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Monday, January 23, 2023

यूपी बोर्ड : एससीईआरटी के विशेषज्ञ 9 से 12 तक के बनाएंगे पेपर

यूपी बोर्ड : एससीईआरटी के विशेषज्ञ 9 से 12 तक के बनाएंगे पेपर

● राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में कार्यशाला 30 से

● राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बदलावों को शामिल करेंगे


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की कक्षा नौ से 12 तक के प्रश्नपत्र अब यूपी बोर्ड की बजाय राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में बनाए जाएंगे। इसकी शुरुआत कक्षा नौ के प्रश्नपत्र बनाने से हो रही है। कक्षा नौ के हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र निर्माण के लिए कार्यशाला 30 जनवरी से तीन फरवरी तक एससीईआरटी लखनऊ में होने जा रही है।

इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान व आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान एलनगंज के अलावा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। आने वाले समय में कक्षा दस से 12 तक के प्रश्नपत्र भी एससीईआरटी में तैयार होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में किए गए बदलावों के अनुसार प्रश्नपत्र निर्माण किया जाएगा।

एससीईआरटी का कार्य कक्षा एक से 12 तक की शैक्षणिक रूपरेखा तैयार करने के साथ ही अनुभव आधारित अध्ययन को बढ़ावा देना है। एनईपी 2020 के अनुरूप कक्षा नौ के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी एससीईआरटी को दी गई है। भविष्य में 10 से 12 तक के पेपर भी एससीईआरटी के विशेषज्ञ बनाएंगे।

-विजय किरन आनंद,

महानिदेशक स्कूली शिक्षा

UP : स्कूल कैंपस में हो सकेंगी शादियां और निजी कार्यक्रम, विद्यालय संचालन में मदद हेतु आय का एक नया रास्ता तैयार करने हेतु ड्राफ्ट जारी

UP :  स्कूल कैंपस में हो सकेंगी शादियां और निजी कार्यक्रम,  विद्यालय संचालन में मदद हेतु आय का एक नया रास्ता तैयार करने हेतु ड्राफ्ट जारी


उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब निजी कार्यक्रमों के लिए किराए पर लिया जा सकेगा. उत्तर प्रदेश सरकार इस संबंध में विचार कर रही है. यूपी सरकार UP Board से जुड़े हुए सभी सरकारी सेकेंडरी स्कूलों को निजी कार्यक्रमों के लिए किराए पर अपना कैंपस देने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

सरकार का मकसद इसके जरिए सरकारी स्कूलों के लिए आय का एक नया रास्ता तैयार करना है. शिक्षा निदेशक महेंद्र देव ने बताया कि ये प्रस्ताव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है.

ड्राफ्ट पॉलिसी में प्रस्ताव दिया गया है कि स्कूल की छुट्टियों के दौरान विवाह समारोह और अन्य समारोहों की मेजबानी के लिए स्कूल कैंपस का इस्तेमाल करने की इजाजत देकर फंड इकट्ठा किया जा सकता है. इसमें कहा गया है कि स्कूल अपनी खाली जमीन पर स्पोर्ट्स, कल्चरल एक्टिविटी और प्रदर्शनियों जैसे कार्यक्रम भी आयोजित करवा सकते हैं. खाली जमीन का इस्तेमाल फसल उगाने, स्कूल का समय पूरा होने के बाद कंप्यूटर क्लास का वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने के लिए किया जा सकता है. इन सबसे स्कूल को फंड मिलेगा.


कैसे काम करेगा ये नियम?

पॉलिसी में प्रस्तावों पर विचार करने और अनुमति प्रदान करने के लिए जिला स्तर पर एक समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है. छह सदस्यीय समितियों की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे, जो इसके प्रमुख होंगे. मुख्य विकास अधिकारी इसके उपाध्यक्ष, जिला विद्यालय निरीक्षक इसके सदस्य सचिव होंगे. इसके अलावा, फाइनेंस एंड अकाउंट्स ऑफिसर, मैनेजर और प्रिंसिपल इसके सदस्य होंगे.

स्टेट पॉलिसी गाइडलाइंस के मुताबिक, स्कूलों को पहले अपनी प्रबंधन समितियों की आम सभा की बैठक में प्रस्ताव को मंजूर करने की जरूरत होगी और फिर इसे जिला स्तरीय समितियों को आगे की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. केवल उन्हीं प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी जो स्कूल के नियमित पढ़ाई को प्रभावित नहीं करते हैं. उन प्रस्तावों को भी मंजूरी नहीं दी जाएगी, जिसमें कंस्ट्रक्शन की जरूरत होगी.

स्कूलों को चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा विधिवत ऑडिट किए गए कमाई को हासिल करने और जांच के लिए समिति को प्रदान करने के लिए भी सहमत होना होगा. उन्हें पारदर्शिता के लिए उन्हें अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड करने की भी जरूरत होगी.




वैवाहिक समारोह के लिए किराए पर दे सकते हैं स्कूल परिसर? प्रस्ताव पर ई-मेल के जरिए 27 जनवरी तक मांगा गया सुझाव 


प्रयागराज  : हाई स्कूल और इंटर कालेजों के परिसर को छुट्टी के दिन वैवाहिक समारोह या अन्य उत्सवों के लिए किराए पर दिया जा सकता है। पढ़ाई को बिना बाधित किए स्कूल की जमीन और भवन का व्यावसायिक प्रयोग किया जा सकता है। व्यावसायिक प्रयोग से मिली धनराशि से स्कूल का विकास करना होगा।


 इस आशय से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने कई बिंदुओं का एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर लोगों से ई-मेल schoolincomesuggestion@gmail.com पर 27 जनवरी तक सुझाव मांगा गया है। आए सुझावों पर विचार विमर्श करने के बाद आदेश जारी किया जाएगा।


 प्रदेश के मान्यता प्राप्त कई माध्यमिक विद्यालयों के भवन और फर्नीचर जर्जर हो गए हैं। विद्यालयों की प्रबंध समिति के पास बच्चों को पढ़ाने के लिए आधुनिक संशाधन जैसे स्मार्ट क्लस, कंप्यूटर लैब आदि की व्यवस्था करने के लिए धनराशि नहीं है। खेल उपकरण खरीदने के लिए धनराशि नहीं है। 


यह संशाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन के पास भी बजट नहीं है। ऐसे में अच्छी पढ़ाई और स्कूलों के विकास के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव से प्रबंधन की आय बढ़ेगी तो स्कूलों का विकास होगा। प्रस्ताव में कहा कि छुट्टी के दिन स्कूल परिसर ( क्रीड़ा स्थल को छोड़कर) को वैवाहिक एवं अन्य उत्सवों के लिए किराये पर दिया जा सकता है।




अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सुविधाएं जुटाने के लिए फीस बढ़ाने की अनुमति के साथ आय बढ़ाने के लिए सार्वजनिक कार्यक्रम, शादियां व अन्य कार्यक्रम की अनुमति देने पर भी मंथन

लखनऊ : अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सुविधाएं जुटाने के लिए फीस बढ़ाने की तैयारी है।


प्रदेश में 5483 एडेड स्कूल हैं। राज्य सरकार इस पर विचार कर रही है। वहीं स्कूलों की आय बढ़ाने के लिए यहां सार्वजनिक कार्यक्रम, शादियां व अन्य कार्यक्रम की अनुमति देने पर भी मंथन चल रहा है।


राज्य सरकार की मंशा है कि एडेड स्कूलों की आय को बढ़ाया जाए ताकि भवन की मरम्मत, सुविधाएं, फर्नीचर आदि स्कूल अपने संसाधनों से जुटा सके। इस संबंध में कई बैठकें हो चुकी है। एडेढ स्कूलों की सालाना फीस 500 से 600 रुपये है। इन स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की शिक्षा निशुल्क है यानी कोई फीस नहीं ली जाती। ऐसे में स्कूलों की आय का कोई साधन नहीं है।


इन स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन सरकार देती है। ऐसे में सरकार कोई ऐसा रास्ता ढूंढ़ रही है जिससे स्कूलों की आय बढ़ जाए। इन स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सरकार ने 70 साल पुराने स्कूलों की मरम्मत व सौंदर्यीकरण की योजना बनाई थी लेकिन इसमें उतनी ही रकम प्रबंधन द्वारा लगाने का नियम है। ऐसे में यह योजना भी ठण्डे बस्ते में चली गई। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए न तो ढंग के फर्नीचर हैं और न ही अन्य अन्य सुविधाएं।


इसके अलावा सरकार स्कूल परिसर में ऐसे कार्यक्रमों को ही अनुमति देने पर भी विचार कर रही है जिससे शिक्षण कार्यों में कोई बाधा न आए।

Sunday, January 22, 2023

यूनेस्‍को ने इस वर्ष का अंतर्राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस, अफगान बालिकाओं और महिलाओं को समर्पित करने का निर्णय लिया, UNESCO dedicates this year's International Day of Education to Afghan girls and women

यूनेस्‍को ने इस वर्ष का अंतर्राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस, अफगान बालिकाओं और महिलाओं को समर्पित करने का निर्णय लिया

UNESCO dedicates this year's International Day of Education to Afghan girls and women


संयुक्‍त राष्‍ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्‍कृतिक संगठन – यूनेस्‍को ने इस वर्ष 24 जनवरी को मनाया जाने वाल अंतर्राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस, अफगान बालिकाओं और महिलाओं को समर्पित करने का निर्णय लिया है। 


संगठन की महानिदेशक ऑड्रे अजूले ने बताया कि किसी भी देश में लड़कियों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा के मानवाधिकार का सम्‍मान हर हाल में किया जाना चाहिए। 


सुश्री अजूले ने कहा कि अफगानिस्‍तान की बालिकाओं और महिलाओं के अधिकारों को तत्‍काल बहाल करना विश्‍व समुदाय की जिम्‍मेदारी है। यूनेस्को के अनुसार, फिलहाल अफगानिस्‍तान में लगभग 80 प्रतिशत बालिकाएं और युवतियां तालिबानी शासन में शिक्षा से वंचित हैं, क्‍योंकि उन्‍हें स्कूल और कॉलेज नहीं जाने दिया जा रहा है।


UNESCO has decided to dedicate the International Day of Education on the 24th of January, 2024 to Afghan girls and women. 


