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Thursday, November 17, 2022

ढाई लाख सरकारी स्कूल ही कर सकेंगे पीएम- श्री (PMSRI) योजना में दावेदारी

ढाई लाख सरकारी स्कूल ही कर सकेंगे पीएम- श्री (PMSRI) योजना में दावेदारी



नई दिल्ली: देश की स्कूली शिक्षा का नया माडल अब पीएम- श्री (प्राइमिनिस्टर स्कूल फार राइजिंग इंडिया) स्कूल ही होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने इसके तहत चयनित होने वाले सरकारी स्कूलों को लेकर एक गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके आधार पर ही देश के करीब ढाई लाख सरकारी स्कूलों को दूसरे चरण में प्री-सेलेक्ट किया गया है। यानी यही ढाई लाख सरकारी स्कूल ही पीएम- श्री के लिए अपनी दावेदारी ठोंक सकेंगे।


शिक्षा मंत्रालय ने पीएम- श्री स्कूलों के चयन को लेकर जो गाइडलाइन जारी है, उसके तहत चयनित होने वाले सरकारी स्कूलों को कुल तीन चरणों से गुजरना होगा।



 पहला चरण में सिर्फ ऐसे ही राज्य शामिल हों सकेंगे जो पहले मंत्रालय के साथ ही इन स्कूलों को लेकर एक समझौता करेंगे। साथ ही यह आश्वासन देंगे कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपने राज्य में पूरी तरह से लागू करेंगे। दूसरे चरण में सिर्फ ऐसे सरकारी ही इसके लिए अपने आवेदन कर सकेंगे जो छात्रों के नामांकन, छात्र-शिक्षक अनुपात और इंफ्रास्ट्रक्चर आदि के आधार पर तैयार किए गए शुरुआती दस मानकों पर फिट बैठेंगे।

माध्यमिक स्कूलों के एक चौथाई ही बन सके पर्यटन मित्र, पर्यटन को बढ़ाने के लिए किशोर व युवाओं को पर्यटन मित्र बनाने की योजना

माध्यमिक स्कूलों के एक चौथाई ही बन सके पर्यटन मित्र


पर्यटन को बढ़ाने के लिए किशोर व युवाओं को पर्यटन मित्र बनाने की योजना, माध्यमिक शिक्षा परिषद यूपी बोर्ड के ही 30 हजार विद्यालय 


प्रदेश में युवाओं को पर्यटन से जोड़ने की चाल बेहद धीमी है। छह माह में सिर्फ 8,500 पर्यटन मित्र ही बनाए जा सके हैं, जबकि प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के ही 30 हजार से अधिक विद्यालय संचालित हैं। अभी तक एक ही बोर्ड के कुल विद्यालयों का एक चौथाई ही पर्यटन मित्र बन सके हैं।


केंद्र सरकार के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने मई माह में जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद को निर्देश दिया कि निजी व सरकारी हर विद्यालय में पर्यटन क्लब का गठन किया जाए। क्लब में विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा छह से 12वीं तक के उन छात्र - छात्राओं को पर्यटन मित्र के रूप में सदस्य बनाया जाए, जिनमें संस्कृति की समझ हो और पढ़ने- लिखने की ललक हो। हर जिले के जिलाधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजे गए।


छह माह में पर्यटन विभाग के अधिकारी सिर्फ 8,500 पर्यटन मित्र ही बना सके हैं। एक क्लब में 25 सदस्य व दो शिक्षक हो सकते हैं। विभाग यह बताने को तैयार नहीं कि कुल क्लब कितने बने हैं। विभाग की खानापूरी से अधिकांश विद्यालय इससे दूर हैं।


पर्यटन मित्रों के बीच निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला, अभिनय, वाद-विवाद, सामुदायिक संपर्क अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फोटोग्राफी आदि की प्रतियोगिता जिले से राज्य स्तर तक होगी मेधावियों को पुरस्कृत करके उन्हें भ्रमण भी कराएगा।


माध्यमिक शिक्षा का दायित्व संभालते ही एक्शन में DGSE, प्रयागराज से होगी निरीक्षण की शुरुआत

अब 25 नवम्बर को निरीक्षण करेंगे महानिदेशक, प्रयागराज के दौरे में हुआ बदलाव


प्रयागराज। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद अब 25 नवंबर को प्रयागराज दौरे पर आएंगे। 15 नवंबर को जारी कार्यक्रम के अनुसार महानिदेशक को 19 नवंबर को यूपी बोर्ड मुख्यालय का निरीक्षण करने के साथ माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ समीक्षा करनी थी। लेकिन अपरिहार्य कारणों से शनिवार का कार्यक्रम टल गया है। महानिदेशक ने बताया कि अब वह 25 नवंबर को प्रयागराज आएंगे।


DGSE प्रयागराज से निरीक्षण की करेंगे शुरुआत

प्रयागराज। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद 19 नवंबर को सुबह नौ बजे से राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।

तीन से चार बजे के बीच यूपी बोर्ड मुख्यालय का निरीक्षण करने के बाद शिक्षा निदेशालय में चार से पांच बजे तक माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।


माध्यमिक शिक्षा का दायित्व संभालते ही एक्शन में DGSE, 19 नवंबर को प्रयागराज से होगी निरीक्षण की शुरुआत 


प्रयागराज। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद 19 नवंबर को सुबह नौ बजे से राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। तीन से चार बजे के बीच यूपी बोर्ड मुख्यालय का निरीक्षण करने के बाद शिक्षा निदेशालय में चार से पांच बजे तक माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।


Wednesday, November 16, 2022

प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती की मांग, युवा मंच के बैनर तले छात्रों ने सिविल लाइंस में धरनास्थल पर किया प्रदर्शन

प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती की मांग, युवा मंच के बैनर तले छात्रों ने सिविल लाइंस में धरनास्थल पर किया प्रदर्शन

प्रयागराज : प्रदेश के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए मंगलवार को प्रतियोगी छात्रों ने आवाज बुलंद की। युवा मंच के बैनर तले सिविल लाइंस में धरनास्थल पर प्रदर्शन कर विज्ञापन जारी करने की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएम द्वितीय को दिया।



युवा मंच के संयोजक राजेश सचान ने कहा कि देश में रोजगार की भयावह स्थिति है, लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार की दिलचस्पी रोजगार के सवाल को हल करने में नहीं दिखाई देती।

युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि चयन बोर्ड में तकरीबन साल भर से सदस्यों की नियुक्ति अधर में है। बेसिक शिक्षा में सरकारी आंकड़ों में 1.26 लाख पद रिक्त हैं, लेकिन विज्ञापन जारी नहीं किया जा रहा है। यही हाल अन्य विभागों का भी है। समूह ग के एक लाख पद रिक्त हैं।

पुलिस विभाग में 52 हजार और प्राथमिक विद्यालयों में 97 हजार पदों पर विज्ञापन जारी करने का वादा विगत वर्षों में सरकार ने किया, लेकिन अब सरकार वादा खिलाफी कर रही है।

