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Sunday, November 15, 2020

धन नहीं तो कैसे पहचाने जाएं फर्जी शिक्षक, सत्यापन शुल्क के अभाव में पूरा काम पड़ा ठप

धन नहीं तो कैसे पहचाने जाएं फर्जी शिक्षक, सत्यापन शुल्क के अभाव में पूरा काम पड़ा ठप



प्रयागराज |  प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत पाठशालाओं में फर्जी शिक्षकों की पहचान में बजट का रोड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों सत्यापन के निर्देश दिए थे। लेकिन सत्यापन शुल्क देने के लिए रुपये नहीं होने के कारण पूरा काम ठप पड़ा है। अकेले प्रयागराज में 2989 शिक्षकों के अलग-अलग विश्वविद्यालयों एवं बोर्ड से 10 हजार से अधिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 40 लाख रुपये की आवश्यकता है।


जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के पास बजट नहीं होने के कारण सत्यापन रिपोर्ट शासन को उपलब्ध नहीं करा पा रहे। अपर निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने पिछले दिनों सभी मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर तीन दिन में सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं विशेष सचिव शासन जय शंकर दुबे ने 8 जुलाई को दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। पूरी रिपोर्ट 31 जुलाई तक मांगी गई थी।

लेकिन बजट के अभाव में डेडलाइन बीते दो महीने बाद भी सत्यापन नहीं हो सका है यही स्थिति पूरे प्रदेश की बनी हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षकों ने शिक्षा निदेशालय से सत्यापन शुल्क के रूप में लाखों रुपये की डिमांड की है। 

जगह-जगह फर्जी मार्कशीट की दुकान

प्रयागराज |  वेबसाइट पर उपलब्ध है सूची हाईस्कूल और इंटर के फर्जी अंकपत्र क्रिकेट जौनपुर, लखनऊ से लेकर ग्वालियर, दिल्ली तक फैला है। रुपये लेकर फर्जी अंकपत्र बांटने का काम कोरोना महामारी के दौरान भी नहीं थमा है। पिछले छह महीने में यूपी बोर्ड को आधा दर्जन से अधिक सत्यापन के मामले मिले हैं जो फर्जी है। गुरुकुल विवि वृन्दावन मथुरा, हिन्दी साहित्य सम्मेलन की प्रथमा व मध्यमा, राजकीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान लखनऊ और राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान लखनऊ, वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ बदायूं, मध्य भारत ग्वालियर, एमएच एजुकेशनल विद्यापीठ जौनपुर आदि अनाधिकृत संस्थाओं ने 10वीं एवं 12वीं के अंकपत्र जारी किए हैं। इन संस्थाओं की समकक्षता के संबंध में बीएसए मथुरा, डीआईओएस लखनऊ, अटल विहारी बाजपेवी हिन्दी विवि भोपाल, रोडवेज विभाग बरेली, जिला कमांडेंट होमगार्ड लखनऊ आदि ने पूछताछ की है। अफसरों का कहना है कि यूपी बोर्ड की ओर से पत्र भेजा रहा है कि इन संस्थाओं से जारी अंकपत्र या प्रमाणपत्र का विधिक अस्तित्व नहीं है।

वेबसाइट पर उपलब्ध है सूची
देशभर में अधिकृत एवं मान्य संस्थाओं की सूची यूपी बोर्ड की वेबरइट www.upmsp.edu. in है। सभी राज्यों की विधि द्वारा स्थापित माध्यमिक शिक्षा परिषदों से संवालित 10वीं तथा 12वी परीक्षाएं यूपी बोर्ड के समकक्ष हैं। सीबीएसई सीआईएससीई की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं भी मान्य एनआईओएस की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा इस प्रतिबंध के साथ मान्य है कि यह परीक्षा कम से कम पांच विषयों में पास की गई हो।

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