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Monday, January 12, 2026

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी उच्च शिक्षा निदेशक का चयन, मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए नया पत्र जारी किया

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी उच्च शिक्षा निदेशक का चयन, मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए नया पत्र जारी किया

विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने दिए निर्देश, पहले जारी आदेश पर उठे थे सवाल

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का चयन अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित चयन समिति करेगी। इस संबंध में शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने निर्देश दिया है। अब चयन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा (समूह 'क') सेवा (द्वितीय संशोधन) - नियमावली-2008 के प्रावधानों के न अनुसार होगा।

विशेष सचिव की ओर से उच्च शिक्षा कार्यालय को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षा निदेशक का चयन राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत स्नातकोत्तर (पीजी) प्राचार्यों में से किया जाएगा। यह चयन लोक सेवा आयोग के पदों के लिए लागू विभागीय चयन समिति नियमावली के तहत गठित समिति  द्वारा किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।

उल्लेखनीय है कि 31 दिसंबर को डॉ. बीएल शर्मा को कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था। मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए एक जनवरी को नया पत्र जारी किया।

यह है मामला
31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज सेवानिवृत्त हो गए। दरअसल उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। लेकिन शासन ने 31 दिसंबर को ही वरिष्ठता सूची दरकिनार कर सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को प्रभारी निदेशक पद पर तैनात कर दिया। डॉ. बीएल शर्मा सात वर्ष से मुख्यालय में तैनात हैं। जबकि, विभागीय अधिकारियों का कहना हैं कि डॉ. बीएल शर्मा पीजी प्राचार्य तो दूर स्नातक यूजी कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पद पर कार्यरत हैं।


निदेशक की पात्रता को चुनौती देने वाली पीआईएल कोर्ट ने रिट ए में बदली

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक (बीएल शर्मा) की पात्रता और उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को रिट ए में बदल दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की पात्रता के खिलाफ जनहित याचिका स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने दिया है।

प्रयागराज के बृजेंद्र कुमार मिश्रा की ओर से दायर जनहित याचिका में यूपी के उच्च शिक्षा निदेशक की पात्रता पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि सेवा संबंधी मामलों या किसी अधिकारी की पात्रता के विरुद्ध जनहित याचिका दायर करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को पात्रता संबंधी कोई आपत्ति है तो वह नियमित याचिका के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस जनहित याचिका को रिट-ए में परिवर्तित करने की अनुमति दी जाए।

कोर्ट ने मामले के गुणों पर कोई टिप्पणी किए बिना इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कार्यालय को इस मामले को रिट ए के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया। जनहित याचिका की श्रेणी से हटाकर उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। 



प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती, तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप, सरकार और मंत्री को बनाया पार्टी

हाईकोर्ट ने जनहित के बजाय नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी


प्रयागराज। 31 दिसंबर को प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक बनाए गए डॉ. बीएल शर्मा की तैनाती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बाघम्बरी गद्दी के रहने वाले बृजेन्द्र कुमार मिश्र ने मनमानी तैनाती के खिलाफ जनहित याचिका की थी। हालांकि नौ जनवरी को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस अरुण कुमार ने इसे जनहित याचिका के स्थान पर नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी है।


याची के अधिवक्ता की सहमति पर पीआईएल को नियमित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश देने के साथ हाईकोर्ट ने उपयुक्त बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने के मामले में प्रदेश सरकार के साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, डॉ. बीएल शर्मा के साथ ही उच्च शिक्षा के विशेष सचिव और संयुक्त सचिव को भी पार्टी बनाया गया है।


प्रवक्ता को दे दिया पीजी प्राचार्य का पद

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। जबकि डॉ. बीएल शर्मा पीजी तो दूर स्नातक (यूजी) कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पर कार्यरत हैं। 31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के दिन वरिष्ठता सूची के अनुसार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ के पद पर कार्यरत डॉ. मोनिका सिंह की तैनाती तय मानी जा रही थी। डॉ. बीएल शर्मा को निदेशक का प्रभार देने का फरमान आ गया। 

डॉ. बीएल शर्मा उच्च शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक पर 25 मई 2018 से कार्यरत हैं। उनसे वरिष्ठ डॉ. शशि कपूर संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात हैं लेकिन उनको भी प्रभार नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार शिक्षा निदेशालय से निदेशक पद पर तैनाती के लिए जिन पांच नामों की संस्तुति भेजी गई थी उनमें डॉ. बीएल शर्मा का नाम नहीं था क्योंकि वरिष्ठता सूची में दर्जनों शिक्षक ऊपर हैं। चर्चा है कि मंत्री का करीबी होने के कारण ही वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए डॉ. बीएल शर्मा को इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

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