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Friday, May 28, 2021

कोरोना मृतक आश्रितों को तत्काल मदद के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ ने की एक दिन का वेतन देने की पेशकश

कोरोना से शहीद शिक्षकों हेतु प्राथमिक शिक्षक संघ के सदस्य शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटे जाने के सम्बन्ध में मांगपत्र

कोरोना मृतक आश्रितों को तत्काल मदद के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ ने की एक दिन का वेतन देने की पेशकश। 


लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ एक अप्रैल से 31 मई के बीच दिवंगत होने वाले परिषदीय शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के आश्रितों की आर्थिक मदद के लिए शिक्षकों का एक दिन का बेतन देने की पेशकश की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने सरकार को पत्र लिखकर शिक्षकों का एक दिन का बेतन काटकर मृतक अश्रितों के खाते में समान रूप से जमा कराने का प्रस्ताव दिया है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि गत वर्ष भी परिषदीय शिक्षकों ने सर्वाधिक 76 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए थे। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से बड़ी संख्या में शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों की मृत्यु हुई है।

 उन्होंने कहा कि अब तक सरकार की ओर से मुआवजा राशि नहीं मिलने से मृतक शिक्षकों के अश्रित परेशान है। उन्होंने कहा कि मृतक आश्रितों को तत्काल राहत के लिए संघ ने शिक्षकों के बेतन से एक-एक दिन का वेतन काटकर मृतक आश्रितों के खाते में जमा कराने का प्रस्ताव दिया है।

 उन्होंने कहा कि यदि कोई शिक्षक एक दिन का वेतन देने में असमर्थ है तो वे संबंधित बीएसए को प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। संघ ने सरकार से मृतक आश्रितों को जल्द एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा,सरकारी नौकरी, सहायक अध्यापक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में शिधिलता देने की मांग की है।












अनाथ और विधवा को मुफ्त पढ़ाएगा, राजर्षि टण्डन मुविवि की अनूठी पहल

अनाथ और विधवा को मुफ्त पढ़ाएगा, राजर्षि टण्डन मुविवि की अनूठी पहल



कोरोना काल में अपने अभिभावकों को खोने वाले शिक्षाíथयों के लिए उत्तर प्रदेश राजर्ष िटंडन मुक्त विश्वविद्यालय (मुविवि) ने चिंता की है और उन्हें बड़ी राहत देने का फैसला किया है। नए सत्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले ऐसे शिक्षाíथयों को मुफ्त में प्रवेश दिया जाएगा। यह सुविधा कोरोना से अपने पति को खोने वाली विधवा महिलाओं को भी मिलेगी।


कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने बताया कि संस्थान में किन्नरों को पूर्व में ही मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा जेल में बंद कैदियों को शिक्षित करने का भी विश्वविद्यालय ने जिम्मा उठाया है। अब कोरोना काल में नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। तमाम छात्र-छात्रओं ने अपने माता-पिता को खो दिया। ऐसे में उनकी पढ़ाई आíथक वजहों से थम जाएगी। 

इसके अलावा यदि किसी महिला ने अपने पति को खो दिया है और वह शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनने का जज्बा रखती हैं तो मुक्त विवि ऐसे लोगों को मुफ्त में पढ़ाएगा। इस फैसले को अनौपचारिक तौर पर सहमति मिल गई है। जल्द ही विद्वत परिषद और कार्य परिषद में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा और सर्वसम्मति से मंजूरी मिलते ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। 


खास बात यह है कि यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में स्थापित करीब 1200 अध्ययन केंद्रों पर लागू होगी। इसके लिए सभी अध्ययन केंद्रों को भी निर्देशित करने की तैयारी चल रही है। कुलपति के अनुसार अब तक किसी भी विश्वविद्यालय ने इस तरह की राहत नहीं दी है। मुक्त विश्वविद्यालय पहला ऐसा संस्थान है, जिसने इस तरह का कदम उठाया है।


एक दिन का वेतन देंगे शिक्षक-कर्मचारी

कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देंगे। हालांकि, इसके लिए किसी को बाध्य नहीं किया जाएगा। सभी शिक्षक और कर्मचारी अपनी मर्जी से वेतन दे सकते हैं। इस मसले पर सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है।

छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में जल्द खुलेगा हेल्थ सेंटर

परिसर में जल्द ही हेल्थ सेंटर खुलेगा। विवि के शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा छात्रों को यहां बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जल्द ही अनुभवी डॉक्टर की नियुक्ति की जाएगी।

भारतीय भाषाओं में होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई

भारतीय भाषाओं में होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई



नई दिल्ली: इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब हंिदूी सहित सभी दूसरी भारतीय भाषाओं में भी होगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने नए शैक्षणिक सत्र से हंिदूी सहित आठ भारतीय भाषाओं में पढ़ाने की मंजूरी दे दी है। आने वाले दिनों में एआइसीटीई की योजना करीब 11 भारतीय भाषाओं में इसे पढ़ाने की है। 


इस बीच हंिदूी के साथ इसे जिन अन्य सात भारतीय भाषाओं में पढ़ाने की मंजूरी दी गई है, उनमें मराठी, बंगाली, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़ और मलयालम शामिल हैं। एआइसीटीई ने यह पहल उस समय की है, जब जर्मनी, रूस, फ्रांस, जापान और चीन सहित दुनिया के दर्जनों देशों में पूरी शिक्षा ही स्थानीय भाषाओं में दी जा रही है।

69000 भर्ती : कोर्ट के आदेश के बाद भी इंटर पास प्रशिक्षितों को नहीं मिली नौकरी

69000 भर्ती : कोर्ट के आदेश के बाद भी इंटर पास प्रशिक्षितों को नहीं मिली नौकरी 


69 हजार शिक्षक भर्ती में इंटरमीडिएट के बाद प्रशिक्षण डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों को कोर्ट के निर्देश के बाद भी नियुक्ति नहीं मिल सकी। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट ने उनको पद के लिए योग्य मानते हुए नियुक्ति देने का आदेश दिया है। कोर्ट की ओर से 15 मार्च को जारी आदेश में कहा गया था कि याची को एक महीने के भीतर ज्वाइन करवाया जाए। कोर्ट के आदेश के दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद विभाग की ओर से नियुक्ति देने की दशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।


सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को भेजे पत्र में इंटरमीडिएट पास प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का कहना है कि 15 मार्च को जारी आदेश में हाई कोर्ट ने कहा था कि बेसिक शिक्षा नियमावली के अनुसार सहायक अध्यापक की नियुक्ति पात्रता 45 प्रतिशत अंक के साथ 10+2 की डिग्री और प्रशिक्षण है। ऐसे में इंटरमीडिएट के बाद एनसीटीई से मान्य शिक्षा डिप्लोमा धारक को सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्त करने से इनकार नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने अमेठी के बीएसए को याची प्रिया देवी की नियुक्ति देने का आदेश दिया था।


इसी प्रकार हाईकोर्ट ने 25 मार्च को अपने आदेश में याची सोनी को नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इस बारे में भी बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से कोई प्रगति नहीं हुई। इसी के साथ ही कोर्ट में सैकड़ों केस कोरोना के चलते अटके हैं। इंटरमीडिएट पास अभ्यर्थियों के मामले में यदि कोर्ट के फैसले पर बेसिक शिक्षा विभाग ने नियुक्ति दी होती तो सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी कोरोना काल में इस कार्यालय से उस कार्यालय तक न भटकते।

