असंवैधानिक बताया है।


उन्होंने बताया कि प्रदेश के काफी शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी के लिए आवेदन ही नहीं कर सकते हैं। 2001 से पहले इंटर, बीटीसी के आधार पर नियुक्त काफी शिक्षक जिनकी सेवा अभी 5 वर्ष से अधिक है। मृतक आश्रित कोटे में अनुकम्पा के तहत इंटर शैक्षिक योग्यता के आधार पर नौकरी पाने वाले अध्यापक टीईटी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में पहले के नियुक्त शिक्षकों को इससे राहत दी जानी चाहिए।

संगठन के सतेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि यूटा इस लड़ाई को न्यायालय के साथ-साथ सड़क पर भी लड़ेगा। जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। बता दें कि टीईटी मामले में प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पीएम व शिक्षामंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की गई है।


पांच को दिल्ली में शिक्षक संगठनों की बैठक : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। इस मामले में आगे की रणनीति बनाने व दिल्ली में होने वाले आंदोलन की रूपरेखा तैय करने के लिए पांच अक्तूबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक बैठक बुलाई गई है। इसमें झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेश के शिक्षक संगठन व नेता शामिल होंगे। तब तक केंद्र सरकार इस मामले में सकारात्मक पहल नहीं करती है तो दिल्ली कूच की तिथि तय की जाएगी।


झारखंड सरकार नहीं जाएगी सुप्रीम कोर्ट: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। लेकिन अन्य राज्यों में इसे लेकर मतभेद है। झारखंड सरकार ने हाल ही में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका न दाखिल करने का निर्णय लिया है। सरकार ने कहा है कि अधिकतर मामलों में पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती है। शिक्षक टीईटी की तैयारी करें। उन्हें साल में दो बार टीईटी का अवसर मिलेगा।

Friday, July 25, 2025

स्कूलों के विलय के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

स्कूलों के विलय के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

25 जुलाई 2025
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सैकड़ों सरकारी स्कूलों के विलय के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस दीपंकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चूंकि मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा है इसलिए याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना चाहिए।

 तैय्यब खान सलमानी की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि सरकार के इस कदम से राज्य में हजारों से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सात जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को राहत देते हुए सैकड़ों स्कूलों के विलय के फैसले को हरी झंडी दी थी। 



स्कूल मर्जर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

21 जुलाई 2025
परिषदीय स्कूलों के विलय के विरोध में अब पीलीभीत के बच्चों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई है। कल्याणपुर गांव राठ पीलीभीत की दस वर्षीय छात्रा सेन्सी देवी, चांदपुर गांव राठ पीलीभीत की नौ वर्षीय कोमल और इसी गांव की सात वर्षीय मिली देवी ने अपने अभिभावकों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

 याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलील है कि बच्चों के मौलिक एवं संवैधानिक शिक्षा के अधिकार को बिना संसदीय स्वीकृति के बाधित नहीं किया जा सकता। यही नहीं सरकार के इस कदम को मनमाना भी बताया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका हो चुकी है।

मामला Sensi Devi बनाम State of U.P. (डायरी संख्या 38597/2025) है, जो स्कूल पेयरिंग मामले को लेकर है। Sensi Devi केस चीफ जस्टिस की पीठ में सूचीबद्ध है। 




स्कूल मर्जर के खिलाफ अब बच्चे पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

18 जुलाई 2025
प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों के विलय के विरोध में अब पीलीभीत के बच्चों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका हुई है। कल्याणपुर गांव राठ पीलीभीत की दस वर्षीय छात्रा सेन्सी देवी, चांदपुर गांव राठ पीलीभीत की नौ वर्षीय कोमल और इसी गांव की सात वर्षीय मिली देवी ने अपने अभिभावकों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

 याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलील है कि बच्चों के मौलिक एवं संवैधानिक शिक्षा के अधिकार को बिना संसदीय स्वीकृति के बाधित नहीं किया जा सकता। यही नहीं सरकार के इस कदम को मनमाना भी बताया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका हो चुकी है।



सुप्रीम कोर्ट पहुंचा स्कूलों के मर्जर का मामला, यूपी में हजारों स्कूल बंद करने के फैसले को जनहित याचिका के जरिए चुनौती

15 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.