सरकार को चेतावनी दी कि अगर प्रतियोगी छात्रों की वाजिब मांगों को पूरा नहीं किया गया तो जल्द प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा। धरना, प्रदर्शन में करन सिंह परिहार, नेहा सिंह, अनिता वर्मा, पल्लवी रानी, मधु वर्मा, केशा सरोज, प्रियंका देवी आदि मौजूद रहे।

RTE लागू होने के 12 साल बाद भी शिक्षक तैनाती का नियम साफ नहीं

RTE लागू होने के 12 साल बाद भी शिक्षक तैनाती का नियम साफ नहीं


● परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों को लेकर ऊहापोह

● तबादला प्रस्ताव में भी विषय को लेकर स्थिति साफ नहीं

● उच्च प्राथमिक के लिए स्नातक में विषय की बाध्यता

● बेसिक शिक्षा परिषद आज तक नहीं बना सका नियम

● प्रमोशन में टीईटी की अनिवार्यता पर विभाग ने नहीं की स्थिति साफ


प्रदेश के 45 हजार से अधिक परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में 12 साल बाद भी शिक्षकों की तैनाती का नियम नहीं बन सका है। इस वजह से आरटीई के अनुसार कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही। 


राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में शिक्षकों की तैनाती के संबंध में गाइडलाइन दी गई थी लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारी उसे आज तक लागू नहीं कर सके हैं।


नियमों के अनुसार कक्षा छह से ऊपर पढ़ाने के लिए वही अध्यापक पात्र होते हैं जिन्होंने संबंधित विषय को स्नातक स्तर पर पढ़ा हो। (यहां यह साफ करना जरूरी है कि इंटर योग्यता पर भर्ती शिक्षकों के मामले में इंटर में लिए विषयों के अनुसार इसे जोड़ा जाएगा।)


उदाहरण के लिए यदि किसी शिक्षक को प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में सामाजिक विज्ञान के पद पर पदोन्नति पाना है तो उसे  इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्रत्त् एवं राजनीति विज्ञान विषयों में से किन्हीं दो विषय स्नातक स्तर पर पढ़ा होना चाहिए। इसी तरह अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत विज्ञान एवं गणित के पद पर पदोन्नति के लिए अध्यापकों को संबंधित विषय स्नातक स्तर पर पढ़ा होना चाहिए।


लेकिन परिषदीय प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदोन्नति में विषयों का ध्यान नहीं रखा जाता। अभी 14 अक्तूबर को परिषदीय शिक्षकों के अंतजनपदीय स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए जारी आदेश में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद पर प्रतिस्थापित करने की बात लिखी है। लेकिन इसमें एनसीटीई से निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी करने का उल्लेख नहीं है।



प्रमोशन में टीईटी की अनिवार्यता पर विभाग ने अब तक नहीं की स्थिति साफ

प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रमोशन को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। पूर्व में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दीपक शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय ने आर शक्तिवेल बनाम तमिलनाडु सरकार के मामले में यह निर्णय दिया है कि प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदोन्नति के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास होना अनिवार्य है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग अब तक इस स्थिति को साफ नहीं कर सका है कि प्रमोशन में टीईटी अनिवार्य है या नहीं।

उच्च शिक्षा ग्रहण करते समय कारोबार करने पर कोई रोक नहीं : सुप्रीम कोर्ट का फैसला

उच्च शिक्षा लेते समय कारोबार करने पर कोई रोक नहीं : सुप्रीम कोर्ट का फैसला


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान किसी व्यक्ति के अपना व्यवसाय शुरू करने पर कोई रोक नहीं है। 


साथ ही कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक वास्तविक आवश्यकता के आधार पर दुकान खाली करा सकता है। इस मामले में मकान मालिक ने किराये के भुगतान में जानबूझकर चूक और खुद के उपयोग के लिए दुकान की आवश्यकता को आधार बनाकर किरायेदार की बेदखली की मांग की थी। 


मामला आंध्र प्रदेश भवन (पट्टा, किराया और बेदखली) नियंत्रण अधिनियम, 1960 का है। मामले में किराया नियंत्रण अपीलीय प्राधिकरण ने किरायेदार को दुकान खाली करने का आदेश दिया था, जिसे आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था।


हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, उच्च अध्ययन करने वाले व्यक्ति के व्यवसाय शुरू करने पर कोई रोक नहीं है। 


पीठ ने कहा, अपीलीय प्राधिकरण ने पाया कि मकान मालिक व्यवसाय कर रहा था और अपने बच्चे के लिए एक व्यवसाय स्थापित करना चाहता था। पीठ ने किराया नियंत्रण प्राधिकरण की ओर से दुकान खाली करने के आदेश को बहाल कर दिया ।

पीएम मोदी का "मिशन लाइफ" बनेगा स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा mission life

पीएम मोदी का "मिशन लाइफ" बनेगा स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा mission life 

शिक्षा मंत्रालय ने शुरू किया काम, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने को मोदी का पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली का मंत्र


जलवायु परिवर्तन जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों के चलते जब पूरी दुनिया पर संकट के बादल छाए हुए हैं, ऐसे में पीएम का 'मिशन लाइफ' (लाइफ स्टाइल फार एनवायरमेंट) यानी 'पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली' की सीख नई पीढ़ी के लिए बड़ा वरदान साबित हो सकती है। इस दिशा में पहल शुरू हो गई है। पीएम के 'मिशन लाइफ' को समूचे स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है, जो बुनियादी स्तर से ही स्कूलों में बच्चों को सिखाया और पढ़ाया जाएगा।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के निर्देश पर स्कूली शिक्षा विभाग ने पीएम के मिशन लाइफ से नई पीढ़ी को जोड़ने की यह अहम पहल तब की है, जब देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत नया स्कूली पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। ऐसे में मिशन लाइफ से जुड़ी पहल को भी स्कूलों में अलग- अलग स्तर पर शामिल करने की दिशा में काम चल रहा है।


 हाल ही में जारी किए गए स्कूलों के बुनियादी स्तर के नए कैरीकुलम फ्रेमवर्क में भी पर्यावरण को पर्याप्त जगह दी गई है। इस दौरान इन जिन अहम पहलुओं को स्थान दिया गया है, उनमें ऊर्जा और पानी की बचत, सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल  को कम करना, स्वच्छता पर जोर देना, मौसम अनुकूल खान-पान, कचरा प्रबंधन, स्वस्थ जीवन शैली के लिए जरूरी उपाय, ई-वेस्ट को कम करना जैसे विषयों पर फोकस किया गया है। आने वाले स्कूली पाठ्यक्रम में यह सभी विषय देश को नई पीढ़ी को किसी न किसी रूप में पढ़ने को मिलेंगे। 


पीएम ने मिशन लाइफ पर अपने विचार सबसे पहले ग्लासगो में वर्ष 2021 में आयोजित काप- 26 (कांफ्रेंस आफ पार्टीज) में रखा था। इसमें उन्होंने दुनिया भर को मिशन लाइफ से खुद को जोड़ने की पहल की थी।


