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Friday, December 5, 2025

68500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में अनियमितता का लगाया है आरोप

68500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में अनियमितता का लगाया है आरोप


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 68500 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में तीन सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज की अर्चना यादव की विशेष अपील पर दिया।


68500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 का परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में अनियमितता का आरोप लगाया था। दोबारा मूल्यांकन में 4800 नए अभ्यर्थियों का चयन हुआ। फिर भी असंतुष्ट दर्जनों छात्र हाईकोर्ट पहुंचे। कोर्ट के आदेश पर तीसरे मूल्यांकन में भी कई छात्र सफल हुए। इसके बाद भी बहुत से असंतुष्ट छात्र हाईकोर्ट पहुंचे।

याची के अधिवक्ता संजय यादव ने दलील दी कि 13 अगस्त 2018 को पहली बार रिजल्ट जारी किया गया, जिसमें अर्चना को 63 अंक मिले। परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने दोबारा मूल्यांकन कराया तो 66 अंक हुए। तीसरी बार अदालत के आदेश पर मूल्यांकन हुआ तो अंक घटकर 64 रह गए। हर बार अलग नंबर मिलने से मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

सामान्य और ओबीसी वर्ग का कटऑफ 67 अंक था। परीक्षा नियामक प्राधिकरण ऐसा आयोग है कि जितनी बार कॉपी चेक कर रहा, उतनी बार प्रश्नों का आंसर बदल दे रहा है। इससे छात्रों में काफी आक्रोश है। 68500 सीटों में से लगभग 17,000 सीटें अभी भरी नहीं गई हैं। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से दो सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है।

Wednesday, October 1, 2025

68500 शिक्षक भर्ती में बचे 27713 पदों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच 7 अक्टूबर को करेगी सुनवाई

68500 शिक्षक भर्ती में बचे 27713 पदों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की बेंच 7 अक्टूबर को करेगी सुनवाई 


उत्तर प्रदेश के 68500 शिक्षक भर्ती मामले में बचे हुए 27713 रिक्त पदों की भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई होने जा रही है। इस मामले की सुनवाई अब पांच जजों की विशेष बेंच करेगी, जो कि 7 अक्टूबर 2025 को होगी। यह सुनवाई अभ्यर्थियों द्वारा दायर पुनः क्यूरेटिव पेटिशन पर होगी, जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया और पदों के आवंटन से जुड़े मुद्दों को लेकर न्यायालय से मांग की है।


उत्तर प्रदेश में कुल 68500 सहायक अध्यापक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया अन्य कारणों से अधर में थी। इन पदों में से लगभग 27713 पद अभी भी रिक्त हैं। इन रिक्त पदों को भरने हेतु पिछली सुनवाईयों में कोर्ट ने कई बार निर्देश दिए थे कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत हो। समस्या के मुख्य बिंदु कटऑफ मेरिट, परीक्षा प्रक्रिया और नियुक्ति के नियम बने हुए हैं।


हाल ही में अभ्यर्थियों ने क्यूरेटिव पेटिशन दायर कर 68500 शिक्षक भर्ती में बची 27713 पदों से संबंधित मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे हैं। इस क्यूरेटिव पेटिशन की सुनवाई अब उच्चतम न्यायालय के पांच जजों की बेंच करेगी। यह सुनवाई 7 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की गई है। पांच जजों की बेंच की सुनवाई का मतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।


यह मामला 2018 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा में अनियमितताओं के कारण कई फैसलों और नियुक्तियों पर प्रश्न उठे थे। कोर्ट ने इस मामले की उच्च न्यायालयों में कई बार सुनवाई की है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने अगस्त 2023 में 27713 पदों पर दो माह के अंदर परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ कुछ अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट गए थे, जिन्होंने मेरिट कट को कम करने की मांग की, जो खारिज कर दी गई थी।