Director general Audrey Azoulay said that no country in the world should bar women and girls from receiving an education and it is a universal human right that must be respected.


She further said that the international community has the responsibility to ensure that the rights of Afghan girls and women are restored without delay. According to UNESCO, currently, around 80 per cent of school-aged Afghan girls and young women are out of school under the Taliban rule, as they denied them access to secondary schools and universities.

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को 55 महीनों से नहीं मिला केंद्रांश, एक साल से योजना का नवीनीकरण भी नहीं हुआ

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को 55 महीनों से नहीं मिला केंद्रांश, एक साल से योजना का नवीनीकरण भी नहीं हुआ


लखनऊ। मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत प्रदेश के करीब 25 हजार शिक्षकों का बीते 55 माह का मानदेय बकाया है। बीते एक साल से योजना का नवीनीकरण भी नहीं हुआ है। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर शिक्षकों का बकाया केंद्रांश जारी करने और योजना का नवीनीकरण करने का अनुरोध किया है।


मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि योजना के तहत 20 लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। योजना में कार्यरत शिक्षकों को 55 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। 


मालूम रहे कि योजना के शिक्षकों में स्नातक शिक्षक को 8000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इस मानदेय में 60 फीसदी केंद्रांश और 40 फीसदी राज्यांश शामिल रहता है। परास्नातक शिक्षकों को मिलने वाले 15000 रूपये में 7200 रुपये केंद्रांश और स्नातक शिक्षकों को मिलने वाले 8000 रुपये मानदेय में 3600 केंद्रांश के तौर पर मिलता है। 

ऑफिस नहीं तो अफसरों को ही शिफ्ट कर रहे लखनऊ, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव दो साल से लखनऊ में ही डटे, तीन साल में दो बार फेल हुई ऑफिस शिफ्ट करने की साजिश

ऑफिस नहीं तो अफसरों को ही शिफ्ट कर रहे लखनऊ, अब सहायक शिक्षा निदेशक पत्राचार को लखनऊ कर दिया गया अटैच

● बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव दो साल से लखनऊ में ही डटे 

● अपर शिक्षा निदेशक भी लखनऊ में रहकर काम देख रहे

● तीन साल में दो बार फेल हुई ऑफिस शिफ्ट करने की साजिश


प्रयागराज :  कर्मचारियों के विरोध और राजनीतिक दबाव के कारण सरकारी कार्यालयों के प्रयागराज से लखनऊ शिफ्ट न कर पाने पर अब अफसरों को ही राजधानी भेजा जाने लगा है। आलम यह है कि कई अधिकारी सालों से अपने प्रयागराज स्थित कार्यालय में नहीं बैठ रहे और लखनऊ कैंप कार्यालय से सारे काम कर रहे हैं। सहायक शिक्षा निदेशक (पत्राचार) प्रयागराज के पद को शिक्षा निदेशालय (शिविर कार्यालय) लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया है।


शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने प्रयागराज से लखनऊ अटैच किए गए सहायक शिक्षा निदेशक (पत्राचार) को 16 जनवरी को कार्य आवंटन भी कर दिया। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल जुलाई 2020 में इस पर नियुक्ति पाने के बाद से लगातार लखनऊ में ही बैठ रहे हैं। 


पांच लाख से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को देखने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यालय पर पिछले ढाई साल से सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां से सारी फाइलें लखनऊ अनुमोदन के लिए जाती हैं। अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉ. महेन्द्र देव को नौ नवंबर को शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद से वह भी लखनऊ में ही बैठ रहे हैं।


 शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के उनके कार्यालय पर दो महीने से अधिक समय से ताला लगा है। इसके अलावा अपर निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता भी लखनऊ में ही बैठते हैं। वर्तमान में शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के सारे महत्वपूर्ण निर्णय लखनऊ से लिए जा रहे हैं।


शिक्षा निदेशालय में जिम्मेदार अफसर नहीं बैठ रहे हैं। इससे यहां के कर्मचारियों को बार-बार लखनऊ दौड़ना पड़ता है। इस समस्या को सरकार के संज्ञान में लाया गया है। यदि अफसरों ने अपने मूल कार्यालय में बैठना शुरू नहीं किया तो आंदोलन करेंगे। -प्रदीप सिंह, मंत्री शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ


तीन साल में दो बार फेल हुई ऑफिस शिफ्ट करने की साजिश

प्रयागराज : संगमनगरी से शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण कार्यालयों को लखनऊ शिफ्ट करने की तीन साल में दो साजिशें फेल हो गई। विशेष सचिव डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने 30 दिसंबर 2022 को उच्च शिक्षा निदेशालय कार्यालय को लखनऊ प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव मांगा था। 


हालांकि कर्मचारियों के विरोध और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हस्तक्षेप पर प्रक्रिया रोकनी पड़ी। इससे पहले 24 फरवरी 2020 को अपर मुख्य सचिव बेसिक रेणुका कुमार ने शिक्षा निदेशालय स्थित बेसिक शिक्षा परिषद व इसके वित्त नियंत्रक कार्यालय के साथ ही खंड शिक्षाधिकारियों व लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों के सेवा प्रकरण संबंधी अनुभाग को साक्षरता निदेशालय लखनऊ स्थानान्तरित करने का आदेश जारी किया था।

Saturday, January 21, 2023

यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल की तो लगेगा रासुका, होगी कुर्की, महानिदेशक ने शिक्षाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, नकल के दोषी पाए जाने पर होगी कुर्की की प्रक्रिया

यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल की तो लगेगा रासुका, होगी कुर्की, महानिदेशक ने शिक्षाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, नकल के दोषी पाए जाने पर होगी कुर्की की प्रक्रिया

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2023 को नकल विहीन संपन्न कराने के लिए शासन ने कड़े निर्णय लिए हैं। 21 जनवरी को प्रायोगिक परीक्षा शुरू होने के एक दिन पहले शुक्रवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने शिक्षाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नहरहाल में नकलविहीन परीक्षा संपन्न कराई जानी है। नकल में केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक से लेकर किसी की भी संलिप्तता मिलने पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, कुर्की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।


इस बार परीक्षा केंद्र जिला प्रशासन के साथ मिलकर बनी कमेटी की संस्तुति पर बनाए गए हैं। उन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है, जिसके खिलाफ एसटीएफ ने रिपोर्ट दी है। इसके अलावा प्रश्नपत्रों के रखरखाव के लिए प्रधानाचार्य कक्ष से अलग कक्ष को स्ट्रांग रूम बनाने के निर्देश दिए हैं, जो डबल लाक में होंगे। महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि नकल मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वाडियो कांफ्रेंसिंग में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव, यूपी बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल, प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय की अपर सचिव विभा मिश्रा सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव, सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं डीआइओएस शामिल रहे।

जहां सीसीटीवी नहीं, वहां पास के स्कूल में होगी परीक्षा

प्रयागराजः इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा के प्रथम चरण की शुरुआत शनिवार से होगी। पहले चरण में आगरा, सहारनपुर, बरेली, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या, आजमगढ़, देवीपाटन और बस्ती मंडल में परीक्षा होगी, जो 28 जनवरी तक चलेगी। जिन विद्यालयों में सीसीटीवी की सुविधा नहीं है, वहां पंजीकृत छात्र - छात्राओं के लिए सीसीटीवी सुविधा वाले नजदीकी विद्यालय को प्रायोगिक परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारित किया गया है।

यूपी : अनुदानित मदरसों के बच्चों को मिल सकेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपए

यूपी : अनुदानित मदरसों के बच्चों को मिल सकेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपए


अपयूपी में मदरसों के बच्चों को मिलेगी फ्री ड्रेस, अभिभावकों के खाते में भेजे जाएंगे रुपएउत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को फ्री ड्रेस मिलेगी। इन बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस की धनराशि भेजी जाएगी।  

उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पांच साल बाद इस बार नि:शुल्क ड्रेस मिलने की उम्मीद जगी है। 


प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तिखार अहमद जावेद को इस बारे में पेश आ रही सभी कठिनाईयों को दूर करवाने का आश्वासन दिया है। अगर यह कठिनाईयां दूर हो गयीं तो राज्य के 560 मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को भी बेसिक शिक्षा के सरकारी स्कूलों में इन कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों की ही तरह नि:शुल्क ड्रेस मिलेगी। 


इसके लिए इन बच्चों के अभिभावकों के खातों में ड्रेस की धनराशि भेजी जाएगी। इसके साथ ही इन अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद के पाठ्यक्रम की किताबें नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी।


उत्तर प्रदेश के मदरसों में मार्च से NCERT का पाठ्यक्रम लागू होगा


उत्तर प्रदेश में स्कूलों की तरह चरणबद्ध तरीके से सभी मान्यता प्राप्त या राज्य सहायता प्राप्त मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड इस साल मार्च से शुरू होने वाले अगले शैक्षणिक वर्ष में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है। राज्य के सभी मान्यता प्राप्त या राज्य सहायता प्राप्त मदरसों में स्कूलों की तरह चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा।


इस बीच मदरसा छात्रों को गणवेश वितरण में आ रही बाधा भी जल्द ही दूर हो जाएगी। राज्य द्वारा संचालित स्कूलों के छात्रों को वर्तमान में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजना के तहत उनकी स्कूल यूनिफॉर्म के लिए 1,200 रुपये मिलते हैं। इसलिए, नई व्यवस्था के साथ, यूपी में मदरसा छात्रों को भी सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद वर्दी के लिए उतनी ही राशि मिलेगी।


इस संबंध में एक निर्णय 18 जनवरी को यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक में कथित तौर पर लिया गया था। बैठक में बोर्ड सदस्यों ने बेसिक शिक्षा विभाग को हितग्राहियों को गणवेश वितरण में आ रही दिक्कतों पर चर्चा की. मदरसा (कक्षा 1 से 8)। सदस्यों ने मदरसा छात्रों की वर्दी खरीदने के लिए सीधे उनके खातों में पैसे भेजने का भी फैसला किया।


छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद ने हाल ही में एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, अब मदरसा के बच्चे कंप्यूटर, गणित और विज्ञान का अध्ययन कर सकेंगे।