छात्राएं आईं नहीं और भोजन के नाम पर हजम कर गए नौ करोड़, इन जिलों में निकाली गई रकम

छात्राएं आईं नहीं और भोजन के नाम पर हजम कर गए नौ करोड़, इन जिलों में निकाली गई रकम


संतकबीरनगर। प्रदेश के 18 जिलों के कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राएं आईं नहीं और उनके भोजन के नाम पर नौ करोड़ रुपये अधिकारियों ने निकाल लिए। मामला शासन में पहुंचा तो इन जिलों के बीएसए से जवाब तलब किया गया है। इसके साथ ही कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है।


 शासन के इस आदेश से बीएसए कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई होती है। यह पूरी तरह से आवासीय विद्यालय है।


इन जिलों में निकाली गई रकम

बरेली 84 लाख, बिजनौर में 74 लाख, देवरिया में 68 लाख, फतेहपुर में 31 लाख, गाजियाबाद में 18 लाख, गोंडा में 96 लाख, कांशीराम नगर में 31 लाख, मऊ में 23 लाख, मेरठ में 26 लाख, मुरादाबाद में 39 लाख, रायबरेली में 63 लाख, संतकबीरनगर में 38 लाख, श्रावस्ती में 26 लाख, सोनभद्र में 26 लाख, सुल्तानपुर में 44 लाख, उन्नाव में 47 लाख, वाराणसी में 37 लाख. प्रतापगढ़ में 76 लाख रुपये निकाले गए।


69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने अब सोशल मीडिया को बनाया मांग का जरिया

69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने अब सोशल मीडिया को बनाया मांग का जरिया


लखनऊ। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में त्रुटियों की वजह से वंचित रह गए अभ्यर्थी ट्विटर पर गुहार लगाने के बाद अब सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो डालकर अपनी आवाज शासन तक पहुंचा रहे हैं। प्रदेश के करीब हर जिले से अभ्यर्थी वीडियो बनाकर पोस्ट डालकर नियुक्ति पत्र जल्द दिए जाने की मांग कर रहे हैं।


इन अभ्यर्थियों ने बताया कि बेसिक में करीब सात हजार शिक्षक पदों पर रिक्त सीटें हैं। वहीं करीब 750 से ज्यादा अभ्यर्थियों को पूर्णांक और प्राप्तांक में त्रुटि होने की वजह से नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। जबकि सभी अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा में उत्तीर्ण कर मेरिट में आ गए थे। काफी समय तक धरना देने के बाद शपथ पत्र के आधार कुछ अभ्यर्थियों को मान्य कर दिया गया। 


अभ्यर्थियों ने बताया कि उसी शपथ पत्र के आधार पर उनको भी मान्य कर सकते हैं। जबकि जिनको मान्य किया गया है उनकी भी वहीं त्रुटियां थीं। अभ्यर्थियों ने मांग की कि जब एक जैसी त्रुटियां हैं तो उनको क्यों निराश किया गया। उन्होंने मांग की है कि मूल दस्तावेज के आधार पर उनकी त्रुटियों में सुधार किया जाए। अभ्यर्थियों ने बताया कि शासन तीसरी सूची जारी करने का आश्वासन तो दे रहा है लेकिन पिछले कई महीनों से जारी नहीं किया गया। 


ट्विटर के जरिए अपनी मांग उठाने के बाद अब सोशल मीडिया पर अभ्यर्थी परिवार समेत फोटो, वीडियो और पोस्टर जारी कर मुख्यमंत्री व बेसिक शिक्षा मंत्री से नियुक्ति पत्र दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं। पीलीभीत, गोंडा, मेरठ, हाथरस, बरेली, मुरादाबाद, आजमगढ़, जौनपुर, कानपुर, इटावा, बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर समेत अन्य जिलों से अभ्यर्थी वीडियो और पोस्टर पोस्ट कर रहे हैं।


 अभ्यर्थियों ने बताया कि यदि सरकार उनके पक्ष में निर्णय नहीं लेती है तो लॉकडाउन खत्म होने के बाद अपनी मांग को लेकर लखनऊ में आंदोलन करेंगे।

सीबीएसई स्कूलों को देना होगा अपनी वेबसाइट पर फीस सहित विवरण, वेबसाइट पर स्कूल की जानकारी लेकर अभिभावक बच्चों का अपनी पसंद के विद्यालय में करवा सकेंगे प्रवेश

सीबीएसई स्कूलों को देना होगा अपनी वेबसाइट पर फीस सहित विवरण, वेबसाइट पर स्कूल की जानकारी लेकर अभिभावक बच्चों का अपनी पसंद के विद्यालय में करवा सकेंगे प्रवेश

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर बच्चों से वसूली जाने वाली फीस से लेकर परीक्षा परिणाम सहित सभी जानकारी ऑनलाइन करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल अपना विवरण वेबसाइट पर नहीं दे रहा है अथवा उसमें कुछ छिपाया गया है तो ऐसे स्कूलों की मान्यता वापस ली जा सकती है। बोर्ड की ओर से इस प्रकार के आदेश के बाद अब स्कूल अपने बारे में कोई जानकारी छिपा नहीं सकेंगे। इससे अभिभावकों को लाभ होगा। बोर्ड ने स्कूलों को एक महीने के भीतर अपनी सभी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा है।


सीबीएसई की इस पहल से अभिभावकों को सीधा लाभ होगा। अभिभावक अपने बच्चे को किस स्कूल में प्रवेश दिलाएं, यह तय कर सकेंगे। बोर्ड ने पहले से वेबसाइट पर अपलोड अधूरी जानकारी को अपडेट करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने यह कदम पारदर्शिता लाने के लिए उठाया है। यदि कोई स्कूल अपने बारे में जानकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जानकारी अपलोड नहीं करने वाले पुराने स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण नहीं होगा। साथ ही नए स्कूल भी मान्यता से वंचित रह जाएंगे।

स्कूलों को दसवीं और बारहवीं के बीते तीन वर्ष के परिणाम, स्कूल की जानकारी के साथ प्रधानाचार्य के बारे में विवरण साझा करना होगा। इसमें प्रधानाचार्य का नाम, शैक्षिक योग्यता सहित उनके बारे में जानकारी और दसवीं, बारहवीं के तीन वर्ष के परिणाम का विवरण, एफीलेशन नंबर, स्कूल कोड, पता सहित ई-मेल आईडी, फोन नंबर को अपलोड करना होगा। स्कूलों को अपने मान्यता प्रमाण पत्र, सोसाइटी पंजीकरण, भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र, स्कूल फीस स्ट्रक्चर, स्कूल परिसर का क्षेत्र, कक्षा की संख्या व आकार, कंप्यूटर लैब, प्रयोगशाला की संख्या व आकार, इंटरनेट सुविधा, बालक-बालिका शौचालयों की संख्या के साथ कई जानकारी देनी होगी।

मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू करने का आदेश, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने दी अनुमति

मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू करने का आदेश, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने दी अनुमति

