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Saturday, August 10, 2024

Jai Hind in Haryana Schools : स्कूल में बच्चे ‘गुड मॉर्निंग’ की जगह बोलेंगे ‘जय हिंद, इस राज्य में 15 अगस्त से लागू होगा नियम

Jai Hind in Haryana Schools
स्कूल में बच्चे ‘गुड मॉर्निंग’ की जगह बोलेंगे ‘जय हिंद, इस राज्य में 15 अगस्त से लागू होगा नियम

हरियाणा के स्कूलों में अब छात्र गुड मॉर्निंग की जगह बोलेंगे जय हिंद, शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश, बताये ये कारण


Jai Hind in Haryana Schools: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्र और अध्यापक अब गुड मॉर्निंग नहीं बल्कि जय हिंद बोलेंगे. हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. 15 अगस्त से ये आदेश लागू करने के लिए कहा गया है. इसके पीछे शिक्षा विभाग ने कई कारण बताये हैं.


चंडीगढ़: हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों में देश भक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'गुड मॉर्निंग के स्थान पर 'जय हिन्द' को अभिवादन के रूप में लागू करने का निर्णय लिया गया है. इसके पीछे विद्यार्थियों में प्रतिदिन राष्ट्रीय एकता की भावना और देश के समृद्ध इतिहास के प्रति सम्मान के साथ प्रेरित करने की सोच को बताया गया है.हरियाणा के स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं. 


ये आदेश जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी समेत स्कूल मुखिया एवं स्कूल प्रभारियों को भेज दिए गये हैं.शिक्षा मंत्री ने 31 जुलाई को की थी अपीलपंचकूला सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में 31 जुलाई 2024 को आयोजित टीजीटी अध्यापकों के राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्रदेश की शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने बच्चों को भारतीय संस्कार देने की बात कही थी. इसी दौरान उन्होंने स्कूल में बच्चों को गुड मॉर्निंग के बजाय जय हिंद बोलना सिखाने की बात कही थी.



नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था नारा
'जय हिन्द का नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दिया गया और इसे लोकप्रिय बनाया गया था. उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान आजाद हिन्द फौज का गठन कर 'जय हिन्द' का नारा दिया था. स्वतंत्रता के बाद 'जय हिन्द' को भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा अभिवादन के रूप में अपनाया गया, जो राष्ट्र की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है.




विद्यालयों में 'जय हिन्द' अभिवादन का महत्त्व

देशभक्तिः स्कूल शिक्षा निदेशालय के जारी आदेशों में कहा गया है कि 'जय हिन्द' अभिवादन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव और एकता की एक मजबूत भावना पैदा करता है. ये प्रत्येक भारतीय के रूप में उनकी पहचान और देश के भविष्य में संभावित योगदान का दैनिक स्मरण करवाता है.

राष्ट्र के प्रति सम्मानः देश भक्तिपूर्ण अभिवादन 'जय हिन्द' देश और उसके मूल्यों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है. यह विद्यार्थियों को स्वतंत्रता के लिए दिए बलिदानों की प्रशंसा करने के लिए प्रोत्साहित करता है.

एकता को बढ़ावा: 'जय हिन्द' क्षेत्रीय, भाषायी और सांस्कृतिक मतभेदों से परे है, जो विविध पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के मध्य एकता को बढ़ावा देता है.

अनुशासन और सम्मान को बढ़ावा: भारत में सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस बल, जिनकी सेवाएं अनुशासित हैं, उनके द्वारा 'जय हिन्द' को अभिवादन के रूप में लागू किया गया है.

अनुशासनः 'जय हिन्द' जैसे अभिवादन का नियमित उपयोग विद्यार्थियों में अनुशासन और एकरूपता को बढ़ावा देगा.

परंपरा के प्रति सम्मान: दैनिक दिनचर्या में पारंपरिक अभिवादन को शामिल करने से सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय परंपराओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा मिलता है.

प्रेरणा: यह अभिवादन प्रेरणा और प्रेरक दोनों है, जो विद्यार्थियों को राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की उनकी क्षमता की याद दिलाता है.

भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा: 'जय हिन्द' युवा भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जो उन्हें राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है.

एकजुट करने वाली शक्ति: भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में 'जय हिन्द' एक एकीकृत शक्ति के रूप में कार्य करता है, जो लोगों को उनके मतभेदों के बावजूद एक साथ लाता है और एक सामूहिक राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करता है.


स्कूल शिक्षा निदेशालय का आग्रह
स्कूल शिक्षा निदेशालय, हरियाणा द्वारा आग्रह किया गया है कि सभी स्कूल प्रमुख अपने क्षेत्राधिकार के विद्यालयों में 'जय हिन्द' को अभिवादन के रूप में लागू करवाएं, ताकि विद्यार्थी और अध्यापक 'गुड मॉर्निंग' इत्यादि अभिवादन के स्थान पर 'जय हिन्द को अपनाएं. आदेश दिए गए हैं कि 15 अगस्त 2024 से पूर्व यह सूचना/निर्देश सभी विद्यालयों को सम्प्रेषित करते हुए विद्यालय स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण से पूर्व इसकी अनुपालना सुनिश्चित करें और इस ओदश का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए.

Friday, August 9, 2024

अमान्य विद्यालयों के संचालन पर यूपी बोर्ड की तिरछी हुई निगाहें, जनसामान्य से मांगी सूचना

अमान्य विद्यालयों के संचालन पर यूपी बोर्ड की पड़ी निगाहें, जनसामान्य से मांगी सूचना

अनधिकृत प्रवेश पर मान्यता प्राप्त संस्था होगी दंड की भागीदार

अमान्य संस्था या कोचिंग के अनधिकृत छात्रों का प्रवेश अवैध


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) सचिव भगवती सिंह ने मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में अमान्य संस्था अथवा कोचिंग संस्था के छात्र-छात्राओं के प्रवेश होने की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सार्वजनिक पत्र जारी कर कहा है कि यदि कहीं अमान्य कक्षाएं संचालित की जा रही हों तो उसकी सूचना यूपी बोर्ड मुख्यालय एवं बोर्ड के सभी पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों को दें, जिससे उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सके। 


सचिव ने कहा है कि परिषद से मान्यता प्राप्त होने के बाद संस्थाओं द्वारा केवल मान्य वर्ग/ विषयों में छात्र-छात्राओं का प्रवेश लिया जाएगा। यदि संस्था द्वारा किसी अमान्य संस्था अथवा कोचिंग संस्था के अनधिकृत छात्रों का प्रवेश लिया जाता है तो वह अनियमित एवं अवैध होगा। नियमानुसार ऐसी संस्थाओं के विरुद्ध दंड निर्धारित किया जाएगा। किसी संस्था द्वारा अमान्य संस्थाओं की जानकारी देने के लिए सचिव ने बोर्ड मुख्यालय प्रयागराज एवं क्षेत्रीय अपर सचिवों के कार्यालय का नंबरों के साथ एक मोबाइल नंबर भी जारी किया गया है। 


बोर्ड मुख्यालय पर जानकारी देने के लिए उप सचिव (प्रशासन) देवव्रत सिंह का मोबाइल नंबर जारी किया गया है। सचिव ने सभी क्षेत्रीय अपर सचिवों से कहा है कि वे अपने क्षेत्र के जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित करें कि इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करें।


इन नंबरों पर दें जानकारी

• क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ- 9454457256, 0121-2660742

 क्षेत्रीय कार्यालय बरेली- 9451055902, 0581-2576494

• क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज- 9454457246, 0532-2423265

• क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी- 9450964432, 0542-2509990

• क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर- 9415259462, 0551-2205271

• उप सचिव प्रशासन बोर्ड मुख्यालय- 8447297770, 0532-2623829

Thursday, August 8, 2024

अब बच्चे पढ़ेंगे देश पर गर्व करने वाली कहानियां

अब बच्चे पढ़ेंगे देश पर गर्व करने वाली कहानियां


नई दिल्लीः बच्चों को पढ़ाई के दबाव से निकालने और उन्हें खेल-खेल में पढ़ाने का जो सपना नई राष्ट्रीय  शिक्षा नीति (एनईपी) के जरिये देखा गया था, अब वह आकार - लेने लगा है। स्कूली शिक्षा के स्तर  पर तीसरी और छठी कक्षा के लिए - एनईपी के तहत नई पाठ्य पुस्तकें बाजार में उतार दी गई हैं जिसमें बच्चों को चंद्रयान अभियान से जुड़ी रोचक कहानी से लेकर देश पर गर्व करने वाली कविताएं, जीवन मूल्यों और पारिवारिक जुड़ाव को बढ़ाने  वाले पाठ के साथ भारत को अच्छी तरह से जानने-समझने वाली विषय  वस्तु पढ़ने को मिलेगी।


