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Sunday, October 25, 2026

मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने आरटीआई के जवाब में दी अहम जानकारी, रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु और बर्तन धुलाई से जुड़े शासनादेश प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध नहीं

मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने आरटीआई के जवाब में दी अहम जानकारी, रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु और बर्तन धुलाई से जुड़े शासनादेश प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध नहीं

लखनऊ। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में रसोइयों की नियुक्ति एवं कार्य संबंधी शासनादेश सहित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी उपलब्ध कराई है। प्राधिकरण के जनसूचना अधिकारी संजय कुमार शुक्ला की ओर से 21 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि रसोइयों की नियुक्ति एवं कार्य संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश शासनादेश संख्या 435(1)/79-6-10, दिनांक 24 अप्रैल 2010 के अनुसार हैं, जो प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

पत्र के अनुसार, रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित कोई शासनादेश प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध नहीं है। इसी तरह, परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के बर्तन (थाली/गिलास) धोने के संबंध में भी प्राधिकरण स्तर पर कोई शासनादेश उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है।

इसके अतिरिक्त, पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पल्स पोलियो दिवस पर मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने के संबंध में भी प्राधिकरण स्तर पर कोई शासनादेश उपलब्ध नहीं है। पत्र में प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में उप निदेशक, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश का पदनाम और पता भी दिया गया है।


Friday, March 20, 2026

संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग

संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग


संसदीय समिति ने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की है। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से इसके लिए मदद बढ़ाने का आग्रह किया।

स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत सुबह का नाश्ता मिले।

नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को भी दोपहर का भोजन मिले।

केंद्र-राज्य सरकारें पोषण योजना में अपना अंशदान बढ़ाएँ।


नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय से जुडी संसदीय समिति ने देश भर के स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत दिए जाने वाले दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की भी सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार को इसके लिए राज्यों को मदद देनी चाहिए।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि नाश्ता जो दिन का पहला आधार होता है, वह विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पढ़ाई के दौरान एकाग्रता के लिए आवश्यक उर्जा और स्मरण शक्ति में सुधार करता है।


समिति की सिफारिश
समिति ने सिफारिश की है कि ऐसे स्कूल जो सुबह की पाली में चलते है, उनमें बच्चों को हल्का नाश्ता देने की व्यवस्था तुरंत शुरू की जाए। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपने-अपने अंशदान में वृद्धि करें। समिति ने इसके साथ ही स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को भी दोपहर का भोजन मुहैया कराने की सिफारिश की है।

समिति का मानना है कि छात्रों की यह उम्र किशोरावस्था की होती है। ऐसे में उन्हें उस उम्र में पर्याप्त पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है। मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। समिति का कहना है कि यह ठीक वैसे ही जैसे बाल्टी भरने से पहले नल को बंद कर दिया जाए।

Sunday, October 26, 2025

नवंबर से गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू देने की तैयारी, परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मिलेगा मोटे अनाज से बना खाना

नवंबर से गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू देने की तैयारी, परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मिलेगा मोटे अनाज से बना खाना

बेहतर होगी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता


लखनऊ। सूबे के  परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब दो लाख विद्यार्थियों के खान-पान व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ठंड से बचाव के लिए उन्हें दोपहर के खाने में मोटे आजान जैसे ज्वार व बाजरा से निर्मित भोजन दिया जाएगा। इसके अलावा गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू भी दिया जाएगा। यह व्यवस्था नवंबर से शुरू होगी।


सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते हुए मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत हुई है। इसके तहत प्रत्येक दिवस पर मिलने वाले भोजन में नवंबर से बदलाव किया जाएगा। खासकर नियमित खाने में मोटे अनाज से निर्मित पौष्टिक आहार की मात्रा को बढ़ाया जाएगा। ताकि, ठंड में बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य रह सके और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ सके।


बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गेहूं की रोटी, सोयाबीन की सब्जी, चना व अरहर की दाल, मौसमी सब्जियां और फल दिए जाते हैं लेकिन, ठंड की वजह से अब उन्हें गुड़, मूंगफली, जौ, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलिया व फाइबर प्रोटीन युक्त खाना दिया जाएगा।

Tuesday, October 21, 2025

MDM में तिथि भोजन योजना का यूपी में नहीं हो पा रहा सफल क्रियान्वयन, प्रयागराज की रिपोर्ट ने खोला सच

MDM में तिथि भोजन योजना का यूपी में नहीं हो पा रहा सफल क्रियान्वयन, प्रयागराज की रिपोर्ट ने खोला सच


उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में तिथि भोजन योजना को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। सरकार और विभागीय अधिकारी इस योजना को सामुदायिक सहभागिता और बच्चों में पोषण के प्रति जागरूकता का माध्यम मानते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत अभी भी उम्मीदों से बहुत दूर है। प्रयागराज से आई रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजना के दिशा-निर्देशों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच गहरी खाई मौजूद है।


 प्रयागराज से प्रकाशित अखबारी खबरों के अनुसार, परिषदीय स्कूलों में तिथि भोजन के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि विद्यालय परिसर के भीतर केवल पका हुआ भोजन ही बच्चों को दिया जाए और फास्ट फूड या तले हुए पदार्थों को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए। विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे भोजन की गुणवत्ता और वितरण प्रक्रिया की निगरानी करें। यहां तक कि भोजन कराने वाला व्यक्ति भी बच्चों के साथ बैठकर भोजन करेगा, ताकि बच्चों में समानता और सहभागिता की भावना विकसित हो।

लेकिन, योजना की भावनात्मक और प्रशासनिक गंभीरता के बावजूद, राज्य के अधिकांश जिलों में यह पहल अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो पाई है। प्रयागराज की न्यूज रिपोर्ट में साफ उल्लेख किया गया है कि बीएसए देवेंद्र सिंह के निर्देशों के बावजूद, तिथि भोजन कराने के इच्छुक लोगों की संख्या बहुत कम है। कई विद्यालयों में महीनों से कोई तिथि भोजन कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है।

सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में आर्थिक सीमाएँ, समय की कमी और अभिभावकों की अनिच्छा इसके प्रमुख कारण हैं। कई स्थानों पर एसएमसी सदस्य और ग्राम पंचायतें भी सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रही हैं। जिन विद्यालयों में तिथि भोजन होता भी है, वहाँ अक्सर मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठते हैं।

विभागीय अधिकारी मानते हैं कि तिथि भोजन की भावना अत्यंत नेक है, लेकिन बिना सामुदायिक भागीदारी के यह योजना केवल कागज़ों पर ही सजीव रह जाएगी। प्रयागराज की तरह कई जिलों में जब तक स्थानीय समाज और अभिभावक सक्रिय भागीदारी नहीं निभाते, तब तक यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य — सामाजिक एकता, स्वच्छता और पोषण सुधार — को हासिल नहीं कर सकेगी।


इस पूरे परिदृश्य में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि योजनाओं का मसौदा और क्रियान्वयन प्रक्रिया प्रायः ज़मीनी सच्चाइयों को जाने बिना तैयार की जाती है। विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से न तो व्यावहारिक सुझाव लिए जाते हैं, न ही स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाती है। नतीजतन, ऐसी योजनाएँ जमीनी हकीकत से कटकर केवल “अच्छे इरादों के दस्तावेज़” बनकर रह जाती हैं। तिथि भोजन जैसी सामाजिक रूप से सार्थक पहल को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक, अभिभावक, ग्राम प्रतिनिधि और प्रशासन — सभी एक साथ मिलकर व्यवहारिक ढंग से आगे बढ़ें, वरना यह योजना भी अन्य अनेक योजनाओं की तरह केवल आदेशों और फाइलों में सिमट कर रह जाएगी।