25 साल पढ़ाया, अब खुद देनी पड़ी पात्रता की परीक्षा, नियुक्ति के समय तय योग्यता और अनुभव की अनदेखी पर नाराजगी के साथ शिक्षकों ने दी स्पेशल टीईटी
पेपर के कठिन स्तर ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी, गणित, अंग्रेजी, पर्यावरण और बाल मनोविज्ञान के सवालों में उलझे परीक्षार्थी; परीक्षा की कठिनाई और पात्रता के औचित्य पर उठे सवाल
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2010 और उससे पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए मंगलवार को आयोजित विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी)-2026 अब अपने कठिन प्रश्नपत्र को लेकर चर्चा में है। लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हजारों शिक्षकों को परीक्षा में गणित, अंग्रेजी, पर्यावरण अध्ययन और बाल मनोविज्ञान के सवालों ने खासा उलझाया। कई परीक्षार्थियों ने प्रश्नपत्र के स्तर को अपेक्षा से अधिक कठिन बताते हुए असंतोष जताया। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले शिक्षकों के बीच प्रश्नपत्र की कठिनाई और परीक्षा की प्रासंगिकता को लेकर चर्चा होती रही।
प्रदेश में परीक्षा के लिए 131 केंद्र बनाए गए थे। प्रयागराज में 22 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेशभर में परीक्षा के लिए करीब 1.06 लाख शिक्षकों ने आवेदन किया था। परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों की संख्या भी 2,616 बताई गई है।
25 वर्ष की सेवा के बाद पात्रता पर सवाल
परीक्षा में शामिल शिक्षकों की प्रमुख नाराजगी इस बात को लेकर रही कि नियुक्ति के समय निर्धारित शैक्षिक योग्यता और चयन प्रक्रिया के आधार पर वर्षों तक शिक्षण कार्य करने के बाद अब उन्हें दोबारा पात्रता साबित करने की परीक्षा देनी पड़ रही है। इनमें 50 से 55 वर्ष तक की आयु के शिक्षक भी शामिल रहे। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय लागू नियमों, अर्जित अनुभव और लंबी सेवा अवधि को भी इस पूरी व्यवस्था में उचित महत्व मिलना चाहिए।
प्रश्नपत्र की समीक्षा की मांग
शिक्षक संगठनों ने भी विशेष टीईटी के प्रश्नपत्र के स्तर पर सवाल उठाते हुए शासन स्तर पर इसकी समीक्षा कराने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि अन्य विभागीय परीक्षाओं में कर्मचारियों की सेवा अवधि, परिस्थितियों और कार्य अनुभव को ध्यान में रखकर प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं, इसलिए विशेष टीईटी में भी ऐसा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए परीक्षा का स्तर उनकी परिस्थितियों के अनुरूप निर्धारित करने की बात कही गई है।
गणित और बाल मनोविज्ञान के सवालों ने उलझाया
परीक्षार्थियों के अनुभवों के अनुसार गणित, पर्यावरण अध्ययन, बाल मनोविज्ञान और अंग्रेजी के कई प्रश्न चुनौतीपूर्ण रहे। कुछ केंद्रों पर हिंदी के व्याकरण संबंधी सवालों को लेकर भी अभ्यर्थियों में चर्चा रही। शिक्षकों का कहना था कि परीक्षा में विषयों की गहराई और प्रश्नों की जटिलता ने समय प्रबंधन को भी प्रभावित किया।
परीक्षा से पीछे नहीं, सम्मान और न्यायसंगत मूल्यांकन की मांग
शिक्षकों के बीच एक व्यापक भावना यह भी सामने आई कि वे परीक्षा या अपनी योग्यता के मूल्यांकन से पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन परीक्षा के नाम पर उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सामान्य टीईटी के अनुभवों का हवाला देते हुए कुछ शिक्षकों ने सफलता की उम्मीद भी जताई है। वहीं, परीक्षा की कठिनाई को देखते हुए परिणाम को लेकर अभी से कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
विशेष टीईटी को लेकर अब दो सवाल प्रमुखता से सामने हैं—क्या वर्षों की सेवा और नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता का समुचित मूल्यांकन किया गया है और क्या परीक्षा का प्रश्नपत्र संबंधित शिक्षकों की सेवा परिस्थितियों के अनुरूप था? शिक्षक संगठनों की समीक्षा की मांग ने इन सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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