
Tuesday, January 2, 2018

महराजगंज : दिव्यांग छात्रों के गीत को मुख्यमंत्री ने सराहा, पू० मा० विद्यालय जड़ार की छात्राओं के कार्यक्रम ने भी सबको किया प्रभावित

बस्ती : अंग्रेजी के साथ प्रोजेक्टर व लैपटाप, आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट कान्वेंट स्कूलों को दे रहा मात
सदर विकास खंड में स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट कान्वेंट स्कूलों को मात दे रहा है। स्कूल ड्रेस में बच्चों के गले में लटकती टाई और आईकार्ड देखकर हर कोई चौंक जाता है, उन्हें यकीन ही नहीं होता कि यह बच्चे किसी सरकारी प्राथमिक विद्यालय के छात्र हैं। इस विद्यालय के बच्चों को प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और लैपटाप के जरिये स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जा रही है। यहां की शैक्षणिक गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रवेश के लिए बच्चों को आवेदन फार्म भरने पड़ते हैं।
परिषदीय विद्यालय का नाम आते ही जेहन में मैले कुचैले कपड़े पहने बच्चे, श्यामपट्ट पर चाक से बच्चों को पढ़ाते, गिनती पहाड़ा का अभ्यास कराते शिक्षक और टाट पट्टी पर बैठे बच्चों का चेहरा सामने आ जाता है, मगर आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट को देखने के बाद लोगों को अपनी सोच बदलनी पड़ रही है।
विद्यालय में लगातार छात्र संख्या घटती देख डेढ़ साल पहले पूर्व माध्यमिक विद्यालय परसा जागीर के प्रभारी प्रधानाध्यापक डा. सर्वेष्ट मिश्र को विभाग ने यहां तैनात किया। डा. मिश्र विद्यालय को बेहतर बनाने में जुट गए। इस कार्य में उनका सहयोग विद्यालय पर तैनात कानपुर जिले की सहायक अध्यापिका सोनू वर्मा और बुलंदशहर की विभा चाहर ने किया। इन दोनों ने पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को इंगलिश मीडियम की शिक्षा देनी शुरू कर दी। प्रधानाध्यापक ने बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासेज की व्यवस्था की। इसके लिए उन्होंने जनसहयोग से बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, लैपटाप की व्यवस्था की।
इसके बाद विद्यालय चल पड़ा प्रगति की ओर। बच्चों के लिए पिछले साल ही जूता मोजा, टाई, बेल्ट और आईकार्ड की व्यवस्था कर दी गई। आज इन बच्चों को देखने के बाद लगता है कि यह किसी मांटेसरी स्कूल के बच्चे हैं।

भदोही : नौनिहालों में जगा रही हुनर की ‘ज्योति’, अवकाश के दिनों में पेंटिंग, सिलाई-कढ़ाई व अन्य विधाओं का दे रहीं प्रशिक्षण
लहरों को साहिल की दरकार नहीं होती, हौसलों के आगे कोई दीवार नहीं होती। जलते हुए चिराग नें आंधियों से कहा, हिम्मत हो तो बुझा के दिखा, जलने के लिए मुङो कोनों की दरकार नहीं होती। कुछ इन्हीं पंक्तियों को साकार कर रही है ज्ञानपुर ब्लाक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा में बतौर प्रभारी प्रधानाध्यापक तैनात ज्योति कुमारी।
कुछ अलग करने की सोच का नतीजा ही है कि विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ अवकाश के दिनों में कभी पेटिंग तो कभी सिलाई-कढ़ाई से लेकर खिलौने तैयार करने तक का प्रशिक्षण देकर न सिर्फ नौनिहालों में हुनर के रंग भर रही हैं बल्कि परिषदीय विद्यालय के प्रति लोगों की सोच में भी बदलाव लाने का बेहतर प्रयास कर रही हैं। मकसद सिर्फ इतना की जब बच्चे काबिल होकर निकलेगें तो कहीं न कहीं उनकी सफलता के पीछे उनका नाम भी जुड़ा नजर आएगा। जी हां बात हो रही है मखमली हस्तनिर्मित कालीनों के जरिए समूचे विश्व में अपनी पहचान कायम कर चुके कालीन नगरी भदोही के गोपीगंज नगर निवासी ज्योति कुमारी की। आज के भौतिकवादी दौर में जब कि प्रत्येक व्यक्ति अधिकाधिक धनार्जन की लालसा में जुटा हुआ है। विशेषकर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के समय से आने व जाने को लेकर हमेशा शिकायत उठती रहती है। यहां तक की परिषदीय विद्यालय में अपने बच्चों का नामांकन कराने की बात आते ही लोग नाक,भौं सिकोड़ने लगते हैं। अपने बच्चों को वहां भेजना नहीं चाहते थे। ऐसे समय में भी पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा में तैनात ज्योति कुमारी अपनी मेहनत की बदौलत शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम देने में जुटी हुई हैं। वर्ष 2009 में प्राथमिक विद्यालय शिवरामपुर में बतौर सहायक अध्यापक तैनाती के बाद जब उनका तबादला पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोइलरा में हुआ तो उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी। बच्चों को शिक्षा के साथ अवकाश के दिनों में पेंटिंग, सिलाई कढ़ाई, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों के ज्ञान का वर्धन करने के साथ उन्हें हुनरमंद भी बनाने की ठानी तो उनका यह सफर मिशन शिक्षण संवाद में तब्दील हो उठा।
उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टी में विशेष समर कैंप तो प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित कराती हैं। बताया कि इसके पीछे उनका स्वार्थ बस इतना है कि बच्चे काबिल होकर आगे जाएं। बच्चे काबिल हो यही गुरुजनों का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। जब बच्चे किसी मुकाम पर पहुंचेगे तो निश्चित ही उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक की भी पहचान कायम होगी।’
प्रभारी प्रधानाध्यापक ज्योति बदल रही परिषदीय विद्यालय के प्रति सोच गर्मी में विशेष समर कैंप तो प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को कार्यक्रमबच्चों को कढ़ाई सिखाती ज्योति कुमारी