जावेद ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगले शैक्षणिक वर्ष से यूपी के मदरसों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। अभी तक, मदरसा छात्रों के लिए वर्दी को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन वे वर्दी चुन सकते हैं, जो कि लड़कियों के लिए सलवार और कुर्ता और लड़कों के लिए कुर्ता और पायजामा है।
उत्तर प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा मदरसे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 16,513 से अधिक मदरसा राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से 558 सरकारी सहायता प्राप्त हैं और अन्य केवल मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं। छात्र रिकॉर्ड को देखें, तो 19 लाख से अधिक उम्मीदवार मान्यता प्राप्त मदरसों में नामांकित हैं और लगभग सात लाख छात्र वर्तमान में राज्य के लगभग 8,500 मदरसों में पढ़ रहे हैं जो गैर मान्यता प्राप्त हैं।

कक्षा दस से नीचे के गरीब बच्चों की छात्रवृत्ति में इजाफा

कक्षा दस से नीचे के गरीब बच्चों की छात्रवृत्ति में इजाफा

लखनऊ : कक्षा 10 से नीचे की कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों के वजीफे की रकम बढ़ा दी गई है।


अनुसूचित जाति, जनजाति, घूमंतू व अधिसूचित जाति, अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ा वर्ग के इन गरीब बच्चों को अगले शैक्षिक सत्र से सालाना चार हजार रुपये की दर से वजीफा मिलेगा। फिलहाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के ऐसे बच्चों को 2250, अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग तथा अन्य वर्ग के गरीब बच्चों को 3000 रुपये की दर से वजीफा मिल रहा है। जानकारी के अनुसार इस बारे में केंद्र से आदेश तो अप्रैल-मई में ही जारी हो गए थे, मगर निर्णय न हो पाने के कारण विभाग मौजूदा शैक्षिक सत्र में बच्चों को बढ़ी दर से वजीफा नहीं दे पाए। केंद्र सरकार ने प्राइम मिनिस्टर यंग एचीवर्स स्कॉलरशिप स्कीम शुरू की है।

Friday, January 20, 2023

प्रोन्नत राजकीय शिक्षकों की मांगी पदस्थापना

प्रोन्नत राजकीय शिक्षकों की मांगी पदस्थापना

प्रयागराज : अधीनस्थ राजपत्रित पद पर मई, 2022 को विभागीय पदोन्नति (डीपीसी) और जून में उसकी सूची जारी होने के बाद से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 368 शिक्षक पदस्थापना मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दिसंबर, 2021 में होने वाली डीपीसी मई और जून, 2022 में हुई तो उसमें शामिल 382 में से 14 शिक्षक 31 मार्च, 2022 को सेवानिवृत्त हो चुके थे। 


ऐसे में शेष प्रोन्नत 368 शिक्षकों को एक साथ पदस्थापना दिए जाने की मांग को लेकर राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने विभाग की लेटलतीफी बताने के साथ प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेजा है। संघ के प्रांतीय महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने पत्र में लिखा है कि करीब आठ माह से अधीनस्थ राजपत्रित पद पर पदोन्नत शिक्षकों का पदस्थापन लटका है। 21 मई, 2022 को डीपीसी हुई और जून 2022 को सूची जारी की गई। जुलाई 2022 में आफलाइन पदस्थापन के लिए पुरुष संवर्ग में विकल्प के लिए 286 पद तथा महिला संवर्ग में 430 पद दिखाए गए थे। शिक्षा निदेशालय ने दिसंबर, 2022 में जानकारी दी कि पुरुष संवर्ग में अधीनस्थ राजपत्रित के 95 तथा महिला संवर्ग में 258 पद रिक्त हैं।

प्रयोग कराए नहीं,अब रिकार्डिंग से कतरा रहे स्कूल, यूपी बोर्ड के कैमरों की निगरानी में प्रैक्टिकल के आदेश से स्कूलों में असमंजस, कहीं लैब तो कहीं संसाधन नहीं

प्रयोग कराए नहीं,अब रिकार्डिंग से कतरा रहे स्कूल, यूपी बोर्ड के कैमरों की निगरानी में प्रैक्टिकल के आदेश से स्कूलों में असमंजस, कहीं लैब तो कहीं संसाधन नहीं

लखनऊ : यूपी बोर्ड से संचालित माध्यमिक विद्यालयों में सालभर 12वीं के प्रयोग कराए नहीं गए और अब सीसी कैमरे की बीच प्रैक्टिकल कराने के आदेश से स्कूलों की हालत खस्ता है। कोई भी स्कूल इस व्यवस्था के तहत प्रैक्टिकल कराने के लिए तैयार नहीं हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति पूरे प्रदेश की है। 


प्रदेश के कई जिलों के माध्यमिक विद्यालयों में प्रैक्टिकल लगभग बंद है। कई स्कूलों में लैब नहीं है, तो जहां लैब है वहां उपकरण टूट फूट गए हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहली बार 12वीं की प्रायोगात्मक परीक्षा पर नजर रखने के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट की निगरानी और सीसी कैमरे की रिकॉर्डिंग डीबीआर में सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।


पड़ताल में पता चला कि 50 से अधिक स्कूलों के 12वीं के बच्चे साल भर में कभी लैब नहीं गए। अब जब रिकार्डिंग की बारी आयी तो इन्हें पोल खुलने का डर सताने लगा है। कुछ स्कूलों ने जरूर पहल की है। इनके प्रबंधक और प्रधानाचार्य बाजार से स्केल, परखनली, ट्यूब, कुछ जरूरी केमिकल समेत फिजिक्स, बायो, केमिस्ट्री के पोस्टर, जरूरी उपकरण बाजार से खरीदकर लैब तो सजा दी है, लेकिन बच्चों को प्रैक्टिकल के तरीके ही नहीं पता हैं। लखनऊ में यूपी बोर्ड से 758 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इस बार इंटरमीडिएट में 46 हजार बच्चे परीक्षा देंगे। भौतिक, रसायन, जन्तु, वनस्पति, कृषि समेत आर्ट के विषयों के प्रैक्टिकल शामिल हैं।

सुलतानपुर

सेक्टर मजिस्ट्रेट की देखरेख में परीक्षा होगा। राउटर डिवाइस सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। जो संसाधन कम है, उसे पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।


गोरखपुर

जिले में कुल इंटर कालेज 308 हैं इसमें 220 केंद्र बनाए गए हैं, सभी परीक्षा केंद्र में सीसीटीवी कैमरे हैं। सभी जगह लैब हैं लेकिन 115 में जर्जर हालत है।


मेरठ
जिले में 400 से अधिक विद्यालय हैं। 30 से अधिक के 12वीं के बच्चे साल भर में कभी लैब नहीं गए। डीआईओएस ने कहा कि केंद्रों पर सीसीटीवी व वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा की गई है।

कानपुर
कुल 511 कॉलेजों में से 20 में लैब नहीं है। 200 से ज्यादा में एक भी दिन प्रैक्टिकल नहीं हुए। 250 कालेजों में बेहतर लैब है और प्रैक्टिकल हुए हैं। कन्नौज 52, फतेहपुर 53, हरदोई 321, इटावा 64, उरई 80, फर्रुखाबाद के 102 स्कूलों में लैब नहीं है।

बरेली
बरेली में 285 केंद्र हैं। सभी में सीसीटीवी कैमरे और वॉइस रिकॉर्डर हैं। राजकीय हाई स्कूल क्यारा व अलीनगर केंद्र में लैब नहीं है। शाहजहांपुर के 15 स्कूलों में व्यवस्थाएं अधूरी हैं। बदायूं, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी में सभी स्कूल अपडेट हैं।

आगरा
कुल 905 विद्यालयों में से 350 में लैब के नाम पर खाली कक्ष हैं। रसायन लैब में केमिकल नहीं तो बॉटनी में उपकरण नहीं हैं। मैनपुरी, एटा व कासगंज में कई बच्चे बिना प्रयोग करे परीक्षा देंगे। कई विद्यालय संचालक रिकार्डिंग से काम चलाएंगे।

प्रयागराज
जिले में तीन दर्जन राजकीय इन्टर कॉलेज, 181 सहायता प्राप्त विद्यालय व 850 से अधिक वित्तविहीन विद्यालय हैं। राजकीय विद्यालयों में प्रयोगशाला ठीक स्थिति में हैं पर आधे से अधिक एडेड कॉलेजों में प्रयोगशाला की स्थिति अच्छी नहीं है।

मुरादाबाद
मंडल में आधी-अधूरी तैयारियों के बीच प्रायोगिक परीक्षाएं होंगी। मुरादाबाद में बिना कैमरे वाले स्कूल केंद्र नहीं हैं। रामपुर,संभल अमरोहा के सौ से ज्यादा स्कूलों में कैमरे नहीं है। अफसर बोले रहे कि ऐसे स्कूलों में शिक्षक फोन से वीडियो अपलोड करेंगे।

बनारस
कुछ वित्तविहीन विद्यालयों में लैब की समस्या है। सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। ऐसे स्कूलों की प्रायोगिक परीक्षा दूसरे स्कूलों में होगी। डीआईओएस ने बताया कि परीक्षा रिकॉर्डिंग के बीच होगी। चंदौली, मऊ व आजमगढ़ में लैब नहीं है।

स्कूलों में प्रैक्टिकल लैब दुरुस्त करने के लिए अक्तूबर में सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया था। इस बार इंटरमीडिएट प्रैक्टिकल कैमरे की निगरानी में होंगे। सेक्टर मजिस्ट्रेट इन स्कूलों में प्रैक्टिकल पर नजर रखेंगे। -राकेश पाण्डेय, डीआईओएस, लखनऊ

माध्यमिक शिक्षकों हेतु प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2022-23 में राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के चयन के सम्बन्ध में निर्देश व शासनादेश जारी

राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए 31 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन, देखें संशोधित समय सारिणी 


