DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label ड्रेस. Show all posts
Showing posts with label ड्रेस. Show all posts

Monday, October 7, 2024

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश

स्कूली बच्चों को यूनिफार्म पर एक माह में लें निर्णय, हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को दिया आदेश


लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म की सुविधा दिए  जाने के मामले में एक माह में निर्णय - लेने का आदेश दिया है। न्यायालय  ने कहा है कि इस संबंध में जो भी निर्णय लिया जाता है उसे हलफनामा के माध्यम दाखिल किया जाए अथवा बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये अगली सुनवाई उपस्थित पर हों। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका पर तीन अप्रैल को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा मांगा था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद - हलफनामा न दाखिल होने पर - न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए - दोनों अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने अथवा हाजिर होने का आदेश दिया था। न्यायालय के सख्ती के बाद दोनों अधिकारियों की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया कि मामले में निर्णय के लिए एक माह का समय दिया जाए।



समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म न देने के मामले में एक माह में फैसला ले विभाग – हाईकोर्ट
 

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों की तरह समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों में विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म न देने के मामले में महीने भर में निर्णय लेकर जानकारी पेश करने का आदेश दिया है। 


कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर नवंबर के पहले हफ्ते में होने वाली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल न हुआ तो बेसिक शिक्षा और समाज कल्याण विभागों के प्रमुख सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश होना होगा। इससे पहले सरकारी वकील ने दोनों प्रमुख सचिवों का जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि मामले में निर्णय लेने में महीने भर का समय लगेगा।


 न्यायमूर्ति राजन रॉय और ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक सहायक समिति लखनऊ के महासचिव द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया। 

Friday, August 16, 2024

अभिभावकों की नीयत डीबीटी पर पड़ रही भारी, बच्चों के अधिकारों के साथ अपने ही कर रहे खिलवाड़

अभिभावकों की नीयत डीबीटी पर पड़ रही भारी,  बच्चों के अधिकारों के साथ अपने ही कर रहे खिलवाड़ 


उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जारी की गई डायरेक्ट बैनफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम का उद्देश्य बच्चों को यूनिफॉर्म सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत प्रत्येक बच्चे के अभिभावकों के खाते में 1200 रुपये की धनराशि भेजी गई। एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्कूलों में कई बच्चे अब भी बिना यूनिफॉर्म या पुरानी ड्रेस में ही स्कूल आ रहे हैं। 

(प्रतीकात्मक चित्र)


ये स्थिति चिंताजनक है और सवाल उठाती है कि आखिर यह धनराशि कहां जा रही है? क्या अभिभावक इस धनराशि का सही उपयोग नहीं कर रहे हैं? डीबीटी योजना का मूल उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ एक स्वाभिमान भरा वातावरण प्रदान करना था, जिसमें वे एक जैसी यूनिफॉर्म पहनकर आत्मविश्वास से पढ़ाई कर सकें। लेकिन जब 60 फीसदी बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल आ रहे हैं, तो यह साफ है कि धनराशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है।


कई स्कूलों में देखा गया कि बच्चे पुरानी ड्रेस पहनकर, हवाई या टूटी-फूटी चप्पलों में स्कूल आ रहे हैं। ऐसे में शासन की वह मंशा, जिसके तहत परिषदीय स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की तरह चमकाने और बच्चों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य था, कहीं न कहीं विफल हो रहा है। इससे बच्चों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।


अभिभावकों की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि वे बच्चों के भविष्य के प्रति सचेत होते तो इस धनराशि का सही उपयोग करते। बच्चों के अधिकारों और उनकी शिक्षा के प्रति यह लापरवाही केवल उनके भविष्य को ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य को भी अंधकार में धकेलने वाली है। शासन को इस पर कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और बच्चों को उनके अधिकार मिल सकें। 

Tuesday, April 30, 2024

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें

मांग : परिषदीय विद्यार्थियों को सिली सिलाई यूनिफॉर्म मिले तो खत्म हों कई दिक्कतें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2024-25 शुरू हो चुका है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे के लिए उनके अभिभावकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिये पैसे भेजा जाएगा। पर, अभी ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म व बैग आदि देने की मांग उठने लगी है, क्योंकि अभिभावक पैसे का सही इस्तेमाल नहीं करते हैं। इससे शिक्षकों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। 


सरकार परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को जहां निशुल्क किताबें देती है। वहीं यूनिफॉर्म, बैग, जूता-मोजा और स्वेटर के पैसे डीबीटी के जरिये अभिभावकों के खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। 


उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि यूनिफॉर्म के लिए पैसे नहीं, बच्चों को यूनिफॉर्म ही दी जाए। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग निविदा कर जेम पोर्टल से मानक के अनुसार यूनिफॉर्म लेकर पाठ्य-पुस्तकों की तरह वितरित करे।


 संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि अभिभावकों के खातों में जो पैसा भेजा जा रहा है, उसका शतप्रतिशत इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इससे आधे ही बच्चे यूनिफार्म में आते हैं। वहीं, शिक्षकों को बार-बार अभिभावकों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए कहा जाता है। इसे लेकर कई जगह विवाद भी हो रहा है।

Friday, April 5, 2024

समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म देने पर चार सप्ताह में निर्णय ले सरकार: हाईकोर्ट

समाज कल्याण के स्कूलों में यूनिफॉर्म देने पर चार सप्ताह में निर्णय ले सरकार: हाईकोर्ट 




लखनऊ : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म की सुविधा देने के विषय पर चाह सप्ताह में निर्णय लें। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तिथि तय करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों का हलफनामा भी तलब किया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यूपी अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि बेसिक शिक्षा द्वारा संचालित स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को यूनिफॉर्म दिया जाता है, जबकि 26 अक्टूबर 2023 के ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए समाज कल्याण विभाग के स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म की सुविधा देने से इनकार कर दिया गया है।


 पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा था। न्यायालय ने कहा कि यूनिफॉर्म की सुविधा को रोक देना प्रथम दृष्टया तार्किक निर्णय नहीं लगता। इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार कर रही है।

Wednesday, July 12, 2023

जुलाई आधी बीतने को, नहीं मिला DBT के जरिए ड्रेस व स्कूल बैग का पैसा, बेसिक विद्यालयों के बच्चे पुरानी ड्रेस आ रहे स्कूल

जुलाई आधी बीतने को, नहीं मिला DBT के जरिए ड्रेस व स्कूल बैग का पैसा, बेसिक विद्यालयों के बच्चे पुरानी ड्रेस आ रहे स्कूल


लखनऊ। आधी जुलाई बीतने वाली है, लेकिन अब तक बैग, जूता-मोजा के लिए दिया जाने वाला पैसा नहीं दिया गया है। ऐसे में बच्चे पुरानी ड्रेस में स्कूल आ रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने यह दावा किया था कि नए सत्र की शुरुआत में ही पैसा सीधे खाते में डीबीटी कर दिया जाएगा।


बेसिक के विद्यालयों में अप्रैल में ही नया सत्र शुरू हो गया था। दो महीने की पढ़ाई के बाद गर्मी की छुट्टियां हो गई। गर्मी की छुट्टियों के बाद भी तीन जुलाई से बच्चों का डीबीटी का इंतजार नहीं समाप्त हुआ है। जबकि विभाग ने गर्मी की छुट्टियों से पहले ही स्कूल चलो अभियान के माध्यम से नए सत्र में बच्चों के नामांकन कराए और उनका आधार आदि का डाटा फीड कराया था। इसका उद्देश्य यही था कि समय बच्चों को ड्रेस, स्कूल बैग, जूते-मोजे आदि का पैसा डीबीटी कर दिया जाए। 


आवश्यक तैयारी पूरी कर ली गई है। जल्द ही पैसा डीबीटी सीधे अभिभावकों के खाते में कर दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की दिक्कत नहीं है। अभी स्कूल खुले हुए कुछ दिन ही हुए हैं। जल्द ही बच्चे ड्रेस में स्कूल आएंगे। -विजय किरन आनंद, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

Wednesday, June 28, 2023

अनुदानित मदरसों के बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म, निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी

अनुदानित मदरसों के बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म


■ निशुल्क पाठ्य पुस्तकें पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी हैं

■ मदरसों के पिछले वर्ष कराए गए सर्वे पर अब तक नहीं हो सका फैसला


लखनऊ  । प्रदेश के 560 अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से कक्षा आठ तक के बच्चों को जुलाई में निःशुल्क यूनिफार्म दिये जाने की तैयारी है। मदरसों के इन बच्चों को चार साल बाद यूनिफार्म मिलेगी। यह जानकारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा. इफ्तेखार अहमद जावेद ने दी।


उन्होंने बताया कि जो यूनिफार्म बेसिक शिक्षा परिषद के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निःशुल्क दी जा रही है। वही यूनिफार्म मदरसों के बच्चों को भी मिलेगी। उन्होंने बताया कि अनुदानित मदरसों के कक्षा एक से कक्षा आठ तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा परिषद की पाठ्य पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। 


पिछले साल अक्तूबर में प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों का 12 बिन्दुओं पर सर्वे करवाया गया था, जिसमें 7500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले थे। 15 नवम्बर तक जिलाधिकारियों ने अपने- अपने जिलों के मदरसा सर्वे की रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, मगर उसके बाद से अब तक इस रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन ने इस बारे में पूछने पर बताया कि शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है।