एनईपी के तहत हालांकि अभी सिर्फ तीसरी व छठवीं कक्षा की - पाठ्य पुस्तकें ही तैयार होकर आई हैं। बाकी अन्य कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकें भी चरणबद्ध तरीके से अगले दो वर्षों में लाई जानी हैं।  एनसीईआरटी की मानें तो इनमें से सभी किताबों को तैयार करने का काम अंतिम चरण में चल रहा है।


 इस बीच, जिन दो कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकें सामने आई हैं, उसमें तीसरी कक्षा के गणित विषय की  पाठ्य पुस्तक सबसे रोचक है। जिसका नाम 'गणित मेला' दिया गया है। वह बच्चों के कौतूहल को ठीक वैसे ही बढ़ाने वाली है, जैसे मेले में बच्चे हर खिलौने को देखकर इतराने लगते हैं। इनमें वैसे तो 14 पाठ हैं, लेकिन प्रत्येक पाठ का नाम रोचक है। पहले पाठ का नाम है 'नाम में क्या है' तो वहीं अन्य पाठों के नाम दोहरा शतक, नानी मां के साथ छुट्टियां, कुछ लेना कुछ देना, सूरजकुंड मेला जैसे नाम हैं। इतना ही नहीं, तीसरी कक्षा के बच्चों को चंद्रयान मिशन की कहानी को जिस अंदाज में परोसा गया है, वह बच्चों के मन-मस्तिष्क पर सदैव के लिए छप जाने वाली है।


 शिक्षा मंत्रालय के अनुसार एनसीईआरटी की तीसरी और छठवीं कक्षा की सभी पाठ्य पुस्तकें बाजार में आ गई हैं। जिन्हें छात्र इस सत्र से ही पढ़ सकते हैं।


भारत को क्यों इंडिया नाम दिया

भारत और इंडिया नाम को लेकर अब अक्सर राजनीति होती रहती है। ऐसे में छठवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्य पुस्तक में एनसीईआरटी ने 'इंडिया, दैट इज भारत' नाम से एक पाठ रखा गया है। इसमें बताया है कि देश का प्राचीन नाम क्या था। साथ ही देश का इंडिया नाम कैसे विदेशी लोगों ने रखा। इसके साथ ही इनमें देश की संस्कृति और इसके इतिहास की भी पूरी जानकारी दी गई है।

बेसिक शिक्षकों के ट्रांसफर-समायोजन की प्रक्रिया स्पष्ट करने का निर्देश आज फिर होगी सुनवाई, तब तक तबादला आदेश जारी करने पर रोक

बेसिक शिक्षकों के ट्रांसफर-समायोजन की प्रक्रिया स्पष्ट करने का निर्देश 

आज फिर होगी सुनवाई, तब तक बेसिक स्कूलों के अध्यापकों के तबादले पर रोक

हाई कोर्ट ने कहा, बेसिक शिक्षा परिषद व अपर मुख्य सचिव दें व्यक्तिगत शपथपत्र




प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के स्थानांतरण व समायोजन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज व अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) से व्यक्तिगत हलफनामे में छात्र-अध्यापक अनुपात पर सरप्लस अध्यापकों की पहचान, उनके समायोजन एवं उन्हें चिन्हित करने का तरीका स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 

साथ ही याचिका की अगली सुनवाई तिथि आठ अगस्त तक स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह तथा न्यायमूर्ति डोनादी रमेश की खंडपीठ ने प्रयागराज की नीरजा व 50 अन्य सहायक अध्यापकों की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।


याचीगण का कहना है कि स्थानांतरण व समायोजन के गोविंद कौशिक व 116 अन्य के ऐसे ही केस में हाई कोर्ट ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) से जानकारी लेकर याचिका निस्तारित कर दी थी और कार्यवाही छह सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया था। निदेशक ने कोर्ट को बताया था कि निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के नियम 10 के अनुरूप सत्र 2024-


25 जो 11 अप्रैल 2024 से शुरू हुआ है, में 30 जून तक स्कूलों में छात्र संख्या व अध्यापक के अनुपात को आधार मानकर समायोजन तथा स्थानांतरण किया जाएगा। कोर्ट ने तब छह सप्ताह में लिस्ट तैयार करने का आदेश देते हुए कहा था कि फिर से वाद कारण उत्पन्न हो तो दोबारा कोर्ट आ सकते हैं।

खंडपीठ ने कहा, 'उम्मीद थी कि राज्य प्राधिकारी छात्र-अध्यापक अनुपात के अनुसार सरप्लस अध्यापकों का पता कर जिले में वरिष्ठता के अनुसार तैनाती का पुनर्निधारण कर लेंगे।'




अगली सुनवाई तक समायोजन प्रक्रिया के तहत किसी तरह के स्थानांतरण आदेश जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक, देखें कोर्ट ऑर्डर

एक और रिट पर आया कोर्ट का ऑर्डर 👇



यूपी में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर रोक, हाईकोर्ट ने पूछा-  प्रक्रिया पूरी करने में इतनी जल्दबाजी क्यों?


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिषदीय विद्यालयों में अध्यापकों के समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में बेसिक शिक्षा सचिव प्रयागराज को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने के लिए कहा है कि पूरी कार्यवाही इतनी जल्दबाजी में क्यों की जा रही है। नीरजा और 50 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए या आदेश न्यायमूर्ति एस सिंह और न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने दिया है।

याचीगण का पक्ष रख रहे हैं अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग में छात्र अध्यापक अनुपात के आधार पर शिक्षकों के जिले के भीतर ही समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट को बताया गया की सबसे पहले 30 जून 2024 की स्थिति के अनुसार विद्यालयों में छात्र अध्यापक अनुपात तय किया जाएगा। उसके लिए वास्तविक प्रयास किए जाएंगे तथा इसके आधार पर यह तय होगा कि किस-किस विद्यालय में अध्यापकों की संख्या छात्रों के अनुपात में अधिक है और कहां कम है। इसके बाद उन शिक्षकों की पहचान की जाएगी जिनको समायोजित किया जाना है। यह जिले में उनकी वरिष्ठता के आधार पर तय होगा।

याचियो के अधिवक्ता ने बेसिक शिक्षा सचिव के 31 जुलाई 2024 के पत्र का हवाला देकर कहा कि सारी प्रक्रिया 6 सप्ताह में पूरी करने का निर्णय लिया गया। जिससे पता चलता है कि विद्यालयों में पदों की संख्या तय करने और समायोजित किए जाने वाले अध्यापकों की पहचान के लिए बहुत कम समय दिया गया है।

परिषद के अधिवक्ताओं ने कोर्ट से इस मामले में लिखित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय की मांग की। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टिया सारी कार्यवाही बहुत जल्दबाजी में की जा रही है। इस मामले में मात्र लिखित जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव प्रयागराज को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही अगली सुनवाई तक किसी अध्यापक के स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी।



अगली सुनवाई तक समायोजन प्रक्रिया के तहत किसी तरह के स्थानांतरण आदेश जारी करने पर हाईकोर्ट की रोक, देखें कोर्ट ऑर्डर 

इंस्पायर छात्रवृत्ति योजना की रेस में यूपी बोर्ड के 24 हजार छात्र, विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मिलेगी उच्च शिक्षा के लिए 80 हजार रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति

इंस्पायर छात्रवृत्ति योजना की रेस में यूपी बोर्ड के 24 हजार छात्र, विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मिलेगी उच्च शिक्षा के लिए 80 हजार रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति


प्रयागराज। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति इंस्पायर योजना के लिए यूपी बोर्ड के 24,000 विद्यार्थियों को आवेदन हेतु चुना गया है। इस योजना के अंतर्गत विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए 80 हजार रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। 


80 हजार छात्रवृत्ति पाने की रेस में 24073 मेधावी

● यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग में 436 अंक पाने वाले कर सकेंगे आवेदन


प्रयागराज : यूपी बोर्ड से 2024 में इंटर विज्ञान वर्ग की परीक्षा 436/500 (87.20 प्रतिशत) या अधिक अंकों से पास करने वाले 24073 मेधावी छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए सालाना 80 हजार रुपये की ड्रीम स्कॉलरशिप हासिल कर सकते हैं।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंस्पायर योजना के तहत छात्रवृत्ति उन्हीं मेधावियों को मिलेगी जिन्होंने बेसिक एवं नेचुरल साइंस कोर्स (उदाहरण के तौर पर गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान अथवा लाइफ साइंस वनस्पति विज्ञान एवं जन्तु विज्ञान आदि) में स्नातक अथवा इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश लिया हो। 


