
Saturday, March 9, 2024
बीबीए, बीसीए व बीएमएस की छात्राओं को हर वर्ष मिलेगी 25,000 रुपये छात्रवृत्ति, कमजोर वर्ग की मेधावी बेटियों के लिए केंद्र की नई योजना का एलान
बीबीए, बीसीए व बीएमएस की छात्राओं को हर वर्ष मिलेगी 25,000 रुपये छात्रवृत्ति, कमजोर वर्ग की मेधावी बेटियों के लिए केंद्र की नई योजना का एलान
नई दिल्ली। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं के लिए नई छात्रवृत्ति योजना की घोषणा की है। व्यावसायिक प्रबंधन में स्नातक (बीबीए), कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक (बीसीए) व प्रबंधन शिक्षा में स्नातक (बीएमएस) की छात्राओं को शैक्षणिक सत्र 2024-25 से सालाना 25 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसका लाभ, एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेजों की छात्राओं को ही मिलेगा।
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीताराम ने शुक्रवार को योजना लॉन्च करते हुए कहा कि इस योजना के तहत हर साल मेरिट के आधार पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 3,000 छात्राओं को 7.5 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। अभी तक इंजीनियरिंग क्षेत्र में बेटियों को सालाना 50,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।
16 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, अप्रैल अंत या मई के पहले सप्ताह में परीक्षा परिणाम आने की उम्मीद
16 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, अप्रैल अंत या मई के पहले सप्ताह में परीक्षा परिणाम आने की उम्मीद
प्रयागराज । यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाएं शनिवार को समाप्त होंगी। इसी के साथ 55 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के परिणाम का इंतजार शुरू हो जाएगा। वैसे बोर्ड सूत्रों की मानें और सबकुछ निर्धारित उम्मीद के मुताबिक हुआ और चुनाव आयोग की अनुमति मिल गई तो अप्रैल अंत या अधिकतम मई के पहले सप्ताह में परिणाम घोषित हो
■ चुनाव के कारण निर्वाचन आयोग से लेनी होगी अनुमति
पिछले साल भी कॉपियों का मूल्यांकन 31 मार्च को पूरा हुआ था और परिणाम रिकॉर्ड समय में 25 अप्रैल को घोषित कर दिया गया था। इस साल भी 31 मार्च को ही मूल्यांकन समाप्त हो रहा है।
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शनिवार को समाप्त हो रही हैं। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य प्रगति पकड़ेगा। बोर्ड से आए दिशा-निर्देशों के अनुसार इस बार 16 मार्च से कापियों का मूल्यांकन शुरू होगा।
प्रयागराज। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं नौ मार्च को समाप्त होंगी। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बोर्ड ने रूपरेखा तैयार कर ली है। मूल्यांकन 16 से 31 मार्च के बीच पूरा होगा। 3.01 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 1,47,097 परीक्षक नियुक्त किए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव देव्यकांत शुक्ल ने बताया कि परीक्षाएं समाप्त होने के एक सप्ताह बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी शुरू हो जाएगा। हाईस्कूल परीक्षा में 29,47,311 और इंटर में 25,77,997 परीक्षार्थी समेत 55,25,308 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।
कुल 3.01 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश भर में 1,47,097 परीक्षकों को नियुक्त किया गया है। हाईस्कूल की 1.76 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 94,802 परीक्षक और इंटर की 1.25 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 52,295 परीक्षकों को नियुक्त किया गया है।
इसके लिए कुल 260 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए 131 और इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 116 केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
अपने घर में डीआईओएस आगरा का बाबू पांच लाख घूस लेते गिरफ्तार
अपने घर में डीआईओएस आगरा का बाबू पांच लाख घूस लेते गिरफ्तार
आगरा । जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक रामप्रकाश गुरुवार की रात एंटी करप्शन के जाल में फंस गया। उसने पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। टीम ने उसे लॉयर्स कालोनी से रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। रिश्वत मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए मांगी गई थी। पीड़ित की शिकायत पर जाल बिछाया गया था। बाबू को जेल भेज दिया
शास्त्रीपुरम (सिकंदरा) के सी-2 सेक्टर निवासी अश्वनी कुमार सिंह के पिता अनिरुद्ध कुमार सिकंदरा में सहायक अध्यापक थे। छह अगस्त 2020 को उनकी मृत्यु हो गई। अश्वनी ने पिता की मौत के एक साल बाद मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए आवेदन किया। प्रधान सहायक रामप्रकाश ने फाइल आगे बढ़ाने के लिए मोलभाव शुरू कर दिया।
Friday, March 8, 2024
बिना मान्यता के चल रहे मदरसे होंगे बंद, एसआइटी ने अंतरिम रिपोर्ट में की सिफारिश
बिना मान्यता के चल रहे मदरसे होंगे बंद, एसआइटी ने अंतरिम रिपोर्ट में की सिफारिश
लखनऊ : मदरसों में शैक्षिक कायर्यों को बढ़ावा देने के लिए हो रही विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग की जांच के दौरान प्रदेश में 8,848 मदरसे अवैध पाए गए हैं। एसआइअटी (विशेष जांच दल) की जांच में सामने आया है कि इन मदरसों का संचालन बिना किसी अनुमति के हो रहा था और इनके संचालक अपनी आय के श्रोत का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। मानकों को दरकिनार कर चलाए जा रहे इन मदरसों को खाड़ी देशों से फंडिंग भी हो रही थी। इनमें मदरसा बोर्ड व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी की कोई मानीटरिंग नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि अवैध पाए गए ज्यादातर मदरसे वर्ष 2005 के बाद से संचालित हो रहे हैं। इनमें सिद्धार्थनगर में 800 से अधिक व श्रावस्ती में 400 से अधिक अवैध मदरसे हैं। नेपाल सीमा से सटे जिलों में इनकी संख्या अधिक है। एसआइटी मामले में अब तक दो अंतरिम रिपोर्ट सौंप चुकी है। इनमें अवैध पाए गए मदरसों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। माना जा रहा है कि बोर्ड परीक्षा के बाद अवैध मदरसों को बंद किए जाने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
जांच के बाद एसआईटी ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, बताया- खाड़ी देशों से आई रकम से हुआ निर्माण
टेरर फंडिंग के लिए जुटाई गई रकम हवाला के जरिये भेजने की आशंका
लखनऊ। सरकार के निर्देश पर प्रदेश के अवैध मदरसों की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसमें करीब 13 हजार अवैध मदरसों को बंद कराने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के आधार पर अब मदरसा बोर्ड कार्रवाई करने की तैयारी में है। जांच में जिन मदरसों को अवैध पाया गया है, उनमें से अधिकतर नेपाल सीमा पर स्थित हैं। इनका निर्माण खाड़ी देशों से मिली रकम से बीते दो दशकों में हुआ है।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कई और चौंकाने वाले खुलासे भी किए हैं। जिन 13 हजार मदरसों को बंद करने की सिफारिश की गई है, उनमें से अधिकतर नेपाल की सीमा से सटे महराजगंज, श्रावस्ती, बहराइच समेत कई जिलों में हैं। हर एक सीमावर्ती जिले में ऐसे मदरसों की संख्या 500-500 से ज्यादा है। एसआईटी ने इन मदरसों से उनकी आय और व्यय का ब्योरा मांगा तो वे उपलब्ध नहीं करा सके।
इससे आशंका जताई जा रही है कि सोची-समझी साजिश के तहत टेरर फंडिंग के लिए जुटाई गई रकम को हवाला के जरिये मदरसों के निर्माण के लिए भेजा गया। अधिकतर मदरसों ने अपने जवाब में चंदे की रकम से निर्माण कराने का दावा किया है, हालांकि वह चंदा देने वालों का नाम नहीं बता सके।
बच्चों के शारीरिक शोषण का आरोप भी
जांच में यह भी सामने आया है कि गैरकानूनी तरीके से बने इन मदरसों में बच्चों का शारीरिक शोषण भी होता है। पूर्व में ऐसे तमाम प्रकरण सामने आ चुके हैं। इन मदरसों की मान्यता भी नहीं है। वहीं, सर्टिफिकेट मान्य नहीं होने की वजह से यहां से शिक्षा प्राप्त करने वालों को नौकरी भी नहीं मिल पाती है।
पांच हजार के पास अस्थायी मान्यता
