यू-डायस रिपोर्टः 313 स्कूलों में छात्र नहीं, 7874 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
कहीं-कहीं एक शिक्षक संभाल रहे सैकड़ों की पढ़ाई
10 जुलाई 2026
लखनऊ : प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर 313 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, लेकिन इनमें 177 शिक्षक तैनात हैं। दूसरी ओर 7,874 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें पूरे विद्यालय की पढ़ाई सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। इन स्कूलों में कुल 4,85,071 छात्र पढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी यू-डायस प्लस 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में चुनौती सिर्फ स्कूल या शिक्षक बढ़ाने की नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के संतुलित और प्रभावी उपयोग की भी है।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 2,65,278 स्कूल, 4,27,03,359 छात्र और 16,42,764 शिक्षक हैं। प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) 26 है, यानी औसतन एक शिक्षक पर 26 छात्र हैं। हर स्कूल में औसतन छह शिक्षक और 161 छात्र हैं। हालांकि औसत तस्वीर संतोषजनक दिखती है, लेकिन जमीनी स्तर पर असमानता साफ नजर आती है। एक तरफ ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चे ही नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ हजारों स्कूलों में एक शिक्षक को सभी कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि उत्तर प्रदेश उन 12 राज्यों में शामिल है, जहां विद्यार्थियों की संख्या के सापेक्ष स्कूलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यानी स्कूलों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मेघालय भी इसी श्रेणी में हैं। इसके विपरीत महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में छात्रों की तुलना में स्कूल कम हैं। वहां प्रति स्कूल छात्रों का दबाव अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यू-डायस के ये आंकड़े बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए स्पष्ट संकेत हैं। जहां छात्र नहीं हैं, वहां स्कूलों और शिक्षकों के बेहतर उपयोग की योजना बनानी होगी। वहीं एकल शिक्षक वाले स्कूलों में जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती करनी होगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। केवल स्कूलों और शिक्षकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका संतुलित वितरण ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की कुंजी है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक में ड्राप आउट दर 0.3 और उच्च प्राथमिक में 6.7%, मंत्रालय ने हाल ही में जारी की है यूडायस प्लस रिपोर्ट
शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में प्राथमिक स्तर पर प्रदर्शन बेहतर
8 जुलाई 2026
लखनऊ। प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से कक्षा पांच तक में ड्राप आउट दर 0.3 प्रतिशत है। वहीं उच्च प्राथमिक में यह अभी भी 6.7 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 3.6 प्रतिशत के मुकाबले दोगुनी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से यू-डायस प्लस की हाल ही में जारी रिपोर्ट में यूपी का प्रदर्शन उच्च प्राथमिक के साथ-साथ माध्यमिक स्तर पर भी बेहतर नहीं है। माध्यमिक स्तर पर 8.4 प्रतिशत ड्राप आउट दर है जो कि राष्ट्रीय औसत 9.5 प्रतिशत से कम है। उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा छह से कक्षा आठ तक के ज्यादा छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। कक्षा पांच के बाद की कक्षाओं में स्कूलों में छात्रों को रोकने के लिए मजबूत रणनीति तैयार करनी होगी।
वहीं छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में भी उच्च प्राथमिक स्तर पर सुधार की जरूरत है। प्राथमिक स्तर पर एक शिक्षक पर करीब 19 छात्र हैं जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर पीटीआर एक शिक्षक पर 21 छात्र है और राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 17 है। माध्यमिक स्तर पर यूपी में एक शिक्षक पर 23 विद्यार्थी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 15 ही है।
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