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Monday, March 27, 2017

कानपुर : वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2013-14 के बीच घाटमपुर ब्लॉक में मिड डे मील योजना में भारी अनियमितता, वसूले जाएंगे एमडीएम के 21 करोड़

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिडडे मील योजना (एमडीएम)में हुआ खेल उजागर होने के बाद भी अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। घाटमपुर ब्लाक के स्कूलों में यह खेल लेखा परीक्षा एवं सहकारी समितियां एवं पंचायतें विभाग ने पकड़ा था। ऑडिट में 21.91 करोड़ रुपये की अनियमितता उजागर हुई थी। अब इस मामले में वसूली के लिए आरोपी प्रधानाध्यापकों व तत्कालीन प्रधानों के विरुद्ध आरसी जारी करने की तैयारी है। लेखा परीक्षा एवं सहकारी समितियां एवं पंचायतें विभाग के ज्येष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार ने बीते वर्ष वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2013-14 के बीच 228 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बांटे गए मिडडे मील का ऑडिट किया था। इस दौरान उन्होंने भारी अनियमितता पकड़ी थी। उन्होंने अभिलेखों की जांच में पाया कि सब्जी, मसाला, तेल आदि की खरीद में नियमों की अनदेखी कर गोलमाल किया गया। विभाग द्वारा जो खाद्यान्न विद्यालयों को आवंटित किया गया, उसमें भी बंदरबांट की गई। ऑडिट के दौरान प्रधान और प्रधानाध्यापक खरीदी गई सामग्री का बिल, वाउचर नहीं दिखा सके। उनकी आनाकानी के बाद ही यह माना गया कि खरीद में नियमों की अनदेखी की गई और बच्चों के निवाले में प्रधानाध्यापकों और ग्राम प्रधानों ने मिलकर खेल किया। जांच के दौरान उन्होंने पाया था कि रसोइया को मानदेय देने में भी नियमों की धज्जी उड़ाई गई । ज्यादातर प्रधानों ने उन्हें नकद भुगतान की बात कही है। कुछ ने तो रसोइया को बियरर चेक दिया। उन्होंने उच्च प्राथमिक स्कूलों में 18,20,38,196 रुपये और प्राथमिक विद्यालयों में 3,71,01,359 रुपये का खेल पकड़ा था। ऑडिटर ने इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई करने को कहा था पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि विभाग की ओर से संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से इस संबंध में आख्या जरूर मांगी गई है पर बमुश्किल अभी तक सौ प्रधानाध्यापकों ने ही आख्या दी है। ऐसे में अब लेखा परीक्षा एवं सहकारी समितियां एवं पंचायतें विभाग की ओर से आरोपियों के विरुद्ध आरसी जारी करने की तैयारी है। इस संबंध में अब जिलाधिकारी को पत्र भेजा जाएगा।


ऑडिट रिपोर्ट पर घाटमपुर के एबीएसए ने प्रधानों व प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा है। करीब सौ प्रधानों व प्रधानाध्यापकों ने आख्या दी है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन साल तक स्कूलों में भोजन नहीं बना जबकि ऐसा संभव नहीं है। सभी स्कूलों में भोजन बना था।
-जिला समन्वयक मिडडे मील


आख्या देने में देरी क्यों हो रही है, पता नहीं। अब तक जवाब आ जाना चाहिए था, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने कोई रिपोर्ट नहीं भेजी। इसलिए वसूली के लिए आरसी जारी की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजेंगे। भोजन न बनने की बात रिपोर्ट में नहीं लिखी गई है।’
-  उप संभागीय लेखा परीक्षा अधिकारी, लेखा परीक्षक, सहकारी समितियां एवं पंचायतें।

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