जांच में कुल 23 हजार मदरसों में से 5 हजार के पास अस्थायी मान्यता का पता चला। कुछ तो बीते 25 वर्षों में मान्यता के मानक पूरे नहीं कर सके हैं। शिक्षा का अधिकार व धार्मिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के नाम पर चल रहे तमाम मदरसों ने मान्यता का नवीनीकरण कराना तक जरूरी नहीं समझा व धड़ल्ले से उसे संचालित कर रहे हैं। बाकी पांच हजार में फिलहाल कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।
हैरानी की बात यह है कि इन मदरसों का कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी निरीक्षण करने तक नहीं जाता है।
100 करोड़ मिलने की हुई थी पुष्टि
एसआईटी की जांच में सीमावर्ती इलाकों के 80 मदरसों को विदेश से करीब 100 करोड़ रुपये की फंडिंग होने की पुष्टि बीते दिनों हुई थी। राज्य सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए सारे मदरसों की गहनता से जांच करने का एसआईटी को आदेश दिया था।
सरनेम बदलने के आधार पर 6 साल से बेसिक शिक्षिका पेंशन रोके रखना एकदम अनुचित – हाईकोर्ट
सर नेम बदलने के आधार पर 6 साल से बेसिक शिक्षिका पेंशन रोके रखना एकदम अनुचित – हाईकोर्ट
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केवल सरनेम बदले जाने के आधार पर रिटायर शिक्षिका की पेंशन व सेवानिवृत्ति भुगतान रोकने के कदम को अनुचित करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार का काम जनता के हित का ध्यान रखना है, अनावश्यक के तकनीकी आधारों पर लोगों को परेशान करना नहीं।
कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों में सिर्फ सरनेम बदल जाने के आधार पर पेंशन रोकना सरकार का अत्यधिक तकनीकी रवैया है। इसी के साथ कोर्ट ने दिवंगत शिक्षिका के विधिक उत्तराधिकारी को बकाया पेंशन का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने ममता जौहरी उर्फ ममता भटनागर की याचिका पर दिया।
मामले के तथ्यों के अनुसार याची बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के पद से सेवानिवृत हुई। नौकरी ज्वाइन करते समय रिकॉर्ड में उनका नाम ममता भटनागर था। बाद में उन्होंने अपना नाम ममता जौहरी कर लिया। उनका बैंक अकाउंट भी इसी नाम से खुला और आधार कार्ड में भी उन्होंने अपना नाम ममता भटनागर की जगह ममता जौहरी करा लिया। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति भुगतान के कागजात ममता जौहरी के नाम से तैयार नहीं किया जा सके। जिससे भुगतान नहीं हो सका।
याची ने वर्ष 2018 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जो करीब छह साल तक लंबित रही और इस दौरान 2021 में याची का निधन हो गया। बाद में उसके विधिक उत्तराधिकारी के नाम से याचिका में परिवर्तन किया गया। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि याची के विधिक उत्तराधिकारी के बैंक खाते में उसकी पेंशन और सेवनिवृत्ति का जो भी बकाया है, उसका भुगतान किया जाए।
बेसिक शिक्षकों को टैबलेट तो दिया लेकिन सिम और डाटा का पता नहीं, अधिकारी कार्यवाही की दे रहे चेतावनी
बेसिक शिक्षकों को टैबलेट तो दिया लेकिन सिम और डाटा का पता नहीं, अधिकारी कार्यवाही की दे रहे चेतावनी
■ ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगा पा रहे शिक्षक
■ स्कूलों को टैबलेट दिए लेकिन काम शुरू नहीं
लखनऊ । प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की ऑनलाइन उपस्थित्ति व अन्य कामों के लिए शिक्षकों को टैबलेट तो दिये, लेकिन सिम और डाटा का पता नहीं। शिक्षक सिम और इंटरनेट कनेक्शन मांग रहे हैं। वहीं अधिकारी वेतन रोकने की घुड़की दे रहे हैं। टैबलेट देने के तीन माह बाद भी बच्चों को ऑनलाइन उपस्थिति व अन्य किसी काम में इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। टैबलेट स्कूल के कार्यालय में बंद रखे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने नवम्बर में सूबे के सभी प्राथमिक स्कूलों में टैबलेट दिये थे। इस टैबलेट से बच्चों की ऑन लाइन उपस्थिति, एमडीएम समेत अन्य सभी काम ऑन लाइन किये जाने थे। ताकि बच्चों की उपस्थिति और सभी योजनाओं की निगरानी मुख्यालय से की जा सके।
विभाग ने मार्च तक टैबलेट में इंटरनेट के प्रयोग के लिए कम्पोजिट ब्रांट से 1500 रुपये खर्च करने की व्यवस्था दी थी, लेकिन शिक्षकों ने इसका उपयोग नहीं किया। शिक्षक लगातार मांग कर रहे हैं विभाग उन्हें सीयूजी नम्बर का सिम कार्ड और डाटा मुहैया कराए। तभी वो टैबलेट का उपयोग करेंगे।
कम्पोजिट स्कूलों में बिना इंटरनेट नहीं होगा संचालन
शहर व ग्रामीण क्षेत्र के काफी कम्पोजिट स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं हैं। यहां पर 10 से लेकर 20 कम्प्यूटर लगाए गए हैं। इन्हें चलाने के लिए इंटरनेट की जरूरत होगी। यह कम्प्यूटर सिम कार्ड से नहीं संचालित हो सकते हैं। शिक्षक लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नहीं, बच्चे कैसे बनें निपुण ? यूपी बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और बीआरसी प्रशिक्षणों ने बिगाड़ी निपुणता की लय
परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नहीं, बच्चे कैसे बनें निपुण ? यूपी बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और बीआरसी प्रशिक्षणों ने बिगाड़ी निपुणता की लय
लखनऊ: यूपी बोर्ड की परीक्षाएं चल रही है। उनमें कक्ष निरीक्षण के लिए माध्यमिक के अलावा बेसिक शिक्षको की ड्यूटी भी लगाई जा रही है। ज्यादातर जिलों में बेसिक स्कूलों के लगभग आधे शिक्षको की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगा दी गई है। जो शिक्षक बचे है, उनको फाउडेशनल लिट्रेसी ऐंड न्यूमरेसी (FLN) ट्रेनिंग के लिए आदेश कर दिए गए है। स्कूलो में पढ़ाने के लिए शिक्षक बचे नही है।
यह तब है जब 16 मार्च से बेसिक स्कूलो में परीक्षा भी होनी है। दरअसल, यूपी बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षण के लिए बड़ी संख्या में शिक्षको की जरूरत होती है। इसमे राजकीय और एडेड इंटर कॉलेजो के शिक्षको की ड्यूटी लगाई जाती है। एडेड इंटर कॉलेजो के शिक्षक प्रबंधतंत्र के अधीन होते है। वे परीक्षा ड्यूटी करने से बचते हैं। ऐसे में कमी पूरी करने के लिए बेसिक शिक्षको की ड्यूटी लगा दी जाती है।
शिक्षकों का कहना है कि एक ओर बच्चों को निपुण बनाने का अभियान चल रहा है। अब बेसिक स्कूलों की परीक्षा से पहले ज्यादातर शिक्षकों की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगा दी गई। इसी समय FLN ट्रेनिंग शुरू कर दी गई।
वही, प्रमुख सचिव-बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओ में चार-पांच दिन ही ड्यूटी रहेगी। FLN ट्रेनिंग लगभग पूरी हो रही है। जो नही कर पाएंगे, उनको बाद में करवा दी जाएगी। स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
Thursday, March 7, 2024
Wednesday, March 6, 2024
राज्यपाल आनंदी बेन ने आगरा विवि के परीक्षा परिणाम व दीक्षांत समारोह में देरी और कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी और जिम्मेदारों को दिखाया आईना
ऐसी डिग्री से क्या लाभ, जब मेधावियों के लिए नौकरी ही न बचे : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदी बेन ने आगरा विवि के परीक्षा परिणाम व दीक्षांत समारोह में देरी और कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी और जिम्मेदारों को दिखाया आईना
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 89वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने परीक्षा, परिणाम और दीक्षांत समारोह में देरी पर विश्वविद्यालय प्रशासन को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह हो चुके हैं, सबसे अंत में यहां हो रहा है। तंज कसते हुए कहा कि सत्र के आखिरी दिनों में डिग्री देने से छात्रों का क्या लाभ, जब प्लेसमेंट की नौकरियां हीं नहीं बचें। उन्होंने कुलपति की ओर इंगित कर नए सत्र से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में सबसे पहले इसी जुलाई में दीक्षांत समारोह कराने के लिए निर्देशित किया।
खंदारी परिसर स्थित छत्रपति शिवाजी मंडपम में हुए समारोह में अपने 20 मिनट के संबोधन में राज्यपाल ने शैक्षणिक सत्र की देरी पर सख्त लहजे में कहा कि कोई अनपढ़ हो समझ में भी आए, यहां तो सभी शिक्षाविद् हैं, फिर भी लगातार देरी हो रही है। उन्होंने ऐसे कॉलेजों पर कार्रवाई के लिए कहा जो फीस, प्रायोगिक अंक-आंतरिक परीक्षा के अंक जमा करने में देरी करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कॉलेजों की वजह से सभी का परिणाम नहीं रोका जाए।