इसलिए पढ़ाया जाएगा

स्कूलों से स्कूली पाठ्यक्रम में पीएम के मिशन लाइफ को शामिल करने की मुहिम पर काम कर रहे विशेषज्ञों की मानें तो जीवन शैली एक आदत है, जो शुरू से जैसी बन जाती है वैसी ही लगभग अंत तक रहती है। ऐसे में समाज बच्चों में यदि शुरुआत से ही पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली के प्रति रुझान पैदा कर दिया जाए या फिर उन्हें इससे होने वाले फायदे और नुकसान के प्रति सचेत कर दिया तो निश्चित ही वह इस पर अमल करेंगे।

हाईकोर्ट ने पूछा, विद्यालयों में डेंगू से बचाव के लिए क्या है व्यवस्था? अगली सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की लगाई तिथि

हाईकोर्ट ने पूछा, विद्यालयों में डेंगू से बचाव के लिए क्या है व्यवस्था? अगली सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की लगाई तिथि



प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डेंगू के फैले प्रकोप को देखते हुए स्कूलों में इसके बचाव के बारे में शासन से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि स्कूलों में क्या व्यवस्था की गई है। खासकर बच्चों के लिए। उन्हें संक्रमण से बचने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। उन्हें इस मामले में जागरूक किया गया है या नहीं।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए पांच दिसंबर की तिथि तय करते हुए सरकार से रिपोर्ट देने के लिए कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ कर रही है।


इसके पूर्व सुनवाई शुरू होने पर प्रयागराज में डेंगू के उपचार के लिए की गई व्यवस्था के संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बताया गया कि उपचार के लिए अस्पतालों में बेड सुरक्षित हैं। वहां फिजिशियन तैनात हैं। जांच और दवाओं के इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स भी पर्याप्त मात्रा है। संक्रमण बढ़ने के दौरान इसकी कमी थी लेकिन अब इसकी कमी को भी दूर कर लिया गया है। इसके साथ ही इसकी मांग भी कम हो गई है। 


सरकार की तरफ से अधिवक्ता एके गोयल ने बहस की। कोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई केलिए पांच दिसंबर की तिथि तय कर दी।

शिक्षक साथी पद पर आवेदन हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप देखें।

शिक्षक साथी पद पर आवेदन हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप देखें।



(नोट : आवेदन से पूर्व अपने जिले से जारी विज्ञप्ति देखें, और वहीं से जारी प्रारूप पर ही आवेदन करें। यह प्रारूप मात्र सुझाव / मदद के लिए है।)

राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए 30 नवम्बर तक मांगे गए आवेदन

राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए 30 नवम्बर तक मांगे गए आवेदन


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व प्रधानाचार्यों से राज्य अध्यापक पुरस्कार व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2022 के लिए अलग-अलग आवेदन आमंत्रित किए हैं। 



आवेदन 15 नवंबर से 30 नवंबर तक ऑनलाइन किए जा सकेंगे। निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि अर्ह शिक्षकों के लिए विस्तृत जानकारी school.upmsp.edu.in पर उपलब्ध है।

पंचम राज्य स्तरीय आदर्श पाठयोजना प्रतियोगिता में चयनित माध्यमिक स्तर की शिक्षक / शिक्षिकाओं की सूची जारी

पंचम राज्य स्तरीय आदर्श पाठयोजना प्रतियोगिता में चयनित माध्यमिक स्तर की शिक्षक / शिक्षिकाओं की सूची जारी


शिक्षकों को योजनाबद्ध तरीके से शिक्षण कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा वर्ष 2021 के पंचम राज्य स्तरीय आदर्श पाठयोजना प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की जनपद स्तर से चयनित पाठयोजनाओं का राज्य स्तर पर मूल्यांकन बाह्य विशेषज्ञों द्वारा कराया गया विशेषज्ञों द्वारा पाठयोजनाओं का मूल्यांकन मानकों के आधार पर किया गया। मूल्यांकन के उपरान्त माध्यमिक स्तर में निम्नवत् शिक्षक / शिक्षिकाओं की पाठयोजनाओं का चयन किया गया।


Tuesday, November 15, 2022

टाइम एंड मोशन संबंधी शासनादेश में आवश्यक शिथिलता देने एवं अवकाश तालिका में केवल वास्तविक देय अवकाश प्रदर्शित किए जाने हेतु जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का ज्ञापन

टाइम एंड मोशन संबंधी शासनादेश में आवश्यक शिथिलता देने एवं अवकाश तालिका में केवल वास्तविक देय अवकाश प्रदर्शित किए जाने हेतु जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का ज्ञापन




पुस्तक वितरण में देरी/लापरवाही उजागर करने वाले शिक्षक का नियमविरुद्ध निलंबन करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही हेतु SBTC एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

पुस्तक वितरण में देरी/लापरवाही उजागर करने वाले शिक्षक का नियमविरुद्ध निलंबन करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही हेतु SBTC एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र



अध्यापक के मनमाने स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर ठोका हर्जाना, 10000 रुपये प्रतिमाह स्थानांतरण अवधि में अध्यापक को देने का निर्देश

अध्यापक के मनमाने स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर ठोका हर्जाना, 10000 रुपये प्रतिमाह स्थानांतरण अवधि में अध्यापक को देने का निर्देश



प्रयागराज  । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज नंद ग्राम गाजियाबाद में सहायक अध्यापक (गणित) के पद पर कार्यरत अध्यापक का मनमाने तरीके से तबादला करने के लिए राज्य सरकार पर हर्जाना लगाते हुए स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिया है। 


कोर्ट ने कहा कि जितनी अवधि तक अध्यापक अपने विद्यालय में कार्य नहीं कर सका, उतनी अवधि तक दस हज़ार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से उसे हर्जाना का भुगतान किया जाए, क्योंकि अधिकारियों के मनमाने रवैए से अध्यापक को अदालत आने के लिए विवश होना पड़ा।


 यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने राजकीय इंटर कॉलेज नंदग्राम गाजियाबाद में सहायक अध्यापक देवेंद्र कुमार शर्मा की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि 13 जुलाई 2021 को उसका स्थानांतरण गाजियाबाद के ही त्योड़ी स्थित इंटर कॉलेज में कर दिया गया। इस पर उसने हाईकोर्ट में याचिका की ।


✍️ देखें कोर्ट आर्डर


Monday, November 14, 2022

टाइम एंड मोशन शासनादेश के अव्यवहारिक उपबंधों को निरस्त किए जाने हेतु उ०प्र० जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का अपर मुख्य सचिव को पत्र

टाइम एंड मोशन शासनादेश के अव्यवहारिक उपबंधों को निरस्त किए जाने हेतु उ०प्र० जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का अपर मुख्य सचिव को पत्र





विद्यालय परिसर रखें साफ : डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिए निर्देश

विद्यालय परिसर रखें साफ : डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिए निर्देश 

डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिया निर्देश, कहीं भी न हो जलभराव


लखनऊ : प्रदेश में डेंगू व चिकनगुनिया के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने विद्यालयों के लिए निर्देश जारी किए हैं।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षकों को इस संदर्भ में पत्र भेजा है। 


