मान्यता मिलने से दूर होगी परेशानी प्राचार्य धर्मेद्र कुमार ने बताया कि डॉयट बनने के 11 वर्ष बाद भी इसे बीटीसी प्रशिक्षण की मान्यता न मिलना दुखद है। डॉयट को मान्यता मिलने से बीटीसी का प्रशिक्षण करने के लिए जिले के अभ्यर्थियों को गोंडा (दर्जीकुआं) नहीं जाना पड़ेगा। इससे अभ्यर्थियों को आवागमन पर होने वाले खर्च से छुटकारा मिलेगा। मेरा प्रयास है कि इस सत्र के अंत तक डॉयट को मान्यता मिल जाए। अगले सत्र से जिले के बीटीसी अभ्यर्थी अपने जिले में ही बीटीसी का प्रशिक्षण करें।
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