पोर्टल शुरू होने पर वेबसाइट www.online.inspire.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि आवेदन पत्र के साथ संलग्न होने वाले एलिजिबिलिटी या एडवाइजरी नोट को बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

सीतापुर : 15 हजार की घूस लेते रंगे हाथ खण्ड शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार

सीतापुर : 15 हजार की घूस लेते रंगे हाथ खण्ड शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार


सीतापुर। एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को पहला ब्लॉक में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को 15 हजार की घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिया। खंड शिक्षा अधिकारी पर एक हेडमास्टर से रिश्वत लेने का आरोप है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी ने पकड़े जाने पर एंटी करप्शन टीम से अभद्रता की। टीम के सदस्यों के साथ उनकी हाथापाई भी हुई। टीम उन्हें लखनऊ लेकर गई है।


पहला ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारी सुरेंंद्र प्रताप सिंह तैनात हैं। बुधवार को प्राथमिक विद्यालय, खालगांव के हेडमास्टर विनोद कुमार उनके कार्यालय पहुंचे। उन्होंने 15 हजार रुपये बीईओ को दिए।


इसके बाद कार्यालय में मौजूद एंटी करप्शन टीम ने एबीएसए को घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिया। हेडमास्टर विनोद कुमार की शिकायत पर ही यह कार्रवाई हुई है। आरोप है कि एक मामले को रफा-दफा करने के लिए बीईओ ने हेडमास्टर से 50 हजार रुपयों की मांग की थी। इसके एवज में प्रधानाचार्य ने किसी तरह 35 हजार रुपये दिए थे।


इसके बाद भी एबीएसए लगातार पैसों की मांग कर रहे थे। इसके बाद हेडमास्टर ने एंटी करप्शन विभाग से बीईओ की शिकायत कर दी। इसके बाद यह कार्रवाई हुई। ब्लॉक संसाधन केंद्र में गिरफ्तारी के समय मौजूद लोगों ने बताया कि जब टीम ने बीईओ को पकड़ा तो उन्होंने अभद्रता की। इस पर टीम के साथ उनकी हाथापाई भी हुई। इसके बाद एंटी करप्शन टीम एबीएसए को लेकर लखनऊ रवाना हो गई।


डीवीआर भी साथ ले गई
एंटी करप्शन टीम ने एबीएसए सुरेंद्र प्रताप सिंह को उनके कक्ष से गिरफ्तार किया। इसके बाद टीम अपने साथ कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी ले गई। कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे में ही बीईओ रिश्वत लेते कैद हुए हैं।


सेना से सेवानिवृत्त थे बीईओ 
एबीएसए सुरेंद्र प्रताप सिंह इससे पूर्व सिधौली व सीतापुर नगर क्षेत्र में बतौर खंड शिक्षा अधिकारी तैनात रहा। वह सेना से सेवानिवृत्त था। उनके साथ काम करने वाले शिक्षकों ने बताया कि वह थोड़ा सख्त स्वभाव के थे।

बांदा : बीईओ 25 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

बांदा : बीईओ 25 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार


नरैनी (बांदा)। नरैनी खंड शिक्षा अधिकारी को चौराहे पर शिक्षक से 25 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करेप्शन टीम रंगे हाथों दबोच लिया। टीम उसे नरैनी कोतवाली ले आई। पूछताछ के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया।


कंपोजिट विद्यालय बसरेही में तैनात शिक्षक देशबंधु रूपौलिहा का दो माह के एरियर भुगतान का मामला शिक्षा विभाग में लंबित है। इसी मामले को सुलझाने के एवज में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रविंद्र कुमार ने उनसे 25 हजार रुपये मांगे थे। बुधवार की शाम देशबंधु रूपौलिया को रुपये लेने के लिए बुलवाया। इससे पहले शिक्षक ने झांसी में भ्रष्टाचार निवारण टीम को फोन पर सूचना दे दी थी। सीओ अतुल कुमार की अगुवाई में 15 सदस्यीय टीम दो वाहनों से पहुंची और चौराहे पर खड़ी थी।


शिक्षक ने बीईओ रविंद्र कुमार को जैसे ही रुपये दिए, उसी समय टीम उन्हें पकड़ लिया। टीम बीईओ को पकड़कर नरैनी कोतवाली ले गई। बताया जाता है कि खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ पहले से भी कई आरोप हैं। कोतवाली में कागजी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज कराया गया। विजिलेंस टीम में इंस्पेक्टर केके सिंह सहित 15 अन्य लोग भी शामिल रहे।


एरियर भुगतान के बदले मांगी रिश्वत
अतर्रा निवासी शिक्षक देशबंधु रूपौलिया ने बताया कि दो वर्ष पहले ग्राम प्रधान की शिकायत पर बीईओ ने उन्हें निलंबित कर दिया था। दो माह तक निलंबित रहा। इसके बाद बहाल किया गया। दो माह के बकाया एरियर के भुगतान को लेकर बीईओ उनसे 25 हजार रुपये घूस मांग रहे थे।


जून में पकड़े गए थे एमडीएम जिला समन्वयक
बेसिक शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का मामला नया नहीं है। जून माह में बीएसए ऑफिस में तैनात एमडीएम कोऑर्डिनेटर भास्कर आसवानी को भ्रष्टाचार निवारण टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। आज भी वह जेल में हैं। शिक्षक गंगा सागर ने आरोप लगाया था कि रसोइया चयन को लेकर लगातार परेशान कर रिश्वत की मांगी जा रही थी। पीड़ित शिक्षक ने 25 जून को भ्रष्टाचार निवारण संगठन चित्रकूट धाम मंडल में की। निरीक्षक राकेश सिंह के नेतृत्व में ने भास्कर को दस हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया था।

Wednesday, August 7, 2024

परिषदीय स्कूलों में जिले के अंदर तबादले और समायोजन से शिक्षकों की बिगड़ी गणित

परिषदीय स्कूलों में जिले के अंदर तबादले और समायोजन से शिक्षकों की बिगड़ी गणित


प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में जिले के अंदर तबादले और समायोजन ने शिक्षकों की गणित बिगाड़ दी है। शिक्षकों का कहना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संविलियन होने पर संविलियित (कंपोजिट) विद्यालयों में प्राथमिक के प्रधानाध्यापक को सरप्लस होने के कारण उसी विद्यालय में उच्च प्राथमिक में सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित कर दिया गया।


दूसरी तरफ तमाम अन्य प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की आवश्यकता है। नई समायोजन नीति में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 29,334 गणित/विज्ञान शिक्षकों का भी गणित बिगाड़ दिया है। प्राथमिक के प्रधानाध्यापकों के कंपोजिट विद्यालय में सहायक अध्यापक बना देने से जिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंपोजिट होने के बाद छात्र संख्या 100 से कम है, वहां न तो प्राथमिक के प्रधानाध्यापक और न ही उच्च प्राथमिक के प्रधानाध्यापक के पद सृजित हैं।


 इन स्कूलों में भाषा अध्यापक, गणित/विज्ञान और सामाजिक विषय के एक-एक पद सृजित हैं। विसंगति यह हो रही है कि प्राथमिक के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक में मनमाने ढंग से समायोजित करने से छात्र संख्या के आधार पर 29,334 में 2015 से नियुक्त अध्यापक सरप्लस हो रहे हैं।

अब यूपी के हर जिले में खुलेगा एक विश्वविद्यालय

अब यूपी के हर जिले में खुलेगा एक विश्वविद्यालय


सीएम योगी ने दिए निर्देश, कहा- एक जिला-एक विवि का बनाएं लक्ष्य, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति बनाने और आकांक्षात्मक जिलों के लिए विशेष प्रावधान के दिए निर्देश


लखनऊ। हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय का लक्ष्य पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब हर जिले में एक-एक विवि स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस संबंध में सीएम ने मंगलवार को अपने आवास पर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा की। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए नई नीति भी बनाने के निर्देश दिए। 


उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति को लेकर हुई बैठक में सीएम ने कहा कि सात साल में लगातार प्रयास से एक मंडल-एक विवि की परिकल्पना पूरी हो चुकी है। सभी 18 मंडलों में विवि स्थापना की प्रक्रिया हो चुकी है। कुछ मंडलों में निर्माण चल रहा है। अब हमारा लक्ष्य एक जिला एक विवि का होना चाहिए। 


वर्तमान में 35 जिलों में विवि हैं। शेष जिलों में विवि स्थापना के लिए निजी क्षेत्र बड़ा सहयोगी बन सकता है। उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र के वित्त पोषण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रदेश में उच्च शिक्षा की बढ़ती मांग को देखते हुए, निजी निवेश उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के सरकारी प्रयासों में सहायक हो सकता है। इससे छात्रों के लिए संस्थानों, पाठ्यक्रमों और सीटों की संख्या में वृद्धि होगी।