राज्यपाल ने प्रश्नपत्रों में त्रुटि पर कहा कि इससे छात्रों को परेशानी होती है पर इसे बनाने वाले पर कार्रवाई नहीं होती। छात्रों से पूछा कि ऐसे शिक्षक पर कार्रवाई होनी चाहिए कि नहीं। छात्रों का जवाब हां सुनकर उन्होंने कहा कि अब ऐसा ही होगा। राज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक गुणवत्ता में 6 विश्वविद्यालयों को ए प्लस प्लस रैंक मिलने पर अनुदान में 100-100 करोड़ रुपये मिले हैं। हाल ही में कानपुर विश्वविद्यालय भी इसी श्रेणी में शामिल हुआ है।
उन्होंने कहा कि बीते 10 साल में विश्वविद्यालय की जो हालत होनी थी वह हो गई। अब इसके उत्थान के लिए कार्य करना होगा, इसके लिए कुलपति से 15 मार्च के बाद मास्टर प्लान मांगा है। सभी के प्रयासों से एक बार फिर से आगरा विश्वविद्यालय को भी टॉप पर ले जाएंगे। समारोह में 120 मेधावियों को पदक दिए गए।
Agra News: दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति ने आगरा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
आगरा: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल होनहारों को सम्मानित कर रही थी तो किसी ने नही सोचा था कि कुलाधिपति आगरा विश्वविद्यालय की वास्तविक स्थिति का आईना उसी विश्वविद्यालय के अधिकारियों को दिखा देंगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंच से ही संबोधित करते ही आगरा विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा कि आज भी इस विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली नहीं बदली है। यूनिवर्सिटी में इन होनहार और मेधावी विद्यार्थियों को आज भी समय पर उनकी अंक तालिका और डिग्री नहीं मिलेगी तो छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में ही जाएगा। देश के ख्याति प्राप्त आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में पिछले कई दशकों से यही चल रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे तो विश्वविद्यालय में होनहार और मेधावी विद्यार्थियों को टोटा पड़ जाएगा।
आंबेडकर विश्वविद्यालय के 89 वें दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देने के बाद कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने आंबेडकर विश्वविद्यालय की दुःखती रग पर हाथ रख दिया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इशारों ही इशारों में आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, लेक्चरर , प्रशासक, शिक्षक संघ कर्मचारी संघ और छात्र संघ के नेताओं को संकेत दे दिया कि वह अपनी कार्यप्रणाली को सुधार लें।
उन्होंने अंबेडकर विश्वविद्यालय में नेतागिरी करने वालों को साफ संकेत दे दिया कि वह चेत जाएं और सुधर जाएं अन्यथा हमें जो करना है फिर वह मजबूर होकर करना ही होगा। उन्होंने कहा कि आगरा विश्वविद्यालय में हो रही नेतागिरी के चलते अब छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
महामहिम ने कहा कि यूजीसी द्वारा कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय को ए डबल प्लस दिया गया है, यूजीसी डबल प्लस को 100 करोड़ का अनुदान देता है, आप कहाँ पर हैं..? आख़िर आप A++ क्यों नहीं ला सकते.. उन्होंने विद्यार्थियों शिक्षकों प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके विश्वविद्यालय को A ++ मिलना चाहिए कि नहीं… नीचे से आवाज़ आईं मिलना चाहिए.. उन्होंने कहा फिर बदलाव के लिए तैयार हो जाएं। आप खुद बदलें तो अच्छा है अन्यथा हमें तो बदलाव करना ही है। उन्होंने कहा कि बीते सोमवार को विश्वविद्यालय के बारे में बहुत कुछ जाना है। अब यह सब नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि मैंने कुलपति आशु रानी को बता दिया है, जो नहीं सुधरेंगे उन्हें हम सुधार देंगे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सख्त लहजे में कहा कि जब देश के भर के विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की बड़ी-बड़ी कंपनियों में अपॉइंटमेंट हो जाती है तब आपका रिजल्ट निकलता है, अगर रिजल्ट देरी से निकला है तो नया सत्र भी देरी से ही शुरू होगा। ऐसे में आखिर अंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का भविष्य कैसे संवरेगा, यहां के मेधावी छात्र-छात्राओं को कैसे बड़ी कंपनियों में नियुक्ति मिलेगी।
उन्होंने कुलपति की तरफ देखते हुए कहा कि मैंने निर्देशित कर दिया है कि जो कॉलेज अपने छात्र-छात्राओं और प्रैक्टिकल की जानकारी नहीं भेजते हैं तो उनके चलते परीक्षा और रिजल्ट में देरी न करें। अब किसी भी कॉलेज की लापरवाही के चलते विश्व विद्यालय की परीक्षाएं और उसका परिणाम नहीं रुकेगा।
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रशासकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कॉलेज की भी ग्रेडिंग की जाएगी। जो कॉलेज A+, A लाएगा उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी, जिनको B ग्रेड मिलेगा उन्हें समझाया जाएगा, सुधरने की हिदायत दी जाएगी और C ग्रेड वाले कॉलेजों का क्या होना चाहिए यह आप ही तय कर लें… उन्होंने कहा कि जो नहीं सुधरेगा उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मंगलवार को आगरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पूरा होमवर्क करके आई थीं, उन्होंने विश्वविद्यालय के एक-एक करके सभी के कपड़े उधेड़ दिए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में बहुत कुछ कह दिया और साफ किया कि हर हाल में विश्वविद्यालय का सेशन सही समय पर शुरू होगा। मैं कुलपति आशु रानी को मार्च के अंत में बुला रही हूँ, मैं जानुँगी कि विश्वविद्यालय के सत्र को सही समय पर शुरू करने के लिए क्या किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को अंक तालिकाएं और उनकी डिग्री सही समय पर मिलनी चाहिए, यह उनका अधिकार है। छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर नहीं लगते होंगे, अब उन्हें उनकी डिग्री और मार्कशीट डिजीलॉकर में उपलब्ध कराई जाएगी।
मनमाने आदेशों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सभी बीएसए का आज और कल प्रशिक्षण, इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जारी किया है निर्देश
बीएसए की अक्षमता को लेकर की गई तल्ख टिप्पणी के बाद हाईकोर्ट की नाराजगी दूर करने को सभी बीएसए का दो दिवसीय प्रशिक्षण हुआ शुरू
प्रदेश के सभी बीएसए का ऑनलाइन प्रशिक्षण आज से
हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश
विभागीय जांच में बीएसए के बाध्यकारी उपबंधों का पालन न करने पर कोर्ट नाराज
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने छह और सात मार्च को प्रदेश के सभी बीएसए का ऑनलाइन प्रशिक्षण कराने का आदेश जारी किया है। सचिव ने इसका आदेश मीनाक्षी मिश्रा की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की बीएसए की अक्षमता को लेकर की गई तल्ख टिप्पणी के बाद दिया है।
कोर्ट ने कहा था कि शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बाध्यकारी उपबंधों और नियमों की अनदेखी कर मनमाने आदेश दे रहे हैं। ऐसे कई मामले कोर्ट में आए, जिसमें बीएसए ने विभागीय जांच के उपबंधों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने प्रशिक्षित करने की जरूरत महसूस की।
मनमाना आदेश देने वाले बीएसए फर्रुखाबाद के खिलाफ कड़ा आदेश जारी करने के बजाय कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद से जानकारी मांगी। सचिव ने फौरन प्रदेश के सभी बीएसए को दो दिन के प्रशिक्षण में शामिल होने का आदेश जारी कर रिपोर्ट कोर्ट में दी। कोर्ट ने सचिव की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। साथ ही याची के संबंध में पारित बीएसए फर्रुखाबाद का आदेश रद्द करते हुए जांच रिपोर्ट की प्रति याची को देकर छह हफ्ते में नियमानुसार जांच प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने जारी किया है निर्देश
विभागीय जांच में बीएसए के बाध्यकारी उपबंधों का पालन नहीं करने पर कोर्ट नाराज
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने छह और सात मार्च को प्रदेश के सभी बीएसए का ऑनलाइन प्रशिक्षण कराने का आदेश जारी किया है। सचिव ने इसका आदेश याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की बीएसए की अक्षमता को लेकर की गई तल्ख टिप्पणी के बाद दिया है।
