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Thursday, November 2, 2023

संपूर्णानंद संस्कृत विवि को मिलेगा राष्ट्रीय दर्जा, बदलाव के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने शुरू की पहल

संपूर्णानंद संस्कृत विवि को मिलेगा राष्ट्रीय दर्जा, बदलाव के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने शुरू की पहल


विश्वविद्यालय के अभ्युदय और उत्थान के लिए कुलपति और राज्यमंत्री ने की चर्चा

जल्द शुरू होगा ज्योतिष परामर्श केंद्र, काशी के स्वरूप में होंगे द्वार


वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय फलक तक ले जाने की केंद्र और प्रदेश सरकार ने पहल शुरू कर दी है। जल्द ही विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की संस्था का दर्जा भी मिल जाएगा, हालांकि यह राज्य सरकार से ही संबद्ध रहेगा। इससे विश्वविद्यालय में अनुदान और वित्तीय समस्या का समाधान आसानी से हो सकेगा। बुधवार को | राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने इस विषय के साथ ही विकास के मुद्दों लपति से चर्चा की। 


राज्यमंत्री ने बताया कि चारों प्रवेश द्वार को काशी के स्वरूप में निर्मित किया जाएगा। जल्द ही ज्योतिष परामर्श केंद्र की शुरुआत होगी, इससे जरूरतमंदों को सही ज्योतिषीय परामर्श मिल सकेगा। विधायक निधि से मिले 25 लाख रुपये से इसका निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा। परिसर के विकास में जो भी बाधाएं हैं उसे दूर करने के लिए अध्ययन करने के बाद कार्ययोजना तैयार की गई है।


कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा और कुलसचिव राकेश कुमार के साथ मंथन के दौरान राज्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को स्वच्छ पेयजलापूर्ति के लिए आरओ मशीन, सीवर लाइन को ठीक कराने के साथ ही छात्रावासों में स्मार्ट डस्टबिन रखे जाएंगे। सड़कों का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। 


10 पाठ्यक्रमों से जुड़े सात सौ अभ्यथी

राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के स्टूडियो का निरीक्षण किया। बताया कि केंद्र से संचालित होने वाले 10 पाठ्यक्रमों में देश भर से 700 आवेदन पंजीकृत हो चुके हैं। पाठ्यक्रम के माध्यम से घर बैठे ज्योतिष, कर्मकांड, वास्तु और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया जा सकेगा। इसकी ऑनलाइन कक्षाएं जल्द चलेंगी।


Friday, April 15, 2022

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज से होंगे परीक्षा के लिए आवेदन

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज से होंगे परीक्षा के लिए आवेदन


वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रथमा, पूर्वमध्यमा, उत्तरमध्यमा, शास्त्री, आचार्य कक्षाओं में वार्षिक परीक्षाओं के लिए शुक्रवार से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। छात्र एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ सात जून तक परीक्षा आवेदन भर सकेंगे। परीक्षा आवेदन ऑनलाइन भरने की शुरूआत 17 अप्रैल से होगी और अंतिम तिथि 14 मई निर्धारित की गई है।


परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी ने बताया कि छात्र 15 अप्रैल से चालान भर सकते हैं और 16 से शुल्क जमा कर सकते हैं। चालान भरने की अंतिम तिथि 12 मई और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 13 मई है। महाविद्यालयों द्वारा भरे हुए परीक्षा आवेदन पत्र भेजने की अंतिम तिथि 15 मई है। इसके बाद छात्र दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 25 मई तक चालान भर सकते हैं


एक हजार रुपये विलंब शुल्क  के साथ सात जून तक छात्र भर सकेंगे परीक्षा फार्म और 26 मई तक दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ शुल्क जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन भी दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 27 मई तक जमा कर सकते हैं। इसके बाद पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 31 मई तक चालान भर सकते हैं। पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ एक जून तक शुल्क और पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ दो जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ पांच जून तक चालान, छह जून तक शुल्क और सात जून तक परीक्षा फार्म भर सकेंगे।

Thursday, February 3, 2022

शास्त्री की डिग्री के मसले पर प्रधानमंत्री से मिलेंगे 18 संस्कृत विवि के कुलपति

शास्त्री की डिग्री के मसले पर प्रधानमंत्री से मिलेंगे 18 संस्कृत विवि के कुलपति

10 मार्च के बाद 18 कुलपतियों का प्रतिनिधिमंडल करेगा मुलाकात


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वाराणसी। सेना भर्ती की सूची से शास्त्री की डिग्री को बाहर करने पर देश भर के संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति एकजुट हो गए हैं। छात्र हित में 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने ऑनलाइन मीटिंग कर प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।