राज्यों की नीति का अध्ययन करें

सीएम ने कहा कि उच्च शिक्षा में निजी निवेश समय की जरूरत है। विभाग अन्य राज्यों की संबंधित नीति का अध्ययन करें। स्टेक होल्डर्स से संवाद करें और जल्द उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति तैयार कर पेश करें। नई नीति में निवेशकों को स्टांप ड्यूटी में छूट, कैपिटल सब्सिडी आदि को उचित स्थान दें। उन्होंने नई नीति में आकांक्षात्मक जिलों में विवि की स्थापना पर अतिरिक्त प्रोत्साहन के प्रावधान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्व के टॉप रैंकिंग वाले विवि के कैंपस खोलने के प्रस्ताव पर भी विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान करने को कहा।


उच्च शिक्षा में यूपी का विशेष स्थान

योगी ने कहा कि देश के सबसे युवा राज्य के रूप में यूपी उच्च शिक्षा में विशेष स्थान रखता है। प्रदेश की औसत आयु 21 वर्ष है, जो 2030 तक बढ़कर 26 वर्ष हो जाएगी। देश की युवा आबादी में इसका योगदान 16.5 फीसदी होगा। वर्तमान में प्रदेश का ग्रास इनरोलमेंट रेट (जीईआर) 25.6 फीसदी है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार 2035 तक 50 फीसदी तक बढ़ाना जरूरी है। निजी निवेश प्रोत्साहन नीति इस अंतर को पूरा कर सकती है।

बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रतिमाह छह हजार रुपए के मानदेय पर रखे जाएंगे रिटायर शिक्षक

बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रतिमाह छह हजार रुपए के मानदेय पर रखे जाएंगे रिटायर शिक्षक


लखनऊ । आउट ऑफ़ स्कूल (स्कूल नहीं आने वाले) बच्चों का भविष्य अब रिटायर शिक्षक संवारेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने शारदा कार्यक्रम के तहत आउट ऑफ़ स्कूल बच्चों को शिक्षित करने के लिए रिटायर शिक्षकों को मानदेय पर रखने का निर्णय किया है। जिस क्षेत्र में पांच से अधिक आउट ऑफ स्कूल बच्चे पाये जाएंगे उस क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में रिटायर शिक्षकों को अस्थाई रूप से मानदेय पर रखा जाएगा। इन रिटायर शिक्षकों को प्रतिमाह छह हजार मानदेय दिया जाएगा। ये रिटायर शिक्षक आउट ऑफ़ स्कूल बच्चों को अगले महीने से 9 महीने तक विशेष शिक्षा प्रदान कर उन्हें दक्ष बनायेंगे।


स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षित करने के लिए रिटायर शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराने के निर्देश भी दिए हैं। ब्लॉक स्तर पर समिति बनाकर उसके माध्यम से इनका चयन होगा। आउट ऑफ स्कूल के तहत छह से 14 वर्ष के आयुवर्ग के उन बच्चों को शिक्षित किया जाएगा जो या तो पढ़ाई को बीच में ही छोड़ कर किसी काम में लग गए हैं या जो पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे। 


बेसिक शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों का पता लगाकर उसे विशेष पढ़ाई के माध्यम से शिक्षित करेगा। यह कार्य विभाग की ओर से शुरू किए गए शारदा कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। बेसिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से इस बारे में उनसे संबंधित खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।


इन जिलों में स्कूल न जाने वाले बच्चे ज्यादा
मुरादाबाद, अमरोहा, शामली, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, कानपुर, बहराइच, बलरामपुर, बलिया, वाराणसी, भदोही, कासगंज, बदायूं तथा गोण्डा हैं।

Tuesday, August 6, 2024

यूपी के 4204 मदरसों का भविष्य दांव पर, सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते देगा फैसला, अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार को दिया आदेश, 20 अगस्त तक नहीं करें बच्चों का दाखिला

यूपी के 4204 मदरसों का भविष्य दांव पर, सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते देगा फैसला

अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार को दिया आदेश, 20 अगस्त तक नहीं करें बच्चों का दाखिला


लखनऊ। प्रदेश के मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों से गैर मुस्लिम बच्चों और 4204 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सभी बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट 20 अगस्त को अंतिम सुनवाई करेगा। कोर्ट ने सुनवाई होने तक मदरसों के बच्चों को शिफ्ट न करने के निर्देश दिए हैं।


दरअसल, टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया यूपी ने मुख्य सचिव की ओर से इस संबंध में जारी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। 


एसोसिएशन के महामंत्री दीवान साहेब जमां खान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को मौखिक निर्देश दिया कि कोई भी ऐसी कार्रवाई न की जाए जिससे सुप्रीम कोर्ट के 5 अप्रैल 2024 के आदेश का उल्लंघन हो। उन्होंने बताया कि न्यायाधीश ने कहा कि मामले पर 20 अगस्त को अंतिम सुनवाई होगी। तब तक बच्चों की शिफ्टिंग न की जाए।


ये है पूरा मामला

एसोसिएशन के महामंत्री ने बताया कि मदरसा बोर्ड एक्ट को असांविधानिक घोषित करने तथा मदरसा छात्रों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने के उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ पीठ के 22 मार्च के निर्णय के विरुद्ध दायर अपीलों में उच्चतम न्यायालय ने 5 अप्रैल को स्थगन आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश की अवहेलना करते हुए केंद्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 26 जून के पत्र के क्रम में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव अल्प संख्यक कल्याण एवं हज तथा निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण ने मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों से गैर मुस्लिम बच्चों तथा गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सभी बच्चों को स्कूलों में ट्रांसफर करने का आदेश जारी किया था।

एससी-एसटी छात्रों को अब दाखिले के समय नहीं देनी पड़ेगी ट्यूशन फीस, योगी सरकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में करने जा रही बदलाव

एससी-एसटी छात्रों को अब दाखिले के समय नहीं देनी पड़ेगी ट्यूशन फीसयोगी सरकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में करने जा रही बदलाव

• आनलाइन आवेदन के समय फ्री शिप कार्ड होगा जेनरेट

• विद्यार्थियों को एडमिशन के समय कार्ड को जमा कराना होगा


लखनऊ: अब पैसे के अभाव में एससी-एसटी के युवा उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होंगे। प्रदेश सरकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में गरीब एससी-एसटी छात्र- छात्राओं को बड़ी राहत देने जा रही है। इन्हें दाखिले के समय ट्यूशन फीस नहीं देनी पड़ेगी। छात्रवृत्ति के आनलाइन आवेदन के समय ही अर्हता पूरी करने वाले छात्र- छात्राओं का फ्री शिप कार्ड जेनरेट हो जाएगा। इसे दाखिले के समय जमा करने पर छात्र-छात्राओं को ट्यूशन फीस से मुक्ति मिल जाएगी। इन्हें सिर्फ दूसरे शुल्क देने पड़ेंगे। यह व्यवस्था वर्तमान शैक्षिक सत्र से ही लागू होगी। इसका लाभ 14 लाख से अधिक एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को मिलेगा।


यह सुविधा अभी सरकारी व एडेड कालेजों में मिलेगी। सरकार 2.50 लाख रुपये तक सालाना आय वाले - अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की प्रतिपूर्ति करती है। पहले भी एससी-एसटी छात्रों को जीरो फीस पर दाखिले की व्यवस्था थी, किंतु योजना में बड़े पैमाने पर घपले सामने आने के बाद सरकार ने इसे खत्म कर दिया था। छात्र-छात्राओं को पूरी फीस जमा करनी होती थी, बाद में समाज कल्याण विभाग उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति करता था।


इस व्यवस्था में गरीब छात्र छात्राओं को दाखिले के लिए धनराशि उधार लेनी पड़ती थी। कई बार उन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। सरकार ने इनकी समस्याओं को देखते हुए व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया है। छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन के समय छात्र को आय व जाति प्रमाण पत्र का नंबर भरना होगा। नंबर भरते ही इन प्रमाण पत्रों का लाइव सत्यापन हो जाएगा। आधार नंबर डालने पर आनलाइन प्रमाणीकरण के बाद फ्री शिप कार्ड जेनरेट हो जाएगा।


 जल्द ही सरकार इसकी नियमावली जारी करने जा रही है। सरकार दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए भी छात्रवृत्ति की व्यवस्था आसान करने जा रही है। दिव्यांग छात्रों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त छात्रवृत्ति दी जाती है। अब सरकार छात्रवृत्ति के पोर्टल को युनीक डिसेबिलिटी आइडी (यूडीआइडी) के साथ जोड़ने जा रही है।


