केंद्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना एमडीएम से परिषदीय स्कूलों के करीब 21 सौ बच्चे प्रतिदिन घरों को खाली पेट जा रहे हैं। इंटरेक्टिव वाइस रिस्पांस सिस्टम (आइवीआरएस) की रिपोर्ट में खुलासा होने के बाद भी निजाम की नींद नहीं टूटी हैं। परिषदीय स्कूलों में एमडीएम का यह हाल तब है जब विभाग के पास खाद्यान्न और बजट दोनों पर्याप्त मात्र में है। इसके बाद भी 70 परिषदीय स्कूलों के चूल्हे आज भी ठंडे पड़े है। जिले में 27 सौ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिनमें 2.67 लाख छात्र-छात्रओं का पंजीकरण किया गया है। इन स्कूलों में 70 परिषदीय स्कूल ऐसे है जहां पर अभी तक रसोई का ताला तक नहीं खोला गया है। जिससे 21 सौ बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल पा रहा है। व्यवस्था को पटरी पर पाने के लिए अथक प्रयास किए गए, लेकिन सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई। कुछ प्रधानाध्यापकों ने एमडीएम सेल में लिखित में शिकायत की है कि ग्राम प्रधानों के सहयोग न करने के कारण स्कूलों के चूल्हे ठंडे पढ़े हुए है। इन हालातों में बच्चे आते है और खाली पेट घरों को लौट जा रहे है। एमडीएम में ग्राम प्रधानों के हस्तक्षेप होने के कारण ब्लॉकों में तैनात खंड शिक्षाधिकारी भी एमडीएम बनवाने में विफल रहे।’
No comments:
Write comments