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Wednesday, April 1, 2026

भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश

भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी,  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश


नई दिल्ली। बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही सोशल मीडिया तक पहुंच दी जाए और इसके लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए।


आयोग के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के स्वतंत्र उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो और 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सीमित और निगरानी के साथ उपयोग की छूट दी जाए। आयोग का मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा की जा सकेगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिक जोखिम वाले फीचर्स पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही, बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

आयोग ने उम्र सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे तय नियमों के अनुसार ही सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एक केंद्रीय नियामक संस्था के गठन का सुझाव दिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बढ़ते डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए इस तरह के नियम समय की मांग हैं। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Saturday, March 7, 2026

आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

25% हैं राज्य की आबादी में 15 साल से कम उम्र के बच्चे

12 लाख छात्रों के लिए की जाएगी 'एआई ट्यूटर' की व्यवस्था


अमरावती/बेंगलुरु । आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में राज्य सरकारों ने नाबालिगों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। आंध्र प्रदेश में 13 साल, जबकि कर्नाटक में 16 साल से कम उम्म्र के बच्चे सोशल मीडिया नहीं चला सकेंगे। आंध्र प्रदेश ने 90 दिन (तीन माह) के भीतर नियम लागू करने की बात कही है, वहीं कर्नाटक ने अभी प्रतिबंध लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की है। प्रतिबंध लागू होने पर ये दोनों राज्य ऐसा करने वाले देश के पहले राज्य बन जाएंगे।


शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने विधानसभा में बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों पर मोबाइल का इस्तेमाल करने से होने वाले बुरे असर को रोकने के मकसद से प्रतिबंध लागू किया जाएगा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्ववविद्यालयों में ड्रग्स का इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की भी बात कही। सिद्धरमैया ने कहा कि छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण की चिंता के साथ सरकार जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा स्कूल-कॉलेजों में काउंसिलिंग सेंटर भी स्थापित करेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रतिबंध कबसे लागू होगा।

दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा। कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकें। उन्होंने बताया कि 90 दिन के भीतर प्रदेश में यह प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

उम्र 16 वर्ष तक करने पर चल रहा विचारः आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार इस पहलू पर विचार कर रही है कि आयुसीमा 13 ही रखी जाए या इसे बढ़ाकर 16 वर्ष किया जाए। बताया कि तीन माह में अंतिम निर्णय होते ही प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

जल्द तैयार होगी विशेष योजना
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि स्कूलों, कॉलेजों और घरों में बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक को लेकर नियमावली बनाई जाएगी। कहा कि इसे लेकर एक विशेष योजना बनाई जा रही है। अंतिम रूप दिए जाते ही इसकी जानकारी दी जाएगी।

संसद में भी जताई जा चुकी चिंताः जनवरी जनवरी में संसद में पेश किए गए केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वे में भी बच्चों में बढ़ रही डिजिटल लत को लेकर चिंता जताई गई थी।



एआई एआई डिजिटल डिजिटल ट्यूटर ट्यू

बेंगलुरु। शिक्षा में एआई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी धारवाड़ की मदद से 'सेल्फ लर्निंग डिजिटल ट्यूटर' सुविधा दी जाएगी। कक्षा आठ से 12वीं तक के करीब 12.28 लाख छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर सरकार पांच करोड़ रुपये खर्च करेगी।


एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। देश में 75 करोड़ मोबाइल फोन हैं, जबकि एक अरब के करीब इंटरनेट उपयोगकर्ता है। मेटा के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है।


समान रूप से लागू होनियम : मेटा

नई दिल्ली। कर्नाटक द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद, मेटा ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों से किशोर कम सुरक्षित, और अनियमित साइटों की ओर जा सकते हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकारों को सावधानी बरतनी चाहिए। मेटा ने कहा कि वह प्रतिबंधों का पालन करेगी। मेटा ने कहा कि किशोर हर हफ्ते 40 ऐप इस्तेमाल करते है, इसलिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को निशाना बनाने से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी।


दुनियाभर में कई देश कस रहे नकेल
कहा-कहां लगाम

ऑस्ट्रेलिया: पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया।

फ्रांसः इस साल जनवरी में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का कानून पारित हो गया।

स्पेनः स्पेन सरकार ने भी हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे ही प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है। इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।

ब्रिटेन: वर्तमान में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध पर जनता की राय चल रही है।

नार्वे: यहां पर 15 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव पेश किया गया है, जल्द ही कानून बनने की उम्मीद है।

अमेरिका: वर्जीनिया और फ्लोरिडा राज्यों ने एक घंटे की समयसीमा तय की है। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है।

