परिषदीय विद्यालयों में अब ईंधन की किल्लत से एमडीएम संचालन को लेकर आने वाली बाधा नहीं होगी। वजह शासन ने प्रत्येक परिषदीय विद्यालय समेत वित्त पोषित विद्यालयों के रसोइघर में गैस चूल्हा मुहैया कराने की रणनीति तय की है। इसके लिए प्रति विद्यालय पांच हजार रुपये खर्च किए जाने की कार्ययोजन बनी है। इसके आधार पर ही बजट दिया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय समेत वित्तीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को शासन ने एमडीएम योजना से आच्छादित किया है। ऐसे में एमडीएम के सफल संचालन को लेकर भी लगातार फेरबदल किए जा रहे हैं। हाल ही में शासन ने एमडीएम संचालन की व्यवस्था निजी संस्था अक्षयपात्र को सौंपने की रणनीति बनाई है। हालांकि इसके जनपद में स्थापित होने तक एमडीएम को सुचारू रखने के लिए ईंधन की बांधा को दूर करने का अहम निर्णय लिया है। बताते चलें कि खाद्यान्न की कमी, प्रधान के असहयोग तथा कन्वर्जन कास्ट के अभाव के अलावा एक अहम समस्या एमडीएम पकाए जाने को लेकर ईंधन की कमी है। जरूरत के मुताबिक लकड़ी नहीं मिलने तथा इसे लाने और भंडारण को लेकर समस्या बनी रहती है। वहीं बारिश और सर्दी के मौसम में लकड़ी के भींगने से एमडीएम अक्सर ठप हो जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च करने का बजट बनाया है। शासन ने इसके लिए गोरखपुर के बजट मॉडल को ध्यान में रखते हुए इसके खरीदारी की रणनीति तय की है। गैस व चूल्हे की आपूर्ति पर पहलीबार में करीब पांच हजार रुपये व्यय करने का खाका तैयार किया है। इसमें जिला पूर्ति अधिकारी के माध्यम से दो सिलेंडर के साथ कनेक्शन लिए जाने पर 2900 रुपये, रेगुलेटर की बंधक धनराशि 150 रुपये, नए कनेक्शन का शुल्क 50 रुपये, ब्लू बुक 50 रुपये, दो सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग पर 1465 रुपये, चूल्हा निरीक्षण शुल्क 250 रुपये तथा सुरक्षा पाइप पर 170 रुपये खर्च होगा। इसके अलावा चूल्हे की खरीद पर अतिरिक्त धनराशि व्यय की जाएगी। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में एमडीएम के बर्तन की खरीद के लिए भी प्रत्येक विद्यालय को करीब 15 सौ रूपये खर्च किए जाने की तैयारी है। एमडीएम के जिला समन्वयक सत्य प्रकाश मौर्य ने इसकी पुष्टि की है।
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