अभी बेसिक शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी है। आयोग जल्द ही नए विज्ञापन जारी करके बाकी बचे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा। आगामी पाँच जजों की बेंच की सुनवाई के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय आने की उम्मीद है, जो भर्ती प्रक्रिया को परिभाषित करेगा।


शिक्षक बनने के इच्छुक हजारों अभ्यर्थी शिक्षा विभाग और न्यायालय से जल्द से जल्द इस विवादित मामले का समाधान चाहते हैं ताकि रिक्त पदों पर नियुक्ति हो सके। वहीं सरकार ने लगातार भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही है।

Saturday, December 16, 2023

68500 शिक्षक भर्ती में फिर सीबीआई जांच का मामला उठा, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कहां तक पहुंची जांच?

68500 शिक्षक भर्ती में फिर सीबीआई जांच का मामला उठा, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कहां तक पहुंची जांच?
 

68500 सहायक अध्यापक भर्ती में हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच का जिन्न पांच साल बाद बोतल से फिर निकला

68500 भर्ती में सीबीआई जांच का मामला उठा, 04 सितंबर को भेजे गए पत्र पर जल्द निर्णय लेने को कहा


प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच का जिन्न पांच साल बाद बोतल से फिर निकल आया है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिसंबर को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश पर सीबीआई में दर्ज एफआईआर की वर्तमान स्थिति क्या है।


 इस मामले की सुनवाई जनवरी में रखी है। जनवरी 2018 को 68500 शिक्षक भर्ती के लिए जारी शासनादेश के आधार पर 27 मई को लिखित परीक्षा कराई गई। 13 अगस्त को घोषित परिणाम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली थी। 


दो ऐसे अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था जो परीक्षा में शामिल ही नहीं थे। यही नहीं, परीक्षा में फेल 23 अभ्यर्थियों को भी पास कर दिया गया था। गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।


अनियमितता पर सरकार ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की सचिव डॉ. सुत्ता सिंह को आठ सितंबर 2018 को निलंबित कर दिया था। इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट के जस्टिस इरशाद अली ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। हालांकि बाद में सरकार की अपील पर डबल बेंच ने दिसंबर के दूसरे सप्ताह में अपने आदेश में सीबीआई जांच को औचित्यहीन माना था। हालांकि तब तक सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। उसके बाद कुलदीप कुमार नाम के अभ्यर्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका कर दी थी। उस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में पांच दिसंबर को हुई।


इससे पहले अदालत ने यह निर्देश दिये थे कि इस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सक्षम प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिये। कहा गया था कि सरकार द्वारा जारी विज्ञापन के आधार पर की गयी सहायक अध्‍यापकों की भर्ती उत्‍तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 के खिलाफ थी। इसी के बाद सहायक अध्‍यापकों के 68500 पदों पर शुरू की गयी सम्‍पूर्ण भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच के आदेश दिये थे।

Thursday, September 28, 2023

पांच साल की सेवा अब हुई पूरी, तबादले से शिक्षक वंचित, 68500 भर्ती में चयनित पुरुष शिक्षकों का हाल

पांच साल की सेवा अब हुई पूरी, तबादले से शिक्षक वंचित, 68500 भर्ती में चयनित पुरुष शिक्षकों का हाल



प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित हजारों शिक्षक पांच साल की सेवा पूरी होने के बावजूद अंतर जनपदीय पारस्परिक तबादले से वंचित हो रहे हैं। शासन ने शिक्षकों के तबादले के लिए न्यूनतम पांच साल जबकि शिक्षिकाओं के लिए दो साल सेवा की अनिवार्यता रखी है। 68500 में चयनित पुरुष शिक्षकों को सात सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे।


अब सेवा की न्यूनतम समयसीमा पूरी होने पर ये शिक्षक अपर मुख्य सचिव बेसिक दीपक कुमार, महानिदेशक विजय किरन आनंद, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल आदि से मिलकर तबादले का अनुरोध कर रहे हैं। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। इस बीच पारस्परिक अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए सचिव ने सभी बीएसए को पांच से 12 अक्तूबर तक जोड़ा (पेयर) बनाने की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए हैं।