प्रयागराज :  माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शैक्षिक सत्र 2022-23 में राज्य एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के चयन के संबंध में संशोधित समय सारिणी के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। इसमें राजकीय/अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं संस्कृत विद्यालय तथा वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक/अध्यापक 21 से 31 जनवरी तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इसमें शिक्षकों को अपने सभी अभिलेख, उत्कृष्ट कार्यों का विवरण और इसके संबंध में पांच मिनट का वीडियो आवेदन पत्र के साथ आनलाइन अपलोड करना होगा। इसके बाद राज्य चयन समिति अध्यापक के चरित्र सत्यापन, सामान्य ख्याति के संबंध में डीआइओएस से और आपराधिक पृष्ठभूमि के संबंध में एलआइयू से जांच कराकर आख्या लेगी। इसके बाद पुरस्कार के लिए निर्धारित मानदंड के आधार पर अंक निर्धारण कर चयन किया जाएगा।


माध्यमिक शिक्षकों हेतु प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2022-23 में राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के चयन के सम्बन्ध में निर्देश व शासनादेश जारी


Thursday, January 19, 2023

तीन दिन में गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से हटाएं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अल्टीमेटम

तीन दिन में गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से हटाएं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अल्टीमेटम 


लखनऊ : राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव को निर्देश दिए हैं कि अगले तीन दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ रहे गैर मुस्लिम बच्चों को वहां से निकाल कर उनके पठन-पाठन की अन्य शिक्षण संस्थानों में व्यवस्था की जाए।


आयोग इससे पहले पिछले साल आठ दिसम्बर को इस बारे में विस्तृत संस्तुति जारी कर चुका है। इस बारे में आठ दिसम्बर को प्रदेश के मुख्य सचिव को आयोग ने पत्र भी भेजा था, जिसे हिन्दुस्तान ने प्रकाशित किया था। 20 जनवरी को आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि सात दिसम्बर 2022 को जारी आयोग के निर्देशों का अनुपालन कर तीन दिन में अवगत करवाएं।


मदरसा टीचर्स एसो. बाल आयोग से नाराज

मदरसा शिक्षकों के संगठन आल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिस -ए-अरबिया ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकाले जाने के बाबत दिए गए निर्देश पर सख्त नाराजगी जतायी है। एसोसिएशन के महासचिव वहीदुल्लाह खान ने कहा कि यह पत्र भ्रामक और छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन है।



राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग व मदरसा बोर्ड में रार

आयोग ने मदरसा बोर्ड के निर्णय को बताया मूर्खतापूर्ण

गैर मुस्लिम बच्चों को प्रवेश देने वाले मदरसों की जांच की हुई थी सिफारिश


लखनऊ : प्रदेश के मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों की शिक्षा को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग व उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड में ठन गई है। मदरसा बोर्ड ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग की उस सिफारिश को बुधवार को खारिज कर दिया था, जिसमें आयोग ने ऐसे सभी मदरसों की जांच के लिए कहा था जो कि गैर मुस्लिम बच्चों को दाखिला देते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अब यूपी मदरसा बोर्ड के इस निर्णय को मूर्खतापूर्ण बताया है। आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर स्कूल भेजने का काम आयोग कानूनी दायरे में करेगा ।


दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आठ दिसंबर को सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिख कर उनको ऐसे सभी मदरसों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे, जिसमें गैर - मुस्लिम बच्चे जहां पढ़ रहे हैं। इसके साथ पत्र में कहा गया था कि गैर मुस्लिम बच्चों का दाखिला स्कूलों में कराया जाए। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने आयोग से अपने पत्र पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।


मदरसा बोर्ड ने बुधवार को बैठक में बाल संरक्षण आयोग की सिफारिश को खारिज कर दिया था। मदरसा बोर्ड के इस निर्णय पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने काफी नाराजगी जताई है। उन्होंने ट्वीट किया... मदरसे प्राथमिक रूप से इस्लामिक धार्मिक शिक्षा सिखाते हैं, हिंदू या दूसरे गैर इस्लामिक बच्चों का वहां कोई काम नहीं है।


मदरसा शिक्षा परिषद ने खारिज की बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिश

गैर मुस्लिम बच्चों को प्रवेश देने वाले मदरसों की जांच की सिफारिश का प्रकरण


लखनऊ : उप्र मदरसा शिक्षा परिषद ने बुधवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की उस सिफारिश को खारिज कर दिया जिसमें आयोग ने ऐसे सभी मदरसों की जांच के लिए कहा था जो गैर मुस्लिम बच्चों को दाखिला देते हैं। मदरसों में पढ़ रहे गैर मुस्लिम बच्चों का प्रवेश अन्य विद्यालयों में कराए जाने की भी सिफारिश आयोग ने की थी। आयोग ने यह पत्र सभी राज्यों को भेजा था। आयोग की इन्हीं सिफारिशों को मदरसा बोर्ड ने मानने से इन्कार कर दिया है।


मदरसा बोर्ड ने बुधवार को बैठक कर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए इसमें तय हुआ कि बेसिक शिक्षा की तर्ज पर मदरसा शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। यह भी तय हुआ कि उप्र अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा, मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 के संशोधन के संबंध में हित धारकों से पिछले दिनों लिए गए सुझाव समाहित करते हुए संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा जाए। 


अनुदानित मदरसों में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा ड्रेस वितरण में आ रही कठिनाइयों को दूर करने का निर्णय हुआ। बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने अधिकारियों से कहा कि जो भी दिक्कतें हैं उन्हें हर हाल में दूर किया जाए। बोर्ड ने बुधवार को अपने उस निर्णय को भी वापस लिया जिसमें अनुदानित मदरसों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध कराना था। पूर्व की भांति इस वर्ष भी बेसिक शिक्षा विभाग की पुस्तकें ही मदरसों में उपलब्ध कराई जाएंगी।


मदरसा बोर्ड ने बेसिक शिक्षा की तर्ज पर चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि मदरसा बोर्ड काफी पहले ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू कर चुका है, किंतु किताबों की उपलब्धता न होने के कारण दिक्कत आ रही थी। अब तय हुआ है कि बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में जिस प्रकार चरणबद्ध तरीके से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा उसी तरह मदरसों में भी इसे लागू किया जाएगा। इससे किताबें मदरसों को भी मिल जाएंगी।

Wednesday, January 18, 2023

शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन जल्द, आयोग के गठन के लिए प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप पर शासन स्तर पर मंथन जारी

शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन जल्द, आयोग के गठन के लिए प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप पर शासन स्तर पर मंथन जारी

लखनऊ : शिक्षकों के चयन के लिए उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन जल्द हो जाएगा। आयोग के गठन के लिए सरकार बजट सत्र में उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक, 2023 पारित कराएगी। बेसिक, माध्यमिक, उच्च व तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्तावित इस एकीकृत आयोग में अध्यक्ष सहित 11 सदस्य राज्य सरकार की ओर से नियुक्त किए जाएंगे। आयोग के गठन के लिए प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप पर शासन स्तर पर मंथन जारी है। 


आयोग का अध्यक्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो या रहा हो जिसने राज्य सरकार के प्रमुख सचिव या समकक्ष पद धारण किया हो या किसी विश्वविद्यालय का कुलपति रहा हो या किसी विश्वविद्यालय का न्यूनतम 10 वर्ष तक आचार्य रहा हो और उसके पास कम से कम तीन वर्ष का प्रशासनिक अनुभव रहा हो । अध्यक्ष का कार्यकाल 65 वर्ष की आयु तक या पांच वर्ष, जो भी पहले हो, तक होगा। वहीं सदस्य पद ऐसे लोगों को नियुक्त किया जाएगा जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्य रहे हों या जिसने राज्य सरकार के अधीन सचिव का पद या कोई अन्य समकक्ष पद धारित किया हो। एक सदस्य न्यायिक सेवा (जिला न्यायाधीश स्तर ) का होगा। सदस्यों का कार्यकाल भी अध्यक्ष के समान प्रस्तावित है। बीते दिनों उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक भर्ती के लिए एकीकृत व्यवस्था की जरूरत बताई थी । उन्होंने निगमित निकाय के रूप में उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन का निर्देश दिया था।

शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में बढ़ोतरी का दबाव, बजट में खास घोषणाएं कर सकती है केन्द्र सरकार

शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में बढ़ोतरी का दबाव, बजट में खास घोषणाएं कर सकती है केन्द्र सरकार


नई दिल्ली । केंद्र सरकार इस बार बजट में समग्र शिक्षा अभियान सहित पूरी स्कूली शिक्षा के लिए खास घोषणाएं कर सकती है। इस बार स्कूली शिक्षा की विभिन्न योजनाओं के लिए 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की उम्मीद शिक्षा विभाग को है। विभिन्न योजनाओं में बजट आवंटन की बढ़ोतरी के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। खासतौर पर आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने और कोविड़ के दौरान स्कूलों पर पड़े असर से उबारने की कोशिश बजट में नजर आ सकती है।


जानकारों का कहना है कि कोविड के दौर में स्कूल बंद होने से बड़ी संख्या में छात्रों को कोविड- 19 के प्रभाव में स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इससे बच्चों की सीखने की छमता पर भी असर पड़ा। पिछले दो वर्षों में केंद्रीय बजट में शिक्षा के लिए आवंटन को जानकारों ने पर्याप्त नहीं माना था। इस बार हर तरफ से स्कूली शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं में बढ़ोतरी का दबाव है।


सूत्रों के अनुसार, समग्र शिक्षा अभियान के बजट में बढ़ोतरी के साथ अध्यापक प्रशिक्षण और प्रौढ़ शिक्षा पर भी बजट में तवज्जो दिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इन दोनों मद में बजट आवंटन 2021-22 में 250 करोड़ था, जो 2022-23 में घटकर 127 करोड़ रह गया । समग्र शिक्षा अभियान में पिछले बजट में भी बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन कोरोना की वजह से इसका जमीनी असर देखने को नहीं मिला। इस वर्ष एसएसए को एनईपी 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ज्यादा बजट मिलने की उम्मीद है।

अटल आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई नए सत्र से, श्रमिकों के बच्चों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

तैयारी : सभी 18 मंडलों में जवाहर नवोदय विद्यालय की तर्ज पर बने हैं अटल आवासीय विद्यालय