कोर्ट ने कहा था कि शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बाध्यकारी उपबंधों और नियमों की अनदेखी कर मनमाने आदेश दे रहे हैं। ऐसे कई मामले कोर्ट में आए, जिसमें बीएसए ने विभागीय जांच के उपबंधों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने प्रशिक्षित करने की जरूरत महसूस की।
मनमाना आदेश देने वाले बीएसए फर्रुखाबाद के खिलाफ कड़ा आदेश जारी करने के बजाय कोर्ट ने सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद से जानकारी मांगी। सचिव ने फौरन प्रदेश के सभी बीरसए को दो दिन के प्रशिक्षण में शामिल होने का आदेश जारी कर रिपोर्ट कोर्ट में दी। कोर्ट ने सचिव की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। साथ ही याची के संबंध में पारित बीएसए फर्रुखाबाद का आदेश रद्द करते हुए जांच रिपोर्ट की प्रति याची को देकर छह हफ्ते में नियमानुसार जांच प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित याचिका संख्या 3436/2024 श्रीमती मीनाक्षी मिश्रा बनाम स्टेट आॅफ यू0पी0 व अन्य के में

सेवानिवृत्त शिक्षकों ने मांगी काल्पनिक पदोन्नति, जल्द लाभ नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में लगाएंगे याचिका
सेवानिवृत्त शिक्षकों ने मांगी काल्पनिक पदोन्नति, जल्द लाभ नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में लगाएंगे याचिका
• अपर शिक्षा निदेशक राजकीय को पत्र लिखकर रखी मांग
प्रयागराज : निर्धारित समय पर विभागीय पदोन्नति (डीपीसी) नहीं मिलने से पात्र होने के साथ सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ऐसे में पदोन्नति सूची में सम्मिलित सेवानिवृत्त शिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें अधीनस्थ राजपत्रित के पद पर काल्पनिक (नोशनल) पदोन्नति दी जाए, जिससे एक वेतनवृद्धि का लाभ मिलने के क्रम में पेंशन के रूप में फायदा मिल सके।
विभागीय ढिलाई के कारण लाभ से वंचित नाराज शिक्षकों की ओर से एडी राजकीय को पत्र लिखकर अविलंब काल्पनिक पदोन्नति की मांग की गई है। अन्यथा कि स्थिति में प्रभावित शिक्षक हाई कोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी में हैं।
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 108 सहायक अध्यापकों (एलटी) एवं 131 प्रवक्ताओं को 21 मई 2022 को विभागीय पदोन्नति दी गई। यह पदोन्नति दिसंबर 2021 में मिलनी थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ढिलाई के कारण देरी हुई। परिणाम यह हुआ कि दिसंबर 2021 की पदोन्नति सूची में शामिल कुछ शिक्षक 31 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में जो शिक्षक सेवा में थे, उन्हें 21 मई 2022 को पदोन्नति मिल गई और अधीनस्थ राजपत्रित पद पर पदस्थापना मिल जाने से उन्हें एक वेतनवृद्धि का लाभ मिल गया।
इसके विपरीत जो पदोन्नति सूची में थे, लेकिन 31 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हो गए, उन्हें पदस्थापना के समय सेवानिवृत्त हो जाने से विद्यालय आवंटित नहीं किया गया। ऐसे में उन्हें नियमानुसार काल्पनिक पदोन्नति दी जानी चाहिए थी।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर पाण्डेय ने एडी राजकीय को पत्र लिखकर बताया कि कई बार इस संबंध में उन्हें पत्र भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
अब जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती के लिए शुरू हुआ अनवरत धरना, ढुलमुल रवैए से भर्ती है अटकी
अब जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती के लिए शुरू हुआ अनवरत धरना, ढुलमुल रवैए से भर्ती है अटकी
प्रयागराजः कोर्ट से स्थगन आदेश हटाए जाने के बाद अब जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती में जल्द शासनादेश जारी करने एवं अधियाचित पदों को जोड़ने के साथ भर्ती जल्द पूरी किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय में मंगलवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष नागेंद्र पाण्डेय ने कहा कि अधिकारी वादाखिलाफी कर रहे हैं, जिसके कारण भर्ती अटकी हुई है। उन्होंने बताया कि इस भर्ती में लगा स्थगन आदेश 15 फरवरी को हाई कोर्ट ने हटाने के साथ भर्ती का मार्ग प्रशस्त कर दिया, लेकिन अधिकारियो के ढुलमुल रवैये के कारण अभी तक भर्ती एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई।
इससे पहले 19 फरवरी को धरना दिया गया था, तब अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि शासनादेश जल्द जारी हो जाएगा, किंतु 15 दिन बीतने के बाद अब अधिकारी कुछ स्पष्ट नहीं बता रहे हैं। लखनऊ में भी 27 फरवरी को समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में एससीईआरटी निशातगंज लखनऊ में धरना दिया गया था।
वहां महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा, बेसिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव की ओर से जल्द शासनादेश जारी करने और भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं। इसी के चलते अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है।
मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं की कॉपियां जांचने के लिए अब 3 से 5 रुपये नहीं बल्कि 11 से 13 रुपये तक पारिश्रमिक मिल सकेगा
मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं की कॉपियां जांचने के लिए अब 3 से 5 रुपये नहीं बल्कि 11 से 13 रुपये तक पारिश्रमिक मिल सकेगा
सात मार्च को मदरसा बोर्ड की ऑनलाइन बैठक में लगेगी मुहर
यूपी बोर्ड की तर्ज पर पारिश्रमिक बढ़ाने का है प्रस्ताव
लखनऊ। मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं की कॉपियां जांचने के लिए अब 3 से 5 रुपये नहीं बल्कि 11 से 13 रुपये तक पारिश्रमिक मिल सकेगा। मदरसा शिक्षा परिषद परीक्षा और मूल्यांकन केंद्रों का पारिश्रमिक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर करने की तैयारी कर रहा है। मदरसा बोर्ड की सात मार्च को होने वाली ऑनलाइन बैठक में केंद्रों का पारिश्रमिक बढ़ाने पर मुहर लगाई जाएगी।
मदरसा बोर्ड से करीब 16,460 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। इन मदरसों में मुंशी मौलवी हाई स्कूल समकक्ष, आलिम इंटर समकक्ष, कामिल स्नातक और फाजिल परास्नातक के समकक्ष पढ़ाई होती है। मदरसा बोर्ड में परीक्षा केंद्रों व मूल्यांकन केंद्रों का पारिश्रमिक काफी कम होने की वजह से परीक्षा के दौरान डयूटी व कापियों के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों की तैनाती में समस्याएं आ रही थीं। ऐसे में शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों में केंद्रों व मूल्यांकन में डयूटी के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए उनके पारिश्रमिक में बढ़ोतरी करने की तैयारी है।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. इफ्तिकार अहमद जावेद ने बताया कि सात मार्च को बोर्ड की ऑनलाइन बैठक में यूपी बोर्ड की तर्ज पर मदरसा बोर्ड के परीक्षा केंद्र और मूल्यांकन केंद्रों का पारिश्रमिक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।
मदरसा बोर्ड में अभी तय हैं ये पारिश्रमिक
■ परीक्षा केंद्र : केंद्र व्यवस्थापक 90 रुपये प्रतिपाली, कक्ष निरीक्षक : 65 रुपये दोनों पाली
■ लिपिक: 17 रुपये प्रतिपाली, चपरासी 12 रुपये प्रतिपाली, परीक्षा केंद्र: 2.50 रुपये प्रति विद्यार्थी
■ मूल्यांकन केंद्र: केंद्र व्यवस्थापक 100 रुपये प्रतिदिन
कॉपियां जांचने के लिए तय पारिश्रमिक
■ मंशी-मौलवी : 3 रुपये प्रति कॉपी, आलिम: 5 रुपये प्रति कॉपी, कामिल और फाजिल: 6 रुपये प्रति कॉपी
■ उत्तर पुस्तिका : मूल्यांकन केंद्र को 5,000 उत्तर पुस्तिकाओं तक 1500 रुपये, इसके बाद प्रति एक हजार पर 150 रुपये बढ़ जाता है।
UGC की नई पहल : शोध छात्रों का अब हर महीने किया जाएगा शैक्षिक मूल्यांकन, विभाग में शैक्षणिक सहयोग करना जरूरी
UGC की नई पहल : शोध छात्रों का अब हर महीने किया जाएगा शैक्षिक मूल्यांकन, विभाग में शैक्षणिक सहयोग करना जरूरी
विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में शोध फेलोशिप पाने वाले विद्यार्थियों का अब हर महीने शैक्षिक मूल्यांकन होगा। इन्हें विभागीय कार्यों में सहयोग भी करना होगा। उनके द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट विश्वविद्यालय की ओर से यूजीसी को भेजी जाएगी।