इसमें कहा गया है कि प्रदेश में डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बचाव के सभी आवश्यक उपाए किए जाएं। विद्यालय परिसर साफ रखें, कहीं भी जलभराव न होने पाए। इस संदर्भ में सभी प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।


शिक्षा निदेशक के स्तर से प्रेषित पत्र में कहा गया है कि सभी छात्र- छात्राओं को पूरी बांह की शर्ट और फुल पैंट पहनकर आने का निर्देश दिया जाए। प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना सभा में संचारी रोग एवं उससे होने वाली समस्याओं के संबंध में अनिवार्य रूप से बच्चों को जानकारी दी जाए। 


परिसर में खुली हुई पानी की टंकियों की नियमित सफाई की जाए। यह भी देखा जाए विद्यालय परिसर एवं उसके आसपास कहीं भी जलभराव न होने पाए । विद्यालय परिसर के हैंडपंप एवं मल्टीपल हैंडवाश के पास नियमित रूप से सफाई की जाए।

आज होगी 69000 भर्ती में आरक्षण की अनदेखी के मामले की सुनवाई

आज होगी 69000 भर्ती में आरक्षण की अनदेखी के मामले की सुनवाई


69000 भर्ती में आरक्षण की अनदेखी मामले की सुनवाई 14 नवंबर को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में होगी। आरक्षण विवाद बढ़ने पर ही सरकार ने पांच जनवरी को 6800 की सूची जारी की थी जिसे लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं। 


पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप एवं संरक्षक भास्कर सिंह यादव ने सरकार से 69000 शिक्षक भर्ती में विवाद का केंद्र बने आरक्षण मसले का जल्द से जल्द समाधान कर आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के साथ न्याय करने की मांग की है।

यूपी में छात्रवृत्ति के अलग मानकों की होगी जांच

यूपी में छात्रवृत्ति के अलग मानकों की होगी जांच

■ निजी शिक्षण संस्थानों को बंट रही मलाई

■ विभागीय मंत्री ने बनवायी पांच सदस्यीय जांच कमेटी


लखनऊ। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग निदेशालय द्वारा छात्रवृत्ति व फीस भरपाई योजना के पृथक मानक तय कर निजी शिक्षण संस्थानों को फायदा पहुंचाने के मामले की जांच होगी। विभागीय मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने इस मामले में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है।


यह कमेटी विभाग की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की नियमावली की खामियों की पड़ताल कर, निजी शिक्षण संस्थानों को अनुचित लाभ दिए जाने के मामले पर जल्द ही रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। 


समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब छात्र- छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि देने के लिए जो मानक तय किए हैं, पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय उन मानकों से हटकर अपने मानकों पर छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि बांट रहा है।


 इस मामले में निदेशालय के अधिकारियों व निजी शिक्षण संस्थानों की साठगांठ की आशंका है। अलग मानक तय होने से निजी शिक्षण संस्थानों के ओबीसी छात्रों को ज्यादा लाभ हो रहा है और सरकारी संस्थाओं के गरीब ओबीसी छात्र- हर साल वंचित रह जा रहे हैं।

प्रधानाचार्य भर्ती 2013 के 17 मंडलों का परिणाम जारी, 632 पदों की चयन प्रक्रिया नौ साल बाद पूरी

प्रधानाचार्य भर्ती 2013 के 17 मंडलों का परिणाम जारी, 632 पदों की चयन प्रक्रिया नौ साल बाद पूरी


■ चयन बोर्ड ने वेबसाइट पर जारी किया पैनल


प्रयागराज  । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रधानाचार्य भर्ती - 2013 के 17 मंडलों का परिणाम रविवार रात जारी कर दिया।


चयन बोर्ड की वेबसाइट पर देवीपाटन, फैजाबाद, वाराणसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर, मुरादाबाद, झांसी, बस्ती, बरेली, आजमगढ़, प्रयागराज, चित्रकूट, मिर्जापुर, मेरठ और गोरखपुर मंडल का परिणाम जारी हो गया है। 


इससे पहले शुक्रवार को कानपुर मंडल का परिणाम घोषित हुआ था । इस प्रकार 18 मंडलों में रिक्त 632 पदों की चयन प्रक्रिया तकरीबन नौ साल बाद पूरी हो गई। विभिन्न मंडलों में जिन विद्यालयों के प्रकरण कोर्ट में लंबित हैं, उनका परिणाम घोषित नहीं किया गया है।


चयन बोर्ड ने प्रधानाचार्य के 632 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन 2013 के अंत में निकाला था और फरवरी 2014 तक आवेदन लिए थे। भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका की थी।


कोर्ट की सख्ती के बाद चयन बोर्ड ने इस साल के शुरुआत में भर्ती प्रक्रिया तेज की। 30 मार्च तक साक्षात्कार पूरे हो गए थे उसके बावजूद परिणाम घोषित करने में सात महीने से अधिक का समय लग गया।

Sunday, November 13, 2022

प्राइवेट स्कूल 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की तैयारी में

प्राइवेट स्कूल 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की तैयारी में


• गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की वार्ता में बनी सहमति

• निजी स्कूलों की फीस बढ़ाने की तैयारी पूरी कभी भी हो सकती है इसकी घोषणा

 
लखनऊ : निजी स्कूलों ने 10 प्रतिशत शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है जिसे शैक्षिक सत्र 2023-24 से लागू किया जाएगा। इसकी घोषणा कभी भी हो सकती हैं। कोरोना काल के बाद हर साल फीस वृद्धि की जा रही है। शैक्षिक सत्र 2018 - 19 और 2019-20 में फीस वृद्धि की गई थी। इसके बाद कोरोना के कारण शुल्क नहीं बढ़ाया गया। बीते वर्ष 9.26 प्रतिशत फीस की वृद्धि की गई। 


निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का दावा है कि शुल्क निर्धारण नीति के तहत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को ध्यान में रखते हुए फीस बढ़ाई जा रही है।


अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन उप्र के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों से वार्ता के बाद सहमति बनी है कि शैक्षिक सत्र 2023-24 से सिर्फ 10 प्रतिशत फीस वृद्धि की जाएगी, जो पहली अप्रैल 2023 से लागू होगी। अगर कोई स्कूल इसके अतिरिक्त फीस वृद्धि करता है तो एसोसिएशन इसका विरोध करेगा। उसे बाध्य भी किया जाएगा कि निर्धारित फीसदी से अधिक फीस वृद्धि न करे। 



उधर, अभिभावक कल्याण संघ के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 2018 में फीस निर्धारण के लिए नीति एवं कमेटी बनाई गई थी। उसी आधार पर समिति के सदस्यों को फीस निर्धारित करना चाहिए, मगर अधिकतर निजी स्कूल आर्थिक रूप से मजबूत, रसूखवालों, सत्ता और विपक्ष में बैठे लोगों के हैं। यही कारण है कि स्कूल संचालक अपने अनुसार फीस प्रतिशत तय कर देते हैं।