प्रतिनिधिमंडल 10 मार्च के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर छात्रहित में त्वरित कार्रवाई का अनुरोध करेगा। शुक्रवार को कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केई देवनाथन की अध्यक्षता में बैठक हुई। प्रो. देवनाथन ने कहा कि शास्त्री की उपाधि बीए तथा आचार्य की एमए के समकक्ष है। सेना ने धर्म गुरु पद के लिए संस्कृत विश्वविद्यालयों की शास्त्री की डिग्री को अमान्य कर दिया है। संपूर्णानंद के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की पहल पर बैठक से छात्रों की भी उम्मीद जगी है।



सेना भर्ती की योग्यता सूची से संस्कृत विवि बाहर

मध्यमा स्तर का नाम भी गायब, कुलपति ने लिखा पत्र

देश के 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बुलाई बैठक


वाराणसी : धर्म गुरु पद के लिए भारतीय सेना संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की शास्त्री की डिग्री को स्नातक के समकक्ष नहीं मान रही है। सेना भर्ती महानिदेशालय बी (ए) की ओर से जारी योग्यता निर्धारण की सूची से देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों के छात्रों को बाहर कर दिया है।


प्रकरण को कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बुधवार को जूम एप पर देश के 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की आनलाइन बैठक बुलाई थी। 


इस दौरान कुलपति ने कहा कि रक्षा मंत्रलय की ओर से जारी योग्यता सूची में बेंगलुरु, चेन्नई, दानापुर, जबलपुर, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, पुणो, शिलांग, नेपाल, दिल्ली सहित अन्य जोनों के माध्यमिक विद्यालयों के नाम हैं। वहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मध्यमा स्तर का नाम गोल है, जबकि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में अब भी मध्यमा स्तर की परीक्षा कराता है।


 हाईस्कूल का सर्टिफिकेट पूर्व मध्यमा व इंटर का उत्तर मध्यमा के नाम पर अंकपत्र व प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। बताया बुधवार को इस आशय का (भर्ती बोर्ड) सेना के महानिदेशक को एक पत्र प्रेषित किया जा रहा है जिससे कि सेना द्वारा अपने अध्यादेश मे संशोधन कर सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों सहित काशी हंिदूू विश्वविद्यालय, वाराणसी के विद्या धर्म दर्शन संकाय की शास्त्री उपाधि को भी विज्ञापन मे शामिल किया जाए। इसे देखते हुए सेना के महानिदेशक को एक पत्र भेजा गया है।

Sunday, January 23, 2022

संपूर्णानंद विवि : शास्त्री की जगह अब मिलेगी बीए की डिग्री व पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल व उत्तर मध्यमा को इंटरमीडिएट की उपाधि प्रदान की जाएगी

संपूर्णानंद विवि :  शास्त्री की जगह अब मिलेगी बीए की डिग्री व पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल व उत्तर मध्यमा को इंटरमीडिएट की उपाधि प्रदान की जाएगी

संपूर्णानंद में परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया निर्णय



वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय शास्त्री उपाधि प्राप्त करने वाले अब बीए स्नातक कहे जाएंगे। विश्वविद्यालय ने शास्त्री उपाधि पर अब बीए भी अंकित करने का निर्णय लिया है। शास्त्री उपाधि धारकों को स्नातक कहा जाएगा। इसके साथ-साथ पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल व उत्तर मध्यमा को इंटरमीडिएट की उपाधि प्रदान की जाएगी। शुक्रवार को परीक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।


कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की उपाधियों पर विचार विमर्श हुआ।



पूर्व मध्यमा को हाईस्कूल और उत्तर मध्यमा को इंटर की उपाधि

सेना में धर्म गुरु की परीक्षा से शास्त्री के छात्रों को वंचित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इसके पूर्व आचार्य की उपाधि में एमए जोड़ा जा चुका है। इसके तक साथ ही जो विद्यार्थी सेना में धर्मगुरु के लिए समकक्षता का प्रमाणपत्र कुलसचिव मांग रहे हैं उनको विश्वविद्यालय प्रमाणपत्र भी प्रदान करेगा। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि मेरे लिए संस्था और विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है। 


संस्कृत के अभ्युदय से ही भारतीय संस्कृति का अभ्युदय संभव है। शास्त्री की उपाधि पर विवाद के बाद कुलपति ने गत दिनों रक्षा मंत्री डॉ. राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी और इस समस्या का स्थायी निराकरण करने का अनुरोध किया था। इसके साथ ही सेना के प्रमुख, सेना मुख्यालय चयन बोर्ड को लिखित पत्र व ईमेल भी भेजा था। रक्षा मंत्री ने अप्रैल इसके स्थायी निराकरण की बात कही थी। इस दौरान डॉ. ओमप्रकाश, परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. हीरककान्ति चक्रवर्ती, डॉ. विजय कुमार पांडेय एवं विजय मणि त्रिपाठी रहे।