हरदोई : विशिष्ट बीटीसी 2004 के प्रशिक्षुओं को नहीं मिला था बकाया, देना ही पड़ा लंबित मानदेय
विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच के प्रशिक्षुओं का आखिरकार विभाग को मानदेय देना ही पड़ रहा है। वर्षों से विभाग उनकी धनराशि पर कुंडली मारे बैठा था। मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा तो न्यायालय ने कड़ा रुख अख्तियार किया। हालांकि फिर भी विभाग सोता रहा अब अवमानना की कार्रवाई की नौबत आई है तो मानदेय जारी करने का आदेश दिया गया है।
बीटीसी 2004 प्रशिक्षण के दौरान काफी संख्या में प्रशिक्षुओं को मानदेय नहीं दिया गया था। वैसे तो प्रशिक्षुओं को मात्र 2500 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन उस पर भी विभाग ने कुंडली मार ली थी। मई 2005 से दिसंबर 2005 तक के मानदेय की मांग को लेकर प्रशिक्षु लड़ाई लड़ते रहे। हालांकि उन्हें नौकरी भी मिल गई, लेकिन हक की लड़ाई जारी रखी। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष व वर्तमान में भरावन विकास खंड में तैनात संतोष तिवारी ने मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचाया। जैसा कि बताया कि न्यायालय ने तो दिसंबर 2014 में ही आदेश जारी कर दिया था, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया था। जिस पर अवमानना याचिका दाखिल की गई और उसी पर बेसिक शिक्षा सचिव की तरफ से आदेश जारी किया गया है और अविलंब भुगतान की बात कही गई है

मुरादाबाद : घने कोहरे और कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी ने लिया निर्णय, ठंड में आठ जनवरी तक बंद रहेंगे आठ तक के स्कूल
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने घने कोहरे और कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिले में कक्षा आठ तक सभी विद्यालय आठ जनवरी तक बंद रहेंगे। इनमें अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन, केंद्रीय विद्यालय, आइसीएसई, सीबीएसई, मदरसा, संस्कृत , परिषदीय स्कूलों में कक्षा आठ तक की कक्षाएं नहीं चलेंगी। कक्षा नौ से 12 वीं तक के कक्षाएं चलेंगी।
कई स्कूलों ने समय बदला : ठंड को देखते हुए स्कूलों का समय बदल दिया गया है। सेंट मैरीज स्कूल स्कूल का समय सुबह 9.30 बजे से लगेगा। इसी तरह अन्य स्कूलों ने खुलने के समय में बदलाव किया है।
कोहरे में लिपटी रही नव वर्ष की पहली सुबह : मौसम के रोज अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। सोमवार को नववर्ष की पहली सुबह कोहरे में लिपटी रही। घने कोहरे के कारण ठंडक रही। दस बजे बदलों की ओट से सूरज निकला, उसके बाद कड़ाके की ठंड से मामूली राहत मिली। लोगों ने दोपहर में गुनगुनी सेंकी। पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ भाड़ देखी गई। धूप का बच्चों ने छुट्टी होने के चलते भरपूर आनंद उठाया।
रविवार की आधी रात से घना कोहरा गहराने लगा था, जो निरंतर सुबह तक बना रहा। सुबह तो स्थिति ऐसी रही कि चार कदम की दूरी का कुछ नहीं दिख रहा था। दृश्यता कम होने के चलते सड़क पर वाहन रेंग-रेंगकर चले। लोगों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। बदलों की ओट से जैसे ही सूरज निकला तो उसकी तेज किरणों ने कोहरे को धीरे-धीरे गायब कर दिया। उसके बाद ही दोपहर तक बादल साफ हो सका। वर्ष 2017 की रात सबसे सर्द रही। न्यूनतम तापमान गिरकर 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कोहरा होने के कारण ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से विलंब से चलीं। जिला मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निसार अहमद अंसारी ने बताया कि जनवरी का पहला दिन कोहरे में रहा। अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आगामी दिनों में मौसम ऐसा ही रहेगा। आधी रात मे घना कोहरा छा गया।