प्रोजेक्ट अलंकार से लेकर यूपी बोर्ड परीक्षा तक की होगी समीक्षा

प्रोजेक्ट अलंकार से लेकर यूपी बोर्ड परीक्षा तक की होगी समीक्षा


लखनऊ। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने माध्यमिक शिक्षा की कमान संभालते ही विभिन्न योजनाओं की रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने हर सप्ताह योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की व्यवस्था बनाई है। इसके लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत राजकीय विद्यालयों की स्थिति से लेकर पठन-पाठन व बोर्ड परीक्षा की तैयारियों तक की समीक्षा के अलग- अलग दिन व अधिकारी तय किए गए हैं। 


समीक्षा बैठक निशातगंज स्थित राज्य परियोजना कार्यालय में महानिदेशक की अध्यक्षता में सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना सुबह 10 से 11 बजे के बीच होगी। पहले दिन सोमवार को प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत जर्जर माध्यमिक विद्यालयों के कायाकल्प व वहां की अवस्थापना सुविधाओं को दुरुस्त करने की चल रही प्रक्रिया की समीक्षा होगी। इसी तरह अन्य दिनों में विभिन्न योजनाओं व व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।

अब कठिन शब्दों में नहीं उलझेंगे यूपी बोर्ड के बच्चे, हिन्दी से हिन्दी में बनाएंगे शब्दकोष

अब कठिन शब्दों में नहीं उलझेंगे यूपी बोर्ड के बच्चे,  हिन्दी से हिन्दी में बनाएंगे शब्दकोष


हिन्दी, उर्दू, संस्कृत समेत अन्य भाषाओं और व्यावसायिक विषयों की कक्षा नौ से 12 तक की किताबों की डिक्शनरी बनवा रहा बोर्ड 

वर्तमान में कठिन और तकनीकी शब्दों का नहीं है कोई शब्दकोष


प्रयागराज। यूपी बोर्ड अपने 28 हजार से अधिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र - छात्राओं के लिए पहली बार डिक्शनरी बनवा रहा है। आज तक बोर्ड के स्तर से कठिन और तकनीकी शब्दों का कोई शब्दकोष तैयार नहीं कराया गया है। बोर्ड ने 2018 सत्र से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया था। इस समय यूपी बोर्ड में 34 विषयों में एनसीईआरटी की 67 किताबों से पढ़ाई हो रही है।



किताबें यूपी बोर्ड अपने स्तर पर तैयार कराता है। अब शासन ने एनसीईआरटी और नॉन- एनसीईआरटी किताबों में प्रयुक्त कठिन और तकनीकी शब्दों की डिक्शनरी बनवाने का निर्देश दिया है। हाईस्कूल में गणित और विज्ञान जबकि इंटर में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित आदि विषयों का शब्दकोष बनाने का काम लगभग पूरा हो गया है। इसके लिए नौ से 11 नवंबर तक बोर्ड मुख्यालय में कार्यशाला भी हो चुकी है। शब्दकोष तैयार होने के बाद इसे विषय समिति में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उसके बाद यूपी बोर्ड से शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।



हिन्दी से हिन्दी में बनाएंगे शब्दकोष

प्रयागराज । विषय विशेषज्ञों को हिन्दी से हिन्दी में शब्दकोष तैयार करने को कहा गया है। मूल शब्द के साथ कोष्ठक में उसके अंग्रेजी टर्म भी दिए जाएंगे। डिक्शनरी बच्चों को भौतिक रूप में कैसे और किस रेट पर उपलब्ध होगी, यह तो अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन एक बात तय है कि बोर्ड अपनी वेबसाइट पर इसे अपलोड करेगा जहां से बच्चों को इसका निःशुल्क पीडीएफ मिल सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 69000 शिक्षक भर्ती के एक हजार अभ्यर्थियों के लिए नौकरी की राह खुली

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 69000 शिक्षक भर्ती के एक हजार अभ्यर्थियों के लिए नौकरी की राह खुली


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती में लगभग एक हजार अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ हो गया। इस भर्ती को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए हाईकोर्ट के 25 अगस्त 2021 के आदेश को सही ठहराया है।


नौ नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद एक नंबर से पास हो रहे तकरीबन एक हजार अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति मिलना तय माना जा रहा है।


69000 शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को आयोजित लिखित परीक्षा के परिणाम से असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने छह प्रश्नों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इनमें एक प्रश्न ऐसा था जिसके चारों विकल्प गलत थे।


प्रयागराज, परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती में लगभग एक हजार अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ हो गया। इस भर्ती को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए हाईकोर्ट के 25 अगस्त 2021 के आदेश को सही ठहराया है। नौ नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद एक नंबर से पास हो रहे तकरीबन एक हजार अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति मिलना तय माना जा रहा है।


असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने छह प्रश्नों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2021 के अपने आदेश में पांच प्रश्नों पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया लेकिन उन अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित करने का आदेश दिया था, जिन्होंने उस प्रश्न को हल करने की कोशिश की थी जिसके चारों विकल्प गलत थे। शर्त यह थी कि ऐसे अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका की हो और एक नंबर से पास हो रहे हों। अधिवक्ता राहुल कुमार मिश्रा व विकास चंद्र शुक्ला के साथ ही एक नंबर से पास हो रहे दुर्गेश शुक्ला, रोहित शुक्ला, राम मिश्रा, प्रसून दीक्षित और विकास तिवारी ने नियुक्ति देने का अनुरोध किया है।


इस प्रश्न पर था विवाद

69000 शिक्षक भर्ती के प्रश्नपत्र में बुकलेट संख्या ए के प्रश्नसंख्या 60 में पूछा गया था-शैक्षिक प्रशासन उपयुक्त विद्यार्थियों को उपयुक्त शिक्षकों द्वारा समुचित शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाता है। जिससे वे उपलब्ध अधिक साधनों का उपयोग करके अपने प्रशिक्षण से सर्वोत्तम को प्राप्त करने में समर्थ हो सकें। यह परिभाषा दी गई है। इस प्रश्न के चारों विकल्प गलत थे। इसका सही जवाब ग्राहम बाल्फोर है। लेकिन परीक्षा नियामक प्राधिकारी के विशेषज्ञों ने वेलफेयर ग्राह्य को सही मान लिया था।


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माध्यमिक शिक्षकों को भी ऑनलाइन छुट्टी, मानव संपदा पोर्टल से छुट्टी लेने की प्रक्रिया होगी अनिवार्य रूप से लागू

माध्यमिक शिक्षकों को भी ऑनलाइन छुट्टी, मानव संपदा पोर्टल से छुट्टी लेने की प्रक्रिया होगी अनिवार्य रूप से लागू 


माध्यमिक स्तर के स्कूलों में भी अब शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से ही छुट्टी ले सकेंगे। मानव संपदा पोर्टल से छुट्टी लेने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। महानिदेशक विजय किरन आनंद ने माध्यमिक शिक्षा का कार्यभार संभालते ही एक महीने के अंदर इस प्रक्रिया को लागू करने के आदेश दिए हैं। इस निर्णय से राजकीय व एडेड स्कूलों के लगभग 90 हजार शिक्षकों को लाभ होगा।