डेनमार्क: डेनमार्क में 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि माता-पिता की अनुमति से 13 साल तक के बच्चे कुछ ऐप चला सकेंगे

चीन: यहां माइनर मोड प्रोग्राम लागू है, जो उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम और ऐप के इस्तेमाल को सीमित करता है।


इंटरनेट और डेटा केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए कर्नाटक सरकार को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के साथ इस राज्य-स्तरीय बैन को जोड़ना होगा। इससे पहले, राज्य सरकार विधानसभा में एक नया विधेयक पेश करेगी या मौजूदा आईटी नियमों में

Saturday, April 5, 2025

13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर वैधानिक प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, यह एक नीतिगत मामला है और आप इस पर संसद से कानून बनाने के लिए कहें। हम वर्तमान याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हैं क्योंकि मांगी गई राहत नीति के दायरे में है। 


याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता को प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता प्रदान प्रद की। पीठ ने कहा कि यदि ऐसा कोई पक्ष रखा जाता है तो उस पर आठ सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार विचार किया जाना चाहिए। 

जेपी फाउंडेशन की ओर से दायर याचिका में केंद्र और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई कि वे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों तक बच्चों की पहुंच को विनियमित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी मजबूत आयु सत्यापन प्रणाली की शुरुआत को अनिवार्य बनाएं। 

Saturday, November 30, 2024

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगाया बैन

ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर लगाया बैन


ऑस्ट्रेलिया सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है. ऑस्ट्रेलियाई संसद द्वारा पारित इस क़ानून का उद्देश्य युवाओं को ऑनलाइन गतिविधियों से मानसिक स्वास्थ्य को होने वाले संभावित नुकसान से बचाना है.


नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंच पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है. ऑस्ट्रेलियाई संसद द्वारा पारित इस ऐतिहासिक कानून का उद्देश्य युवाओं को ऑनलाइन गतिविधियों से मानसिक स्वास्थ्य को होने वाले संभावित नुकसान से बचाना है.


टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, आस्ट्रेलियाई सीनेट ने गुरुवार (28 नवंबर) को इस विधेयक को 19 के मुकाबले 34 मतों से पारित कर दिया. इससे पहले प्रतिनिधि सभा ने बुधवार (27 नवंबर) को 13 के मुकाबले 102 मतों से इस कानून को मंजूरी दे दी थी.


इस संबंध में प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा कि ये कानून ऑनलाइन गतिविधियों से होने वाले नुकसान से चिंतितअभिभावकों का समर्थन करता है.


अल्बानीज़ ने संवाददाताओं से आगे कहा, ‘अब ऐसे मंचों पर यह सुनिश्चित करने की सामाजिक ज़िम्मेदारी है कि हमारे बच्चों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है.’


ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया कानून के प्रमुख प्रावधान:

आयु सत्यापन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कम उम्र के यूजर्स को उनकी सेवाओं तक पहुंचने से रोकने के लिए जिम्मेदार होंगे.

सख्त दंड: जो कंपनियां आयु सत्यापन जरूरतों का पालन करने में असफल रहती हैं, उन्हें 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

छूट: मैसेजिंग ऐप्स, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और शैक्षणिक सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी.


फेसबुक, टिकटॉक अन्य ने कार्यान्वयन पर चिंता जताई

मालूम हो कि इस कानून में नियमों का उल्लंघन करने वाले युवाओं या अभिभावकों के लिए कोई दंड नहीं है. सोशल मीडिया कंपनियां भी यूजर्स को उनकी उम्र का आकलन करने के लिए डिजिटल आईडी सहित सरकारी पहचान प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगी.

सोशल मीडिया मंचों के पास इस बात पर विचार करने के लिए एक साल का समय है कि वे प्रतिबंध को कैसे लागू कर सकते हैं.

मेटा प्लेटफ़ॉर्म, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम का मालिक है, ने कहा कि इस कानून को ‘जल्दबाजी’ में लाया गया है.

ज्ञात हो कि इस कानून को लेकर कई सोशल मीडिया मंचों ने शिकायत की थी कि ये अव्यवहारिक होगा. मेटा ने सीनेट से कम से कम जून 2025 तक इंतज़ार करने का आग्रह किया था, जब सरकार द्वारा आयु आकलन टेक्नोलॉजी का मूल्यांकन यह साफ़ करेगा कि छोटे बच्चों को कैसे बाहर रखा जा सकता है.

