DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Thursday, January 22, 2026

विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट

विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट


कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को दो माह में आदेश पारित करने का दिया निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि विवाहित पुत्री भी नियुक्ति पाने की पात्र है। कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को निर्देश दिया है कि वह परिवार की आर्थिक स्थिति और आश्रितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए दो माह में निर्णय लेकर आदेश पारित करें। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने नीतू अनिता देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।


अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पिता सिद्धार्थनगर के इटवा गौरा में प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान आठ जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया। परिवार में केवल बेटी थी, जिसने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के लिए आवेदन किया। निर्णय न होने पर याची ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने पहले ही बीएसए को आदेश पारित करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद बीएसए ने यह कहते हुए नियुक्ति से इन्कार कर दिया कि विवाहित पुत्री परिवार की सदस्य नहीं है।

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची ने दलील दी कि विमला श्रीवास्तव सहित कई मामलों में हाईकोर्ट पहले ही विवाहिता बेटी को परिवार का सदस्य मान चुका है। साथ ही 12 नवंबर 2021 की अधिसूचना के जरिये सरकार ने नियमावली से अविवाहित शब्द हटा दिया है। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

No comments:
Write comments