विद्यालयों में लगेगी ‘स्किल इंडिया’ की पाठशाला, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की पहल, 15 किमी के दायरे में होगा एक प्रशिक्षण केंद्र‘स्किल कनेक्ट’ से जुड़ेंगे स्कूल
अगर आपका बच्चा हाईस्कूल या इंटर में पढ़ रहा है, लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे छात्रों को कौशल विकास मिशन के तहत न केवल ‘स्किल इंडिया’ का पाठ पढ़ाया जाएगा, बल्कि उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण के बाद नौकरी भी दिलाई जाएगी। उप्र कौशल विकास मिशन की इस पहल को अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू हो गई है।
‘स्किल इंडिया’ के तहत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने की उप्र कौशल विकास मिशन की पहल में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इसके तहत माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को कौशल विकास से जोड़ा जाएगा। इसके पीछे मंशा यह है कि हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई कर रहे ऐसे विद्यार्थी जो किसी कारण से आगे की पढ़ाई नहीं कर सकते या फिर किताबी पढ़ाई करने में कमजोर होते हैं, लेकिन उनका दिमाग तकनीकी ज्ञान की ओर अधिक होता है। ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उनके अंदर के तकनीकी हुनर का बढ़ाया जाय। हर जिले में 15 किमी के दायरे में आने वाले ऐसे सभी माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। नए साल में इसकी साल से इसकी शुरुआत होगी। स्कूलों के साथ ही पढ़े लिखे बेरोजगार युवाआंे को ‘स्किल मित्र’ एप जानकारी मिलेगी। इसके माध्यम से न केवल युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की सूची का पता चलेगा बल्कि गूगल मैप के जरिए सेंटर तक आने की जानकारी भी मिल जाएगी। जहां युवा जाकर तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। इसी के माध्यम से पंजीयन के लिए पंजीयन भी कराया जा सकेगा

तमाम तरह की ऑनलाइन सुविधाएं मिलेंगी यूपी बोर्ड परीक्षा के बाद, अभ्यर्थियों और अभिभावकों की दौड़ धूप होगी कम
■ अगस्त से अंक व प्रमाणपत्र अपलोड करने की चल रही प्रक्रिया
■ अक्टूबर में ही तीन वर्ष के रिकॉर्ड वेबसाइट पर होने के अपलोड
इलाहाबाद : प्रदेश सरकार की मंशा है कि आम लोगों को हर तरह की सुविधा आसानी से मुहैया हो, उन्हें अनायास भागदौड़ न करनी पड़ी। इसी सिलसिले में यूपी बोर्ड के अंक व प्रमाणपत्र को वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रक्रिया अगस्त से चल रही है लेकिन, पहले निकाय चुनाव की आचार संहिता से विलंब हुआ और अब बोर्ड परीक्षाओं की रोड़ा बनी हैं। ऐसे में परीक्षाओं के बाद ही सुविधाएं शुरू होंगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड के मुख्यालय और सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में हर दिन अंक व प्रमाणपत्र की प्रति के लिए लोगों को समय और धन खर्च करना पड़ रहा है। इसके लिए तमाम जिलों के अभ्यर्थी व अभिभावक लंबी दूरी भी तय करते हैं। यही नहीं गलत लोगों के संपर्क में आकर वह सुविधा शुल्क भी देते हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने निर्देश दिया है चरणबद्ध तरीके से पिछले वर्षो के अंक व प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन अपलोड कर दिया जाए, ताकि अभ्यर्थी व अभिभावक घर बैठे इसकी प्रति प्राप्त कर लें।
इसके लिए अगस्त से बोर्ड मुख्यालय व क्षेत्रीय कार्यालयों पर अंक व प्रमाणपत्रों को स्कैन करने का कार्य चल रहा है। शासन का निर्देश रहा है कि 30 अक्टूबर तक तीन वर्षो के रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड हो जाएं। इस दिशा में तेजी से कार्रवाई हुई और विभागीय मंत्री से इसका शुभारंभ कराने की रणनीति भी बनी लेकिन, नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता के कारण उसे रोकना पड़ा। उसके बाद से बोर्ड में प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हुई और अब उत्तरपुस्तिकाएं और प्रश्नपत्र भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। ऐसे में ऑनलाइन सुविधा देने की प्रक्रिया बोर्ड परीक्षा के बाद ही शुरू हो सकेगी। बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि शासन ने 26 जनवरी 2018 तक दस वर्षो के रिकॉर्ड अपलोड करने का लक्ष्य तय किया था। यह प्रक्रिया चल रही है। मार्च में इसका शुभारंभ कराने की है।
अभिलेख सत्यापन में मिलेगी सहूलियत : बोर्ड सचिव ने बताया कि इस कार्य से सिर्फ अभ्यर्थी व अभिभावकों को ही नहीं बल्कि सरकारी महकमों को भी अभिलेखों के सत्यापन के लिए बोर्ड या फिर क्षेत्रीय कार्यालय वाहक नहीं भेजना होगा। साथ ही अभिलेखों की हेराफेरी पर भी विराम लग जाएगा। ज्ञात हो कि इलाहाबाद क्षेत्रीय कार्यालय में पिछले वर्षो में कई बार अभिलेखों से छेड़छाड़ के मामले सामने आ चुके हैं।