उत्तर प्रदेश में 5 हजार सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की.सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा देते हुए कहा कि हालांकि यह सरकार का नीतिगत मामला है. याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप यादव ने कोर्ट से इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया.

सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग
उत्तर प्रदेश में 70 से कम छात्र संख्या वाले 5 हजार सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्णय को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया कि सरकार के इस कदम से राज्य में 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा देते हुए कहा कि हालांकि यह सरकार का नीतिगत मामला है. याचिकाकर्ता के वकील  प्रदीप यादव ने कोर्ट से इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया.


5,000 स्कूलों के मर्जर के फैसले को मिली थी हरी झंडी
पिछले हफ्ते सोमवार सात जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को राहत देते हुए 5,000 स्कूलों के मर्जर के फैसले को हरी झंडी दिखा दी थी. कोर्ट ने सरकार के 16 जून 2025 के शासनादेश की अधिसूचना के खिलाफ सीतापुर और पीलीभीत के 51 छात्रों की याचिका खारिज कर दी. अधिसूचना के मुताबिक राज्य के दूरदराज में स्थित जिन सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 70 या इससे कम छात्र हों उनका आसपास के अन्य विद्यालयों में विलय कर दिया गया.

Monday, July 7, 2025

परिषदीय स्कूलों के मर्जर के खिलाफ दाखिल हुई एक और याचिका, 9 जुलाई को होगी सुनवाई

 मर्जर मामले पर जनपद पीलीभीत की याचिका की सुनवाई दिनांक 9/7/2025 को कोर्ट no 32 जस्टिस चन्द्रधारी की बेंच में सीरियल नंबर 64 पर सुनिश्चित हो गयी है जिसमे इलाहाबाद हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अशोक खरे पक्ष रखेंगे!!



परिषदीय स्कूलों के मर्जर के खिलाफ दाखिल हुई एक और  याचिका

पीलीभीत निवासी याची बोले-विलय से मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार होगा प्रभावित, घर के पास नहीं मिल पाएगी शिक्षा


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों के मामला 1 विलय को लेकर 16 जून 2025 को जारी किए गए आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका पीलीभीत के बिलसंडा ब्लॉक के चांदपुर गांव निवासी सुभाष, यशपाल यादव और अत्येंद्र कुमार ने दाखिल की है। इनका कहना है कि यह आदेश न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की पहुंच से शिक्षा को दूर करता है।


सरकार के इस आदेश के तहत जिन प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की  संख्या कम है, उन्हें पास के उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में मिला दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नीति मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की भावना के विपरीत है। इससे छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को उनके निवास स्थान के पास गुणवत्ता युक्त शिक्षा नहीं मिल पाएगी।


 याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकार ने आदेश में अधिकारियों को अत्यधिक और मनमानी शक्तियां सौंप दी हैं। इससे वे बिना किसी स्पष्ट मापदंड के स्कूलों के विलय का निर्णय ले सकते हैं।


याचिकाकर्ताओं ने कहा कि चांदपुर गांव के बच्चों को अब एक किलोमीटर से भी अधिक दूर स्थित स्कूल में जाना पड़ेगा, जबकि वहां न तो पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं।


अदालत से अनुरोध किया गया है कि सरकार के आदेश को रद्द किया जाए। साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारी के 25 जून 2025 के जारी आदेश को निरस्त करें। चांदपुर जैसे गांवों के बच्चों को उनके स्थानीय स्कूलों में ही पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दें। 


इस मामले में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा), महानिदेशक (स्कूल शिक्षा), शिक्षा निदेशक (बेसिक), क्षेत्रीय सहायक शिक्षा निदेशक (बरेली मंडल), डीएम, मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी (बिलसंडा) पीलीभीत को पक्षकार बनाया गया है।