अटल आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई नए सत्र से

श्रमिकों के बच्चों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा 

प्राचार्य के अलावा कई पदों पर चल रही है भर्ती प्रक्रिया


लखनऊ । श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए हर मंडल में जवाहर नवोदय विद्यालय की तर्ज पर बनाए जा रहे 18 अटल आवासीय विद्यालयों में नए सत्र (2023-24 ) से पढ़ाई शुरू हो जाएगी।


इनका संचालन उत्तर प्रदेश बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के माध्यम से होगा। विद्यालयों के संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर समितियों का गठन किया गया है। सत्र 2023-24 के लिए प्राचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो रही है। विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश जवाहर नवोदय विद्यालय की तर्ज पर सीबीएसई के माध्यम से प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा।


समितियां लेंगी महत्वपूर्ण फैसले

राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति में प्रदेश के मुख्य सचिव अध्यक्ष होंगे, जबकि प्रमुख सचिव (श्रम) सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा उत्तर भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण के सचिव व प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) इसके सदस्य होंगे। 

मंडल स्तरीय अनुश्रवण समिति में मंडलायुक्त अध्यक्ष होंगे जबकि संबंधित विद्यालयों के प्राचार्य सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा डीएम, बीएसए, उप श्रमायुक्त, डीआईओएस, जेडी, डीडी तथा नवोदय विद्यालय द्वारा नामित नवोदय विद्यालय के प्रचार्य इसके सदस्य होंगे। नवोदय विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य और 10 वर्ष का विशिष्ट अनुभव रखने वाले शिक्षाविदों तथा राजकीय इंटर कॉलेज व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य नामित सदस्य के रूप में समिति का हिस्सा होंगे।


अप्रैल में होगी प्रवेश परीक्षा : अटल आवासीय विद्यालयों के प्रथम शैक्षणिक के लिए प्रत्येक विद्यालय में कक्षा छह (80 बच्चों के साथ) में अध्ययन-अध्यापन शुरू होगा। अटल आवासीय विद्यालयों में निर्माण श्रमिकों के बच्चों एवं अनाथ बच्चों का प्रवेश सीबीएसई के माध्यम से जवाहर नवोदय विद्यालय की बच्चों की प्रवेश परीक्षा की तर्ज पर आयोजित अटल आवासीय विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। प्रवेश परीक्षा की संभावित तिथि 22 अप्रैल 2023 है। 

69000 शिक्षक भर्ती अन्तर्गत कटआफ में फंसी 6800 व एक अंक से वंचितों की नियुक्ति

69000 शिक्षक भर्ती अन्तर्गत कटआफ में फंसी 6800 व एक अंक से वंचितों की नियुक्ति



प्रयागराज : बेसिक शिक्षा की 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी के चलते चयन से बाहर हुए आरक्षित वर्ग के 6,800 अभ्यर्थियों की सूची वर्ष भर पहले जारी होने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है। इसी भर्ती में परिभाषा के एक प्रश्न के सभी विकल्प गलत होने से एक अंक से बाहर रह गए अभ्यर्थी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के बाद नियुक्ति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आरक्षित वर्ग के 6,800 पदों के मामले में हाई कोर्ट के निर्णय पर नियुक्ति टिकी है।


69,000 शिक्षक भर्ती दिसंबर 2018 में आई थी। इसमें आरक्षण का निर्धारण गलत हो जाने से आरक्षित वर्ग के वंचित अभ्यर्थी हाई कोर्ट गए थे। मुख्यमंत्री से भी शिकायत की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच जनवरी 2022 को आरक्षित वर्ग में 6,800 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की। 


आरक्षित वर्ग में चयनित लक्ष्मीकांत यादव के मुताबिक उनके प्रकरण में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित किया है। उन्होने बताया कि सामान्य वर्ग में कटआफ अंक 69.07 माना है, जबकि नियुक्ति 66.48 तक हुई है। इसी तरह ओबीसी में कटआफ 65.53 माना है, जबकि नियुक्ति 66.48 तक मिली है। एससी वर्ग में कटआफ 59.55 माना है, जबकि नियुक्ति 60.04 तक पाए हैं। इस भर्ती में जितने अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है, उतने पद इस भर्ती में शेष नहीं हैं।  इस कारण 6800 के मामले में भी नियुक्ति प्रक्रिया अटकी है।


 फैसला आने पर स्पष्ट होगा कि कोर्ट ने क्या कटआफ निर्धारित किया। उसी आधार पर एक अंक से मेरिट से वंचितों का कटआफ तय होगा। फिलहाल एक अंक से मेरिट से बाहर हुए याची अभ्यर्थियों से पीएनपी ने आवेदन मांगे हैं। अंतिम तिथि 19 जनवरी तक आवेदन मिलने के बाद इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यूपी बोर्ड परीक्षा में रिजर्व OMR शीट सुधारेगी त्रुटि, गड़बड़ी पर ब्लैंक ओएमआर शीट की व्यवस्था


यूपी बोर्ड परीक्षा में रिजर्व OMR शीट सुधारेगी त्रुटि, गड़बड़ी पर ब्लैंक ओएमआर शीट की व्यवस्था 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल की परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र, नामावली, नामिनल रोल, डेस्क स्लिप के साथ पहली बार प्रयुक्त हो रही ओएमआर शीट भी जिलों को भेजी गई है। इस शीट पर परीक्षार्थी का विषय कोड व अनुक्रमांक पहले से ही प्रिंट है।

विषय कोड या अनुक्रमांक अथवा प्रिंटेड सूचना में कोई त्रुटि होने से परीक्षा प्रभावित न होने पाए इसकी भी चिंता यूपी बोर्ड ने की है। इसके लिए हर केंद्र पर कुछ रिजर्व ओएमआर शीट भी भेजी गई है, जो ब्लैक है त्रुटि वाली ओएमआर शीट हटाकर परीक्षार्थी को रिजर्व ओएमआर शीट दी जाएगी, जिस पर विषय कोड, अनुक्रमांक सहित सभी सूचना परीक्षार्थी को स्वयं भरनी होगी।


पहली बार ओएमआर शेट पर हाईस्कूल की परीक्षा कराए जाने को लेकर यूपी बोर्ड शुरू से ही सतर्क है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने परिषद की वेबसाइट पर ओएमआर शीट का प्रारूप जारी कर उसे भरने के लिए दिशा- निर्देश इस आशय से जारी किए थे कि परीक्षार्थी अपने स्तर से अभ्यास कर लें। अब 16 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षा के लिए जो ओएमआर शीट जिलों को भेजी जा रही है, उसमें अनुक्रमांक, विषय एवं उसका कोड पहले से प्रिंट है। इसके अलावा रिजर्व ओएमआर शीट भी जिलों को भेजी गई है, जो परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी।


प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय की अपर सचिव विभा मिश्रा ने बताया कि लिखित परीक्षा के लिए सामग्री जिलों में भेजी गई, जिसमें रिजर्व ओएमआर शीट भी है। उन्होंने परीक्षा सामग्री क्षेत्रीय कार्यालय से भेजने के बाद सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वर्चुअल मीटिंग पर उसके रखरखाव और वितरण के संबंध में जानकारी दी।



ओएमआर शीट का नमूना जारी कर यूपी बोर्ड ने समझाया उत्तर देने का तरीका, देखें निर्देश


यूपी बोर्ड परीक्षा में ध्यान से भरें ओएमआर शीट, जरा सी गलती परीक्षार्थियों को पड़ जाएगी भारी, माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से वेबसाइट पर ओएमआर शीट का नमूना और निर्देश जारी, देखें, खबर पढ़ें सबसे नीचे



प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न को ध्यान में रखकर पहली बार हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा -2023 में ओएमआरशीट का प्रयोग कर रहा है। ओएमआर शीट पर उत्तर देने के तरीके को लेकर परीक्षार्थियों के संशय को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने ओएमआर शीट का नमूना अपनी वेबसाइट upmsp.edu.in पर जारी किया है।


बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया है कि वर्ष 2023 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में प्रत्येक विषय के प्रश्नपत्र में 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर अंकित किए जाने हैं। इस संबंध में पूर्व में ही निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में वर्ष 2021-2022 में कक्षा नौ की गृह परीक्षा इस शीट पर कराई जा चुकी है।

जिलों में भेजे गए प्रपत्र

प्रथम चरण में होने वाली इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा संपन्न कराने के लिए परीक्षकों से संबंधित सभी प्रपत्र, फारवर्डिंग /शिफ्टिंग सूची एवं परीक्षक सूची मंगलवार को क्षेत्रीय कार्यालय से जिलों को भेज दी गई। प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय की अपर सचिव विभा मिश्रा ने लखनऊ, झांसी और चित्रकूट मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वर्चुअल मीटिंग कर जानकारी देने के साथ आवश्यक निर्देश दिए।


यूपी बोर्ड : सावधानी से भरें ओएमआर, एक गलती से कटेगा 20 नंबर

● हाईस्कूल के परीक्षार्थियों के लिए यूपी बोर्ड की एडवाइजरी
● पहली बार ओएमआर पर देने होंगे 20 प्रश्नों के उत्तर

हाईस्कूल में पंजीकृत परीक्षार्थियों की संख्या

● 1698023 छात्र

● 1418462 छात्राएं

● 3116485 कुल परीक्षार्थी


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा इस साल बदले पैटर्न पर होगी। पहली बार छात्र-छात्राओं को परंपरागत उत्तरपुस्तिका के साथ ही ओएमआर शीट भी मिलेगी। 70 नंबर के प्रश्नपत्र में से 50 नंबर के उत्तर वर्णनात्मक प्रकार के होंगे और 20 नंबर के प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे जिसका जवाब ओएमआर पर देना होगा। ओएमआर भरने में एक गलती भी हुई तो पूरे 20 नंबर कट जाएंगे क्योंकि ओएमआर का मूल्यांकन स्कैनिंग मशीन और कम्प्यूटर से होगा। ऐसे में ओएमआर पर भरा जाने वाला विवरण गलत होने पर ओएमआर का मूल्यांकन ही नहीं किया जाएगा। 10वीं के छात्र-छात्राओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने मंगलवार को बोर्ड की वेबसाइट पर ओएमआर शीट का नमूना और उसे भरने के लिए एडवाइजरी जारी की है ताकि ओएमआर के गोले भरते समय किसी प्रकार की त्रुटि न हो जाए।