68500 में चयनित और पांच साल की सेवा पूरी कर चुके हंडिया ब्लॉक में तैनात संजीव त्रिपाठी अपने गृह जनपद प्रतापगढ़ के लिए पारस्परिक साथी भी ढूंढकर बैठे हैं। इनका कहना है नौ माह से पारस्परिक अंतर्जनपदीय स्थानांतरण पूरा नहीं हो सका है। अभी 12 अक्तूबर तक जोड़ा बनाने की प्रक्रिया चलेगी तो 68500 के पुरुष शिक्षकों को बाहर करना अनुचित है। 


68500 में चयनित शिक्षक सत्येंद्र शुक्ल व हिमांशु मिश्र कहते हैं कि तय मानक पूरा करने के बावजूद अंतर्जनपदीय स्थानांतरण और पदोन्नति दोनों से बाहर कर दिया गया जो अनुचित है। शिक्षक भास्कर द्विवेदी का आरोप है कि अधिकारियों से शिक्षक हित जैसे स्थानांतरण, निशुल्क चिकित्सा, पदोन्नति की बात की जाए तो वह सालों साल लटकाने का काम करते है। जबकि विभागीय आदेश मनवाने के लिए जबरजस्ती से भी पीछे नहीं हटते।

Tuesday, August 15, 2023

12 दिन के अंतर से तबादले से वंचित हुए हजारों बेसिक शिक्षक

12 दिन के अंतर से तबादले से वंचित हुए हजारों बेसिक शिक्षक

05 साल की सेवा अनिवार्य है अंतरजनपदीय तबादलों के लिए 


प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित हजारों शिक्षक मात्र 12 दिनों के अंतर से अंतर जनपदीय पारस्परिक तबादले से वंचित हो जाएंगे। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने शिक्षकों के तबादले के लिए न्यूनतम पांच साल की सेवा अनिवार्य की है। 


जबकि शिक्षिकाओं को दो साल की सेवा पर ट्रांसफर का लाभ दिया गया है। मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन 26 जुलाई तक लिए गए थे और बीएसए के स्तर से सत्यापन के बाद आवेदन 25 अगस्त तक लॉक किए जाएंगे।


 68500 में चयनित शिक्षकों को सात सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे।  आवेदन लॉक करने की अवधि 12 दिन बढ़ाकर सात सितंबर कर दी जाए तो पुरुष शिक्षक भी तबादले के लिए पात्र हो जाएंगे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक पिछले एक महीने से कई अधिकारियों से मिल चुके हैं।

Thursday, August 25, 2022

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का बेमियादी धरना शुरू

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का बेमियादी धरना शुरू



लखनऊ । बेसिक शिक्षा के 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बुधवार को ईको गार्डेन में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। यह अभ्यर्थी दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पांच फीसदी की छूट प्रदान कर, उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने की मांग कर रहे हैं।



अभ्यर्थी तूफान सिंह ने बताया कि 68500 शिक्षक भर्ती 2018 में हुई। जिसमें ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन आदि को सामान्य वर्ग के साथ 45% नम्बर पर रखा गया। जबकि आरक्षित वर्ग में केवल एससी व एसटी को 40% नम्बर पर रखा गया। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग व राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग व सामाजिक न्याय व सद्भावना समिति विधान परिषद में शिकायत की थी। इसकी सुनवाई लम्बे समय तक चली। 



अभ्यर्थियों ने बताया कि आयोग ने अपनी संस्तुति व रिपोर्ट में आरक्षित वर्ग में ओबीसी दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि को इस भर्ती में आरक्षित वर्ग मानते हुए पासिंग नम्बर में पांच फीसदी की छूट देकर सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आदेश दिया। बीते छह माह से आदेश के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।