- विद्यालयों में तीस हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं
उरई। भविष्य के ह्यचिरागों ह्य को शिक्षा देने वाले मंदिरों
में रोशनी की दरकार है। जनपद के 1750 में 500 प्राथमिक और जूनियर विद्यालय
ऐसे है, जिनमें अभी तक बिजली के कनेक्शन ही नहीं है। विद्युत विहीन
विद्यालयों में तीस हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते है। भीषण गर्मी में बगैर
पंखे के स्कूलों में नौनिहाल बिलबिलाते है। आंधी आने पर अंधेरा छा जाता
है, ऐसे में स्कूलों की पढ़ाई ठप हो जाती है। कनेक्शन नहीं होने के पीछे
शिक्षा विभाग का जवाब बजट का अभाव है। हर साल शिक्षा सत्र शुरू होने से
पहले ह्यस्कूल चलो अभियान ह्य का नारा बुलंद करता है। सड़कों पर जुलूस
निकालकर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। गांव-गांव और गली-गली में शिक्षक
माता-पिता को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते है। इसका असर भी दिखता है, स्कूल
की राह पकड़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ती भी है, लेकिन रफ्ता-रफ्ता यह
संख्या घटती चली जाती है। आखिर क्या है इसके कारण? सवाल के जवाब में स्कूल
की अव्यवस्था भी जिम्मेदार है। मौसम में बदलाव से भीषण गर्मी से बगैर पंखे
के स्कूलों में नौनिहाल बिलबिला रहे है। आंधी बारिश में छाने वाला अंधेरा
और गर्मी में पंखे की दरकार है। वर्ष 2011 से पहले सभी प्राइमरी विद्यालय
बिजली कनेक्शन विहीन थे। इस अवधि में बजट मिला तो करीब 1250 विद्यालय में
बिजली के कनेक्शन हुए। शेष 500 विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन नहीं हुए।
देखना यह है कि सर्व शिक्षा अभियान के सपने को साकार करने की खातिर देश के
हजारों चिरागों को कब तक रोशनी मिल पाएगी।
- क्या कहते हैं जिम्मेदार
बेसिक शिक्षाधिकारी प्रदीप कुमार पाण्डेय का कहना है कि विद्यालय में कनेक्शन के लिए 2010 में बजट आया था, इनमें कई विद्यालयों में कनेक्शन को कराया दिया गया। शासन से कई बार बजट की मांग की गई, बजट के अभाव में स्कूलों में कनेक्शन नहीं हो पाया है। नए बने स्कूलों में वायरिंग करा दी गई है, लेकिन कनेक्शन न होने से बिजली नहीं आती है। केंद्र सरकार का अनुदान नहीं है, ये राज्य सरकार के स्तर से होने वाली प्रक्रिया है। जब तक बजट नहीं मिलता स्थिति ऐसी ही रहेगी।

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