इसके लागू होने के बाद शिक्षकों की तैनाती, छुट्टियों, तबादले, इंक्रीमेंट आदि सभी जानकारियां एक जगह होंगी। इस पोर्टल पर कर्मचारी या शिक्षक की सर्विस बुक भी होगी। मानव संपदा पोर्टल सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में लागू कर दिया है

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष रखा गया 12 सूत्रीय मांगपत्र, देखें

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष रखा गया 12 सूत्रीय मांगपत्र, देखें

Saturday, November 12, 2022

डेंगू से बचाव को स्कूलों में कराएं फॉगिंग : हाईकोर्ट, डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार को चेताया

डेंगू से बचाव को स्कूलों में कराएं फॉगिंग :  हाईकोर्ट, डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार को चेताया


लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शहर में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार को चेताया है। न्यायालय ने बच्चों के स्कूलों में फॉगिंग सुनिश्चित करने का आदेश नगर निगम को दिया है। इसके साथ न्यायालय ने कॉलोनियों और मोहल्लों में फॉगिंग के लिए सामुदायिक सहयोग लेने की भी सलाह दी है। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।


यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने आशीष मिश्रा और अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते पारित किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और नगर निगम के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वेक्टर-जनित रोगों के रोकथाम के लिए कसर नहीं छोड़ी जा रही है।


 
इस क्रम में तीन कमेटियां भी बनाई है। इस पर पीठ ने कटाक्ष करते कहा कि अखबारों में तो आपके प्रयास दिख रहे हैं, लेकिन क्या जमीनी स्तर पर भी काम किया जा रहा है। कोर्ट ने आगे कहा कि अखबारों में एक और डेंगू मरीज के मृत्यु की खबर है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूलों में फॉगिंग सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया।

अब माध्यमिक स्कूलों में भी गणित-विज्ञान पर जोर, बनेगा राज्य स्तरीय रिसोर्स ग्रुप

अब माध्यमिक स्कूलों में भी गणित-विज्ञान पर जोर, बनेगा राज्य स्तरीय रिसोर्स ग्रुप 



लखनऊ : बेसिक शिक्षा की तरह अब माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में भी गणित, अंग्रेजी और विज्ञान पर जोर दिया जाएगा। इसका राज्य स्तरीय रिसोर्स ग्रुप बनाया जाएगा, जिसमें हर विषय के 50-50 शिक्षक शामिल होंगे। पढ़ाई को और दिलचस्प बनाने के लिए 10-10 कम्प्यूटर राजकीय स्कूलों में भेजे जाएंगे।


यूपी बोर्ड के कक्षा नौ से बारह तक पाठ्यक्रम के मुताबिक मौजूद ऑनलाइन कंटेंट को देखने-परखने और शिक्षकों की मदद के लिए यह टीम बनाई जाएगी। ये शिक्षकों का समूह राजकीय स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगे, वहीं ऑनलाइन कंटेंट को परख कर अच्छी व सरल सामग्री को आगे भेजेंगे। स्कूलों में कम्प्यूटर की मदद से बच्चों को दिखा कर पढ़ाया जाएगा।



इसकी शुरुआत प्रदेश के 2200 राजकीय माध्यमिक स्कूलों से की जा रही है। बाद में इसे एडेड स्कूलों तक ले जाया जाएगा। ये एसआरजी प्रदेश के स्कूलों के अपने विषयों के एक्सपर्ट शिक्षकों से बनाया जाएगा। ये शिक्षक यह भी तय करेंगे कि इन विषयों में लर्निंग आउटकम की जांच किन बिन्दुओं पर की जाए और कैसे की जाए। अभी बेसिक शिक्षा के कक्षा एक से आठ तक के लिए मूल्यांकन प्रणाली तय कर दी गई है कि किस कक्षा में किस विषय के लर्निंग आउटकम क्या होंगे, मसलन कक्षा तीन के छात्र को न्यूनतम दो संख्या का जोड़-घटाना आना चाहिए।

अब प्राइमरी स्कूलों के बच्चे सीधे देंगे वार्षिक परीक्षा, त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक परीक्षा के स्थान पर बच्चों की दक्षता परखने के लिए निपुण लक्ष्य मूल्यांकन और लर्निंग आउट कम परीक्षा होगी

अब प्राइमरी स्कूलों के बच्चे  सीधे देंगे वार्षिक परीक्षा, त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक परीक्षा के स्थान पर बच्चों की दक्षता परखने के लिए निपुण लक्ष्य मूल्यांकन और लर्निंग आउट कम परीक्षा होगी


1618 प्राइमरी स्कूलों की संख्या है, राजधानी में, प्रदेश में 111599

02 करोड़ से अधिक बच्चों की संख्या यूपी में, लखनऊ में दो लाख से अधिक बच्चे हैं


● त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक परीक्षा नहीं होगी

● बच्चों के मूल्यांकन के लिए निपुण लक्ष्य और लर्निंग आउट कम परीक्षा आयोजित होगी

● प्रदेश में एक लाख 11 हजार 599 परिषदीय स्कूलों में करीब दो करोड़ बच्चे पंजीकृत


लखनऊ : अब सूबे के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बच्चों को त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक नहीं देनी होगी। बच्चे सीधे वार्षिक परीक्षा देंगे। फरवरी के आखिर में वार्षिक परीक्षा प्रस्तावित है। बच्चों की दक्षता परखने के लिए निपुण लक्ष्य मूल्यांकन और लर्निंग आउट कम परीक्षा होगी। इसके अलावा अन्य गतिविधियों की मदद से बच्चों का मूल्यांकन होगा।


परिषदीय स्कूलों में अभी तक सितम्बर में त्रैमासिक और नवम्बर के आखिर में अर्द्ध वार्षिक करायी जाती थी। शैक्षिक सत्र 2022-23 में शासन ने प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बच्चों को कॉन्वेंट की तरह दक्ष बनाने के लिए पाठ्यक्रम के साथ ही निपुण लक्ष्य और लर्निंग आउट कम समेत कई अन्य गतिविधियां शुरू की गईं। यह पाठ्यक्रम ऐप और पीडीएफ के जरिए शिक्षकों उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के मूल्यांकन के लिए ओएमआर शीट के जरिए निपुण लक्ष्य और लर्निंग आउट कम परीक्षा शुरू की गई है। 

इन्हीं गतिविधियों के चलते विभाग ने त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक परीक्षा को फिलहाल के लिए टाल दिया है। इस मामले में बीएसए अरुण कुमार का कहना है कि उच्च अधिकारियों से जानकारी मिली है कि प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में त्रैमासिक और अर्द्ध वार्षिक परीक्षा नहीं होगी। अब सीधे वार्षिक परीक्षा होगी। फरवरी के आखिर में यह परीक्षा होगी।

