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Wednesday, September 9, 2026

विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे


लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

Sunday, July 26, 2026

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


 लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

Sunday, July 12, 2026

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक, परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी "माई हेल्थ वर्ल्ड" किताबें

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक,  परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी  "माई हेल्थ वर्ल्ड"  किताबें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय, केजीबीवी व मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों को अब मुख्य पढ़ाई के साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव व स्क्रीन टाइम के संतुलित प्रयोग की भी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से माई हेल्थ वर्ल्ड नाम से एक किताब तैयार की गई है। हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध यह किताब प्रदेश के विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई गई है।


इस किताब में छात्रों को संतुलित व पौष्टिक आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियों, योग व खेलकूद के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित व बेहतर प्रयोग, पर्याप्त नींद लेने के फायदे के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इसके बेहतर प्रयोग के निर्देश दिए हैं। अध्ययन सामग्री https://eatrightindia.gov.in/ पर भी उपलब्ध हैं। विद्यालयों में बैगलेस डे का आयोजन किया जाए।

Tuesday, June 23, 2026

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी 

अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल, शिक्षक हैं 10 हजार


लखनऊ : मदरसों में छात्रों के नामांकन की गहन जांच से फर्जी नामांकन कम हो रहे या मुस्लिम अभिभावक बच्चों को मदरसों में पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे ? साल दर साल मदरसों में छात्रों की संख्या घटने से यह सवाल उठ रहा है। 10 वर्ष पहले प्रदेश के मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से अधिक थी, जो घटकर अब 63 हजार रह गई है।


दूसरी तरफ, पिछले वर्ष शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगने से पहले तक उनकी संख्या लगातार बढ़ती रही। वर्तमान में मदरसों में तकरीबन 10 हजार शिक्षक हैं।

प्रदेश में सरकार की अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल हैं। इनमें फर्जी छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के निर्देश दिए। जांच में मानकों व नियमों के उल्लंघन पर 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोका गया लेकिन 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है। सभी में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया गया लेकिन छात्रों की संख्या में गिरावट जारी है। 

मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही स्वीकारती हैं कि छात्रों की संख्या घट रही है। कहती हैं कि कामिल, फाजिल (स्नातक) डिग्री की मान्यता नहीं होना भी इसका एक कारण है। वह कहती हैं कि संभवतः जो अभिभावक बच्चों को स्नातक, परास्नातक तक पढ़ाना चाहते हैं, वह मदरसों में दाखिले से बच रहे हैं क्योंकि मुंशी व मौलवी की पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए इस बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। कामिल, फाजिल की डिग्री को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक करार दे चुका है।

मदरसा सुधार आंदोलन के तलहा अंसारी का कहना है कि अभिभावक यह समझ रहे हैं कि प्रतिस्पर्धा के दौर में बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रोजगार नहीं मिल सकता है, इसलिए बच्चों को मदरसों के बजाय मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अंसारी का यह भी मानना है कि पहले मदरसों में छात्रों की फर्जी संख्या दर्ज करके अनुदान हड़पा जाता था। उन्होंने 2016 की मदरसा नियमावली के बाद अनुदान और छात्रों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए सीबीआइ जांच की मांग की है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की गई है। पिछले वर्ष तक शिक्षकों की भर्ती में मनमानी का जिक्र करते हुए बताते हैं कि लखनऊ के एक मदरसे में छात्र तो 429 ही हैं लेकिन शिक्षक 611 देवरिया के मदरसे में 240 छात्र हैं लेकिन शिक्षक 14 हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात है।

Wednesday, May 27, 2026

बच्चों को मोबाइल से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का स्नेहिल संदेश, गर्मी की छुट्टियों पर 'सीएम योगी' की बच्चों को पाती

बच्चों को मोबाइल से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का स्नेहिल संदेश, गर्मी की छुट्टियों पर 'सीएम योगी' की बच्चों को पाती


उत्तर प्रदेश में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के नाम एक बेहद भावुक खुला खत लिखा है. 'योगी अंकल' ने बच्चों से इन छुट्टियों में मोबाइल और रील्स की स्क्रीन से दूर रहने, नानी-दादी के घर जाकर संस्कार सीखने और इस वैकेशन को पूरी तरह 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने की बड़ी अपील की है.


लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बिल्कुल अलग और संवेदनशील अंदाज में नजर आए हैं. बच्चों के 'योगी अंकल' ने आज, 25 मई 2026 को राज्य के स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों के नाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद भावुक और प्रेरक खुला खत साझा किया है. इस खत को 'योगी की पाती' नाम दिया गया है, जिसमें उन्होंने बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का कड़ा और स्नेहिल संदेश दिया है. 


'मेरे प्यारे बच्चों... किताबों से दोस्ती करो, नई भाषा सीखो' मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए लिखा कि स्कूल की व्यस्त दिनचर्या और परीक्षाओं के परिणाम के बाद मिलने वाला यह अवकाश केवल खाली बैठने के लिए नहीं, बल्कि कुछ नया तलाशने का समय है. सीएम योगी ने लिखा:

"मेरे प्यारे बच्चों, गर्मी की छुट्टियां आप सभी के लिए आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं. व्यस्त रूटीन से मुक्ति मिलते ही मन कुछ नया सीखने के लिए उत्सुक हो जाता है. यह समय अपनी रुचियों को पहचानने, अच्छी किताबों से दोस्ती करने, फोटोग्राफी, पेंटिंग, कुकिंग, संगीत और बागवानी जैसे शौक विकसित करने का है."

