राज्यपाल राम नाईक ने बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए उप्र बाल कल्याण परिषद से प्रभावी योजना बनाने को कहा है। सोमवार को परिषद की कार्यकारिणी बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जिन संस्थाओं के अध्यक्ष राज्यपाल होते हैं, उनमें व्यापक गतिशीलता आनी चाहिए। जिससे लोगों को लगे कि यह संस्थाएं काम कर रही हैं। राजभवन में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक में राज्यपाल ने बाल कल्याण परिषद से युवाओं को जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि परिषद अपनी समस्याओं पर उन्हें विस्तार से प्रत्यावेदन उपलब्ध कराएं, जिससे केंद्र व राज्य सरकार के स्तर पर लंबित मामलों में अध्यक्ष के स्तर से उचित कार्यवाही की जा सके। बैठक में परिषद की वार्षिक आख्या-2016 प्रस्तुत की गई तथा अगले वित्तीय वर्ष का अनुमानित बजट भी पेश किया गया। परिषद की महासचिव रीता सिंह ने बताया कि परिषद द्वारा संचालित 13 आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केंद्रों में 4,124 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया गया तथा 430 बाल विहार केंद्रों के जरिये 10,750 बच्चों को शिक्षा के लिए सहायता दी गई। बैठक में पदाधिकारियों ने राज्यपाल को बताया कि परिषद के दत्तक केंद्र से 14 बच्चों को गोद लिया गया, जिसमें दो बालिकाओं को देश में तथा तीन बालिकाओं को विदेश में गोद लिया गया है। परिषद द्वारा अंधता निवारण कैंप लगाकर मोतियाबिंद के 1,240 मरीजों का इलाज किया गया, जबकि दो बच्चों (एक मरणोपरांत) को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा 14 बच्चों को छात्रवृत्ति योजना के तहत शिक्षा के लिए सहायता प्रदान की गई। परिषद पदाधिकारियों ने बताया कि महिलाओं और बालिकाओं के प्रति होने वाले अपराधों की रोकथाम सहित अन्य विषयों पर परिषद द्वारा शिविरों का भी आयोजन किया गया। बैठक में परिषद द्वारा संचालित बालगृह, वृद्ध एवं निराश्रित महिला आश्रम तथा होम्योपैथी चिकित्सालय के कार्यो की सराहना की गई।
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