वर्ष 2023 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में प्रत्येक विषय के प्रश्नपत्र में 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर अंकित किए जाने के संबंध में पूर्व में दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। जिसके क्रम में 2021-22 में विद्यालयों की कक्षा नौ की गृह परीक्षा में ओएमआर शीट पर परीक्षा आयोजित कराई जा चुकी है। ओएमआर शीट पर प्रश्नोत्तर किस प्रकार अंकित जाएंगे इसका नमूना व भरने के निर्देश वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।

दिब्यकांत शुक्ल, सचिव यूपी बोर्ड

सावधानियां

● केवल काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन से सही गोले को गहरे निशान से भरिए।

● प्रत्येक प्रश्न का उत्तर, उत्तर पत्रक में दिए गए क्रमांक के सामने सम्बन्धित गोले में निशान लगाकर दीजिए। हर प्रश्न के चार विकल्प हैं।

● ओएमआर पर सभी प्रविष्टियां सावधानीपूर्वक भरें, उसमें कटिंग ओवर राइटिंग कदापि न करें।

● ओएमआर पर व्हाइटनर का प्रयोग न करें तथा उसे खुरचें नहीं अन्यथा उत्तर का मूल्यांकन नहीं होगा।

● प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल एक ही पूरे गोले में गहरा तथा पूरा निशान लगाकर दीजिए।

● उत्तर के लिए दिए गए सही गोले में निशान लगाएं। उत्तर पत्रक पर अन्य कहीं-कोई निशान न लगाएं।

● प्रश्न-पत्र मार्का/सीरीज के अन्तर्गत प्रश्न-पत्र के ऊपर अंकित प्रश्न-पत्र संख्या के साथ ब्रैकेट में अंकित उसका मार्का/सीरीज़ जो अंग्रेजी के दो बड़े अक्षरों में ( AB), ( WB), ( WX), ( BZ) आदि की भांति अंकित होगा उसे पूर्ण शुद्धता के साथ ओएमआर उत्तर पत्रक पर यथास्थान अंकित करना होगा तथा उससे सम्बन्धित गोलों को भरना होगा।

● कक्ष निरीक्षक का यह दायित्व होगा कि यह अपने सामने ही प्रश्न-पत्र का मार्का / सीरीज तथा चित्रकला/संगीत वादन विषय में प्रश्न-पत्र का भाग-1 अथवा भाग-2 अंकित कराएं जिसे परीक्षार्थी द्वारा हल किया गया है।

● कतिपय प्रश्नपत्रों में उसके मार्का/सीरीज का उल्लेख नहीं है। अतएव इस प्रकार के प्रश्न पत्रों के संबंध में ओएमआर पत्रक पर प्रश्न-पत्र मार्का/सीरीज में कुछ भी अंकित नहीं करना है।

यूपी बोर्ड परीक्षा में ध्यान से भरें ओएमआर शीट, जरा सी गलती परीक्षार्थियों को पड़ जाएगी भारी, माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से वेबसाइट पर ओएमआर शीट का नमूना और निर्देश जारी, देखें

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 में दसवीं के विद्यार्थियों से हर विषय में 20 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। इसका उत्तर अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट पर देना है। ओएमआर शीट की जांच कंप्यूटर से होगी। ऐसे में इसे भरने में जरा सी भी चूक परीक्षार्थियों को भारी पड़ सकती है।

किसी भी गलती पर ओएमआर शीट की जांच नहीं हो पाएगी और अभ्यर्थी को अंक नहीं मिलेगा। परिषद ने ओएमआर शीट का नमूना और इसे भरने के निर्देश वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। ताकि इसे पढ़ और देखकर ओएमआर शीट भरने का सही तरीका सीख लें।

ओएमआर उत्तर पत्रक को भरने के लिए केवल काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन से सही गोले को गहरे निशान से भरें। ओएमआर शीट में सही गोला कैसे भरना है, यह दिया गया है।

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर, उत्तर पत्रक में दिए गए क्रमांक के सामने संबंधित गोले में निशान लगाकर देना है। हर प्रश्न के चार विकल्प होंगे। सही विकल्प के सामने वाला गोला भरना है। ओएमआर शीट पर सभी प्रविष्टियां सावधानीपूर्वक भरें, उसमें कटिंग, ओवरराइटिंग कदापि न करें। ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड से खुरचे नहीं, अन्यथा उत्तर का मूल्यांकन नहीं होगा।

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल एक ही पूरे गोले में गहरा तथा पूरा निशान लगाकर दें। उत्तर के लिए दिए गए सही गोले में ही निशान लगाएं।

ओएमआर शीट पर अन्य कहीं कोई निशान न लगाएं। ओएमआर शीट में प्रश्न पत्र सीरीज के दोनों अक्षर अंग्रेजी के कैपिटल लेटर में भरना है। साथ ही संबंधित गोले को भी सही-सही भरें। यदि प्रश्न पत्र में उसके सीरीज का उल्लेख नहीं है तो इस प्रकार के प्रश्नपत्रों के संबंध में ओएमआर उत्तर पत्रक पर प्रश्न पत्र सीरीज में कुछ नहीं भरना है।

यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को लेकर हुई प्रधानाचार्यों की बैठक

प्रयागराज : यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक पीएन सिंह ने बुधवार परीक्षा केंद्र बने विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की बैठक ली। उन्होंने निर्देशित किया कि को सीसीटीवी, इंटरनेट व्यवस्था सुचारु रूप से चले, ताकि परीक्षा की कंट्रोल रूम से निगरानी की जा सके। राजकीय इंटर कॉलेज में तीन पालियों में क्रमशः सदर, गंगापार और यमुनापार के प्रधानाचार्यों की बैठक हुई। डीआईओएस पीएन सिंह ने कहा कि प्रयोगात्मक परीक्षा की भी सीसीटीवी कैमरे से निगरानी होगी। ऐसे में प्रयोगशालाओं में भी सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए। साथ ही प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए प्रधानाचार्य कक्ष से अलग अन्य कक्ष में बनाया जाए।

Tuesday, January 17, 2023

बड़ा फैसला : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के निजी विद्यालयों को दिया आदेश, स्कूल कोरोना काल में वसूली फीस का 15 फीसदी लौटाएं, हाईकोर्ट ने कहा, बिना सेवा दिए फीस की मांग करना मुनाफाखोरी

स्कूलों को शासन के निर्देश का इंतजार, फीस को लेकर उच्च न्यायालय का निर्णय अभिभावकों को खुशी देने वाला


प्रयागराज :  उच्च न्यायालय ने स्कूलों को सत्र 2020-21 की फीस से 15 प्रतिशत वापस करने या अगले सत्र में समायोजित करने का फैसला सुनाया है। यह आदेश अभिभावकों के लिए जहां खुशी देने वाला है, वहीं स्कूल प्रबंधन को असमंजस में डाल दिया है। उनका कहना है कि दो सत्र में शुल्क में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई। उसके बाद भी फीस वापसी का आदेश दे दिया गया, फिलहाल सरकार के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। उधर अभिभावक संघ ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत कर सराहा है।

अभिभावक एकता समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय गुप्ता ने कोरोना काल में स्कूलों की फीस प्रकरण पर हुए फैसले को लेकर अभिभावकों की ओर से आभार जताया है।



हाईकोर्ट के आदेश से अभिभावकों को बड़ी राहत, फीस न चुका पाए तो स्कूलों से कटा था बच्चों का नाम

कोरोना काल में नौकरीपेशा से लेकर व्यापारी तक रहे परेशान, बच्चों की छूट गई थी पढ़ाई


प्रयागराज । कोरोना काल का मंजर शायद ही कोई याद रखना चाहेगा। नौकरीपेशा लोगों की नौकरी चली गई तो छोटे और मध्यम व्यापारियों का व्यापार चौपट हो गया। ऐसे कठिन समय में फोस जमा न करने के कारण कुछ निजी स्कूलों ने बच्चों की फीस माफ कर दी लेकिन अधिकतर स्कूल ऐसे थे जिन्होंने दबाव बनाया तो अभिभावकों अपने बच्चों का नाम कटवा लिया। लाचार अभिभावकों के पास बच्चों का नाम सरकारी स्कूलों में लिखवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में आठवीं तक की पढ़ाई मुफ्त होने के कारण इन स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई थी। यूपी बोर्ड से जुड़े सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों कक्षा 9 से 12 तक सालाना फीस मुश्किल से हजार से डेढ़ हजार तक पड़ती है, जबकि सीबीएसई और सीआईएससीई से संचालित जिले के प्राइवेट कॉन्वेंट स्कूलों में एक महीने की फोस ढाई से चार हजार रुपये तक है। सोमवार को आए हाईकोर्ट के आदेश से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।



बड़ा फैसला : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के निजी विद्यालयों को दिया आदेश, स्कूल कोरोना काल में वसूली फीस का 15 फीसदी लौटाएं

कोर्ट ने कहा, बिना सेवा दिए फीस की मांग करना मुनाफाखोरी


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूलों को कोरोना काल के दौरान सत्र 2020-21 में वसूली गई फीस में से 15 प्रतिशत फीस अभिभावकों को लौटानी होगी। कोर्ट ने कहा कि जो छात्र विद्यालय में पढ़ रहे हैं उनकी फीस अगले सत्र की फीस में समायोजित की जाए और जो छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं,उनसे ली गई फीस में से 15 प्रतिशत फीस वापस कर दी जाए।


कोरोना काल में स्कूलों द्वारा वसूली जा रही फीस माफ किए जाने को लेकर कई याचिकाएं और जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इन सभी पर एक साथ सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एवं न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ में यह आदेश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया को करने के लिए हाईकोर्ट ने सभी स्कूलों को दो माह का समय दिया है। यह निर्णय राज्य के सभी बोर्डों के स्कूलों और विद्यार्थियों पर लागू होगा।


अभिभावकों की ओर से अधिवक्ता शाश्वत आनंद और यनेंद्र पांडेय ने कहा कि निजी स्कूलों में वर्ष 2020-21 में ऑनलाइन ट्यूशन को छोड़कर कोई भी सेवा नहीं दी गई। इस प्रकार निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस से एक भी रुपया ज्यादा लेना मुनाफाखोरी के अलावा कुछ भी नहीं है।