कक्षा एक से आठ तक के मदरसों में भी ऑनलाइन पढ़ाई


मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी तहतानिया और फौकानिया (कक्षा एक से आठ तक) स्तर के मदरसों में ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति दे दी है। हालांकि सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी कामिल और फाजिल की परीक्षा पर अभी निर्णय नहीं लिया जा सकता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए मदरसों को 30 मई तक बंद रखने के आदेश दिए गए है।

 रमजान में दीर्घकालीन अवकाश में मदरसों में ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हो रही थी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि मदरसा प्रबंधन अपनी सुविधा के मुताबिक पठन-पाठन की व्यवस्था करेंगे। बाकी को लेकर अभी निर्णय नहीं लिया गया है।


उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन, अल्पसंख्यक कल्याण राजनीतिक पेंशन, मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने आज अन्य शिक्षा बोर्डों की भांति मदरसा  शिक्षा परिषद के अधीन संचालित मदरसों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य शुरू कराने की स्वीकृति प्रदान की। अब जल्द ही मदरसों के कक्षा एक से आठ, कक्षा 9 से 12 तक एवं कामिल - फाजिल की कक्षाओं में ऑनलाइन शिक्षण कार्य शुरू होंगे। जब तक मदरसों को भौतिक रूप से शुरू कराने की स्थिति नहीं बनती है, तब तक नियमित ऑनलाइन पढ़ाई के पठन पाठन की अनुमति होगी। इसके लिए मदरसा शिक्षण परिषद से मान्यता प्राप्त सभी मदरसों को अनुमति प्रदान कर दी गई है। जिसका लाभ हजारों छात्रों को मिलेगा।


कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार आ रही कमी को देखते हुए छात्र हित एवं शैक्षिक सत्र को नियमित किए जाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता / सहायता प्राप्त मदरसों में कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाओं व कामिल फाजिल की कक्षाओं में ऑनलाईन कक्षाओं को पुनः संचालित करने के आदेश दिए।

मंत्री नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी के अथक प्रयास और मार्गदर्शन से आज उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में भारी कमी आई है। ट्रिपल टी के अदभुत प्रयोग से आज प्रदेश में रिकवरी का प्रतिशत 94.7 प्रतिशत है। जिसकी सराहना डबल्यू एच ओ ने भी की है। कोरोना संक्रमण के पॉजिटिविटी दर में भारी कमी को देखते हुए ही मदरसों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया गया है। 

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते लगे लॉकडाउन के कारण मदरसा बंद होने के कारण अब मदरसों में भी  आनलाइन पढ़ाई शुरू होगी।  मदरसों का कोर्स पूरा करने के लिए मदरसा ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था काफी सहायक साबित होगी।

Thursday, May 27, 2021

बेसिक शिक्षा विभाग में मनमाने तरीके से कार्य करने का नायाब मामला आया सामने, 2019 में हुए तबादले में आधे रिलीव नहीं हुए

बेसिक शिक्षा विभाग में मनमाने तरीके से कार्य करने का नायाब मामला आया सामने,  2019 में हुए तबादले में आधे रिलीव नहीं हुए।


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग में मनमाने तरीके से कार्य करने का नायाब मामला सामने आया है। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत 29 जून, 2019 को बड़े पैमाने पर समूह ‘ग’ कर्मियों यानी लिपिकों के तबादले किए। उनमें से आधे कर्मियों को 11 महीने तक रिलीव ही नहीं किया गया। कोरोना संक्रमण के दौर में कुछ कर्मचारी रिलीव हुए तो वे कोर्ट पहुंचे। शासन ने असहज स्थिति में 12 मई, 2020 के बाद रिलीव हुए कर्मचारियों का स्थानांतरण निरस्त कर दिया। अब शासन क्रियान्वयन में दोषी अफसरों को खोज रहा है, जिसमें टालमटोल की जा रही है।


बेसिक शिक्षा निदेशालय की ओर से अधीनस्थ राजकीय कार्यालयों व संस्थानों में कार्यरत लिपिकों का 29 जून, 2019 को तबादला किया था। पांच अलग-अलग आदेशों में कुल 162 लिपिक इधर से उधर भेजे गए। स्थानांतरण आदेश का जिन अफसरों को क्रियान्वयन करना था उन्होंने उदासीनता बरती। 


इसी बीच कोरोना संक्रमण बढ़ा तो 12 मई, 2020 को तबादले न करने का आदेश हुआ। उसके बाद भी अफसरों ने 2019 के आदेश पर कई कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया। उन कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो शासन ने कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा कि तबादले निरस्त किए जा रहे हैं। 


शासन ने इस मामले की छानबीन की तो पाया कि 162 लिपिकों में से 87 को 12 मई, 2020 तक रिलीव नहीं किया गया था। विशेष सचिव आरवी सिंह ने तबादलों का समय पर क्रियान्वयन न करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नाम व पदनाम सहित प्रस्ताव भेजने का आदेश दिया। 


शासन ने यह भी लिखा कि बेसिक शिक्षा निदेशक ने शासन को रिपोर्ट नहीं भेजी है। हालांकि, निदेशक बेसिक शिक्षा डा. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने 31 मार्च, 2021 को अपर शिक्षा निदेशक बेसिक को पत्र भेजकर कहा कि प्रस्ताव अविलंब उपलब्ध कराएं। अब इस मामले में तेजी से छानबीन चल रही है। निदेशालय के अफसरों का कहना है कि प्रकरण गंभीर है और रिपोर्ट जल्द ही भेजी जाएगी।

CBSE ने दसवीं के रिजल्ट से जुड़े सभी संशय को किया दूर

CBSE ने दसवीं के रिजल्ट से जुड़े सभी संशय को किया दूर


गोरखपुर : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा दसवीं के रिजल्ट को लेकर स्कूलों के संशय को दूर कर दिया है। स्कूलों की ओर से रिजल्ट तैयार करने को लेकर किए गए 57 प्रश्नों का जवाब बोर्ड ने यहां के 117 स्कूलों को भेज दिया है। बोर्ड की वेबसाइट पर भी इसे देखा जा सकता है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार छात्र न तो कापियां देख सकते हैं और ना ही चैलेंज कर सकते हैं। असंतुष्ट होने पर बोर्ड छात्र को एक और मौका देगा ।


स्कूलों की ओर से उठाए गए सवाल: यदि किसी छात्र ने परीक्षा नहीं दी। है तो उसके लिए क्या करेंगे ? यदि किसी विद्यालय का कक्षा दस का पहला बैच है तो वह किस आधार पर बच्चों को प्रमोट करेगा, रिजल्ट के बाद असंतुष्ट छात्रों के पास क्या विकल्प होगा, अगर किसी छात्र ने कोई प्रोजेक्ट या असाइनमेंट नहीं दिया है तो उसका क्या होगा ? 

