3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी
लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।
हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।
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