प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति के पोर्टल को आल इंडिया सर्वे आन हायर एजुकेशन से जोड़ने जा रही है। केंद्र सरकार की यह संस्था कक्षा 12 से ऊपर के कालेज को एक कोड देती है। ऐसे में कालेज को यह कोड छात्रवृत्ति के पोर्टल पर भरना होगा। फर्जी कालेजों को कोड आवंटित नहीं होता है। ऐसे में वह सिस्टम से बाहर हो जाएंगे। इसी प्रकार कक्षा एक से 12 तक के कालेजों का कोड यू-डायस से मिलता है।


बीटेक के छात्रों को होगी एक लाख रुपये तक की बचत

सरकार की इस योजना से बीटेक के छात्रों को ही 55 हजार से एक लाख रुपये तक ट्यूशन फीस नहीं देनी पड़ेगी। एमबीए व एमसीए में दाखिला लेने वाले युवाओं का भी 50 से 80 हजार रुपये तक शुल्क बचेगा। इसी प्रकार सरकारी कालेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को करीब 35 हजार रुपये तक की ट्यूशन फीस की बचत होगी।


फ्री शिप कार्ड एससी-एसटी युवाओं को बड़ी राहत प्रदान करेगा। सरकार फीस की गारंटी ले रही है। इस वर्ष से इसे सरकारी व एडेड कालेजों में लागू किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू होने के बाद अगले वर्ष से इसे निजी कालेजों में लागू किया जा सकता है। असीम अरुण, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)



यूपी बीएड की 13 अगस्त से हो सकती है काउंसिलिंग

यूपी बीएड की 13 अगस्त से हो सकती है काउंसिलिंग

06 अगस्त 2024
झांसी। प्रदेश भर में बीएड की काउंसिलिंग 13 अगस्त से हो सकती है। इसके लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। काउंसिलिंग अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक तीन चरण में होगी।

बीयू ने शिक्षा सत्र 2024-25 की राज्य स्तरीय संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा कराई थी। इसके लिए 223384 ने आवेदन भरे। प्रदेश के 51 जिलों में बनाए 470 केंद्रों पर परीक्षा हुई थी। जून में जारी हुए परीक्षा परिणाम में 193062 विद्यार्थियों को रैंक मिली।




बीएड काउंसलिंग की तिथि टली, विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक अंतिम वर्ष का परिणाम जारी न करने से शासन ने नहीं दी अनुमति 

04 अगस्त 2024
झांसी। शासन ने शनिवार तक बुंदेलखंड विवि (बीयू) को बीएड की काउंसलिंग पांच अगस्त से कराने की अनुमति नहीं दी। इसकी वजह बीयू समेत कुछ विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक अंतिम वर्ष का परिणाम जारी न करना है। कुलसचिव का कहना है कि अब पांच अगस्त से काउंसलिंग संभव नहीं है।


बीयू के कुलपति प्रो. मुकेश पांडे ने शासन को पांच अगस्त से काउंसलिंग कराने का कार्यक्रम भेजा था। पहले चरण की काउंसलिंग पांच से 22 अगस्त, दूसरे चरण की 24 से 31 अगस्त तक प्रस्तावित थी। एक से छह सितंबर तक पूल काउंसलिंग और फिर डायरेक्ट एडमिशन होने थे। 

शासन से प्रस्ताव पर मुहर लगने का संकेत मिलने पर विवि प्रशासन ने सीपीएमटी बिल्डिंग में कंट्रोल रूम बनाने और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने का भी खाका तैयार कर लिया था। विवि प्रशासन शनिवार तक स्वीकृति मिलने का इंतजार करता रहा, मगर ऐसा नहीं हो सका। 

सरकार बताए, बच्चों को सेक्स स्वास्थ्य की शिक्षा देने के लिए क्या किया, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

सरकार बताए, बच्चों को सेक्स स्वास्थ्य की शिक्षा देने के लिए क्या किया, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने किशोरों-बच्चों को सेक्स स्वास्थ्य की दी जाने वाली शिक्षा के मामले में राज्य सरकार से पूछा है कि इसके लिए आम जागरूकता पैदा करने को लेकर क्या किया? कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार को पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। 


कोर्ट ने इस मामले में केंद्र के अधिवक्ता को भी छह सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर पक्ष पेश करने को कहा है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश नैतिक पार्टी की ओर से विनोद कुमार सिंह व एक अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया।


याचिका में केंद्र सरकार की किशोरावस्था शिक्षा योजना-2005 को पर्याप्त जागरूकता के साथ प्रदेश में लागू करने का आग्रह किया गया है। याचियों के अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय का कहना था कि 10 से 18 साल की अवस्था में बच्चों में कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। 


ऐसे में सेक्स स्वास्थ्य और प्रजनन को लेकर उनका सही मार्गदर्शन करने को केंद्र ने किशोरावस्था शिक्षा योजना-2005 को केंद्रीय और राज्यों के स्कूल- कालेजों में प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था की है। इसके बावजूद प्रदेश में यह योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं की गई। 


उधर, सरकार की ओर से यह कहते हुए याचिका पर शुरुआती आपत्ति उठाई गई कि राजनीतिक पार्टी इस मामले में जनहित याचिका दाखिल नहीं कर सकती, जिसे कोर्ट ने मामले के तथ्यों के मद्देनजर खारिज कर दिया।

शिक्षक संगठनों ने परिषदीय विद्यालयों में नागपंचमी के अवकाश की रखी मांग, बोले- इस दिन बच्चे भी नहीं आते हैं स्कूल

शिक्षक संगठनों ने परिषदीय विद्यालयों में नागपंचमी के अवकाश की रखी मांग, बोले- इस दिन बच्चे भी नहीं आते हैं स्कूल


लखनऊ : शिक्षक संगठनों ने नागपंचमी पर अवकाश की मांग की है। इसे लेकर बेसिक शिक्षा सचिव को पत्र भेजा गया है।

शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के घटक संगठनों ने सोमवार को बैठक कर नौ अगस्त नागपंचमी के दिन परिषदीय विद्यालयों में अवकाश की मांग की है। इस बाबत संगठन ने बेसिक शिक्षा परिषद सचिव को पत्र भेजा है।


संयुक्त मोर्चा के प्रदेश सचिव दिलीप चौहान ने बताया कि हिंदू धर्म में नागपंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर होती है। पहले इस मौके पर छुट्टी होती थी। लिहाजा नौ अगस्त को नागपंचमी के दिन प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में छुट्टी की जाए।

Monday, August 5, 2024

विशेषज्ञों की राय से होगा यूपी बोर्ड हाईस्कूल के पैटर्न में बदलाव, हाईस्कूल में त्रिभाषा फार्मूला लागू करने पर मंथन

विशेषज्ञों की राय से होगा यूपी बोर्ड हाईस्कूल के पैटर्न में बदलाव, हाईस्कूल में त्रिभाषा फार्मूला लागू करने पर मंथन

● छह की बजाय दस विषय की परीक्षा लेने का है प्रस्ताव
● हाईस्कूल में त्रिभाषा फार्मूला लागू करने पर भी मंथन
● सुझावों पर विशेषज्ञों से विचार के बाद शासन से ली जाएगी मंजूरी


प्रयागराज ।  राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुपालन में कक्षा नौ व दस में बदलाव करने से पहले यूपी बोर्ड विशेषज्ञों की राय लेगा। कक्षा नौ में 2025-26 सत्र से छह की बजाय दस विषयों की परीक्षा लेने और त्रिभाषा फॉर्मूला समेत अन्य बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए बोर्ड ने 29 जून तक छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों आदि हितधारकों से सुझाव मांगे थे। सुझाव मिलने के बाद बोर्ड अब सीबीएसई, एनसीईआरटी समेत शीर्ष शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत और काम कर चुके चुनिंदा विद्वानों की कार्यशाला बोर्ड मुख्यालय में आयोजित करेगा, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में सुझावों को लागू करने और पठन-पाठन का माहौल बेहतर बनाने की रूपरेखा तय की जा सके।


बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि जो भी बदलाव लागू किया जाए वह छात्र-छात्राओं पर अतिरिक्त दबाव न बनाए और अन्य बोर्ड की तुलना में यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर हो सके। नए प्रस्तावित पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को कला शिक्षा क्षेत्र के तहत चित्रकला, रंजन कला, संगीत गायन या संगीत वादन में से किसी एक विषय का चयन करना होगा। शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा के तहत नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा तथा समाजोपयोगी उत्पादक एवं समाजसेवा कार्य सभी के लिए अनिवार्य होगा। व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत 31 विषयों में से एक का चयन करना होगा।