यूजीसी के इस निर्देश पर विश्वविद्यालयों ने अमल शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में शोध करने वाले विद्यार्थियों को जेआरएफ, एसआरएफ सहित कई तरह की फेलोशिप दी जाती है। सामान्य विद्यार्थियों की तरह अब शोध छात्रों की उपस्थिति की भी निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है।
शोध फेलोशिप पाने वाले सभी विद्यार्थियों की उपस्थिति के साथ ही एकेडमिक गतिविधियों में सहयोग लेने की बात कही है। साथ ही हर महीने शोध छात्रों की उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी देनी होगी।
हर सप्ताह दस घंटे करना होगा सहयोग
यूजीसी यूनिट के समन्वयक प्रो. संतोष कुमार का कहना है कि यूजीसी के नए निर्देश के बावत शोध फेलोशिप पाने वाले शोध छात्रों को विभाग में दस घंटे शैक्षणिक सहयोग देना जरूरी है। यानी विभागाध्यक्ष संबंधित शोध छात्र की विभाग में क्लास, लैब सहित अन्य शैक्षणिक कायों में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करेंगे। इससे शोध छात्रों का विभाग और संबंधित विषय से जुड़ाव भी बना रहेगा।
40 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट खरीदने के लिए 4000 करोड़, यूपी कैबिनेट का फैसला
40 लाख स्मार्टफोन और टैबलेट खरीदने के लिए 4000 करोड़, यूपी कैबिनेट का फैसला
लखनऊ। युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट से लैस करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मुहर लग गई। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत मुफ्त टैबलेट वितरण के लिए चुनी गई संस्थाओं को खरीद आदेश जारी करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
योजना के तहत 40 लाख टैबलेट व स्मार्टफोन युवाओं को दिए जाने हैं। इनमें से 25 लाख स्मार्टफोन और 15 लाख टेबलेट हैं। पांच वर्ष के लिए बनी इस योजना के तहत 40 लाख स्मार्टफोन व टैबलेट की खरीद इस साल व अगले साल भी की जाएगी। इसके लिए 4000 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की गई। है।
पिछले साल इस मद में 3600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। राज्य सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सतक्तिकरण योजना की शुरुआत की थी।
Tuesday, March 5, 2024
ऑनलाइन उपस्थिति, डिजिटलाइजेशन और अन्य मांगों को लेकर बेसिक शिक्षकों ने खोला मोर्चा, सूबे की सभी बीआरसी पर किया प्रदर्शन और सौंपा ज्ञापन
ऑनलाइन उपस्थिति, डिजिटलाइजेशन और अन्य मांगों को लेकर बेसिक शिक्षकों ने खोला मोर्चा, सूबे की सभी बीआरसी पर किया प्रदर्शन और सौंपा ज्ञापन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने सोमवार को पूरे प्रदेश के बीआरसी भवनों पर प्रदर्शन कर डिजिटलाइजेशन के विरोध में प्रर्दशन करके ज्ञापन सौंपा। सौंपे ज्ञापन में कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से विद्यालयों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। जिससे शिक्षकों को छात्रों की उपस्थिति तथा मध्याह्न भोजन की सूचना ऑनलाइन भेजने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके लिए विभागीय अधिकारी शिक्षकों से अमर्यादित व्यवहार करने के साथ ही उनका वेतन रोक रहे हैं।
जबकि सरकारी सिम कार्ड उपलब्ध न होने के कारण यह टैबलेट शिक्षकों के लिए निष्प्रयोज्य हैं। जबकि निरीक्षण कर्ता अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को अपनी व्यक्तिगत आईडी से सिम कार्ड खरीदने का दबाव बना रहे हैं। वहीं शिक्षकों की विभिन्न समस्याएं दूर कराने के लिए चार माह पहले बनी समिति ने भी किसी समस्या का समाधान नहीं किया।
ऐसे में शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण कराने, सरकारी सिम देने, शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति एक कैलेंडर वर्ष में 31 दिन का उपार्जित अवकाश देने, प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को अवकाश तथा आकस्मिक अवकाश अनुमन्य करने व शिक्षकों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की है।
शिक्षकों की समस्यायों का समाधान नहीं मिलने पर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन 11 मार्च को देगा धरना
शिक्षकों की समस्यायों का समाधान नहीं मिलने पर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन 11 मार्च को देगा धरना
लखनऊ। प्रदेश में बेसिक के विद्यालयों में एक दर्जन रजिस्टर को डिजिटल करने का फिर से विरोध शुरू हो गया है। शासन की ओर से पहले चरण में बच्चों की उपस्थिति व मिड डे मील की रियल टाइम सूचना अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर शिक्षकों ने डिजिटलीकरण पर जोर देने के पहले उनकी तार्किक मांगो को पूरा करने की मांग की है।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि सरकार यदि जल्द ही शिक्षको की समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो संगठन मजबूर होकर 11 मार्च को सभी मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएगा।
1998 की प्रशिक्षित और वर्ष 2006 में नियुक्त बेसिक शिक्षिका को पुरानी पेंशन से हाईकोर्ट का इन्कार
1998 की प्रशिक्षित और वर्ष 2006 में नियुक्त बेसिक शिक्षिका को पुरानी पेंशन से हाईकोर्ट का इन्कार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूल सहायक अध्यापक भर्ती 1998 में चयनित याची की प्रशिक्षण प्राप्ति के बाद 2006 में हुई नियुक्ति के कारण पुरानी पेंशन का लाभ देने से इन्कार कर दिया है।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने गाजीपुर की सुषमा यादव की याचिका को खारिज करते हुए कहा, यदि अभ्यर्थी प्रशिक्षण योग्यता हासिल कर रहा है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नियुक्ति के बाद ही चयन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी कोर्ट ने कहा, याची ने विशेष बीटीसी प्रशिक्षण 2006 में पूरा किया और, नई पेंशन स्कीम एक अप्रैल 2005 को लागू कर दी गई। याची की नियुक्ति 20 मई 2006 को हुई। इसलिए वह 1998 की भर्ती होने के आधार पर पुरानी पेंशन की मांग नहीं कर सकती।
याची का कहना था कि उसका चयन 1998 की भर्ती में हुआ है। नियुक्ति में देरी के लिए उसे दोषी नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अंतरिम आदेश से याची ने 20 जुलाई 2004 कहा, बीटीसी प्रशिक्षण योग्यता है, इससे चयन प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती है। याची ने जंगीपुर प्रइमरी स्कूल, गाजीपुर में सहायक अध्यापक पद पर ज्वाइन किया।
विशेष बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी होने के बाद उसे 2006 में नियुक्त किया गया। नियुक्ति के 17 वर्ष बाद याची ने बेसिक शिक्षा निदेशक को 17 नवंबर 23 को पुरानी पेंशन के लिए प्रत्यावेदन दिया। कहा, नियुक्ति में देरी में उसकी गलती नहीं है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता विपिन बिहारी पांडेय ने कहा, बीटीसी प्रशिक्षण नियुक्ति की योग्यता है। इसे चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसलिए याची पुरानी पेंशन को हकदार नहीं हैं।
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Sunday, March 3, 2024
चुनावी साल में भी खाली हैं शिक्षामित्रों के हाथ, मानदेय वृद्धि पर सरकार का रुख साफ नहीं, सात साल से नहीं बढ़ाया गया मानदेय
चुनावी साल में भी खाली हैं शिक्षामित्रों के हाथ, मानदेय वृद्धि पर सरकार का रुख साफ नहीं, सात साल से नहीं बढ़ाया गया मानदेय
प्रदेश के 1.15 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में दो दशक से अधिक समय से बच्चों को पढ़ा रहे 1.48 लाख शिक्षामित्रों के हाथ चुनावी साल में भी खाली हैं। हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सम्मानजनक और आजीविका के लिए शिक्षामित्रों को आवश्यक मानदेय का भुगतान करे। मौजूदा समय में शिक्षामित्रों का मानदेय बहुत कम है, इसलिए सरकार एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर मानदेय वृद्धि पर निर्णय ले।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 18 जनवरी को बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में लखनऊ में शिक्षामित्रों के नेताओं संग बैठक हुई थी। शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि उनके पक्ष में जल्द कोई निर्णय होगा लेकिन सवा महीने से अधिक बीतने के बाद भी मानदेय वृद्धि के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हो सका है। अब जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव की अधिसूचना का समय करीब आता जा रहा है, शिक्षामित्रों की निराशा बढ़ती जा रही है क्योंकि चुनावी बिगुल फुंकने के बाद कम से कम तीन महीने कुछ होने की उम्मीद नहीं रहेगी।