रिजल्ट कमेटी कैसे बनेगी ? यदि कोई छात्र अंकों से संतुष्ट नहीं होगा ? तो उसे बोर्ड की ओर से परीक्षा देने का मौका मिलेगा ? जिसके जवाब में बोर्ड ने कहा है कि परीक्षाएं तभी होंगी, जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी।


हाईस्कूल की परीक्षा रद होने के बाद रिजल्ट बनाने को लेकर स्कूलों में संशय की स्थिति थी। इसे दूर करने के लिए स्कूलों ने बोर्ड से तरह तरह के सवाल पूछे थे। इन सभी सवालों को संकलित कर बोर्ड ने सवाल के साथ उनके जवाब स्कूलों को तो भेजा ही है। उसे अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है ।
अजीत दीक्षित, जिला समन्वयक, सीबीएसई

सीतापुर : शिक्षक संकुल के कार्यकाल के परफॉर्मेंस को रिव्यू करते हुए पुनः चयन की सूची भेजने के निर्देश

सीतापुर : शिक्षक संकुल के कार्यकाल के परफॉर्मेंस को रिव्यू करते हुए पुनः चयन की सूची भेजने के निर्देश।

फतेहपुर : पढ़ाई से दूर नहीं रहेंगे परिषदीय बच्चे, छात्रों तथा उनके अभिभावकों से शिक्षक रखेंगे संपर्क, दूरदर्शन के माध्यम से भी बच्चों की दी जाएगी शिक्षा

फतेहपुर : पढ़ाई से दूर नहीं रहेंगे परिषदीय बच्चे, छात्रों तथा उनके अभिभावकों से शिक्षक रखेंगे संपर्क, दूरदर्शन के माध्यम से भी बच्चों की दी जाएगी शिक्षा।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादा दिनों तक अपने गुरु जी और पढ़ाई से दूर नहीं रहेंगे। इसके लिए शिक्षक छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संपर्क करेंगे। यह संपर्क मोबाइल के माध्यम से होगा। कोरोना काल में घर बैठे बच्चों की पढ़ाई को लेकर शासन की ओर से गाइडलाइन जारी की गई हैं।


बच्चों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। लेकिन उसमें कई व्यावहारिक कठिनाइयां होने के कारण बच्चों को दूरदर्शन चैनल के माध्यम से पढ़ाई से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल की तुलना में टेलीविजन की उपलब्धता ज्यादा है, इसलिए बच्चे पढ़ाई के इस तरीके से ज्यादा जुड़ सकेंगे ।

कोरोना के चलते पिछले एक वर्ष से सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद हैं। बच्चों को घरों पर ही विभिन्न माध्यमों से पढ़ाया जा रहा है। स्कूल बंद होने के कारण शिक्षकों और बच्चों का भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसको दूर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षक न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई लिखाई को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे बल्कि छात्र छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों से भी मोबाइल पर संपर्क में रहेंगे। जिससे उसकी पढ़ाई के बारे में पूरी जानकारी शिक्षक को हो सके और आगे के लिए सुझाव भी दिए जा सकें । इसके साथ ही मिशन प्रेरणा के अंतर्गत ई-पाठशाला का संचालन किया जाएगा।

फतेहपुर : पारस्परिक तबादले पर आए शिक्षकों को जल्द मिलेंगे स्कूल, शासन ने बीएसए को दिए सूची तैयार कर रिपोर्ट देने के निर्देश

फतेहपुर : पारस्परिक तबादले पर आए शिक्षकों को जल्द मिलेंगे स्कूल, शासन ने बीएसए को दिए सूची तैयार कर रिपोर्ट देने के निर्देश

फतेहपुर : पारस्परिक तबादले पर आए शिक्षकों को जल्द ही स्कूल आवंटित होंगे। मंगलवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने बीसी कर बीएसए को स्कूल आवंटन की तैयारी पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जिले में 128 शिक्षक पारस्परिक तबादले पर आए हैं, जिनमें दो की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। इस तरह से 126 शिक्षकों को स्कूल आवंटित करना है।


जिले में पांच मार्च को 128 शिक्षक पारस्परिक तबादले पर आए हैं। शासन से आई तबादला सूची में किसी भी शिक्षक के पिता का नाम अंकित नहीं है। ऐसे में एक नाम के कई शिक्षक होने के कारण स्कूल आवंटन में दिक्कत हो रही है। शासन ने यह समस्या दूर करने के लिए शिक्षकों के मूल अभिलेखों से पिता का नाम देखकर कंप्यूटर में अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। यह सूची पूरी होने से बाद शासन में बुधवार को भेजी गई है। एक-दो दिन में स्कूल आवंटन की तिथि घोषित हो सकती है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पारस्परिक तबादला सूची में किसी भी शिक्षक के पिता का नाम अंकित नहीं है। शासन ने शिक्षकों के पिता का नाम अंकित कर सूची तत्काल भेजने के निर्देश दिए हैं। सूची पहुंचने पर शासन से जल्द ही स्कूल आवंटन तिथि घोषित हो सकती है।

विभागीय लापरवाही से नई पेंशन के दायरे में आने वाले शिक्षकों के आश्रितों को पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं, PSPSA ने पत्र लिखकर वित्त नियंत्रक से कार्यवाही की रखी मांग।

पूल एकाउंट न खुलने से लटकी पारिवारिक पेंशन व फंसा देयकों का भुगतान, PSPSA ने पत्र लिखकर वित्त नियंत्रक से कार्यवाही की रखी मांग। 

विभागीय लापरवाही से नई पेंशन के दायरे में आने वाले शिक्षकों के आश्रितों को पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं


बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त लेखा विभाग की लापरवाही के चलते सेवाकाल के दौरान मरने वाले वे शिक्षक जो नई पेंशन के दायरे में थे, उनके आश्रितों को पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं मिला पा रहा है। वहीं इस संबंध में जब शिक्षकों की पारिवारिक पेंशन की पत्रावली संबंधित ब्लाक के माध्यम से लेखधिकारी को भेजी जाती है, उसके बाद बीएसए व लेखाधिकारी की ओर से उन पत्रालियों को पेंशन निदेशालय भेजा जाता है, लेकिन फाइलों को रिजेक्ट या आपत्ति लगाकर वापस भेज दिया जा रहा है। 


इस संबंध में वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को एक लिखित शिकायत भेजी गयी है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन पसपा की ओर से इस संबंध में विभागीय स्तर पर जांच की भी मांग की गयी है कि आखिर ये लापरवाही क्यों हुई जो पूल एकाउंट नहीं कार के इसके पीछे वित्त की क्या मंशा क्या थी, इस पर सवाल खड़े होते हैं। 



पेंशन निदेशालय ने दी ये जानकारीः इस संबंध में जब पेंशन निदेशालय से संपर्क किया गया तो ये जानकारी दी गयी कि उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा एक पूल एकाउंट इस संबंध में खोला जाना था जो अभी तक नहीं ओपन हुआ है। बिना खाते के किसी भी प्रकार के सेवानिवृत्त लाभ पारिवारिक पेंशन, अथवा एनपीएस खाते से अग्रिम निकासी नहीं की जा सकती है।

शिक्षकों के परिवार विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर 
विभाग के सैकड़ो ऐसे शिक्षक हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है और वह पेंशन के दायरे मं लेकिन उनके परिवार को लाभ नहीं मिल पा रहा है | वहीं विभाग उनके परिवार की भी सुनने को तैयार नहीं है।इस स्थिति में उनके परिवार कहां अपनी फरियाद लेकर जाये इस पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है ।