Friday, November 11, 2022

बदलाव : अब महिलाएं कहीं भी जाकर पूरी कर सकेंगी पीएचडी

बदलाव : अब महिलाएं कहीं भी जाकर पूरी कर सकेंगी पीएचडी


पीएचडी करने वाली लड़कियों-महिलाओं को अब दूसरी जगह जाकर पीएचडी पूरी करने की छूट मिलेगी। उन्हें बार- बार भाग कर अपने शहर पीएचडी पूरी करने के लिए नहीं आना पड़ेगा। उनका पूरा का पूरा काम दूसरी जगह ट्रांसफर हो सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीएचडी के नए नियमों में इसे शामिल किया है।


इससे पहले 2016 में पीएचडी करने के नए नियम व संशोधन जारी किए गए थे लेकिन अब नई शिक्षा नीति के मुताबिक संशोधन करते हुए यूजीसी ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके मुताबिक शादी के चलते या अन्य कारणों से महिला शोधार्थी दूसरी जगह जाती है और वहां के किसी संस्थान में पीएचडी जारी रखना चाहती है तो उसे अनुमति दी जाएगी।


इसमें सभी नियम व शर्तों का ध्यान रखा जाएगा। यह भी ध्यान रखा जाएगा कि शोध मूल संस्थान या पर्यवेक्षक द्वारा किसी वित्त पोषण एजेंसी से प्राप्त न किया गया हो। इस नियम के तहत शोधार्थी का अब तक का किया पूरा काम ट्रांसफर हो जाएगा। हालांकि शोधार्थी को उस हिस्से का क्रेडिट अपने मूल संस्थान व सुपरवाइजर को देना पड़ेगा। अभी तक महिला शोधार्थियों को दो वर्ष का अतिरिक्त समय शोध पूरा करने के लिए दिया जाता था। वहीं इस दौरान मातृत्व अवकाश व बाल्य देखभाल अवकाश के रूप में अधिकतम 240 दिनों की छुट्टी की सुविधा भी थी।

अब तक 1.41 करोड़ अभिभावकों के खातों में DBT के जरिए भेजी गई यूनिफॉर्म की धनराशि

अब तक 1.41 करोड़ अभिभावकों के खातों में DBT के जरिए भेजी गई यूनिफॉर्म की धनराशि

DBT : 17 लाख बच्चो के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से जोड़ने का काम जारी 

8 लाख विद्यार्थियों का डाटा संदिग्ध,  पुनः परीक्षण के बाद DBT के जरिए धनराशि होगी जारी


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में 1.41 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के जरिए यूनिफॉर्म व अन्य सामग्री खरीदने के लिए धनराशि भेज दी है। वहीं लगभग 17 लाख अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से जोड़ने का काम कराया जा रहा है। इसके पूरा होते ही इनके खातों में भी धनराशि भेज दी जाएगी।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने अभिभावकों का आह्वान किया है कि वह भेजी गई धनराशि से यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग व स्टेशनरी आदि खरीद लें। वहीं नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया, चौपाल, गोष्ठियों आदि में भी अभिभावकों से यूनिफॉर्म आदि खरीदने के लिए कहा जा रहा है। शिक्षक भी घर-घर संपर्क कर रहे हैं।


वहीं जो खाते आधार से नहीं जुड़े हैं, उसके लिए भी अभिभावकों को प्रेरित किया जा रहा है। चालू सत्र 2022-23 में पंजीकृत कुल 1.91 करोड़ विद्यार्थियों के सापेक्ष 1.66 करोड़ विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों का आधार सत्यापित किया जा चुका है। शेष विद्यार्थियों के आधार नामांकन के लिए प्रत्येक ब्लॉक संसाधन केंद्र पर दो दो आधार नामांकन किट विभाग ने उपलब्ध कराई हैं। न्याय पंचायत संसाधन केंद्रों पर भी नामांकन केंद्रों की स्थापना के लिए अनुबंध किया गया है।


उधर, डीबीटी में पारदर्शी प्रक्रिया के लिए नामांकित विद्यार्थियों का प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है। वहीं विद्यार्थियों व उनके अभिभावक के आधार का डीबीटी मोबाइल एप से शिक्षकों द्वारा सत्यापित किया जा रहा है। महानिदेशक के अनुसार लगभग 8 लाख विद्यार्थियों का डाटा संदिग्ध मानकर उसका पुनः परीक्षण बीएसए व बीईओ के जरिए किया जा रहा है।


Thursday, November 10, 2022

मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन करेंगे माध्यमिक के प्रधानाचार्य

मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन करेंगे माध्यमिक के प्रधानाचार्य


लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के बैनर तले माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रधानाचार्यों ने 14 सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर धरना दिया। परिषद के पदाधिकारियों ने विभाग के निदेशक महेंद्र देव को संबंधित ज्ञापन भी दिया।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा में परिषद के प्रांतीय संरक्षक श्रीनिवास शुल्क ने कहा कि आंदोलन के पहले चरण में सभी जिला मुख्यालयों पर 20 अक्तूबर को प्रधानाचार्यों ने धरना देकर जिला विद्यालय निरीक्षक को मांग पत्र दिए थे। पर, सरकार की हठधर्मिता के चलते समस्याएं यथावत है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य की स्थिति व अस्मिता से जुड़ा मांग पत्र है। इसे स्वीकार कर सरकार को शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ करना चाहिए।


परिषद के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रधानाचार्य अब खामोश नहीं बैठेगा। अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।


वहीं प्रांतीय संरक्षक डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार की उदासीनता माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। डॉ. वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि समस्याओं की अनदेखी करना यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। धरना सभा को प्रांतीय कोषाध्यक्ष डॉ. मणिशंकर तिवारी, डॉ. शैलेंद्र दत्त शुक्ल, संगठन मंत्री राम सुंदर पांडे, हर प्रसाद यादव और सुशील कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। धरना कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री डॉ. रवींद्र त्रिपाठी ने किया।

UGC ने नौकरी करने के साथ PhD की दी छूट

UGC ने नौकरी करने के साथ PhD की दी छूट


प्रयागराज । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई दिल्ली ने शोध के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सात नवंबर को जारी गजट के अनुसार अब कहीं भी सेवारत कर्मचारी या शिक्षक पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे। पहले सरकारी सेवारत कर्मचारियों या शिक्षकों को शोध करने के लिए अपने विभाग से अध्ययन अवकाश लेना पड़ता था।


थीसिस के मूल्यांकन के लिए तीन परीक्षकों की प्रथा थी जिसमें एक गाइड और दो बाह्य परीक्षक। सामान्य तौर पर बाह्य परीक्षक में एक अपने राज्य और दूसरा अन्य राज्य का होता था। अब यूजीसी ने कहा है कि एक परीक्षक अपने संस्थान के बाहर का हो और दूसरा विदेश का ख्यातिलब्ध शिक्षाविद हो। तीसरी खास बात है कि ऑनलाइन या दूरस्थ विधि से शोध कार्य की मान्यता नहीं है। इस पर काफी समय तक विचार विमर्श होता रहा कि मान्य है या नहीं। 


