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Monday, May 25, 2026

स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

 लखनऊपरिषदीय शिक्षकों ने एक बार फिर जनपदीय और अंतरजनपदीय तबादलों की मांग तेज कर दी है। वर्षों से दूरस्थ जिलों और ब्लाकों में तैनात शिक्षक अब सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि लगातार दूर-दराज क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद उन्हें घर के नजदीक तैनाती का मौका नहीं मिल रहा है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग अधिकारियों के तबादले की तैयारी तो कर रहा है, लेकिन परिषदीय शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर चुप्पी साधे हुए है। अब जनगणना कार्य का हवाला देकर तबादलों को टालने की बात कही जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।



तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं होने से परिषदीय शिक्षकों में नाराजगी, कई सालों से दूरस्थ जिलों व ब्लॉकों में कर रहे कार्य

नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों में जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में तबादला प्रक्रिया न शुरू होने से नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है दूरस्थ जिलों में कई वर्ष से सेवाएं दे रहे हैं लेकिन आकांक्षी जिलों में तैनात शिक्षकों के ट्रांसफर न होने से वह अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक जिले के अंदर दूरस्थ ब्लॉकों में तैनात हैं और अपने घर के पास तबादले की मांग कर रहे हैं।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो शिक्षक वर्षों से कार्यरत हैं उनको नगर क्षेत्र के विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित करना चाहिए। 2011 के बाद नगर क्षेत्रों में कोई समायोजन नहीं हुआ है। इससे नगर क्षेत्र में शिक्षकों की काफी कमी है। 

बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के विद्यालयों में 10 हजार पदों पर भर्ती की सूचना से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक निराश हैं। उन्होंने नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय इन पदों पर ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग की। अन्य शिक्षकों को भी वरिष्ठता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों को ब्लॉकों में नियुक्ति दी जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे एक ओर वर्षों से इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक व्यवस्था में भी सुधार आएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस ग्रीष्मावकाश में ही जनपदीय और अंतरजनपदी ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। शिक्षकों ने म्यूचुअल ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जब दो शिक्षक आपसी सहमति से स्थान परिवर्तन चाहते हैं और इसके लिए नियमों में प्रविधान भी मौजूद है, तब भी विभाग स्तर पर फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जा रही हैं। इसे लेकर अधिकारियों पर हठधर्मिता का आरोप लगाया जा रहा है।

Thursday, May 14, 2026

कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर का विवाद शुरू, जिलों में समायोजन सूची पर भी विवाद

हाईकोर्ट ने स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे, अगली सुनवाई 22 मई को होनी है

हाल ही में अमेठी और भदोही में जूनियर शिक्षकों का समायोजन

कौशाम्बी, बुलंदशहर, लखीमपुर में सीनियर को दूसरे स्कूल भेजा

प्रयागराज। हाईकोर्ट के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के समायोजन में एक और विवाद पैदा हो रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा के आदेश पर कुछ जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जूनियर शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया है जबकि कुछ अन्य जिलों के बीएसए ने सीनियर शिक्षकों को समायोजित कर दिया है। अब इसको लेकर शिक्षकों ने विवाद करना शुरू कर दिया है। सीनियर कह रहे हैं कि जूनियर शिक्षक का समायोजन होना चाहिए जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजने पर अड़े हैं।


चूंकि अपर मुख्य सचिव के चार मई के आदेश में यह साफ नहीं है कि जूनियर या सीनियर में किसका समायोजन होगा इसलिए इसे लेकर कानूनी विवाद होना तय है। इसमें सीनियर और जूनियर दोनों में से जिसका मनमाफिक स्कूल में समायोजन नहीं होगा, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सौरभकुमार सिंह व छह अन्य की ओर से दायर विशेष अपील में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को परिषदीय स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होनी है।

अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए से समायोजन करते हुए 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है। अब तक जिन जिलों में समायोजन हो चुका है उनमें अमेठी, बाराबंकी और भदोही में जूनियर शिक्षकों जबकि मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में सीनियर को दूसरों स्कूलों में भेजा जा रहा है। बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना गया है लेकिन यदि सरप्लस अध्यापक महिला है तो अधिक ठहराव वाले पुरुष शिक्षक को समायोजित करने जा रहे हैं। हरदोई में दो कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों सरप्लस शिक्षकों का डेटा मंगा लिया है। लखनऊ में अभी तक बीएसए ने सरप्लस में कनिष्ठ जाएगा या वरिष्ठ इसकी स्थिति तय नहीं की है।


जिले में शिक्षकों की समायोजन सूची पर भी विवाद

प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने मंगलवार को सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस दिखाया गया है। हालांकि सूची में आरटीई नियमों की खुलकर अनदेखी की गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 100 छात्रसंख्या तक विषयवार तीन शिक्षक होना अनिवार्य है। तमाम विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें सरप्लस नहीं दिखाया गया है। सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को सरप्लस किया गया है जहां छात्रसंख्या 100 से कम है और अध्यापक तीन से अधिक हैं। एनआईसी की वेबसाइट पर प्रदर्शित डाटा के संबंध में शिक्षकों को कोई आपत्ति हो तो जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन समिति के सदस्य सचिव बीएसए को 19 मई तक साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए ने साफ किया है कि 19 मई के बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।