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि पहले से संकटों का सामना कर रहे शिक्षामित्रों के लिए दस हजार मानदेय पर गुजर करना मुश्किल हो रहा है। उम्मीद है सरकार उनकी तकलीफ को समझकर जल्द कोई निर्णय लेगी। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह ने भी मानदेय वृद्धि पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
सात साल से नहीं बढ़ाया गया मानदेय
यूपी के शिक्षामित्रों का मानदेय सात साल से नहीं बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। उसके बाद शिक्षामित्रों ने 12 माह का मानदेय देने, सेवाकाल 62 वर्ष करने, मानदेय में आवश्यक वृद्धि करने, प्रतिवर्ष महंगाई के क्रम में मानदेय बढ़ाने, निशुल्क चिकित्सा सुविधा आदि मांगों को लेकर आंदोलन किया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अगस्त 2017 में मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार कर दिया था। 26 मई 1999 को यूपी में शिक्षामित्र योजना लागू होने के बाद अक्तूबर 2005 में मानदेय 2250 रुपये से बढ़कर 2400 किया गया था। 15 जून 2007 को मानदेय 2400 रुपये से बढ़कर 3000 हुआ था।
Saturday, March 2, 2024

परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर रखे जाएंगे कक्ष निरीक्षक और कर्मियों के फोन, परिसर में फोन प्रयोग करते पकड़े गए तो होगी एफआईआर
परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर रखे जाएंगे कक्ष निरीक्षक और कर्मियों के फोन, परिसर में फोन प्रयोग करते पकड़े गए तो होगी एफआईआर
लखनऊ। आगरा में बृहस्पतिवार को बोर्ड परीक्षा का गणित और जीव विज्ञान का पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा केंद्रों में मोबाइल को लेकर शासन ने सख्ती की है। शासन ने निर्देश दिया है कि परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन व इलेक्ट्रानिक गजट ले जाने की अनुमति किसी कीमत पर न दी जाए। कक्ष निरीक्षकों व परीक्षा कार्य में लगे अन्य कर्मियों के मोबाइल फोन प्रवेश द्वार पर या उसके पास रखने की व्यवस्था डीआईओएस व केंद्र व्यवस्थापक सुनिश्चित कराएं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा है कि परीक्षा केंद्र पर तैनात केंद्र व्यवस्थापक व स्टेटिक मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन लेकर नहीं जाएगा। अगर कोई कर्मचारी परीक्षा केंद्र में मोबाइल लेकर जाता है तो स्टेटिक मजिस्ट्रेट उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर परीक्षा कार्य से अलग करें। उन्होंने कहा कि कमांड व कंट्रोल रूम की निगरानी में यह जानकारी मिली है कि शासन के निर्देश के बावजूद परीक्षा केंद्रों व स्ट्रांग रूम में तैनात कुछ कर्मचारियों द्वारा परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल का प्रयोग किया जा रहा है।
यूपी बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन, शुनितापूर्ण एवं शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराये जाने के सम्बन्ध में
नई संविदा भर्ती में याची के लंबे अनुभव का ख्याल रखने की हिदायत के साथ हाईकोर्ट ने संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज, देखें कोर्ट ऑर्डर
नई संविदा भर्ती में याची के लंबे अनुभव का ख्याल रखने की हिदायत के साथ हाईकोर्ट ने संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ याचिका की खारिज, देखें कोर्ट ऑर्डर
जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) की संविदा रद्द करने का मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की संविदाकर्मी की संविदा रद्द किए जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका निस्तारित करते हुए कहा है कि नई संविदा भर्ती में कानून के दायरे के तहत याची महिला के लंबे अनुभव का ध्यान रखा जाय। यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की कोर्ट ने सुनाया। याची नाओ से रद्द करने का मामला अधिवक्ता योगेश मिश्र ने पक्ष रखा।
मामले में याची महिला दुर्गावती सिंह 23 वर्षों से कस्तूरबा गांधी विद्यालय, वाराणसी में संविदा पर जिला समन्वयक के पद पर कार्यरत थीं। इस दौरान याची महिला पर लगाए गए कई आरोपों की जांच के बाद बीएसए ने 4 अगस्त 2023 को पत्र जारी कर उनकी संविदा रद्द कर दी। इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि याची नई संविदा भर्ती में शामिल होने के लिए स्वतंत्र है।
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यूपी बोर्ड : प्रश्नपत्र लीक मामले में आगरा के विद्यालय की मान्यता समाप्त
यूपी बोर्ड : प्रश्नपत्र लीक मामले में आगरा के विद्यालय की मान्यता समाप्त
केंद्र व्यवस्थापक समेत दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी
प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक मामले से संबंधित विद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी गई है। केंद्र व्यवस्थापक, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक, स्टेटिक मजिस्ट्रेट, कंप्यूटर ऑपरेटर और अज्ञात के खिलाफ बृहस्पतिवार को ही प्राथमिकी दर्ज करा दी गई थी। पुलिस ने शुक्रवार को केंद्र व्यवस्थापक राजेंद्र सिंह समेत दो को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर विनय चौधरी व अन्य की तलाश जारी है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद उप्र (यूपी) बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि आगरा जिले के परीक्षा केंद्र श्री अतर सिंह इंटर कॉलेज रोझौली से बृहस्पतिवार को इंटरमीडिएट गणित और जीव विज्ञान का पेपर परीक्षा के दौरान व्हाट्सएप ग्रुप में डाला गया था, हालांकि इसका परीक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है। शुक्रवार को बोर्ड की बैठक में विद्यालय की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया गया। बताया कि स्टेटिक मजिस्ट्रेट गजेंद्र सिंह से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने बताया कि बैठक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यालय प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग करने का प्रयास करता है, तो उसकी मान्यता तत्काल समाप्त कर दी जाएगी।
परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन रखने पर उठे सवाल
प्रयागराज। आगरा की परीक्षा से प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल होने के बाद परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन रखने पर भी सवाल खड़े हुए हैं। मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश में निर्देश दिए गए थे कि परीक्षा केन्द्र परिसर के अंदर मोबाइल फोन अथवा ऐसे इलेक्ट्रानिक उपकरण जिससे अनुचित साधन प्रयोग की आशंका हो, ले जाने की अनुमति न दी जाए। माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेन्द्र देव ने शुक्रवार को सभी डीआईओएस को पत्र लिखा है कि शासनादेश का पालन नहीं हो रहा है।
यूपी बोर्ड : आगरा में इंटर गणित और जीव विज्ञान के पेपर लीक, प्रश्नपत्र के निरस्त होने पर असमंजस
व्हाट्सएप ग्रुप पर परीक्षा के दौरान ही वायरल हो गए दोनों प्रश्नपत्र
आगरा /प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा में बृहस्पतिवार को इंटरमीडिएट गणित और जीव विज्ञान के प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। मामले में डीआईओएस आगरा ने थाना फतेहपुर सीकरी में मुकदमा दर्ज कराया। आरोपी कालेज प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके बेटे की तलाश में देर रात पुलिस दबिश दे रही थी।
पुलिस ने गांव रोझौली स्थित श्री अतर सिंह इंटर कॉलेज के प्रबंधक व प्रिंसिपल राजेंद्र सिंह उर्फ हुड्डा, उसके बेटे कंप्यूटर ऑपरेटर विनय चौहान, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक गंभीर सिंह और स्टेटिक मजिस्ट्रेट गजेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
बृहस्पतिवार को दोपहर 2 से शाम 5:15 बजे तक की पाली में गणित और जीव विज्ञान की परीक्षा थी। हाईस्कूल का कृषि का प्रश्नपत्र भी चल रहा था। अपराह्न करीबन 3 बजे व्हाट्स एप ग्रुप पर जीव विज्ञान और गणित के प्रश्नपत्रों की फोटो की कॉपी भेजी गई थी।