याचिका दाखिल हो चुकी है। केस स्टेटस पर सुनवाई की तिथि अभी दिखाई नहीं पड़ रही है। संभावना है कि दो या तीन दिन में सुनवाई हो सकती है। -कुष्माण्डेय शाही, परिषदीय अधिवक्ता

Sunday, October 1, 2023

बीएड वालों को हटाने पर अड़ गए डीएलएड प्रशिक्षु, याचियों ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को दिया प्रत्यावेदन, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में हो चुकीं याचिकाएं

बीएडवालों को हटाने पर अड़ गए डीएलएड प्रशिक्षु, याचियों ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को दिया प्रत्यावेदन, 
हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में हो चुकीं याचिकाएं



प्रयागराज : कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों की शिक्षक भर्ती में बीएड को मान्य करने वाली राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 28 जून 2018 की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद डीएलएड और बीएड अभ्यर्थियों में तल्खी बढ़ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में संभल के बीटीसी (अब डीएलएड) 2015 बैच के प्रशिक्षु राजवसु आर्य की भी याचिका संबद्ध थी।



पिछले महीने 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद राजवसु ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर बीएड चयनितों को बाहर करने की मांग की है। निदेशक एससीईआरटी लखनऊ और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को भेजे पत्र में परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से 69000 भर्ती के लिए पांच दिसंबर 2018 को जारी विज्ञापन रद्द करने की मांग की है। राजवसु का कहना है कि एनसीटीई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने की सूचना सभी राज्यों को भेज दी है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से न तो अब तक कोई अधिकारिक बयान आया और न ही कोई कार्रवाई की गई है।


हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में हो चुकीं याचिकाएं

प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों की 69000 सहायक अध्यापक भर्ती से बीएड अभ्यर्थियों को बाहर करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं हो चुकी है। इस भर्ती में मामूली अंकों से वंचित डीएलएड (बीटीसी) अभ्यर्थियों ने चयनित बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को छह महीने का अनिवार्य ब्रिज कोर्स न करवाने को लेकर पिछले दिनों हाईकोर्ट में याचिका की थी। उससे पहले शिक्षामित्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका की गई थी।

Thursday, August 24, 2023

CTET से बीएड धारकों को बेदखल करने की मांग, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, 6 सितंबर को होगी मामले की सुनवाई, 20 अगस्त को हुई थी परीक्षा

CTET से बीएड धारकों को बेदखल करने की मांग, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल, 6 सितंबर को होगी मामले की सुनवाई, 20 अगस्त को हुई थी परीक्षा


प्रयागराज | बीएड डिग्री धारकों की प्राथमिक स्कूल में नियुक्ति का विवाद थमने का नाम नही ले रहा। सुप्रीम के कोर्ट के निर्णय के बाद अब शिक्षक पात्रता परीक्षा से बीएड डिग्री धारकों को बेदखल करने की मांग वाली एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल हुई है।


याची शकील खान की ओर से दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत सुनवाई कर रही है। याची की अधिवक्ता तान्या पांडे ने दलील दी है कि बीएड डिग्री धारकों को प्राथमिक कक्षाओं में अध्यापन पर रोक लगाए जाने के बाद, उन्हे राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित होने वाली पात्रता परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


 जो बीएड डिग्री धारक 20 अगस्त को हुई पात्रता परीक्षा में शामिल हुए है, उनके परिणाम को रोक दिया जाएं। उन्होनें राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने की योग्यता में भी संशोधन की मांग भी की है।


राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद की ओर से पेश वकील एचएन पांडे ने याची की पोषणीयता पर सवाल खड़ा किया है। कहा की याची व्यथित पक्षकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बार चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अगर यह पाया जाता है कि अभ्यर्थी के पास आपेक्षित योग्यता नहीं है तो उसका चयन नहीं किया जायेगा। लेकिन इस स्तर पर पात्रता परीक्षा और उसके परिणाम से वंचित किया जाना उचित नहीं है।


लंबित याचिका, राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए निर्णय का का हवाला देते हुए याचिका को निस्तारित करने की मांग की।