राइट टू एजुकेशन के तहत निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त दाखिला देना है। इस संबंध में 17 मार्च को जारी शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख होने के साथ ही डीएम राजशेखर ने भी स्कूलों को निर्देश दिया था कि बैनर के साथ ही अभिभावकों को आरटीई की जानकारी दी जाए, लेकिन इस आदेश को निजी स्कूलों ने ठेंगा दिखा दिया। हालत ये है कि शहर के एक भी स्कूल ने इस तरह का न कोई बैनर लगाया है और न ही अभिभावकों को आरटीई की जानकारी दी जा रही है।
आरटीई की जानकारी न देने में शहर के नामी स्कूलों पीछे नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एडमिशन देने वाले सीएमएस से लेकर बाल विद्या मंदिर चारबाग, एलपीसी सेंट और लखनऊ पब्लिक स्कूल रजाजीपुरम और आनंदनगर समेत सभी शाखाओं का यही हाल है। ऐसे में आरटीई के एडमिशन को बढ़ावा मिलना तो दूर की बात एडमिशन होना ही चुनौती है।
शहर के बड़े से लेकर छोटे किसी भी निजी स्कूल में आरटीई के तहत फ्री एडमिशन की जानकारी देने के लिए नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा। नामी स्कूल भी पीछे नही
पिछले साल भी डीएम की ओर से एक ऐसा ही आदेश जारी किया गया था, लेकिन कई स्कूलों की तरफ से निर्देश का पालन नहीं किया गया। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में निजी स्कूल डीएम के आदेश को दरकिनार कर रहे हैं।
एडमिशन का सिर्फ प्रचार
आरटीई के एडमिशन के लिए स्कूलों के पास एक बैनर तक नहीं है, लेकिन एडमिशन के लिए स्कूलों का व्यापक प्रचार चल रहा है। गेट से लेकर स्कूलों के नोटिस बोर्ड तक स्कूल एडमिशन से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी अभिभावकों को मुहैया करा रहे हैं, लेकिन जब आरटीई की बारी आती है तो कोई भी स्कूल एक पोस्टर तक लगाने को तैयार नहीं है।
ऐसे स्कूलों को नोटिस जारी किया जाएगा और उचित कार्रवाई होगी। सभी को शासनादेश का पालन हर हाल में करना ही होगा। - प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए
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