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Monday, February 13, 2017

बलरामपुर : सरकारी स्कूल, जहां लाइन लगती है दाखिले के लिए

बलरामपुर : बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए जहां होड़ लगती है, वहीं बलरामपुर में सदर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय खगईजोत द्वितीय ऐसा सरकारी विद्यालय है जहां बच्चों के दाखिले के लिए लाइन लगानी पड़ती है।




प्रधानाध्यापक अनीता कुशवाहा की मेहनत और लगन के दम पर यह स्कूल जिले का सर्वश्रेष्ठ परिषदीय विद्यालय बन चुका है। संसाधनों और शैक्षिक माहौल के लिहाज से भी यह सरकारी विद्यालय निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रहा है। हालत यह है कि बच्चों को यहां पढ़ाने के लिए अभिभावकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।




कक्षा एक से पांच तक संचालित इस विद्यालय में 295 बच्चे पंजीकृत हैं। औसतन 210 से 230 बच्चे रोजाना स्कूल आते हैं। सभी कक्षाओं में बच्चों को बैठने के लिए कुर्सी मेजें हैं। प्रधानाचार्य समेत पांच शिक्षक बच्चों को समय सारिणी के अनुसार पढ़ाते हैं। प्रार्थना और सूचनाएं देने के लिए यहां ध्वनि विस्तारक यंत्र (स्पीकर) भी लगाया गया है जिससे सभी को एक साथ संबोधित किया जा सके।




निजी स्कूलों की तर्ज पर यहां खेलकूद के इंतजाम भी हैं। बच्चे झूले का लुत्फ उठा रहे हैं। शिक्षकों ने विद्यालय के पूरे भवन को आकर्षक ढंग से सजाया है। विद्यालय की दीवार व गेट सहित पूरे परिसर में बने रंगबिरंगे चित्र, हंिदूी व अंग्रेजी के शब्द, गणित के सूत्र व काटरून आदि बच्चों को खेल-खेल में भी शिक्षा देते हैं। भवन व संसाधनों की कमी के चलते शिक्षक प्रतिवर्ष कुछ बच्चों को बिना नामांकन के ही लौटा देते हैं। ऐसे में अभिभावकों को नामांकन के लिए इंतजार करना पड़ता है।




परिसर में फूलों की बगिया भी आकर्षक
रंग रोगन के साथ स्कूल में पुष्प व पेड़ भी लगे हैं। जो वातावरण को और आकर्षक बनाते हैं। यहां कई ऐसे पौधे भी हैं जो बच्चों के पढ़ाई का हिस्सा भी हैं। बगिया को सुंदर बनाए रखने के लिए अनीता ने स्कूल में एक निजी श्रमिक भी लगाया है। जो पूरे वर्ष उसे सजाने संवारने का कार्य करता है।




मुख्यमंत्री से मिला है सम्मान
आकर्षक वातावरण, बेहतर शिक्षा व आधुनिक संसाधनों के चलते इस विद्यालय को वर्ष 2016 में जिले के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय का पुरस्कार भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानाध्यापक अनीता कुशवाहा को पांच सितंबर को एक लाख 20 हजार रुपये का पुरस्कार व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया है।

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