मेटा ने कहा,  ‘स्वाभाविक रूप से हम ऑस्ट्रेलियाई संसद द्वारा तय किए गए कानूनों का सम्मान करते हैं. हालांकि, हम उस प्रक्रिया के बारे में चिंतित हैं, जिसने सबूतों पर उचित विचार किए बिना कानून को जल्दबाजी में पारित कर दिया.’

वहीं, स्नैपचैट ने एक बयान में कहा, ‘हालांकि, इस कानून को व्यवहार में कैसे लागू किया जाएगा, इसके बारे में कई सवाल हैं, जिनका जवाब नहीं हैं, हम गोपनीयता को संतुलित करने वाले दृष्टिकोण को विकसित करने में मदद करने के लिए 12 महीने की कार्यान्वयन अवधि के दौरान सरकार और ईसेफ्टी कमिश्नर के साथ मिलकर काम करेंगे. सुरक्षा और व्यावहारिकता के साथ हमेशा की तरह स्नैप ऑस्ट्रेलिया में सभी लागू कानूनों और विनियमों का अनुपालन करेगा.’

Saturday, October 19, 2024

शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से एमश्री विद्यालयों में विशेष अभियान की शुरुआत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर अपनी चमक बिखेरेंगे पीएमश्री विद्यालय

शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से एमश्री विद्यालयों में विशेष अभियान की शुरुआत 


लखनऊ। प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के तहत प्रदेश में शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने  के उद्देश्य से एक विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत सभी 724 पीएमश्री विद्यालयों के शिक्षक, स्कूल प्रबंध समिति (एसएमसी) के सदस्य, ग्राम प्रधानों और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें कर रहे हैं। 

इनके माध्यम से अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनके बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इनमें अभिभावकों को उनके बच्चों की पढ़ाई में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जा रही है। बैठकों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के अभिभावक से संपर्क कर स्कूल वापस लाने की रणनीति भी बनाई जा रही है।



सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर  अपनी चमक बिखेरेंगे पीएमश्री विद्यालय 

● सभी स्कूलों के एकाउंट सोशल मीडिया पर खोले जाएंगे


प्रयागराज । पीएमश्री विद्यालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर भी अपनी चमक बिखेरेंगे। प्रदेशभर में समग्र शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) को निर्देशित किया गया है कि हर जिले से न्यूनतम एक सफलता की कहानी को (प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, विद्यार्थी, समुदाय द्वारा पीएमश्री विद्यालयों में सराहनीय योगदान) भी सोशल मीडिया पर साझा किया जाए। 


30 सितंबर और एक अक्तूबर को होने वाली समीक्षा बैठक में पीएमश्री योजना के तहत जिलों में निर्माण कार्यों के लिए आवंटित धनराशि के सापेक्ष उपभोग की स्थिति की रिपोर्ट भी मांग गई है।

पीएमश्री विद्यालयों को हरित ऊर्जा से समृद्ध किया जाएगा। रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सौर ऊर्जा, ठोस एवं द्रव्य अपशिष्ट, जैविक खेती, प्लास्टिक मुक्त आदि अवधारणाएं होंगी। इनमें बच्चों को उनकी दक्षताओं के अनुरूप चाइल्ड पैडागॉजी आधारित पाठ्यक्रम से शिक्षण होगा। अपने क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए इन्हें आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

कम्प्यूटर, साइंस व गणित लैब और लाइब्रेरी के साथ ही कौशल विकास, खेल, जिज्ञासा और चर्चा आधारित शिक्षा, लर्निंग आउटकम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में दो चरणों में पीएमश्री योजना के तहत चयनित 1753 सरकारी स्कूलों में सर्वाधिक प्रयागराज व गोरखपुर के 47-47 स्कूल हैं।

Friday, May 10, 2024

अध्यापक के नियोजक के खिलाफ चैट पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है या नहीं? हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूछा

अध्यापक के नियोजक के खिलाफ चैट पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है या नहीं? हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूछा


प्रयागराज । राज्य सरकार व माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूछा है कि नियोजक के खिलाफ वाट्सएप ग्रुप पर सहायक अध्यापकों द्वारा चैट करने पर सेवा नियमावली के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं।


कोर्ट ने इस मामले में तीन सप्ताह में जवाब मांगा है और याची के खिलाफ डीआईओएस गोरखपुर के गत 18 अप्रैल के आदेश पर रोक लगाते हुए वाट्सएप मैसेज के आधार पर विभागीय कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने कमलेश यादव की याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक यादव व आरएनयादव को सुनकर दिया है।


याची भोलाराम मस्करा इंटर कॉलेज गहनसाद सहजनवा गोरखपुर में सहायक अध्यापक है। उसने वाट्सएप ग्रुप पर नियोजक के खिलाफ टिप्पणी की थी।