Friday, February 27, 2026

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना अनिवार्य बताया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2023 के नए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के लागू होने के बाद पुराने नियमों के तहत मांगे गए सभी अधियाचन शून्य माने जाएंगे।


 कोर्ट ने शासन और चयन आयोग को भर्ती प्रक्रिया अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। कई जिलों के याचियों की याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। याचियों ने दलील दी कि वर्ष 2019-20 और 2021-22 में प्रधानाचार्यों के 884 और हेडमास्टरों के 729 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इसलिए इसे पुराने नियमों से ही पूरा किया जाना चाहिए।

इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में बदलाव का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। महज अधियाचन भेज देने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। जब प्रक्रिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी तो नई व्यवस्था को लागू करना पूरी तरह सांविधानिक है। 


Friday, January 16, 2026

परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

स्थानांतरण मिलने पर नए विद्यालय में हो जाते हैं कनिष्ठ।

इस कारण पदोन्नति मिलने के लाभ से हो जाते हैं वंचित।


प्रयागराजबेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक समय-समय पर जिले के बाहर यानी अंतरजनपदीय स्थानांतरण पाकर घर के नजदीक पहुंचने का मौका तो मिलता है, लेकिन वह वरिष्ठता के लाभ से वंचित हो जाते हैं। स्थानांतरण के क्रम में जिस विद्यालय में वरिष्ठता मिलती है, वहां सबसे कनिष्ठ हो जाते हैं। क्योंकि पदोन्नति मिलने की प्रक्रिया में सबसे नीचे हो जाते हैं। वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति उन्हें मिलेगी जो विद्यालय में सबसे पहले से होंगे।


शिक्षकों ने मांग उठाई है कि वरिष्ठता का निर्धारण उनकी पहली नियुक्ति तिथि से किया जाए। बड़ी संख्या में ऐसे महिला और पुरुष शिक्षक हैं, जो अध्यापन सेवा में पहले नियुक्त हुए, लेकिन स्थानांतरण लेकर घर के नजदीक आने के कारण कनिष्ठ हो गए। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था से उन शिक्षकों को नुकसान है, जो स्थानांतरण मिलने के बाद दूसरे जिले के विद्यालय में नियुक्त होते हैं।

नियुक्ति मिलने के समय ही तय हो कि जब नियुक्ति प्रदेश स्तर पर होती है और स्थानांतरण भी प्रदेश स्तर पर मिलता है तो वरिष्ठता भी मौलिक नियुक्ति तिथि से निर्धारित होनी चाहिए, न कि स्थानांतरित होकर दूसरे विद्यालय में जाने की तिथि से।

बताया गया कि वर्ष 47,000 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके पसंद के जनपद में भेजा गया। इसमें एक बार करीब 27,000 तथा एक और बार करीब 20,000 शिक्षकों के स्थानांतरण हुए। यह शिक्षक नए विद्यालय में सबसे कनिष्ठ हो गए। इसके कारण पदोन्नति की प्रक्रिया में सबसे नीचे रहने के कारण लाभ से वंचित हो जाएंगे। इस व्यवस्था को बदलकर पहली नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता निर्धारित किए जाने की मांग सरकार से की गई है।

Thursday, August 21, 2025

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्रास माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत अध्यापकों की ज्येष्ठता निर्धारण के सम्बन्ध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्रास माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत अध्यापकों की ज्येष्ठता निर्धारण के सम्बन्ध में


Friday, February 7, 2025

शिक्षक की नियुक्ति वरिष्ठता में प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं – हाईकोर्ट

शिक्षक की नियुक्ति वरिष्ठता में प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं – हाईकोर्ट 


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालेश्वर दास केस के फैसले के हवाले से कहा कि प्रोबेशन अवधि सफलता पूर्वक पूरी होने के बाद कर्मचारी मूल नियुक्ति तिथि से नियमित नियुक्त माना जाएगा। इस तरह याची से पहले रजनीश कुमार की नियुक्ति होने के कारण वह वरिष्ठ होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने डॉ योगेन्द्र पाल की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। साथ ही कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज नगला पूर्वी बदायूं के दो अध्यापकों के वरिष्ठता विवाद को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है।


याची का कहना था कि वह 13 सितंबर 1998 को लेक्चरर पद पर प्रोन्नत किया गया। विपक्षी को 20 अप्रैल 1998 से प्रोबेशन पर नियुक्ति दी गई। प्रोबेशन अवधि 20 अप्रैल 1999 को पूरी हुई। विपक्षी कार्यवाहक प्रधानाचार्य रजनीश के अधिवक्ता अनुराग शुक्ल का तर्क था कि याची 13 सितंबर 1998 को नियुक्त हुआ और विपक्षी 20 अप्रैल 1998 की तिथि से लेक्चरर नियुक्त हुआ। इसमें प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं होगी।