सात विषयों के आधार पर बनेगी मेरिट

वैसे तो बोर्ड दस विषयों की परीक्षा लेगा, लेकिन मेरिट सात विषयों के आधार पर ही बनेगी। इनमें तीन भाषाएं, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंतर्विषयक क्षेत्र (गृह विज्ञान, मानव विज्ञान, वाणिज्य, एनसीसी, कंप्यूटर, कृषि या पर्यावरण विज्ञान में से कोई एक) शामिल है। शारीरिक, कला एवं व्यावसायिक शिक्षा में 30 नंबर की लिखित परीक्षा होगी एवं 70 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन होगा। शेष विषयों में 80 नंबर की लिखित परीक्षा और 20 नंबर का आंतरिक मूल्यांकन होगा। इसके अलावा कई अन्य बदलाव लागू करने पर मंथन चल रहा है।

Sunday, August 4, 2024

शिक्षक दिवस पर माध्यमिक शिक्षकों को तोहफा देने की तैयारी, सिटीजन चार्टर लागू करने की अब आई बारी

शिक्षक दिवस पर माध्यमिक शिक्षकों को तोहफा देने की तैयारी, सिटीजन चार्टर लागू करने की अब आई बारी


वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के विद्यालय से लेकर निदेशालय स्तर पर लंबित वर्षों से अवशेषों का भुगतान एक बहुत ही बड़ी समस्या है। बताया जाता है कि इस समस्या से प्रदेश का कोई भी राजकीय एवं एडेड माध्यमिक विद्यालय अछुता नहीं है। इसके निराकरण के लिए एक अभियान चला कर मामले शीघ्र निपटाने की विशेष जरूरत है और यह सिटीजन चार्टर लागू कर दूर किया जा सकता है। 

सिटीजन चार्टर लागू होने का यह होगा लाभ
जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर की विभिन्न समस्याओं के अलावा शिक्षकों व कर्मचारियों के चयन एवं एसीपी, अस्थायी जीपीएफ, अग्रिम वेतन निर्धारण, प्रधान एवं प्रबंधक के हस्ताक्षर प्रमाणित किये जाने आदि मामले तय समय सीमा के भीतर निस्तारित हो जाएंगे। इसके अलावा मंडल स्तर की समस्याओं के निस्तारण के साथ-साथ जीपीएफ अग्रिम, आदेश एवं भुगतान, पदोन्नतियां, विनियमितिकरण, पीपीओ एवं सेवा निवृत संबंधी सभी देयकों के भुगतान के मामले भी तय समय के भीतर निस्तारित हों सकेंगे। 



माध्यमिक शिक्षा में सिटीजन चार्टर जल्द होगा लागू

लखनऊ । माध्यमिक शिक्षा विभाग में जल्द ही सिटीजन चार्टर लागू किए जाने की तैयारी है। इसके लिए विभाग ने शिक्षक संगठनों समेत कई अन्य संवर्गों के संगठनों से भी सुझाव मांगे है। विभाग में सिटिजन चार्टर लागू होने से सभी संवर्गों की दशकों पुरानी लंबित समस्याओं का जल्द निपटारा हो सकेगा।


साथ ही विभाग के साथ-साथ सभी माध्यमिक स्कूलों में सभी पक्षों की शिकायतों का भी समयबद्ध निस्तारण हो सकेगा। शिक्षक संगठनों ने विभाग में सिटीजन चार्टर विभाग करने के लिए कई सालों से भारी दबाव बना रखा था। अब जाकर सरकार ने इस दिशा में नया प्रयास शुरू किया है। 

सिटीजन चार्टर लागू होने से विद्यालय स्तर से लेकर मंडल और निदेशालय स्तर तक के लंबित मामलों के निस्तारण की जबाबदेही तय होगी और समस्याओं का भी समयबद्ध निस्तारण होगा। सरकार शिक्षा दिवस पर माध्यमिक शिक्षकों को यह तोहफा देने की तैयारी कर रही है। तय समय के भीतर सिटीजन चार्टर की रूप- रेखा तैयार हो सके, इसके लिए के सभी संवर्गों के संगठनों से 31 जुलाई तक सुझाव मांगे थे। 

सूत्रों का कहना है कि अन्तिम तिथि तक अलग-अलग संगठनों से इस दिशा में दर्जनों उपयोगी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिसका परीक्षण किया जा रहा है।


सिटीजन चार्टर लागू होने का यह होगा लाभ

जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर की विभिन्न समस्याओं के अलावा शिक्षकों व कर्मचारियों के चयन एवं एसीपी, अस्थायी जीपीएफ, अग्रिम वेतन निर्धारण, हस्ताक्षर प्रमाणित किये जाने आदि मामले तय समय सीमा के भीतर निस्तारित हो जाएंगे। मंडल स्तर की समस्याओं के निस्तारण भी हो सकेगा।


क्या कहते हैं शिक्षकों के संगठन

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि हमारा संगठन शिक्षकों की लम्बित समस्याओं के समबद्ध निपटारे के लिए लगातार मांग कर रहा है। संगठन के बढ़ते दबाव के कारण विभाग ने सिटीजन चार्टर के लिए सभी संवर्गों से सुझाव मांगे हैं।

वर्षों से प्रमोशन का इंतजार, डेढ़ साल से मिल रही सिर्फ तारीख, अब तक वरिष्ठता सूची तैयार नहीं तैयार नहीं कर पाया बेसिक शिक्षा विभाग

वर्षों से प्रमोशन का इंतजार, डेढ़ साल से मिल रही सिर्फ तारीख, अब तक वरिष्ठता सूची तैयार नहीं तैयार नहीं कर पाया बेसिक शिक्षा विभाग

अब फिर बीएसए को आदेश कर मांगी अंतिम वरिष्ठता सूची


लखनऊ : प्रदेश के बेसिक शिक्षक वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। डेढ़ साल पहले प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन फिर तारीख पर तारीख मिल रही हैं। डेढ़ साल में विभाग अभी तक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी नहीं कर सका है। बेसिक शिक्षा परिषद ने हाल ही में एक बार फिर 27 जुलाई तक सभी बीएसए से वरिष्ठता सूची मांगी मांगी थी लेकिन अभी किसी जिले ने जारी नहीं की।


 बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन पहले जिला स्तर पर होते थे। कई जिले तो ऐसे हैं जहां 15-16 साल से प्रमोशन ही नहीं हुए हैं। लखनऊ में ही 2008 के बाद से प्रमोशन नहीं हुए। जिला स्तर पर 2016 तक प्रमोशन हुए। उसके बाद किसी जिले में प्रमोशन ही नहीं हुए। उसके बाद 2018 में प्रदेश भर में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन जूनियर टीईटी को लेकर पेंच फंस गया। 


प्राइमरी के सहायक अध्यापक का प्रमोशन प्राइमरी के हेड या फिर जूनियर के सहायक अध्यापक के पद पर होता है। इसी तरह प्राइमरी के हेड का प्रमोशन जूनियर के हेड पर होगा। प्राइमरी से जूनियर में जाने के लिए आरटीई के तहत अलग से जूनियर टीईटी जरूरी है। आरटीई लागू होने के बाद कुछ शिक्षकों ने तो टीईटी पूरी कर ली है। वहीं कुछ ने नहीं की है। इसी को लेकर मामला कोर्ट में पहुंच गया था। इससे प्रमोशन नहीं हो सके थे। 


कई बार भेजे रिमाइंडर

जिलों को कहा गया कि वे वरिष्ठता सूची तैयार करें। उसके बाद उन पर आपत्तियां मांगी जाएं और फिर अंतिम सूची जारी की जाए। इसके लिए तारीखें भी जारी की गईं। वे तारीखें निकल गईं। डेढ़ साल में कई बार बेसिक शिक्षा परिषद ने जिलों को यह प्रक्रिया पूरी करने का रिमाइंडर दिया। फिर भी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर सभी बीएसए को पत्र जारी किया गया है।

इस मामले पर कुछ शिक्षक कोर्ट गए हैं। कोर्ट के निर्देश पर ही वरिष्ठता सूची मांगी गई थी। कोर्ट जो भी आदेश देगा। उसे ध्यान में रखते हुए जल्द प्रमोशन की कार्यवाही की जाएगी। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव-बेसिक शिक्षा परिषद