प्राइवेट स्कूलों ने दो साल नहीं बढ़ाई थी फीस

प्रयागराज : कोरोना काल में प्रदेश सरकार के आदेश पर निजी स्कूलों ने 2020-21 और 2021-22 सत्र में फीस में वृद्धि नहीं की थी। प्रबंधकों का कहना है कि यूपी के नियमों के अनुसार स्कूल हर साल 10 तक फीस बढ़ा सकते हैं। लेकिन दो साल तक एक रुपया फीस नहीं बढ़ाई गई। तमाम अभिभावक जो फीस जमा नहीं कर सके उनके लिए फीस माफ की गई।


कोरोना काल में सरकारी स्कूलों में बढ़ा था दाखिला

कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों की मोटी फीस न चुका सकने के कारण तमाम अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में लिखवा दिया था। प्रयागराज समेत अधिकतर जिलों के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या उस दौर में बढ़ गई थी।


याची बोले, अभिभावकों की हुई जीत

मुरादाबाद : कोरोना काल में स्कूलों द्वारा ली गई फीस की वापसी के लिए उच्च न्यायालय में याचिका करने वाले मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल के अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने उच्च न्यायालय का शुक्रिया अदा किया। सचिव अंकित अग्रवाल ने कहा कि यह जीत अभिभावकों की एकता की जीत है।


याचियों के अधिवक्ताओं की राय

जो फीस होती है, वह कानून में (off के सिद्धांत पर आधारित होती है, जिसका अर्थ होता है समथिंग फॉर समथिंग । कोरोना काल के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस के अनुपात में लाइब्रेरी, लैब, स्पोट्र्स आदि सेवाए नहीं दी जा सकी थी। इसलिए फीस प्री-काविड शुल्क पर नहीं ले सकते थे। कोर्ट का यह आदेश प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूलों पर प्रभावी होगा। अगर दो महीने में सभी स्कूल आदेश का अनुपालन नहीं करते हैं तो प्रभावित अभिभावकों के पास हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला रहेगा। _शाश्वत आनंद, एडवोकेट हाईकोर्ट याचियों के अधिवक्ता


माफ की गई यह फीस अभिभावको को छूट के रूप में मिलेगी। कोर्ट के इस आदेश ने प्रदेश के करोड़ों अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। क्योंकि प्राइवेट स्कूल कोविड के दौरान मनमानी फीस वसूल कर उत्तर प्रदेश सरकार के आदेशों का पालन भी नहीं कर रहे थे। हमारा तर्क था कि निजी स्कूलों में वर्ष 2020-21 में ऑनलाइन ट्यूशन को छोड़कर कोई भी सेवा नहीं दी गई। उसके बाद भी फीस लिया जाना पूरी तरह गलत है। हमने अपने तर्कों के समर्थन में इंडियन स्कूल जोधपुर बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी स्कूलों द्वारा बिना कोई सेवा दिए फीस की मांग करना मुनाफाखोरी व शिक्षा का व्यवसायीकरण ही है। _ यनेंद्र पांडेय, एडवोकेट हाईकोर्ट याचियों के अधिवक्ता 


कोर्ट आर्डर


सभी प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट बनाया जाए, ऑपरेशन कायाकल्प 2.0 के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में टेबल, बेंच आदि उपलब्ध कराया जाए, मुख्य सचिव का फरमान

सभी प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट बनाया जाए, ऑपरेशन कायाकल्प 2.0 के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में टेबल, बेंच आदि उपलब्ध कराया जाए, मुख्य सचिव का फरमान

 
लखनऊ : मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट विद्यालयों के रुप में विकसित किया जाए। ऑपरेशन कायाकल्प 2.0 के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में टेबल, बेंच आदि उपलब्ध कराया जाए।


सोमवार को परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संबंध में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय के अंतर्गत प्रत्येक विकास खंड में 4 से 5 कम्पोजिट विद्यालय का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीरण कराया जाए। 


दीक्षा एवं निष्ठा जैसे कार्यक्रमों के द्वारा स्कूल लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षकों का क्षमता संवर्द्धन किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के लिए आत्म रक्षा शिविर का भी आयोजन किया जाए।

सड़क सुरक्षा जल्द कॉलेज पाठ्यक्रम में होगा शामिल, उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा से जुड़े सभी विभागों की संयुक्त बैठक में लिया फैसला

सड़क सुरक्षा जल्द कॉलेज पाठ्यक्रम में होगा शामिल, उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा से जुड़े सभी विभागों की संयुक्त बैठक में लिया फैसला

लखनऊ : प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा है कि सड़क सुरक्षा को जल्द ही कॉलेज पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। माध्यमिक एवं प्राथमिक में भी नैतिक शिक्षा की पुस्तक में सड़क सुरक्षा से संबंधित अध्याय लाभप्रद होंगे।


वह सोमवार को विधान भवन में आयोजित उच्च शिक्षा, माध्यमिक, बेसिक, प्राविधिक तथा व्यवसायिक शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए शिक्षा से जुड़े सभी विभाग एकजुट होकर प्रयास करेंगे। सड़क सुरक्षा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक संवेदनशील विषय है।

प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए प्राविधिक कॉलेजों के छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क के रूप में यातायात से जुड़ा कार्य दिया जाएगा।

इसमें छात्र अपने शहर के व्यस्ततम ट्रैफिक वाले चौराहों को सुव्यवस्थित करने का सुझाव देंगे। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि सड़क सुरक्षा अभियान को सफल बनाने में माध्यमिक शिक्षा विभाग भी पूर्ण सहभागिता करेगा। बैठक में व्यवसायिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी व प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा डॉ. सुधीर एम. बोबडे भी मौजूद रहे।

इस विषय में जागरूकता फैलाने के लिए प्रदेश सरकार पांच जनवरी से चार फरवरी तक सड़क सुरक्षा माह का आयोजन कर रही है।

21 जनवरी को आयोजित होने वाले कार्यक्रम रन फार जी-20 में भी सड़क सुरक्षा को शामिल किए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

स्कूलों व कॉलेजों में एक साथ सड़क सुरक्षा पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किसी दिन किया जाएगा।

विद्यालयों व कॉलेजों में होने वाली एसेम्बली में सड़क सुरक्षा के लिए शपथ दिलाई जाएगी।

यूपी बोर्ड : प्रायोगिक परीक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

यूपी बोर्ड : हेल्पलाइन पर परीक्षकों ने मांगे समाधान

प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा -2023 के लिए हेल्पलाइन जारी करने के बाद उस पर आने वाली समस्याओं की निगरानी भी शुरू कर दी है। सोमवार को हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक किए जाने के बाद शिकायतें बढ़ीं। मंगलवार को करीब 25 शिकायतें नोट की गई, जिनका समाधान भी किया गया। यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बोर्ड मुख्यालय के साथ सभी पांच क्षेत्रीय कार्यालयों की हेल्पलाइन सोमवार को जारी की। इसमें मंगलवार को इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षा की ड्यूटी को लेकर कई परीक्षकों ने पूछताछ की। उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि उनकी ड्यूटी लगने की जानकारी उन्हें कैसे पता चलेगी। जानकारी दी गई कि क्षेत्रीय कार्यालयों को परीक्षकों की ड्यूटी व इसके संबंध में सभी प्रपत्र और नामावली भेज दी गई है।


यूपी बोर्ड : प्रायोगिक परीक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

यूपी बोर्ड : जहां पढ़ रहे विद्यार्थी, वहीं होंगी प्रयोगात्मक परीक्षाएं, सीसीटीवी कैमरे की निगरानी होगी अनिवार्य, बीते वर्ष नहीं थी स्वकेंद्र की सुविधा, खबर पढ़ें सबसे नीचे


प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने पहली बार प्रायोगिक परीक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। बोर्ड के प्रयागराज स्थित मुख्यालय मेरठ, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी व गोरखपुर के क्षेत्रीय कार्यालयों में हेल्पलाइन स्थापित की गई है।


सचिव दिव्यकांत शुक्ल के अनुसार 21 जनवरी से शुरू हो रही इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा में किसी भी छात्र- छात्रा, अध्यापक या प्रधानाचार्य को कोई समस्या या जिज्ञासा हो तो फोन नंबर या ई-मेल की मदद ले सकते हैं।

कार्यालय दूरभाष नंबर

बरेली
0581-2576494

मेरठ 
0121-2660742/9454457256

प्रयागराज 
0532-2423265 /9838510862

वाराणसी 
0542-2509990

गोरखपुर
0551-2205271

मुख्यालय
18001805310 /18001805312



10वीं-12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षाएं शुरू

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2023 में शामिल हो रहे छात्र-छात्राओं के लिए पहली बार प्री-बोर्ड परीक्षाएं कराई जा रही हैं। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल के निर्देश पर स्कूलों में सोमवार से प्री-बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुईं। इसे लेकर छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला। राजकीय इंटर कॉलेज में पहले दिन हिन्दी विषय की परीक्षा कराई गई। प्रधानाचार्य वीके सिंह ने बताया कि हाईस्कूल के अभ्यर्थियों को परंपरागत उत्तरपुस्तिका के साथ ही ओएमआर शीट भी दी गई थी। सुबह नौ से 12.15 बजे तक आयोजित हाईस्कूल की परीक्षा में 806 छात्रों में से 775 उपस्थित रहे।
 
प्रायोगिक परीक्षा के लिए हेल्पलाइन जारी

प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने पहली बार प्रायोगिक परीक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। बोर्ड के प्रयागराज स्थित मुख्यालय समेत मेरठ, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी व गोरखपुर के क्षेत्रीय कार्यालयों में हेल्पलाइन स्थापित की गई है। सचिव दिव्यकांत शुक्ल के अनुसार 21 जनवरी से शुरू हो रही इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा में किसी भी छात्र-छात्रा, अध्यापक या प्रधानाचार्य को कोई समस्या या जिज्ञासा हो तो फोन नंबर या ई-मेल की मदद ले सकते हैं।