कोशेना काल में भी कई शिक्षकों की हुई मौत 
बतादें कि कोरोना काल में भी कई ऐसे शिक्षक हैं जिनकी मौत हुई है और वह पेंशन के दायरे में हैं लेकिन उनको पेंशन का लाभ बिना एकाउंट के नहीं मिल पारहा है।कई शिक्षकों की पत्नी वबच्चे विभाग में चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।

मामला मेरी जानकारी में नहीं: वित्त लेखाधिकारी 
वहीं इस संबंध में लखनऊ बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात वित्त लेखाधिकारी नागेश त्रिपाठी का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी उनके संज्ञान में नहीं हैं।अगर कोई ऐसा मामला आता है तो समीक्षा करके आगे की कार्रवाई की जायेगी।

विभाग की लापरवाही के चलते नहीं खुले खाते
विभाग की लापरवाही की चलते अभी तक खाते नहीं खुलें हैं, जिसके चलते परिवारिक पेंशन के मामले लंबित हैं और मृतक शिक्षकों के परिवार भी परेशान हो रहे हैं। इसमें वित्त लेखाधिकारी की पूरी लापरवाही है। विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, पीएसएसए |


छुट्टियों में ड्यूटी लगाने से शिक्षकों में भारी आक्रोश

छुट्टियों में ड्यूटी लगाने से शिक्षकों में भारी आक्रोश


बलरामपुर। अवकाश के दिनों में ड्यूटी लगाने को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों में रोष है। प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बुधवार को डीएम को संबोधित ज्ञापन बीएसए को सौंपकर आदेश निरस्त कराने की मांग की है। आदेश निरस्त न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना महामारी की चपेट में आकर जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को सरकारी नौकरी व तत्काल सहायता राशि देने की भी मांग की है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ज्ञान सागर पाठक, संयुक्त मंत्री शिव कुमार सोनी, जिला मंत्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वेद प्रकाश पांडेय व कोषाध्यक्ष काजिम अली अंसारी आदि ने बीएसए दफ्तर पहुंचकर डीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा। पत्र में कहा गया है कि 14 अगस्त 2020 को टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए समयावधि व कार्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। शीतकालीन में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक और ग्रीष्मकाल में 20 मई से 15 जून तक शिक्षकों को छुट्टी दिए जाने का प्राविधान है। 16 जून से सत्र शुरू होगा। कोरोना महामारी के चलते सभी शिक्षकों की ग्रीष्मकाल अवकाश में निगरानी समितियों में ड्यूटी लगाई गई है।


छुट्टी के समय में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से शिक्षकों में रोष है। ज्ञापन में ड्यूटी निरस्त कराने, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मतदान व मतगणना के दौरान कोरोना पॉजिटिव होने से जान गवांने वाले शिक्षकों, बेसिक शिक्षा के अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारीजनों को तत्काल सरकारी नौकरी व मदद मुहैया कराने की मांग की गई है।

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा, यूपी बोर्ड परीक्षा पर फैसला इस माह के अंत तक, गृह और चिकित्सा विभाग की सहमति के बाद होंगी बोर्ड व विश्वविद्यालय परीक्षायें

 
डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा, यूपी बोर्ड परीक्षा पर फैसला इस माह के अंत तक

गृह और चिकित्सा विभाग की सहमति के बाद होंगी बोर्ड व विश्वविद्यालय परीक्षायें


माध्यमिक शिक्षा परिषद और यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं के लिए गृह और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से भी सहमति ली जाएगी। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि बोर्ड और यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल भी आवश्यक है। प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं को भी संबंधित स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता रहती है।


उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षा केंद्रों पर मेडिकल टीम की तैनाती भी आवश्यक है ताकि किसी भी परीक्षार्थी, शिक्षक या कर्मचारी में लक्षण दिखने पर या उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए गृह और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से भी सहमति ली जाएगी।


यूपी बोर्ड 12वीं की परीक्षाओं को लेकर योगी सरकार इस माह के अंत तक फैसला लेगी। कोविड-19 महामारी की स्थिति की समीक्षा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ चर्चा के बाद इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा के आयोजन पर निर्णय लिया जाएगा। यह जानकारी बुधवार को उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने दी। 

उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, 'हम पहले ही प्रश्न पत्र प्रिंट करा चुके हैं। कॉपियों के डिकोडेड सेट तैयार हो चुके हैं। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए 8513 परीक्षा केंद्र निर्धारित कर चुके हैं। हम कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री से परीक्षा के आयोजन के संबंध में चर्चा करेंगे और इस माह के अंत तक फैसला लिया जा सकता है।'

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा, 'जब शिक्षा विभाग 12वीं कक्षा की परीक्षा की तिथि फाइनल कर लेगा, तब स्वास्थ्य विभाग यह देखेगा कि परीक्षा केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन किस तरह कराया जाए। हमने पंचायत चुनाव समेत कई कार्यक्रम कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ कराए। ऐसे में हमारे लिए परीक्षा का आयोजन ज्यादा कठिन नहीं होगा।'

उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 90 फीसदी राज्यों ने 12वीं कक्षा की परीक्षा के आयोजन पर सहमति जताई है। इन सभी का मानना है कि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं जरूर होनी चाहिए क्योंकि उच्च शिक्षा व आगे छात्र के भविष्य में 12वीं की परीक्षा अहम भूमिका निभाती है।



इससे पहले उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा था कि यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियां पूरी हैं। जिस तिथि से परीक्षा कराए जाने के संबंध में सुझाव प्राप्त होगा, उन तारीखों में परीक्षा कराकर एक माह के अंदर परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। डा. दिनेश शर्मा ने कहा कि यूपी में बोर्ड परीक्षा संपादित कराए जाने में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आएगी। 

यूपी बोर्ड 12वीं के प्रीबोर्ड परिणाम 28 मई तक होंगे अपलोड

यूपी बोर्ड ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 के लिए पंजीकृत 26 लाख छात्रों की फरवरी में आयोजित प्री बोर्ड परीक्षा परिणाम 28 मई की शाम तक अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षकों को 22 मई को भेजे पत्र में सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने ये निर्देश दिए हैं।

पहले लगे टीका फिर हो परीक्षा: अखिलेश यादव

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर बयान दिया है। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा पहले टीका, फिर परीक्षा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश इससे पहले भी योगी आदित्यनाथ सरकार से मांग कर चुके हैं कि पहले यूपी बोर्ड के सभी परीक्षार्थियों को टीका लगाया जाए, उसके बाद ही इम्तेहान की बात की जाए।



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Wednesday, May 26, 2021

CBSE 12वीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी, यह हो सकता है परीक्षा का नया पैटर्न

CBSE  12वीं बोर्ड की परीक्षा की तैयारी, यह हो सकता है परीक्षा का नया पैटर्न


नई दिल्ली। सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षा में पारंपरिक आंसर शीट के बजाय ओएमआर पर उत्तर लिखने का विकल्प देने जा रहा है। ओएमआर शीट में छात्रों को वैकल्पिक और छोटे प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इस ओएमआर शीट पर छात्र सही उत्तर के आगे पेन अथवा पेंसिल से टिक कर सकेंगे।


