कुशीनगर में 72 मदरसे धरातल पर नहीं अपितु केवल कागज में हैं। वहीं 12 मदरसे विवादित हैं। प्रदेश के निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण के निर्देश पर जिलाधिकारी शंभु कुमार द्वारा गठित टीम द्वारा मदरसों की जांच कराई गई। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौकाने वाले थे। जनपद में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत कुल 460 मदरसे हैं। खड्डा, कप्तानगंज, कसया, मोतीचक, विशुनपुरा, हाटा, पडरौना, रामकोला, फाजिलनगर, नेबुआ नौरंगिया, दुदही, तमकुही विकास खंडों के 362 मदरसों की जांच में 72 मदरसे अस्तित्व में नहीं पाए गए। ऐसे मदरसों को मान्यता देने वाले अधिकारी भी कठघरे में आ गए हैं। हाईस्कूल स्तर की मान्यता रजिस्ट्रार देते हैं तो जूनियर तक की मान्यता जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देते हैं तथा सीडीओ अध्यक्ष होते हैं। बीडीओ व एडीओ समाज कल्याण जांच अधिकारी बनाए गए थे। सेवरही ब्लाक द्वारा अभी जांच रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराया गया है। कार्यवाहक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रामपाल यादव ने बताया कि एक मदरसा में तीन शिक्षक होते हैं। स्नातक स्तर वाले शिक्षक को छह हजार तथा परास्नातक वाले शिक्षक को 12 हजार रुपये मानदेय देने की व्यवस्था है। निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मदरसों का भौतिक सत्यापन कराने के बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाए, अन्यथा गड़बड़ी होने की स्थिति में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के वेतन से काटा जाएगा।
वर्षों से मान्यता लेकर ऐसे मदरसा संचालक शासकीय धन का दुरुपयोग किए हैं। जो मदरसे अस्तित्व में नहीं मिले, वहां के संचालकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने को लेकर प्रशासन तैयारी में जुट गया है। मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ सिंह की संस्तुति पर जिलाधिकारी ने ऐसे मदरसों की मान्यता निरस्त करने, प्राथमिकी दर्ज करने तथा भू राजस्व की भांति शासकीय धन को वसूल करने का आदेश दिया है।
प्रशासन को चकमा देकर, गलत पत्रवली के आधार जिन मदरसों को मान्यता मिला है, उनके मान्यता निरस्त करने तथा उनके संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। भू राजस्व की भांति इनसे शासकीय धन की वसूली की जाएगी। मान्यता देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।- डीएम
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