इस ग्रुप में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रधानाचार्य और शिक्षक जुड़े हुए थे। मगर, कुछ देर बाद प्रश्नपत्र को डिलीट कर दिया गया। तब तक बड़ी संख्या में लोग प्रश्नपत्र को देख चुके थे। यह वायरल भी हो गए। व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन पूर्व डीआईओएस आगरा। गणित और जीव विज्ञान के प्रश्नपत्र जिस व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल हुए हैं, उसके ग्रुप एडमिन पूर्व डीआईओएस मनोज कुमार हैं। ग्रुप में शिक्षक और प्रधानाचार्य सदस्य हैं। प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद दो एडमिन ग्रुप से हट गए। इस ग्रुप पर प्रश्नपत्रों की फोटो वायरल की गई। पहली बार विनय चौधरी के नंबर से वायरल की गई। उसके बाद एक अन्य सदस्य ने वायरल की।
प्रश्नपत्र के निरस्त होने पर असमंजस
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। प्रश्नपत्रों के फोटो वायरल होने से परीक्षा की शुचिता को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई है। परीक्षार्थियों के मन में परीक्षा को लेकर असमंजस बना है। परीक्षा निरस्त न कर दी जाए। हालांकि इस बारे में शिक्षा अधिकारियों की तरफ से कोई स्थिति साफ नहीं की गई है।
थाना फतेहपुर सीकरी में मुकदमा दर्ज, कॉलेज संचालक गिरफ्तार
आगरा के राज्य स्तरीय पर्यवेक्षक और संयुक्त शिक्षा निदेशक मुकेश अग्रवाल ने आगरा के प्रिंसिपल ग्रुप के व्हाट्सएप पर इंटरमीडिएट के दो विषयों के प्रश्नपत्र डाले जाने की जानकारी दी। द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान ऑल प्रिंसिपल्स आगरा नामक व्हाट्सएप ग्रुप में दोपहर बाद 3:10 बजे इंटरमीडिएट जीव विज्ञान और गणित का पेपर वायरल किए दोनों जाने के बाद दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया।
प्रश्नपत्र तब वायरल हुए जब परीक्षा 1:10 घंटे तक संपादित हो चुकी थी। इस मामले में पेपर वायरल करने वाले विनय चौधरी व अन्य के खिलाफ डीआईओएस आगरा की ओर से प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। दिव्यकांत शुक्ल, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद-प्रयागराज।
परीक्षा के दौरान पेपर वायरल करने के मामले में 4 नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। श्री अतर सिंह इंटर कॉलेज के प्रबंधक व प्रिंसिपल राजेंद्र सिंह उर्फ हुड्डा को गिरफ्तार किया गया है। उनके बेटे विनय चौधरी ने पेपर वायरल किया था। उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। सोनम कुमार, डीसीपी पश्चिमी जोन
Friday, March 1, 2024
विजीलेंस की टीम ने बिधूना बीईओ को रिश्वत लेते पकड़ा
Auraiya News: विजीलेंस की टीम ने बीईओ को रिश्वत लेते पकड़ा
औरैया। बिधूना में बीईओ के पद पर तैनात पुष्पेंद्र कुमार जैन को शुक्रवार को कानपुर की विजीलेंस टीम ने ग्रेच्युटी निकलवाने के लिए कागज को बढ़ाने के नाम पर 30 हजार रुपये लेते कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया।
इस दौरान टीम उन्हें कार्यालय से पैदल ही कोतवाली लेकर पहुंची। जहां कागजी कार्रवाई के लिए टीम बीईओ को अपने साथ ले गई। सीओ अशोक कुमार ने बताया कि विजीलेंस टीम ने किसी शिक्षक से रिश्वत लेने के मामले में बीईओ को पकड़ा है।
बिधूना कस्बे के बस्ती निवासी शरद कुमार पुत्र वीरेंद्र कुमार प्राथमिक विद्यालय कुर्सी में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। उनकी ओर से निर्धारित 62 वर्ष की सेवानिवृत आयु से पूर्व 60 वर्ष पर सेवानिवृत्त लेने के लिए विकल्प पत्र बीईओ पुष्पेंद्र कुमार जैन को अगसारित करने को दिया था।
शरद कुमार ने बताया कि लगभग तीन माह पूर्व दिए गए आवेदन पर बीईओ की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। शिक्षक जब दो फरवरी काे बीईओ को मिला तो बात करने पर बीईओ की ओर से 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। इस पर उसने एसपी विजीलेंस कानपुर से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।
इस पर एसपी की ओर से टीम तैयार कर भेजी गई। जहां टीम ने बीईओ को देने के लिए पाउडर लगे नोट देने को दिए। जैसे ही शिक्षक ने रुपये दिए विजीलेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर रुपये समेत आरोपी बीईओ पुष्पेंद्र कुमार को पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें कार्यालय से पैदल ही अपने साथ कोतवाली बिधूना लेकर पहुंची। जहां कागजी कार्रवाई के बाद विजीलेंस टीम आरोपी बीईओ को अपने साथ कानपुर ले गई।
आरोपी बीईओ इससे पहले सीतापुर में तैनात थे। जहां से वह 10 जुलाई 2023 को स्थानांतरण पर औरैया आए थे। पिछले सात माह से बिधूना बीईओ के पद पर तैनात थे।
कन्नौज : बकाया भुगतान के लिए शिक्षक से रिश्वत लेते बीएसए दफ्तर का बाबू गिरफ्तार
कन्नौज : बीएसए दफ्तर का बाबू घूस लेते गिरफ्तार
कन्नौज। बकाया भुगतान दिलाने के एवज में शिक्षक से दस हजार रुपये की घूस लेते बीएसए दफ्तर के बाबू को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। टीम शुक्रवार को आरोपी को लेकर लखनऊ जाएगी। एंटी करप्शन टीम की अगुआई कर रहे इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि शिक्षक अनुराग कुमार ने का एरियर निकलवाने के एवज में बीएसए कार्यालय का लिपिक विमल पांडेय 20 हजार रुपये मांग रहा है। उसने 10 हजार रुपये देने के लिए बृहस्पतिवार को बुलाया है। एंटी करप्शन टीम ने बृहस्पतिवार दोपहर 10 हजार रुपये की घूस लेते लिपिक को पकड़ लिया।
कन्नौज : बकाया भुगतान के लिए शिक्षक से रिश्वत लेते बीएसए दफ्तर का बाबू गिरफ्तार
कन्नौज जिले में एक शिक्षक से बकाया भुगतान निकलवाने के एवज में रिश्वत देने की मांग करने वाले लिपिक को कानपुर से आई एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया। एंटी करप्शन टीम के मुताबिक आरोपी बाबू ने 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। गुरुवार को उसे 10 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई से बीएसए कार्यालय में हड़कंप मचा रहा।
एंटी करप्शन टीम की अगुवाई कर रहे इंस्पेक्टर मृत्यंजय मिश्रा ने बताया कि एक शिक्षक अनुराग कुमार की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है। शिक्षक की शिकायत थी कि उसके पांच माह का बकाया वेतन निकलवाने के एवज में बीएसए कार्यालय में तैनात लिपिक विमल कुमार ने 20 हजार रुपये की मांग की है।
उसी आधार पर गुरुवार को एंटी करप्शन टीम ने बाकायदा जाल बिछाकर उसे तब धर दबोचा जब उसने रिश्वत के 20 हजार रुपये में से पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये लिए। उसी दौरान उसे पकड़ लिया गया। उसे पकड़ कर सदर कोतवाली ले जाया गया। उससे पूछताछ भी की गई। इस दौरान कोतवाली में बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों का जमावड़ा लगा रहा।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की रियल टाइम अटेंडेंस को लेकर शुरू हुई सख्ती, एक दर्जन जिलों के 50 विकासखंड चिह्नित
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की रियल टाइम अटेंडेंस को लेकर शुरू हुई सख्ती, एक दर्जन जिलों के 50 विकासखंड चिह्नित
रायबरेली समेत एक दर्जन जिलों के 50 विकासखंड चिह्नित, शिक्षक संघ ने कहा, शिक्षकों पर न डाला जाए दबाव
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की रियल टाइम अटेंडेंस को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। रोजाना बच्चों की उपस्थिति न अपडेट करने वाले एक दर्जन जिलों के 50 विकासखंड चिह्नित किए गए हैं। इनकी छह मार्च को समीक्षा बैठक होगी। माना जा रहा है कि शासन यहां के बीईओ पर कार्रवाई कर सकता है।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति, मिड डे मील समेत एक दर्जन रजिस्टर डिजिटल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में हाल ही में बच्चों की उपस्थिति व मिड डे मील की जानकारी रोजाना ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अभी भी काफी विद्यालयों में टैबलेट का प्रयोग नहीं शुरू हो सका है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने रायबरेली व बस्ती समेत एक दर्जन जिलों के 50 विकासखंड में डाटा इंट्री काफी कम होने पर नाराजगी जताई है।