खास बात यह है कि छात्र को अपने ही स्कूल में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। इसके अलावा उसी स्कूल में कॉपी जांची जाएगी। परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए सीबीएसई बोर्ड आईआईटी द्वारा तैयार रोबोटिक एप का प्रयोग करेगा। हालांकि, इस योजना के तहत परीक्षा आयोजित करने पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।


वर्तमान पाठ्यक्रम के तहत 60 से 70% वैकल्पिक व छोटे प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अलावा अन्य सामान्य प्रश्न होंगे। डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट की परीक्षा को ध्यान में रखकर बोर्ड का पूरा फोकस 60 से 70% वाले वैकल्पिक और छोटे प्रश्न पर आधारित प्रश्न पत्र तैयार करने पर रहेगा।

शिकायत : 90 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों को दे रहे आधा वेतन, निजी स्कूल शासनादेश की कर रहे अवहेलना

शिकायत : 90 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों को दे रहे आधा वेतन, निजी स्कूल शासनादेश की कर रहे अवहेलना


लखनऊ। प्राइवेट टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने राज्य सरकार से निजी स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के शोषण की शिकायत की है। एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को पूरा वेतन दिलाए जाने की मांग की है। 


एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सरकार ने शासनादेश जारी कर शिक्षण संस्थानों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है लेकिन निजी स्कूल इसकी खुलकर अवहेलना कर रहे हैं। कोरोना काल में करीब 90 प्रतिशत स्कूल अपने शिक्षकों को आधा वेतन दे रहे हैं।


उन्होंने उप मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे एक कमेटी बनाकर इसकी जांच कराए कई शिक्षकों ने शिक्षकों को वेतन मांगने पर स्कूल से निकाल दिया गया है। शिक्षक मजबूरी में नौकरी कर रहा है और वे कहीं पर शिकायत भी नहीं कर पा रहे। एसो. ने अपने शिकायती पत्र में कई स्कूलों का नाम भी लिया है। 

मृत शिक्षकों के आश्रितों के मामले में आठ साल बाद बदलाव

मृत शिक्षकों के आश्रितों के मामले में आठ साल बाद बदलाव


सपा सरकार के मंत्री अहमद हसन ने मृत शिक्षकों का सम्मान बचाने का जो वादा किया, उसे योगी सरकार ने धरातल पर उतारा है। आश्रितों को चतुर्थ श्रेणी के अधिसंख्य पद पर नियुक्ति देने का आदेश सपा शासन का ही है, जिसे अब पलटा है। मृत शिक्षकों के आश्रितों को तृतीय श्रेणी (लिपिक) के अधिसंख्य पद पर नियुक्ति का आदेश हुआ है। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी। स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की जरूरत भी नहीं थी, फिर भी पाल्यों को उन्हीं स्कूलों में अनुचर बनना पड़ा था, जहां उनके पिता या पति शिक्षक थे।


प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 26 जुलाई, 2011 को लागू हुआ, उसके पहले तक मृत शिक्षकों के आश्रितों को स्नातक होने पर बीटीसी का प्रशिक्षण दिला शिक्षक पद पर नियुक्ति दी जाती रही। नए नियम से स्नातक के साथ प्रशिक्षण व टीईटी होना अनिवार्य हुआ तो आश्रितों को नियुक्ति में लंबे समय तक असमंजस रहा। 


शासन के निर्देश पर 15 फरवरी, 2013 को बेसिक शिक्षा परिषद ने नियुक्ति की गाइडलाइन जारी की। कहा कि आश्रित यदि स्नातक, प्रशिक्षण प्राप्त और टीईटी उत्तीर्ण नहीं है तो उसे शिक्षक पद पर और यदि इंटरमीडिएट है और परिषदीय कार्यालयों में कनिष्ठ लिपिक का पद रिक्त है तो उसकी नियुक्ति लिपिक पद की जा सकती है। आश्रित कक्षा आठ उत्तीर्ण हो व कार्यालय व विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी का पद रिक्त न हो तब भी अधिसंख्य पद पर नियुक्ति की जा सकती है। 


ज्ञात हो कि परिषदीय विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी का पद अब तक सृजित नहीं है और कार्यालयों में गिने-चुने लिपिक के पद थे, इसलिए अधिकांश आश्रित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही बन पाए। योगी सरकार इस नियम को पलटने के लिए 20 माह से मंथन कर रही थी। अब इसे पलट दिया गया है। 


डाटा 'मिसमैच' के चलते शुल्क भरपाई से वंचित 65 हजार छात्रों को राहत जल्द

डाटा 'मिसमैच' के चलते शुल्क भरपाई से वंचित 65 हजार छात्रों को राहत जल्द


लखनऊ। उन छात्र-छात्राओं के लिए राहत भरी खबर है, जिन्हें डाटा मिसमैच के चलते पिछले वित्त वर्ष में शुल्क भरपाई नहीं हो सकी थी। इन्हें भुगतान के लिए समाज कल्याण निदेशालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इनकी संख्या करीब 65 हजार है।


यह छात्र अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के हैं। बताते हैं कि इन्होंने छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर पिछली कक्षा के अपने अंकों को अपलोड किया था, लेकिन शिक्षण संस्थानों ने अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट में इन अंको को गलत ढंग से 'जीरो- जीरो अपलोड कर दिया। नतीजतन डाटा का मिलान न होने के कारण सॉफ्टवेयर ने इन छात्रों को रिजेक्ट श्रेणी में डाल दिया। इसलिए इन्हें भुगतान नहीं हो पाया।


इन छात्रों ने अपनी शिकायत उच्चस्तर पर दर्ज कराई। कहा कि पात्र होने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं हुआ। समाज कल्याण निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के छात्रों को भुगतान के लिए उच्च स्तर पर सहमति बन चुकी है।


इसके अलावा निजी शिक्षण संस्थानों के उन छात्रों के प्रत्यावेदनों पर भी विचार किया जाएगा, जो पिछले वित्त वर्ष में अपने पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष के छात्र थे, लेकिन नई कैटेगरी में आवेदन करने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका। इसकी वजह उनके संस्थान को एनबीए या नैक की मान्यता का न होना था, लेकिन यह नियम सिर्फ प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए ही लागू किया गया था। पहले से योजना का लाभ ले रहे छात्रों को इस पाबंदी के दायरे से बाहर रखा गया था।

प्रयागराज : कोरोना से अभिभावक की मौत पर बच्चों की फीस होगी माफ, जिला प्रशासन की अगुवाई में प्राइवेट स्कूलों ने दी सहमति

कोरोना से अभिभावक की मौत पर बच्चों की फीस होगी माफ, जिला प्रशासन की अगुवाई में प्राइवेट स्कूलों ने दी सहमति


 प्रयागराज : कोरोना संक्रमण से माता, पिता या घर के कमाने वाले व्यक्ति की मौत पर सीबीएसई, सीआइसीएसई के स्कूलों के बच्चों की फीस माफ कर दी जाएगी। इस पर स्कूल के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यो ने मंगलवार को डीएम व जिला विद्यालय निरीक्षक के साथ हुई बैठक में सहमति दी। विश्वास दिलाया कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं बाधित होने देंगे। अनाथ हुए बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा देते रहेंगे।


