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Saturday, September 26, 2026

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे, चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे,  चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

लखनऊ। बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग की आदत कम करने और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नया कदम उठाएगा। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब टॉप-5 स्टूडेंट रीडर चुने जाएंगे। इसके अलावा हर विद्यालय में 'रीडर ऑफ द वीक' भी चुना जाएगा। स्कूलों में समाचार पत्र और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की समीक्षा बैठक हुई। इसमें उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, आत्मरक्षा, कला और क्राफ्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में दक्ष बनाने के लिए प्रोफेशनल कोच की मदद ली जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को खेलों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र खरीदने के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी नियमित रूप से समाचार पत्र और किताबें पढ़ें। बैठक में बताया गया कि 25,790 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं।

मंत्री ने इनके प्रभावी उपयोग के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए। छात्रों के संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और शारीरिक विकास की निगरानी के लिए समग्र प्रगति पत्र लागू किया गया है, जिसे अपार आईडी और प्रेरणा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है।

Monday, September 21, 2026

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद, मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद,  मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

21 सितंबर 2026
प्रयागराज। माध्यमिक विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता कराई जाएगी। इसमें विद्यार्थी मंत्री, सांसद और विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। विपक्ष के विद्यार्थी सामाजिक मुद्दे पर सवाल उठाएंगे। मंत्री व सांसद बने विद्यार्थी उसका जवाब देंगे। अध्यक्ष की भूमिका में रहने वाले विद्यार्थी सदर की कार्रवाई संचालित करेंगे। विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव मिलेगा।

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने डीआईओएस को नोडल अधिकारी नामित किया है। विद्यालयों को राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत पोर्टल पर किशोर सभा के तहत पंजीकरण कराना होगा। एक सप्ताह तक विद्यार्थियों को प्रतियोगिता का अभ्यास कराया जाएगा ताकि वह बेहतर ढंग से प्रश्न पूछ सकें। विद्यार्थी सवालों का बेहतर जवाब दे सकें।

सदन की कार्रवाई संचालित करने की प्रक्रिया शिक्षक विद्यार्थियों को बताएंगे। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों तर्क-वितर्क करने की समझ विकसित होगी। अभिव्यक्ति कौशल में भी निखार आएगा। 



विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

9 सितम्बर 2026
लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

Sunday, September 20, 2026

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

विभिन्न विभागों में तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक 


लखनऊ। राज्य सरकार यूपी के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य हितों को देखते हुए माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता नीति बना रही है। इससे किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा। इनके साथ स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराई जाएगी। किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की शनिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर मंथन किया गया। सरकारी व एडेड विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन दिए जाएंगे।


भ्रांतियां दूर करने पर जोर

विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन के साथ किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा और जागरूकता सत्रों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। किशोरियों को इसके बारे में जरूरी जानकारी देने और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी व्यवहार को बढ़ावा देने के साथ इससे जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने पर भी जोर रहेगा।

Sunday, July 26, 2026

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


 लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

Sunday, July 12, 2026

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक, परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी "माई हेल्थ वर्ल्ड" किताबें

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक,  परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी  "माई हेल्थ वर्ल्ड"  किताबें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय, केजीबीवी व मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों को अब मुख्य पढ़ाई के साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव व स्क्रीन टाइम के संतुलित प्रयोग की भी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से माई हेल्थ वर्ल्ड नाम से एक किताब तैयार की गई है। हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध यह किताब प्रदेश के विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई गई है।


इस किताब में छात्रों को संतुलित व पौष्टिक आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियों, योग व खेलकूद के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित व बेहतर प्रयोग, पर्याप्त नींद लेने के फायदे के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इसके बेहतर प्रयोग के निर्देश दिए हैं। अध्ययन सामग्री https://eatrightindia.gov.in/ पर भी उपलब्ध हैं। विद्यालयों में बैगलेस डे का आयोजन किया जाए।

Tuesday, June 23, 2026

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी

मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी 

अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल, शिक्षक हैं 10 हजार


लखनऊ : मदरसों में छात्रों के नामांकन की गहन जांच से फर्जी नामांकन कम हो रहे या मुस्लिम अभिभावक बच्चों को मदरसों में पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे ? साल दर साल मदरसों में छात्रों की संख्या घटने से यह सवाल उठ रहा है। 10 वर्ष पहले प्रदेश के मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से अधिक थी, जो घटकर अब 63 हजार रह गई है।


दूसरी तरफ, पिछले वर्ष शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगने से पहले तक उनकी संख्या लगातार बढ़ती रही। वर्तमान में मदरसों में तकरीबन 10 हजार शिक्षक हैं।

प्रदेश में सरकार की अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल हैं। इनमें फर्जी छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के निर्देश दिए। जांच में मानकों व नियमों के उल्लंघन पर 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोका गया लेकिन 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है। सभी में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया गया लेकिन छात्रों की संख्या में गिरावट जारी है। 

मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही स्वीकारती हैं कि छात्रों की संख्या घट रही है। कहती हैं कि कामिल, फाजिल (स्नातक) डिग्री की मान्यता नहीं होना भी इसका एक कारण है। वह कहती हैं कि संभवतः जो अभिभावक बच्चों को स्नातक, परास्नातक तक पढ़ाना चाहते हैं, वह मदरसों में दाखिले से बच रहे हैं क्योंकि मुंशी व मौलवी की पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए इस बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। कामिल, फाजिल की डिग्री को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक करार दे चुका है।

मदरसा सुधार आंदोलन के तलहा अंसारी का कहना है कि अभिभावक यह समझ रहे हैं कि प्रतिस्पर्धा के दौर में बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रोजगार नहीं मिल सकता है, इसलिए बच्चों को मदरसों के बजाय मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अंसारी का यह भी मानना है कि पहले मदरसों में छात्रों की फर्जी संख्या दर्ज करके अनुदान हड़पा जाता था। उन्होंने 2016 की मदरसा नियमावली के बाद अनुदान और छात्रों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए सीबीआइ जांच की मांग की है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की गई है। पिछले वर्ष तक शिक्षकों की भर्ती में मनमानी का जिक्र करते हुए बताते हैं कि लखनऊ के एक मदरसे में छात्र तो 429 ही हैं लेकिन शिक्षक 611 देवरिया के मदरसे में 240 छात्र हैं लेकिन शिक्षक 14 हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात है।