आखिर कहां फंस रहा पेच?
खुद परिषद ने यह साफ नहीं किया है कि प्रमोशन के लिए जूनियर टीईटी जरूरी है या नहीं? इसको लेकर बीएसए भी भ्रमित हैं। पिछले साल जब प्रक्रिया शुरू की गई थी तो बीएसए ने अलग- अलग मानकों पर सूची तैयार करनी शुरू कर दी थीं। यह स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं की गई। जब प्रमोशन प्रक्रिया शुरू की गई तो उसी के साथ अंतरजनपदीय म्यूचुअल तबादले की प्रक्रिया भी साथ में शुरू की गई थी। ये तबादले हो चुके हैं। इस तरह शिक्षकों की वरिष्ठता फिर बदल गई। ऐसे में अंतिम सूची जारी करने से पहले एक अनंतिम सूची जारी करनी होगी और उस पर आपत्तियां मांगनी होंगी।



बेसिक शिक्षा विभाग ने 19 माह में 15 पत्र किए जारी, फिर भी नहीं हो पाया 35 हजार बेसिक शिक्षकों का प्रमोशन

🔵 करीब डेढ़ साल में सचिव स्तर से जिलों को जारी हो चुके 15 पत्र 
🔵 बिना प्रधानाध्यापक के चल रहे प्रदेश के 34054 बेसिक स्कूल


बेसिक शिक्षा विभाग साग में तैनात शिक्षकों के प्रमोशन के लिए बीते 19 महीने में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव जिला स्तर के लिए 15 पत्र जारी कर चुके हैं। इसके बाद भी प्रमोशन नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षक संघों का दावा है कि पूरे प्रदेश में करीब 35 हजार शिक्षकों का प्रमोशन लंबित है। प्रमोशन नहीं होने के कारण 34,054 स्कूलों में हेडमास्टर ही तैनात नहीं हैं।



नियम कानूनों में बार बार बदलाव के चलते बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के कई मामले हाईकोर्ट तक पहुंच गए। बीते वर्ष हाईकोर्ट ने नियम-कानूनों में बार-बार लगभग सभी रिटों का निस्तारण कर दिया। इसके बाद तेजी से प्रमोशन हो जाने चाहिए थे।

सचिव स्तर से जिला स्तर के लिए चिट्ठी-पत्री भी शुरू हो गई। इसे लेकर पत्र आते रहे और उन पर कार्रवाई होती रही। सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 24 जुलाई अब एक और पत्र जारी किया है। इस पत्र के जरिए प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापक पदों की वरिष्ठता सूची मांगी गई है। 



दर्जन बार आदेश, फिर भी बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति शेष
प्रमोशन प्रक्रिया के लिए फिर शुरू हुई प्रक्रिया पर उठे प्रश्न

वर्ष 2008 शिक्षकों के बाद से नहीं मिली को पदोन्नति


प्रयागराजः बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक-शिक्षिकाएं 15 वर्ष से पदोन्नति मिलने के इंतजार में हैं, लेकिन उनकी यह प्रतीक्षा खत्म नहीं हो रही है। अब 24 जुलाई को एक बार फिर बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी बीएसए को पत्र लिखकर शिक्षक/शिक्षिकाओं की अंतिम वरिष्ठता सूची मांगी है, लेकिन शिक्षक कह रहे हैं कि पदोन्नति मिल जाए, तब तो प्रयास के अर्थ हैं, वर्ना पत्रों के ढेर से लाभ नहीं मिलने वाला है।

अगर पदोन्नति देने के लिए वर्ष 2023 से किए जा रहे प्रयास को ही देखें तो अब तक दर्जन भर से ज्यादा बार आदेश दिए गए, लेकिन पदोन्नति मिलने का शिक्षकों का इंतजार खत्म नहीं हुआ। वर्ष 2008 के बाद से बेसिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को पदोन्नति नहीं दी गई, जबकि कई बार मांग की गई। इधर, पदोन्नति की मांग को लेकर शिक्षकों के मुखर होने पर प्रक्रिया शुरू तो की गई, लेकिन पूरी नहीं हुई। वर्ष 2023 में 31 जनवरी को पदोन्नति दिए जाने के लिए वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए, लेकिन बात पदोन्नति पूरी होने तक नहीं पहुंची। इस संबंध में 19 फरवरी 2023 को फिर पत्र जारी किया गया। इस तरह अलग-अलग तिथियों में पत्र जारी करने का सिलसिला अब तक तक चल रहा है। 


अभी 24 जुलाई को जारी पत्र में परिषद सचिव ने पिछले पत्रों की जानकारी देते हुए सभी बीएसए से कहा है कि परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में पदोन्नति के संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के पत्र का संज्ञान लें। यह भी बताया है कि 24 अप्रैल 2023 के पत्र के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों की वरिष्ठता सूची का प्रकाशन कर आपत्ति मांगकर अंतिम रूप से प्रकाशित कराते हुए पदोन्नति की कार्यवाही नियमानुसार पूर्ण करने के आदेश दिए गए थे। 


जिलों ने निर्देश के क्रम में कार्यवाही निश्चित रूप से पूर्ण कर ली होगी। ऐसे में जिलों में तैयार अंतिम वरिष्ठता सूची विशेष वाहक के माध्यम से 27 जुलाई तक परिषद कार्यालय में उपलब्ध कराने का समय दिया गया। मामले पर उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि प्रदेश भर के शिक्षक 2008 के बाद से पदोन्नति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बार प्रक्रिया पूर्ण कराते हुए पदोन्नति दी जानी चाहिए, जिससे शिक्षकों को लाभ मिल सके।

अंग्रेजी पढ़ाने के लिए तैयार की जा रही शिक्षक गाइड, किताबें बदलने के बाद शिक्षकों को पढ़ाने में आ रही हैं कुछ दिक्कतें

अंग्रेजी पढ़ाने के लिए तैयार की जा रही शिक्षक गाइड, किताबें बदलने के बाद शिक्षकों को पढ़ाने में आ रही हैं कुछ दिक्कतें

इसी महीने गाइड तैयार कर देगा आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान 


प्रयागराज। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान गाइड (संदर्शिका) तैयार कर रहा है। इसी माह के अंत तक तैयार हो जाएगी और फिर शिक्षकों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके बाद यह गाइड उन्हें दे दी जाएगी।


यूपी बोर्ड के विद्यालयों में अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें चल रही हैं। किताबें बदलने के बाद शिक्षकों को पढ़ाने में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। इसलिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के अंतर्गत शिक्षकों के लिए गाइड तैयार करने का काम आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) प्रयागराज को दिया गया। जून से इसका काम चल रहा है।

ईएलटीआई के प्रधानाचार्य स्कंद शुक्ल ने बताया कि नौवीं से 12वीं तक की अंग्रेजी की सभी किताबों की गाइड तैयार करने का काम चल रहा है। इसमें प्रत्येक पाठ का सार और बैकग्राउंडर दिया जाएगा। एक पाठ को कितने दिन में और कैसे पढ़ाना है, यह सब बताया गया है। इसके अलावा अंग्रेजी व्याकरण की गाइड दो भाषाओं में तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इससे शिक्षकों को काफी मदद मिलेगी और वह बच्चों को बेहतर पढ़ा सकेंगे।


Saturday, August 3, 2024

CBSE ने 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा का रिजल्ट जारी किया

सीबीएसई ने 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा का रिजल्ट जारी किया


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बारहवीं कक्षा की पूरक परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं। देशभर में सभी विषयों की एक साथ 15 जुलाई को हुई इस परीक्षा में 29.78% छात्र सफल रहे हैं। हालांकि यह बीते साल के मुकाबले में कम है। बीते साल 47.50% छात्र सफल रहे थे।


 छात्र सीबीएसई की वेबसाइट से अपना रिजल्ट देख सकते हैं। बोर्ड ने अभी दसवीं कक्षा के कंपार्टमेंट के रिजल्ट को घोषित नहीं किया है। पूरक परीक्षा में 15, 397 स्कूलों से 1,27,473 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इसमें 37,957 छात्र सफल घोषित किए है। 


इस परीक्षा में भी लड़कियां लड़कों के मुकाबले में आगे रही हैं। लड़कियों का पास प्रतिशत 33.47% और लड़कों का पास प्रतिशत 27.90% रहा है। 

परिषदीय विद्यालयों के एक किमी की परिधि में न खोले जाएं प्राइवेट स्कूल, स्कूलों में टेबल-मेज, बिजली पंखे और चहारदीवारी की व्यवस्था की उठाई मांग

परिषदीय विद्यालयों के एक किमी की परिधि में न खोले जाएं प्राइवेट स्कूल, स्कूलों में टेबल-मेज, बिजली पंखे और चहारदीवारी की व्यवस्था की उठाई मांग

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल महानिदेशक स्कूल शिक्षा से मिला


लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को शिक्षकों व बच्चों की समस्याओं को लेकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा से इसमें उन्होंने प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के एक किलोमीटर की परिधि के अंदर प्राइवेट स्कूल खोलने की अनुमति न दिया जाने की मांग की। साथ ही विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं बेहतर करने का भी मुद्दा उठाया।


यादव ने कहा कि परिषदीय विद्यालय में कई साल से बच्चे टाट-प‌ट्टी पर मिला।बैठकर पढ़ाई कर रहे है। इसको देखते हुए टेबल-मेज को व्यवस्था की जाए। जिन विद्यालयों में बिजली, पंखे और बाउंड्रीवाल नहीं है, वहां इसको भी विद्यालयों मे कायाकल्प के तहत हुए निर्माण कार्यों को मुगवता का सत्यापन कराया जाए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार

संदीप दत ने मिड-डे-मील वितरण के लिए नए बर्तन की व्यवस्था करने की मंद को। उन्होंने रिक्षकों का समायोजन 31 जुलाई तक की छात्र संख्या के आधार पर करने की भी मांग उठाई। साथ ही शिक्षकों के जिले के अंदर व जिले के बाहर पास्मरिक तबादला प्रक्रिया शुरू करने का भी मुद्दा उठाया। महानिदेशक स्कूल ने कहा कि यह इन मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही करेगी। कुछ पर पहले से ही काम चल रहा है। इस दौरान रस्मिकांत द्विवेदी, इरशाद अली आदि उपस्थित थे।

Friday, August 2, 2024

30 जून के नामांकन पर समायोजन की प्रक्रिया पर संभावित सरप्लस शिक्षकों में उपजा आक्रोश, विरोध की तैयारी

30 जून के नामांकन पर समायोजन की प्रक्रिया पर संभावित सरप्लस शिक्षकों में उपजा आक्रोश, विरोध की तैयारी


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेन्द्र कमार तिवारी ने 30 जून तक के छात्र नामांकन के आधार पर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन का कार्यक्रम जारी किया है, लेकिन शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। 


शिक्षकों ने बताया है कि उत्तर प्रदेश निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली के आधार पर शैक्षिक सत्र प्रारंभ के तीन माह नामांकन होने की व्यवस्था है। 


पहले जुलाई में सत्र शुरू होता था। अब अप्रैल में सत्र शुरू होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन अगले महीने 18 मई से 30 जून तक ग्रीष्म अवकाश के कारण नामांकन नहीं हुए। इस कारण जुलाई के नामांकन के आधार पर समायोजन किया जाए।


प्रबंधन की वरिष्ठता सूची में DIOS को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट

प्रबंधन की वरिष्ठता सूची में DIOS को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट

कॉलेज की प्रबंध समिति की वरिष्ठता सूची को डीआईओएस ने संशोधित करने का दिया था निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक को किसी भी संस्थान की प्रबंध समिति की ओर से बनाई गई वरिष्ठता सूची में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।


उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम या अन्य किसी विधिक प्रावधान के अनुसार उन्हें संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करने और कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज और एक अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।


बदायूं स्थित कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज के प्रबंधक ने प्रवक्ताओं की वरिष्ठता सूची बनाई थी। इसको जिला विद्यालय निरीक्षक बदायूं के 27 मार्च 2024 के आदेश रद्द कर दिया। साथ ही उन्हें संयुक्त  शिक्षा निदेशक बरेली मंडल के दो मार्च 2017 के आदेश के अनुसार वर्ष 2020-21 में प्रकाशित पूर्व वरिष्ठता सूची के अनुसार 15 अप्रैल 2024 के आदेश से नई वरिष्ठता सूची जारी करने का निर्देश दिया।


याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट ने में जिला विद्यालय निरीक्षक, बदायूं के आदेश की वैधता को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए डीआईओएस के आदेश को रद्द कर दिया।


कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा नियमावली के अन्तर्गत बनाए गए विनियमों के उपबंधों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत जिला विद्यालय निरीक्षक विद्यालय की प्रबंध समिति की वरिष्ठता सूची में हस्तक्षेप कर सकें या संशोधित करने का निर्देश दे सकें।



यूपी : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट/इम्प्रूवमेंट परीक्षा का रिजल्ट घोषित, देखें प्रेस नोट


यूपी बोर्ड ने जारी किया कंपार्टमेंट व इंप्रूवमेंट परीक्षा का परिणाम, हाईस्कूल के सभी और इंटरमीडिएट के 90.97 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा के 11 दिन बाद परिणाम बृहस्पतिवार को जारी कर दिया है। इसमें शामिल हाईस्कूल के सभी अभ्यर्थी सफल हो गए हैं। वहीं, इंटरमीडिएट के 90.97 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल हुए हैं। यह परिणाम यूपी बोर्ड की वेबसाइट https://upmsp.edu.in पर उपलब्ध है।

इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट की परीक्षा 20 जुलाई को प्रदेशभर में 93 केंद्रों पर कराई गई थी। इसके लिए सभी जिलों में मुख्यालयों के जीआईसी को केंद्र बनाया गया था। सुबह की पाली में आठ से 11:15 बजे तक हाईस्कूल की परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के लिए 16,059 बालक और 4,670 बालिकाओं यानी 20,729 ने पंजीकरण कराया था। परीक्षा में 1851 अनुपस्थित रहे। इसमें शामिल हुए 14,619 बालक और 4263 बालिका सफल हो गए हैं।

दूसरी पाली में दोपहर दो से 5:15 बजे तक इंटरमीडिएट की परीक्षा हुई। उसमें पंजीकृत 23,634 (13,395 बालक और 10,239 बालिका) में से 1350 परीक्षार्थी अनुपस्थित थे। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सीसीटीवी से निगरानी हुई थी। अब परिणाम आया तो इंटरमीडिएट के 90.82 प्रतिशत बालक और 91.16 प्रतिशत बालिका सफल हुए हैं। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि वेबसाइट पर परिणाम जारी किया गया है। 



यूपी : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट/इम्प्रूवमेंट परीक्षा का रिजल्ट घोषित, देखें प्रेस नोट 


Thursday, August 1, 2024

उच्च शिक्षा निदेशालय में भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर डिग्री शिक्षकों ने खोला मोर्चा, लगाए आरोप, भ्रष्टाचार का केंद्र है निदेशालय, निरंकुश हैं अधिकारी

 उच्च शिक्षा निदेशालय में भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर डिग्री शिक्षकों ने खोला मोर्चा, लगाए आरोप, भ्रष्टाचार का केंद्र है निदेशालय, निरंकुश हैं अधिकारी



प्रयागराज। विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से उच्च शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगा रहे शिक्षकों ने निदेशालय के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (फुफक्टा) के आह्वान पर प्रदेश भर के शिक्षकों ने निदेशालय में धरना दिया। आरोप लगाए कि निदेशालय भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है और यहां के अधिकारी निरंकुश हो गए हैं।


सामूहिक अवकाश लेकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, रूहेलखंड विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, आजमगढ़ विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, बलिया विश्वविद्यालय आदि के शिक्षकों ने धरने में शिरकत की। फफुक्टा के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र चौहान ने कहा कि निदेशालय के क्रियाकलापों से शिक्षक पीड़ित हैं और यहां के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।


महामंत्री प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि अगर निदेशालय शिक्षकों की मांगें नहीं मानता है तो क्रमिक धरना प्रदर्शननाशशुरू किया जाएगा और शिक्षक विधानसभा का घेराव करेंगे। अशासकीय महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 47 के तहत नियुक्त शिक्षकों स्थायीकरण न होने, राज्य कर्मियों की तरह शिक्षकों को चिकित्सीय व्यवस्था न मिलाने से शिक्षकों में नाराजगी है।


प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन (प्रसुआक्टा) के अध्यक्ष प्रो. पवन कुमार पचौरी ने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने और बायोमेट्रिक हाजिरी का आदेश वापस लेने की मांग की। युवा


शिक्षकों की तरफ से डॉ. अखिलेश मोदनवाल ने कहा जब-जब फुपुक्टा शिक्षक हितों को लेकर आवाहन करेगी, तब तक हम शिक्षक साथी निदेशालय से लेकर सचिवालय तक का घेराव करेंगे। धरना-प्रदर्शन में शिक्षक नेता डॉ. हिमांशु सिंह, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. शिव प्रकाश यादव, डॉ. गंगेश दीक्षित, डॉ. रवि चौरसिया, डॉ. श्योराज सिंह, डॉ. भारतेंदु मिश्र, डॉ. आरएम यादव, डॉ. एसके सिंह, डॉ. अनिल यादव, डॉ. अखिलेश राय आदि शामिल रहे।