डीएम भानुचंद्र गोस्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इसमें जिले के 70 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्य, प्रबंधक व व्यापार मंडल के पदाधिकारी शामिल हुए। डीएम ने कहा कि महामारी के कारण कई परिवार आर्थिक रूप से भी प्रभावित हुए हैं। इसे देखते हुए वर्तमान सत्र में फीस भी न बढ़ाएं।


जो शुल्क पिछले वर्ष लिया गया वही इस बार भी लें। यदि कहीं बढ़ी फीस ली गई हो तो आगे महीने से उसे समायोजित कर लें। इसके अतिरिक्त यदि स्कूल में भौतिक रूप से परीक्षा नहीं ली जा रही तो परीक्षा शुल्क भी न लें। इसी क्रम में क्रीड़ा शुल्क, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर, वार्षिक आयोजन आदि की फीस भी न लें जब तक सभी गतिविधियां शुरू न हो जाएं। 


यदि कोई अभिभावक तीन महीने की फीस एक साथ दे पाने में सक्षम न हो तो उससे मासिक शुल्क लें। यह भी कहा गया कि किसी विद्यार्थी या उसके परिवार के सदस्य संक्रमित हों तो लिखित अनुरोध पर फीस अगले महीने लें। आगे की फीस भी किस्त के रूप में समायोजित करें।

बरेली : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्तियों की विज्ञप्ति जारी

बरेली : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्तियों की विज्ञप्ति जारी




ग्रीष्मावकाश में लगी कोविड ड्यूटी, परिषदीय शिक्षकों में असंतोष

ग्रीष्मावकाश में लगी कोविड ड्यूटी, परिषदीय शिक्षकों में असंतोष


प्रयागराज : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से डीएम को संबोधित ज्ञापन बीएसए को दिया गया। इसमें ग्रीष्मावकाश के समय शिक्षकों की ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम, निगरानी समिति व अन्य कार्यो में लगाए जाने पर आपत्ति की गई। बताया गया कि अब तक प्रदेश में 1621 शिक्षक कोरोना संक्रमण के चलते जान गंवा चुके हैं। 


किसी भी शिक्षक को नियुक्ति से पहले शिक्षण संबंधी प्रशिक्षण व परीक्षा से गुजरना पड़ता है जब कि अध्यापकों को इससे हटकर अलग ड्यूटी लगाई जा रही है। नियमत: 20 मई से 15 जून तक अध्यापकों को ग्रीष्मावकाश दिया जाना चाहिए, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। बदले में न तो कोई आर्थिक लाभ दिया जा रहा है और न अन्य अवकाश। 


ज्ञापन में मांग की गई है कि सभी शिक्षकों की ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम, कोविड सर्वे व निगरानी समितियों से हटाई जाए। इस मौके पर देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शिव बहादुर सिंह, मनीष तिवारी, डा. हरीश चंद्र, डा. एसपी सिंह, सरोज सिंह, मसूद अहमद, राजेंद्र कनौजिया, अमर कुमार आदि मौजूद रहे।

Tuesday, May 25, 2021

शिक्षकों ने ट्विटर पर उठाया 'कैशलेस ट्रीटमेंट फॉर यूपी टीचर्स का मुद्दा

ट्विटर पर झलकी शिक्षकों के कैशलेश इलाज की पीड़ा, एक लाख से अधिक ट्वीट से ट्रेंड हुआ।

शिक्षकों ने ट्विटर पर उठाई कैशलेस उपचार की मांग

शिक्षकों ने ट्विटर पर उठाया 'कैशलेस ट्रीटमेंट फॉर यूपी टीचर्स का मुद्दा

एक लाख से अधिक शिक्षक अभियान से जुड़े, सीएम और बेसिक शिक्षा मंत्री को टैग कर चिकित्सीय लाभ दिलाने की मांग की


लखनऊ: कोविड 19 के दौर में ड्यूटी और पंचायत चुनाव के दौरान शिक्षक साथियों की मौत से दुखी होकर प्रदेश के शिक्षकों ने ट्विटर पर कैशलेस ट्रीटमेंट फॉर यूपी टीचर्स का मुद्दा उठाया है। शिक्षकों ने अभियान चलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी को टैग करते हुए शिक्षकों को सरकारी चिकित्सीय लाभ दिलाने की मांग की है।

अभियान की शुरुआत में अहम भूमिका निभाने वाले भदोही के शिक्षक विनोद कुमार कहते हैं कि अभियान मंगलवार से ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से राज्य कर्मचारियों को निःशुल्क मेडिकल सुविधा या चिकित्सा सुविधा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही आमजन के लिए भी आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से इलाज के लिए 5 लाख तक की व्यवस्था की गई है। लेकिन शिक्षकों को कोई सरकारी चिकित्सीय लाभ नहीं मिलते हैं। दूसरी तरफ उन्हें सरकारी कर्मचारी मानकर आयुष्मान से भी वंचित रखा गया है।



प्रदेश के शिक्षकों ने ट्विटर पर अपनी व्यथा को दर्शाते हुए कैशलेस उपचार की मांग को उठाया। सरकार एक ओर राज्य कर्मचारियों को निश्शुल्क मेडिकल सुविधा, चिकित्सा सुविधा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की है। शिक्षकों कोई सरकारी चिकित्सीय लाभ नहीं मिलते हैं तो दूसरी तरफ वे सरकारी कार्मिक होने के कारण आयुष्मान से भी वंचित रखे गए हैं। शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा प्रतिपूर्ति की मांग की है।








गतवर्ष कोरोना काल मे सर्विलांस ड्यूटी, राशन वितरण, स्कूल के कारण संक्रमण और गत पंचायत चुनावों में लगातार खो रहे अपने साथियों के साथ प्रशासनिक व्यवहार से व्यथित होकर शिक्षकों ने अपना दर्द ट्विटर पर व्यक्त करने की राह चुनी है। 

आज के दौर में स्वास्थ्य सर्वाधिक आवश्यक किन्तु अत्यंत ही महंगी सुविधा है। जहाँ एक ओर सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों को  निःशुल्क मेडिकल सुविधा/ चिकित्सा सुविधा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की है, इसके साथ ही आम जन के लिए भी आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से इलाज के लिए  5 लाख तक की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों कोई सरकारी चिकित्सीय लाभ नही मिलते हैं, तो दूसरी तरफ वे सरकारी कार्मिक होने के कारण आयुष्मान से भी वंचित रखे गए हैं। शिक्षकों द्वारा पहले से भी कैशलेस चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जा माँग की जाती रही है। 


आज ट्विटर पर बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षको ने अपनी दास्तां कहने के लिए मुख्यमंत्री व बेसिक शिक्षा मंत्री को ट्विटर का ट्विटर हैंडल चुना और #CashlessTreatment4UPTeachers मुद्दा ट्रेन्ड करने लगा जिसपर लाखों की संख्या में प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई।  इस महाअभियान में धीरे धीरे  लाखो लोग जुड़ गए और ट्विटर पर शिक्षकों की पीड़ा झलक गयी। 