उन्होंने किशोरों और युवाओं से विशेष अपील की कि वे इस खाली समय का उपयोग कोई नई भाषा सीखने या कोई नया हुनर (Skill Acquisition) हासिल करने की प्रक्रिया में करें. 


पेरेंट्स से अपील: 'बच्चों को ले जाएं नानी-दादी के घर' खत के दूसरे हिस्से में सीएम योगी ने अभिभावकों (Parents) को सीधे संबोधित करते हुए आज के डिजिटल दौर की एक बड़ी कमी पर चोट की. उन्होंने लिखा कि आज के बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियों से दूर होते जा रहे हैं.

संस्कारों से जुड़ाव: सीएम ने पेरेंट्स से कहा कि इन छुट्टियों में बच्चों को उनके ननिहाल और ददिहाल जरूर लेकर जाएं, ताकि वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकें और हमारे पारिवारिक मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझ सकें.

प्रकृति से दोस्ती: उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को मिट्टी, पानी और वृक्षों का महत्व समझाएं. बच्चों के हाथों से पौधे लगवाएं और उन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी बच्चों को ही सौंपें.

छुट्टियों को 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाएं पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश से एक बड़ा संकल्प लेने का आह्वान किया है. उन्होंने लिखा:

'मेरी आप सभी से अपील है कि इन छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का संकल्प लें. आप कहीं भी घूमने जाएं या पिकनिक पर जाएं, हमेशा कपड़े या जूट के थैलों का ही उपयोग करें. प्लास्टिक का कचरा कहीं भी न फेंकें. आज के ये छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े बदलावों का आधार बनते हैं.' 

सीएम ने बच्चों को उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक संपदा से रूबरू कराने के लिए उन्हें दुधवा नेशनल पार्क, चूका बीच और कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसे प्राकृतिक स्थलों पर ले जाने का भी सुझाव दिया.

Monday, May 11, 2026

बच्चों को तनाव से बचने के गुर भी सिखाएंगे स्कूल, मंत्रालय जारी करेगा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देश, शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

बच्चों को तनाव से बचने के गुर भी सिखाएंगे स्कूल, मंत्रालय जारी करेगा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देश, शिक्षक होंगे प्रशिक्षित

परीक्षा परिणाम सहित साइबर बुलिंग की बढ़ती घटनाएं बच्चों के बढ़ते तनाव की मानी जा रही हैं मुख्य वजह


नई दिल्ली: खेलने, कूदने और पढ़ने की उम्र में बच्चों में तनाव के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्कूल उन्हें पढ़ाने के साथ तनाव मुक्त रहने की भी सीख देंगे। शिक्षा मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों की मदद से बच्चों को तनाव से बचाने के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन पर काम शुरू किया है। इसमें स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे पर न सिर्फ नजर रखी जाएगी, बल्कि स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रत्येक शिक्षक को भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण की मदद से शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय ऐसे बच्चों को पहचान सकेंगे, जिन्हें तनाव हो रहा है। इसके साथ ही काउंसलिंग और मेडिटेशन के जरिए उनके तनाव को भगाने में मदद करेंगे।


शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने इस गाइडलाइन के जून के पहले हफ्ते तक आने की उम्मीद जताई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में पढ़ाई और परीक्षा परिणामों से जुड़े तनावों के साथ ही साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट गेम, मैसेजिंग एप्स और अन्य इंटरनेट माध्यमों के जरिए भी बच्चों के तनाव ग्रस्त होने के मामले बढ़े हैं। ऐसे में तैयार की जा रही नई गाइडलाइन में इन सभी पहलुओं से बच्चों को बचाने पर फोकस किया गया है। खासकर कोविड के बाद से स्कूलों में मोबाइल या अन्य डिजिटल माध्यमों से पढ़ाने को बढ़ावा दिया गया है, जिससे बच्चों के बीच इसका इस्तेमाल तो बढ़ा है, लेकिन इसके सुरक्षित प्रयोग को लेकर बच्चों को सतर्क न करने से वे गेमिंग या इंटरनेट मीडिया के अन्य एप्स में फंस गए हैं, जो उनके तनाव बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।


तनाव के बढ़ते मामलों को लेकर नीति आयोग ने भी उठाए थे सवाल

मंत्रालय ने यह पहल ऐसे समय शुरू की है, जब नीति आयोग ने भी हाल ही में बच्चों में तनाव बढ़ने के मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। साथ ही कहा कि बच्चों को इससे बचाने के लिए काउंसलर नियुक्त करने की पहल पर भी शैक्षणिक संस्थानों ने काम नहीं किया। वहीं तनाव ग्रस्त बच्चों को पहचानने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया। यही वजह है कि तैयार की जा रही नई गाइडलाइन में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया है। इस पहल में स्कूलों में बच्चों के माता-पिता और संरक्षकों के साथ लगातार बैठकों को शामिल किया जा रहा है ताकि बच्चों में देखे जाने वाले बदलावों पर चर्चा की जा सके।