बुधवार तक छात्रों को मिल जाएंगे रोल नंबर इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्राओं को बुधवार तक रोल नंबर मिल जाएंगे। पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों में नामावली आ चुकी है जिसे जिलों को भेजा जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से प्रधानाचार्यों को नामावली पहुंचाई जाएगी। 21 जनवरी से प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो रही है। रोल नंबर के माध्यम से प्रैक्टिकल अंक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। इधर बोर्ड की ओर से परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जा चुकी है।

इन नंबरों पर फोन कर बता सकते हैं समस्या

कार्यालय ई-मेल आईडी दूरभाष नंबर

मेरठ romeerut@ gmail. com 0121-2660742 /9454457256

बरेली robareilly@ gmail. com 0581-2576494

प्रयागराज roallahabad1@gmail. com 0532-2423265/9838510862

वाराणसी rovaranasi@ gmail. com 0542-2509990

गोरखपुर upmsprogkp@ gmail. com 0551-2205271

मुख्यालय upmsp@ rediffmail. com 18001805310/18001805312


यूपी बोर्ड : जहां पढ़ रहे विद्यार्थी, वहीं होंगी प्रयोगात्मक परीक्षाएं, सीसीटीवी कैमरे की निगरानी होगी अनिवार्य, बीते वर्ष नहीं थी स्वकेंद्र की सुविधा

लखनऊ : यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं उन्हीं विद्यालयों में होंगी, जहां संबंधित छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इसके लिए शर्त होगी कि परीक्षाएं संबंधित विद्यालयों में अनिवार्य रूप से वायस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराई जाएं। बीते वर्षों में निजी विद्यालयों में स्वकेंद्र की व्यवस्था नहीं थी और उनके केंद्र दूसरे विद्यालयों में बना दिए गए थे। इस संबंध में 21 जनवरी से शुरू हो रहीं प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए बोर्ड की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि सीसीटीवी की रिकार्डिंग विद्यालयों अपलोड रहेगी। के प्रधानाचार्य अपने पास सुरक्षित रखेंगे। परीक्षकों के लिए कहा गया है कि वह अपने साथ आधार कार्ड या मान्य पहचान पत्र आवंटित विद्यालय में अवश्य ले जाएं। परीक्षकों के नियुक्ति पत्र व उनकी तैनाती की सूची परिषद की वेबसाइट पर विद्यालयों व डीआईओएस के पोर्टल पर भी अपलोड रहेगी।

लखनऊ शिक्षक खंड से विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी ने प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए स्वकेंद्र व्यवस्था का स्वागत किया है।

लखनऊ शिक्षक खंड से विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी ने प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए स्वकेंद्र व्यवस्था का स्वागत किया है।

Monday, January 16, 2023

ओबीसी बच्चों को ₹ 2250 की दर से मिलेगा वजीफा

ओबीसी बच्चों को ₹ 2250 की दर से मिलेगा वजीफा

लखनऊ :  प्रदेश में कक्षा 10 से नीचे की कक्षाओं में पढ़ रहे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बच्चों को 2250 रुपये की पुरानी दर से ही वजीफा मिलेगा। इन बच्चों की संख्या 10 लाख 60 हजार के करीब है। हालांकि केंद्र सरकार ने प्राइम मिनिस्टर यंग एचीवर्स स्कॉलरशिप अवार्ड स्कीम फार वाइब्रेण्ट इण्डिया योजना के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े (ईबीसी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अधिसूचित व घूमंतू जातियों के कक्षा 10 से नीचे के पाठ्यक्रमों में वजीफे की राशि 4 हजार रुपये कर दी है।


मगर राज्य का पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग अभी इन बच्चों को चार हजार रुपये के बजाये 2250 रुपये की दर से ही वजीफा देगा। यह निर्णय सोमवार को विभाग के मंत्री नरेन्द्र कश्यप की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। सोमवार 16 जनवरी के अंक में इन बच्चों का वजीफा फंस जाने की खबर प्रकाशित की थी। यह भी जानकारी दी थी कि विभागीय मंत्री इस बारे में सोमवार को उच्च स्तरीय बैठक का निर्णय लेंगे। इस बारे में पिछले 25 दिनों से विभाग में फाईल पर मंथन चल रहा था। मगर निर्णय नहीं हो पा रहा था।



गतिरोध : केन्द्र ने बढ़ायी वजीफे की दर, प्रदेश का पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय से दर तय नहीं, दस लाख ओबीसी विद्यार्थियों की फंसी छात्रवृत्ति

■ पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ने आज बुलायी बैठक

■ केंद्र सरकार ने शुरू की है स्कॉलरशिप स्कीम

लखनऊ : प्रदेश के शिक्षण संस्थानों की कक्षा 10 से की कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों का वजीफा फंस गया है। समाज कल्याण विभाग ने इन्हीं कक्षाओं के अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के गरीब छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्षा 10 से ऊपर के बच्चों के वजीफे का वितरण शुरू कर दिया है।

अब तक 7 लाख 22 हजार बच्चों को वजीफे की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की भी जा चुकी है। मगर राज्य का पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाया है।

अब इस अनिर्णय की स्थिति में विभागीय मंत्री को दखल देना पड़ा है। उन्होंने सोमवार को विभाग के संबंधित अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। दरअसल, यह नौबत पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय द्वारा इन बच्चों को वजीफे की राशि की दर तय न कर पाने की वजह से वजीफा फंस गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने प्राइम मिनिस्टर यंग एचीवर्स स्कॉलरशिप अवार्ड स्कीम फार वाइब्रेण्ट इण्डिया शुरू की है।

इस योजना के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े (ईबीसी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अधिसूचित व घूमंतू जातियों के कक्षा 10 से नीचे के पाठ्यक्रमों में वजीफे की राशि 4 हजार रुपये कर दी है जबकि प्रदेश के पिछड़ा वर्ग निदेशालय द्वारा इन बच्चों को 2250 रुपये की दर से वजीफा दिया जाता है। अब निदेशालय को निर्णय लेना है। कि वह केंद्र द्वारा तय की गई नई दर से वजीफा बांटे या फिर पुरानी दर से..

पिछले 25 दिन से फाइल पर चल रहा मंथन

पिछले 25 दिनों से फाइल पर मंथन चल रहा है। मगर फैसला नहीं हो पा रहा है. जबकि आगामी 24 जनवरी को यूपी दिवस के शुभारम्भ के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक बच्चों को छात्रवृत्ति वितरित करने वाले हैं। इस बारे में खबर ने राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेन्द्र कश्यप से बातचीत की तो उन्होंने उपरोक्त स्थिति स्वीकार की और कहा कि इस बारे में उन्होंने सोमवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें निर्णय ले लिया जाएगा।

दस लाख छात्रों का फंसा वजीफा

लखनऊ : प्रदेश के शिक्षण संस्थानों की कक्षा 10 से नीचे की कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों का वजीफा फंस गया है। समाज कल्याण विभाग ने इन्हीं कक्षाओं के अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के गरीब छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्षा 10 से ऊपर के बच्चों के वजीफे का वितरण शुरू कर दिया है।


अब तक 7 लाख 22 हजार बच्चों को वजीफे की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की भी जा चुकी है। मगर राज्य का पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाया है।

अब इस अनिर्णय की स्थिति में विभागीय मंत्री को दखल देना पड़ा है। उन्होंने सोमवार को विभाग के संबंधित अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। दरअसल, यह नौबत पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय द्वारा इन बच्चों को वजीफे की राशि की दर तय न कर पाने की वजह से वजीफा फंस गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने प्राइम मिनिस्टर यंग एचीवर्स स्कॉलरशिप अवार्ड स्कीम फार वाइब्रेण्ट इण्डिया शुरू की है।

इस योजना के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े (ईबीसी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अधिसूचित व घूमंतू जातियों के कक्षा 10 से नीचे के पाठ्यक्रमों में वजीफे की राशि 4 हजार रुपये कर दी है जबकि प्रदेश के पिछड़ा वर्ग निदेशालय द्वारा इन बच्चों को 2250 रुपये की दर से वजीफा दिया जाता है। अब निदेशालय को निर्णय लेना है कि वह केंद्र द्वारा तय की गई नई दर से वजीफा बांटे या फिर पुरानी दर से...।

पिछले 25 दिन से फाइल पर चल रहा मंथन

पिछले 25 दिनों से फाइल पर मंथन चल रहा है। मगर फैसला नहीं हो पा रहा है जबकि आगामी 24 जनवरी को यूपी दिवस के शुभारम्भ के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक बच्चों को छात्रवृत्ति वितरित करने वाले हैं। इस बारे में हिन्दुस्तान ने राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेन्द्र कश्यप से बातचीत की तो उन्होंने उपरोक्त स्थिति स्वीकार की और कहा कि इस बारे में उन्होंने सोमवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें निर्णय ले लिया जाएगा।

शीत अवकाश बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, माध्यमिक विद्यालयों में समय की बंदिश भी समाप्त, मौसम को लेकर स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी का आदेश लागू होगा, शीतलहर के चलते कई जनपदों में अवकाश / समय परिवर्तन के आदेश जारी

शीतअवकाश बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल

माध्यमिक विद्यालयों में समय की बंदिश भी समाप्त

मौसम को लेकर स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी का आदेश लागू होगा

शीतलहर के चलते कई जनपदों में अवकाश / समय परिवर्तन के आदेश जारी (यहां देखें क्लिक करके)


लखनऊ। बर्फीली हवाओं और कड़ाके की ठंड भले ही अभी चल रही हो लेकिन  प्रदेश में शीतकालीन अवकाश के कारण एक जनवरी से बंद चल रहे बेसिक शिक्षा परिषद के आठवीं तक के स्कूल आज 16 जनवरी से फिर खुलेंगे। मौसम को लेकर स्थानीय स्तर पर अब जिलाधिकारी का आदेश ही लागू होगा। 


माध्यमिक स्कूलों में भी सर्दी को देखते हुए समय में किया गया बदलाव खत्म होगा। जारी समय सारिणी के अनुसार परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक संचालित होंगे। माध्यमिक विद्यालय पूर्व निर्धारित समय सुबह 8.50 से दोपहर 2.50 के बीच चलेंगे।