कोविड संक्रमण के चलते हजारों शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वाहन करते करते काल के गाल में समा गए कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी ने उन्हें असमय ही विदा कर दिया । 
ऐसे माहौल में जब शिक्षक कही बाहर निकल कर अपनी बात जिम्मेदार लोगों से नही कह सकता है तो उसने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए ट्विटर के माध्यम से कैशलेश इलाज की माँग उठायी।


ये सुविधा राज्य सरकार द्वारा बहुत से विभागों के कर्मचारियों को दी जाती है । ऐसे में शिक्षको को न देकर सरकार शिक्षको के साथ अन्याय कर रही है। जबकि शिक्षको की ड्यूटी हर एक महत्वपूर्ण कार्य मे लगाई जाती है। ऐसे में शिक्षको को ये सुविधा क्यो नही दी जाती है।

स्वतः स्फूर्त शिक्षकों का यह मुद्दा सबसे कम समय मे सर्वाधिक ट्वीट के रूप में दिन भर छाया रहा और शिक्षकों के साथ साथ तमाम विशिष्ट लोगों, पत्रकारों ने भी इसका समर्थन किया ।


प्रशिक्षण के बाद चुनाव संपन्न की अवधि में एवं मतगणना के बाद कोविड-19 से संक्रमित होकर जान गवाने वाले मृतक शिक्षा मित्रों की जनपद वार सूची

प्रशिक्षण के बाद चुनाव संपन्न की अवधि में एवं मतगणना के बाद कोविड-19 से संक्रमित होकर जान गवाने वाले मृतक शिक्षा मित्रों की जनपद वार सूची














 

अंक वेबसाइट पर तेजी से हो रहे अपलोड, यूपी बोर्ड कक्षा 9 से 12 तक की परीक्षाओं का संजोएगा रिकार्ड

अंक वेबसाइट पर तेजी से हो रहे अपलोड, यूपी बोर्ड कक्षा 9 से 12 तक की परीक्षाओं का संजोएगा रिकार्ड



प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल परीक्षा 2021 के परीक्षार्थियों का लगभग पूरा रिकार्ड मंगा लिया है। सभी कालेजों ने प्रीबोर्ड और छमाही का रिकार्ड भेज दिया है। हालांकि, कुछ छात्र-छात्रओं के अंकों को लेकर गतिरोध बना है। इसका हल भी जल्द ही निकाल लिया जाएगा। अब परीक्षार्थियों के प्रमोट होने के आसार अधिक हैं, वैसे इस पर अंतिम निर्णय जल्द ही मुख्यमंत्री करेंगे।


केंद्रीय शिक्षा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने इस बार हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त कर दी है और परीक्षार्थियों को 11वीं में प्रमोट कर रहा है। इसका देश के अधिकांश शिक्षा बोर्ड अनुसरण कर रहे हैं। यूपी बोर्ड ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए लेकिन, वार्षिक व आंतरिक परीक्षा के परिणाम न होने से समस्या आ रही थी। बोर्ड ने पहले प्रीबोर्ड और छमाही परीक्षा के अंक वेबसाइट पर मांगे और दूसरे दिन नौवीं के विषयवार अंक व पूर्णाक मांगा। 

कालेजों ने पहले कोरोना काल का हवाला देकर अंक देने में आनाकानी की और नौवीं के बारे में कहा गया कि पिछले वर्ष 13 अप्रैल, 2020 को सभी को प्रमोट किया था। बोर्ड ने सख्ती से जिला विद्यालय निरीक्षकों को आदेश दिया, साथ ही इस वर्ष नौवीं व ग्यारहवीं के वार्षिक परीक्षा तक के अंक मांगे। 

वर्ष 2021 के कक्षा-12 के परीक्षार्थियों के प्री बोर्ड परीक्षा एवं उनके कक्षा 11 के छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक एवं पूर्णांक परिषद की बेबसाइट पर अपलोड कराये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी




बोर्ड सूत्रों के अनुसार कालेजों ने हाईस्कूल प्रीबोर्ड और छमाही के अंक भेज दिए हैं। छमाही की जगह कालेजों ने तीन माह पर होने वाले टेस्ट के अंक दिए गए हैं। नौवीं के भी अंक तमाम कालेजों ने भेज दिया है। बोर्ड ने 24 मई तक अंक मांगे थे और इसकी तारीख नहीं बढ़ाई गई है। कह सकते हैं कि प्रमोट करने की तैयारियां पूरी की जा रही हैं ताकि सीएम की ओर से मुहर लगने पर अंक व प्रमाणपत्र वितरित किए जा सकें।


यूपी बोर्ड कक्षा 9 से 12 तक की परीक्षाओं का संजोएगा रिकार्ड


यूपी बोर्ड अब हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं के साथ ही 9वीं व 11वीं की छमाही व वार्षिक परीक्षाओं के रिकॉर्ड भी संजोएगा। सचिव ने सभी कालेजों से कक्षा 12 की प्रीबोर्ड और 11 के छमाही व वार्षिक परीक्षा के अंक मांगे हैं, जबकि इंटरमीडिएट 2021 की लिखित परीक्षाएं होना तय है। यह कार्य इसीलिए शुरू हुआ है कि ताकि हर वर्ष 9 से 12वीं तक के रिकार्ड को सुरक्षित रखा जा सके और भविष्य में परीक्षा न हो पाने के आसार पर यकायक कालेजों से मांगना न पड़े। ज्ञात हो कि दैनिक जागरण ने नौ मई को ‘कोरोना ने यूपी बोर्ड को दिखाया परीक्षा में सुधार का रास्ता’ शीर्षक से इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी।


असल में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने निर्णय लिया कि इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा नहीं होगी, परीक्षार्थी अगली कक्षा में प्रमोट होंगे। इंटर के संबंध में फैसला होना है। सीबीएसई व यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लगभग समान है लेकिन, दोनों की परीक्षाओं की सूचना देने में अंतर है। सीबीएसई में मासिक टेस्ट के अलावा छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूरा रिकार्ड ऑनलाइन है। केंद्रीय बोर्ड छात्र-छात्रओं के प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल में आसानी से प्रमोट कर सकता है। वहीं, यूपी बोर्ड में कक्षा 9 की अर्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा का रिकार्ड बोर्ड मुख्यालय नहीं भेजा जाता था। इस बार प्री बोर्ड यानी हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से पहले स्कूल स्तर की परीक्षा फरवरी में कराई गई। लेकिन, उसका रिकार्ड बोर्ड के पास नहीं था।


वजह, यूपी बोर्ड में अधिकांश कालेज वित्तविहीन हैं, जबकि राजकीय व अशासकीय कालेज एक तिहाई ही हैं। ऐसे में पहले जिलों से नवीं और हाईस्कूल में प्री बोर्ड व छमाही का रिकार्ड मांगा गया। अब बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कक्षा 12 की फरवरी में हुई प्रीबोर्ड परीक्षा का रिकॉर्ड मांगा है। इंटर के सभी संस्थागत व व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की कक्षा 11 की छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूर्णाक व प्राप्तांक मांगा गया है। इसी तरह से कृषि भाग एक के परीक्षार्थियों का कक्षा 11 की छमाही के अंक मांगे गए हैं। बोर्ड सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से 28 मई की शाम तक वेबसाइट पर अंक अपलोड करने का निर्देश दिया है।