अब यूजीसी ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन या दूरस्थ विधि से पीएचडी नहीं की जा सकती। ऐसे स्थायी अध्यापक जिनकी सेवानिवृत्ति में तीन साल बचे हैं वह शोध के लिए किसी छात्र का नामांकन नहीं करा सकते, हालांकि वह को-गाइड के रूप में अधिकतम 70 वर्ष तक पीएचडी करा सकते हैं। 


सबसे खास बात है कि पहले थीसिस जमा कराने से पहले शोधार्थी को कम से कम दो शोधपत्र संदर्भित शोध पत्रिकाओं में छपवाना पड़ता था। अब इसकी छूट दी गई है। शोध की प्रक्रिया के दौरान दो शोधपत्र छपवाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा जब कोई थीसिस जमा कर दे तो विश्वविद्यालयों को अधिकतम छह महीने के अंदर वायवा कराना होगा। 


पहले छात्र थीसिस जमा करने के बाद सालभर डेढ़ साल तक वायवा के लिए चक्कर काटते रहते थे। अब यूजीसी ने इसे समयबद्ध कर दिया है। अब पीएचडी कम से तीन वर्ष की होगी इसमें छह माह का कोर्स वर्क शामिल होगी। पीएचडी पूरी करने की अधिकतम अवधि छह वर्ष की होगी। राजकीय पीजी कॉलेज सैदाबाद में जन्तु विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. एके वर्मा ने कहा कि इन बदलावों से शोध कार्य समययबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से होंगे। साथ ही नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

IIT समेत भारत के 7 संस्थान एशिया के टॉप 100 इंस्टीट्यूट में शामिल, देखें पूरी सूची

IIT समेत भारत के 7 संस्थान एशिया के टॉप 100 इंस्टीट्यूट में शामिल, देखें पूरी सूची



विश्व प्रसिद्ध क्यूएस एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2023 में एशिया के टॉप 100 इंस्टीट्यूट्स की लिस्ट में भारत के 7 संस्थानों को शामिल किया गया है। सात भारतीय संस्थानों में 5 आईआईटी, आईआईएससी बेंगुलरु और दिल्ली यूनिवर्सिटी हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे ने अपनी रैंकिंग में इस वर्ष सुधार किया है। 2022 में जहां यह दिग्गज आईटी संस्थान 42वें पायदान पर था, वहां अब यह 40वें स्थान पर आ गया है। भारतीय संस्थानों की लिस्ट में आईआईटी बॉम्बे टॉप पर है। 


एशिया के 760 विश्वविद्यालयों की रैंकिंग की इस लिस्ट में आईआईटी दिल्ली 46वें स्थान पर रहा, जो पिछले साल 45वें पायदान पर था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ( आईआईएससी ) बेहतर प्रदर्शन करते हुए पिछले साल के मुकाबले (56वीं रैंक) इस वर्ष 52वें स्थान पर है। आईआईटी मद्रास ने भी अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इस बार यह 53वें स्थान पर है। आईआईटी खड़गपुर 61वें, आईआईटी कानपुर 66वें और दिल्ली यूनिवर्सिटी 85वें स्थान पर हैं। 


ये हैं एशिया के बेस्ट संस्थान
चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी इस लिस्ट में टॉप पर है। दूसरे स्थान पर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर और तीसरे स्थान पर चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी हैं। 


क्यूएस रैंकिंग में एशिया के बेस्ट इंस्टीट्यूट्स, रैंक और स्कोर
पेकिंग यूनिवर्सिटी, स्कोर - 100, रैंक- 1
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगपुर- 97.4, रैंक 2
सिंघुआ यूनिवर्सिटी, स्कोर - 97.3, रैंक- 3
द यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग - 96.8, रैंक-4
नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर - 96.7, रैंक - 5


रैंकिंग में भारत के इंस्टीट्यूट, रैंक और स्कोर
आईआईटी बॉम्बे - स्कोर 68.7, रैंक 40
आईआईटी दिल्ली,  स्कोर 64.9, रैंक 46
आईआईएससी बेंगलुरु, स्कोर 59.4, रैंक 52
आईआईटी मद्रास - स्कोर 59, रैंक 53
आईआईटी खड़गपुर - स्कोर 55.4, रैंक 61
आईआईटी कानपुर , स्कोर 52.4,  रैंक 66
दिल्ली विश्वविद्यालय, स्कोर 47.1, रैंक 85
आईआईटी रुड़की, स्कोर 40.3, रैंक 114
जेएनयू, दिल्ली, स्कोर 38.8, रैंक 119
आईआईटी गुवाहाटी, स्कोर 37.8, रैंक 124

सर्वे में 60 जिलों में 8496 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त, 15 नवम्बर तक सभी जिलों से मांगी रिपोर्ट

सर्वे में 60 जिलों में 8496 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त, 15 नवम्बर तक सभी जिलों से मांगी रिपोर्ट 


जिलाधिकारियों के माध्मम से शासन स्तर पर सर्वे रिपोर्ट प्राप्त किए जाने की अंतिम तिथि 15 नवंबर तय की गई है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शेष 15 जिलों की सर्वे निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बताया कि सभी जिलों से सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरी निर्णय लिए जाएंगे।



अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अभी तक 60 जिलों से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की सर्वे रिपोर्ट मिल गई है। इनमें 8496 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त मिले हैं। वह बुधवार को विधानभवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में समीक्षा बैठक कर रहे थे।


मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शेष 15 जिलों की सर्वे निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बताया कि सभी जिलों से सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। इस सर्वे का उद्देश्य अल्पसंख्यक वर्ग को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना और विकास की गति से जोड़ना है। गौरतलब है कि जिलाधिकारियों के माध्मम से शासन स्तर पर सर्वे रिपोर्ट प्राप्त किए जाने की अंतिम तिथि 15 नवंबर तय की गई है।


उन्होंने निर्धारित समय में सर्वे संपन्न के लिए अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों की सराहना की। साथ ही निर्देश दिए कि यह विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि सर्वे कार्य का परिणाम सकारात्मक हो और इससे अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र अधिकाधिक लाभान्वित हों। उन्होंने कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं और इनका भविष्य संवारना हम सबकी जिम्मेदारी है।


बैठक में राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का सर्वांगीण विकास ही हम सबका प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। बैठक में प्रभारी प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, विशेष सचिव आनंद कुमार, निदेशक जे. रीभा, रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह व संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय मौजूद रहे।


इन जिलों से मिली रिपोर्ट
लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, बस्ती, कासगंज, महोबा, औरैया, ललितपुर, चंदौली, शामली, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, चित्रकूट, मथुरा, मऊ, आगरा, फतेहपुर, कौशांबी, हमीरपुर, देवरिया, जौनपुर, सहारनपुर, कानपुर नगर, जालौन, उन्नाव, बांदा, शाहजहांपुर, झांसी, हरदोई, संभल, पीलीभीत, संतकबीरनगर, गाजियाबाद, इटावा, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, बलिया, बरेली, लखीमपुर खीरी, सोनभद्र, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, महराजगंज, बुलंदशहर, वाराणसी, कानपुर देहात, मेरठ, बदायूं व प्रयागराज