उन्होंने समीक्षा बैठक में सभी बीएसए व बीईओ को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र लिखकर ऑनलाइन उपस्थिति के लिए शिक्षकों पर दबाव न बनाने की मांग की है। बच्चों की उपस्थिति अपडेट करने व मिड डे मील की रिकॉर्डिंग व फल- दूध वितरण की तस्वीर मांगे जाने पर रोक लगाएं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों के प्रोन्नत वेतनमान का निर्धारण, शिक्षकों की वरिष्ठता सूची का प्रकाशन, जीपीएफ लेजर को अपडेट, ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों को नगरीय क्षेत्र के विद्यालयों में शामिल किया जाए।
DGSE ने दी बीएसए और बीईओ को दी फिर चेतावनी, डिजिटल हाज़िरी में अभी भी सीतापुर टॉप पर, देखें जनपदवार प्रगति
शासनादेश दिनांक 20 जुलाई, 2023 के अनुपालन में दिनांक 15 फ़रवरी, 2024 से समस्त जनपदों के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्र उपस्थिति पंजिका एवं मध्याह्न भोजन पंजिका का डिजिटल रूप ही मान्य किये जाने के सम्बन्ध में निर्देशित किया गया है ।
उक्त के सम्बन्ध में दिनाँक - 26 फरवरी , 2024 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में महानिदेशक , स्कूल शिक्षा महोदया द्वारा उक्त दोनो पंजिकाओं के शत-प्रतिशत उपयोग के सम्बन्ध में निर्देशित किया गया है । उक्त के उपरांत भी आज की प्रगति निराशाजनक है । तत्सम्बन्धी जनपदवार Tracker संलग्न है।
अतः समस्त BSA एवम BEO को निर्देशित किया जाता है कि उक्त दोनों डिजिटल पंजिकाओं (छात्र उपस्थिति पंजिका एवं मध्याह्न भोजन पंजिका ) का दैनिक रूप से शत- प्रतिशत उपयोग कराना सुनिश्चित करें , अन्यथा की स्थिति में कार्यवाही हेतु बाध्य होना पड़ेगा।
महानिदेशक,
स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश
ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में फेल 327 BEO पर लटकी तलवार
• यहां एक भी परिषदीय स्कूल में नहीं लग रही हाजिरी
• छात्रों की आनलाइन हाजिरी 15 फरवरी से है अनिवार्य
लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में विद्यार्थियों की आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में नाकाम 327 खंड शिक्षाधिकारियों (बीईओ) पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। यहां सभी विद्यालयों के शिक्षक इस व्यवस्था का बहिष्कार कर रहे हैं। कुल 826 ब्लाकों में से जिन 499 ब्लाक के परिषदीय स्कूलों में आनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है, उनकी स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। यहां भी बड़ी संख्या में शिक्षक आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे। विद्यालयों में टैबलेट भिजवाए गए थे और 15 फरवरी से सभी शिक्षकों को इसके माध्यम से ही उपस्थिति दर्ज करनी थी।
फिलहाल महानिदेशक, स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को पत्र लिखकर सख्त नाराजगी जताई गई है। स्कूलों में टैबलेट पहुंच जाने के बावजूद शिक्षकों द्वारा आदेशों का पालन न करने पर वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है। 327 ब्लाकों के बीईओ से इस पर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। जिन जिलों में यह व्यवस्था सुचारु ढंग से लागू नहीं हो पा रही है, वहां बीएसए का आगे वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई है।
वहीं बीईओ से कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वह विद्यालयों का भ्रमण करें और हर हाल में इस व्यवस्था को लागू कराएं, वरना वेतन रोकने के साथ-साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। मालूम हो कि 1.34 लाख परिषदीय स्कूलों में 1.96 करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं।
प्रत्येक स्कूल में एक-एक और कुछ विद्यालयों में दो-दो टैबलेट छात्रों की आनलाइन उपस्थिति और मिड डे मील खाने वाले विद्यार्थियों की संख्या आनलाइन भेजने के लिए दिए गए हैं, ताकि प्रदेश स्तर पर रियल टाइम मानीटरिंग हो सके। तमाम निर्देशों के बावजूद शिक्षक विभाग की ओर से टैबलेट के लिए सिम न दिए जाने सहित अन्य तकनीकी कारण बताकर इसका बहिष्कार कर रहे हैं।
छात्रों की डिजिटल उपस्थिति पर आज से होगी सख्ती, आज शाम को होगी समीक्षा
लखनऊ। बेसिक के विद्यालयों में छात्रों की रियल टाइम अटेंडेंस को लेकर अब सख्ती की जाएगी। सोमवार से उपस्थिति की सूचना हर हाल में शत-प्रतिशत ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर राज्य परियोजना निदेशालय ने बीएसए, बीईओ आदि अधिकारियों को कार्यवाही की चेतावनी दी है।
शासन ने पिछले काफी दिनों से परिषदीय विद्यालयों में एक दर्जन रजिस्टर डिजिटल करने की कवायद शुरू की थी। किंतु शिक्षकों के विरोध और टैबलेट के संचालन न होने के कारण यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। कुछ जगह पर दो-चार फीसदी ही टैबलेट का संचालन हो रहा है। इस बीच शासन ने पिछले महीने छात्रों की सुबह के समय रियल टाइम अटेंडेंस लगाने व दोपहर में मध्याह्न भोजन की सूचना अपडेट करने का निर्देश दिया। इसमें भी शिक्षकों ने बहुत रुचि नहीं ली। इस पर संबंधित अधिकारियों से शासन ने नाराजगी व्यक्त की है।
राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा ने सभी बीएसए, बीईओ, डीसीटी, डीसी आदि को निर्देश दिया है कि 26 फरवरी से दोनों ही डिजिटल पंजिकाओं (छात्र उपस्थिति पंजिका व मध्याह्न भोजन पंजिका) का शत-प्रतिशत प्रयोग किया जाए। ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। 26 फरवरी को ही स्कूल बंद होने के बाद वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इसकी प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
छात्र उपस्थिति एवं मध्याह्न भोजन पंजिका का डिजिटल रूप ही मान्य किये जाने के सम्बन्ध में जनपदवार प्रगति जारी कर DGSE ने दी बीएसए और बीईओ को चेतावनी, सीतापुर टॉप पर
आप अवगत हैं कि शासनादेश दिनांक - 20 जुलाई, 2023 के अनुपालन में दिनांक 15 फ़रवरी, 2024 से समस्त जनपदों के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्र उपस्थिति पंजिका एवं मध्याह्न भोजन पंजिका का डिजिटल रूप ही मान्य किये जाने के सम्बन्ध में निर्देशित किया गया है।
यह अत्यंत खेदजनक है कि राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित किए जाने के उपरांत भी प्रगति अत्यंत निराशाजनक है । ये आपकी शिथिल कार्यशैली का परिचायक है। तत्सम्बन्धी जनपदवार Tracker संलग्न है ।
अतः समस्त BSA एवम BEO को निर्देशित किया जाता है कि कल दिनाँक - 24 फरवरी , 2024 से उक्त दोनों डिजिटल पंजिकाओं (छात्र उपस्थिति पंजिका एवं मध्याह्न भोजन पंजिका ) का शत - प्रतिशत उपयोग कराना सुनिश्चित करें अन्यथा की स्थिति में आपके विरुद्ध कार्यवाही हेतु बाध्य होना पड़ेगा। इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता प्रदान करें । तद्विषयक अद्यतन प्रगति की समीक्षा अधोहस्ताक्षरी द्वारा दिनाँक - 26 फरवरी , 2024 को वीडियो कॉन्फेंस के माध्यम से की जायेगी।
सीतापुर अव्वल, अन्य जिले करें सुधार : बेसिक शिक्षा विभाग का डिजिटाइजेशन को लेकर निर्देश
19 फरवरी 2024
बेसिक शिक्षा विभाग ने 15 फरवरी से सभी प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की रियल टाइम उपस्थिति अपडेट करने के निर्देश दिए हैं, इसमें सीतापुर अव्वल रहा है।
जबकि फतेहपुर, महाराजगंज, जालौन, बहराइच, वाराणसी, शाहजहांपुर, आजमगढ़, बांदा, बदायूं, मेरठ की प्रगति न्यूनतम रही है।
विभाग ने फिसड्डी जिलों से नाराजगी जताई है। विभाग ने सभी बीएसए व बीईओ को निर्देश दिया है कि छात्र उपस्थिति पंजिका व एमडीएम को प्रतिदिन डिजिटल तरीके से अपडेट करना सुनिश्चित करें।
15 फ़रवरी से छात्र उपस्थिति एवं मध्याह्न भोजन पंजिका का डिजिटल रूप ही मान्य किये जाने के सम्बन्ध में जनपदवार प्रगति जारी
👉 जनपद – फ़तेहपुर, महाराजगंज, जालौन, बहराइच, वाराणसी, शाहजहाँपुर, आज़मगढ़, बाँदा, बदायूँ, मेरठ की प्रगति न्यूनतम
👉 जनपद सीतापुर का आरम्भिक प्रयास को DGSE ने बताया सराहनीय
आप अवगत हैं कि शासनादेश दिनांक 20 जुलाई, 2023 के अनुपालन में दिनांक 15 फ़रवरी, 2024 से समस्त जनपदों के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्र उपस्थिति पंजिका एवं मध्याह्न भोजन पंजिका का डिजिटल रूप ही मान्य किये जाने के सम्बन्ध में निर्देशित किया गया है।
खेद का विषय है कि राज्य परियोजना कार्यालय के पत्रांक-13483, दिनाँक 09 फ़रवरी 2024 द्वारा निर्देशित किए जाने के उपरांत भी प्रगति अत्यंत निराशाजनक है ।
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